भारत ने वेटलैंड संरक्षण की दिशा में रचा एक और स्वर्णिम अध्याय!
अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ (Glaw) झील को राज्य का पहला रामसर स्थल घोषित किया गया है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है।
अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ (Glaw) झील को राज्य का पहला रामसर स्थल घोषित किया गया है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है।
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10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक भारत की अध्यक्षता में, जयपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य, देशों के उद्योग मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिससे न्यू इंडस्ट्रियल रेवॉल्यूशन पर ब्रिक्स साझेदारी (PartNIR) के तहत, मंत्री-स्तरीय संवाद को एक नया आयाम मिला है।
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12वें NationalHandloomDay के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा राजस्थान के बाड़मेर के प्रतिभाशाली बुनकर श्री बरीगा राम जी को 'पट्टू साड़ी' बुनाई में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया जाना सम्पूर्ण राजस्थान के लिए गौरव का विषय है।
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𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚'𝐬 𝐏𝐞𝐚𝐜𝐨𝐜𝐤 𝐝𝐢𝐩𝐥𝐨𝐦𝐚𝐜𝐲 𝐚𝐭 𝐔𝐍
भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को पांच युवा मोर भेंट किए हैं। इनमें चार नीले और एक दुर्लभ सफेद मोर शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के रंगों का प्रतीक हैं।
जिनेवा में भारत के राजदूत Arindam Bagchi ने ये मोर संयुक्त राष्ट्र जिनेवा की महानिदेशक Tatiana Valovaya को सौंपे।
भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को पांच युवा मोर भेंट किए हैं। इनमें चार नीले और एक दुर्लभ सफेद मोर शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के रंगों का प्रतीक हैं।
जिनेवा में भारत के राजदूत Arindam Bagchi ने ये मोर संयुक्त राष्ट्र जिनेवा की महानिदेशक Tatiana Valovaya को सौंपे।
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जवाहर कला केंद्र में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर, राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने उत्कृष्ट बुनकरों को, राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार प्रदान किए। प्रथम पुरस्कार जालोर जिले के डीगांव निवासी श्री कानाराम को, कॉटन एवं सिल्क साड़ी के उत्कृष्ट निर्माण हेतु प्रदान किया गया।
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पशुओं में नस्ल सुधार और उनके संरक्षण की दिशा में, राजस्थान ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसका शिलान्यास पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत द्वारा, पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत, गाँव साण्डेराव में स्थापित हो रहे, इस सेंटर के प्रशासनिक भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। संभवतः यह देश का भी पहला एवं एकमात्र एक्सीलेंस इंडीजिनस सेंटर है, जहाँ एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार एवं संवर्धन का कार्य होगा।
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