बदलते भारत की छवी
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भारत में जो वर्तमान समय कि स्थिति प्रस्थिति हैं उसने बाहर निकलना है

काले अंग्रेजों से मातृ भूमि के मुक्त और गौ हत्या का विरोध करना है
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🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्रातः कालीन दद्योदक आरती श्रृंगार दर्शन*
*13-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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👉 इस बार ज्येष्ठ महीना *अधिक मास* है। 17 मई से 15 जून 2026 तक पुरुषोत्तम (अधिक) मास रहेगा।
👉 चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, माघ और फाल्गुन - ये *नौ महीने* ही अधिक मास होते हैं।
👆 क्योंकि कुम्भ से तुला तक सौरमास चान्द्रमास से बड़ा होता है।
👉 कार्तिक, मार्गशीर्ष व पौष मास कभी भी अधिकमास नहीं होते हैं।
👉 उक्त तीनों महीने अधिक न होकर क्षय मास होते हैं।
👆 क्योंकि इन तीन महीनों में दो अमावस्या के बीच दो सौर - संक्रान्ति आ जाती है।
👉 क्षय मास 141 वर्ष अथवा 19 वर्ष बाद आता है।
👉 जिस वर्ष क्षयमास आता है, उस वर्ष में दो अधिकमास होते हैं।
👆 प्रथम अधिकमास क्षयमास के तीन महीने पूर्व तथा दूसरा अधिकमास क्षयमास के 3 महीने पश्चात् आता है।
👉 सौरवर्ष एवं चान्द्रवर्ष के लगभग 11 दिन के अन्तर को मिटाने के लिए अधिकमास होता है।
👉 हर बार 32 महीने 16 दिन 4 घटी उपरान्त अधिकमास पुनः आता है।
👉 एक कथानुसार दैत्य हिरण्यकशिपु के वरदान स्वरूप उसके वध के लिए अधिकमास का निर्माण किया गया। इसीलिए 'अधिकमास' को भगवान विष्णु ने अपने नाम पर 'पुरुषोत्तम मास' रखा।
👉 विभिन्न प्रणाली के आधार पर निर्मित पञ्चाङ्गों के कारण इस बार फिर *मकर संक्रान्ति पर्व* मनाने को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसलिए दो दिन मकर संक्रान्ति पर्व मनेगा।
👉 काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा विगत *एक शताब्दी* से प्रकाशित *विश्व पञ्चाङ्ग* में मकर संक्रान्ति पर्व *15 जनवरी* गुरुवार को मनाने का उल्लेख है।
👆 *विश्व पञ्चाङ्ग* के अनुसार- सूर्य रात्रि 8:49 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
👉 इसी प्रकार 103 वर्ष से प्रकाशित *महाकाल पञ्चाङ्ग उज्जैन* के अनुसार 14 जनवरी को सूर्य रात्रि 8:09 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए अगले दिन *15 जनवरी* गुरुवार को संक्रान्ति पुण्यकाल है। इस दिन स्थानीय समय अनुसार सूर्यास्त 5:59 बजे होगा।
👉 सूर्यास्त के 3 घटी यानि 72 मिनट बाद सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर संक्रान्ति पर्व का पुण्यकाल पर्व अगले दिन मनाने का *धर्मसिन्धु* में उल्लेख है।
👉 अतः मकर संक्रान्ति पर्व का पुण्यकाल *15 जनवरी गुरुवार को प्रातः काल से ही है।*
👉 मकर संक्रान्ति देवताओं का *प्रभातकाल* है।
👉 मकर संक्रान्ति के दिन सभी देवी - देवता अपना स्वरूप बदलकर प्रयाग सङ्गम पर स्नान के लिए आते हैं।
👉 मकर संक्रान्ति के दिन काष्ठ और अग्नि का दान तथा तीर्थ स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्त्व है।
👉 इस दिन घी, कम्बल, तेल, गुड़, खिचड़ी के दान का विशेष महत्त्व है।

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ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻



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🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्रातः कालीन दद्योदक आरती श्रृंगार दर्शन*
*15-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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एक साथी और भी था🥺🙏🏻💐
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🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्रातः कालीन दद्योदक आरती श्रृंगार दर्शन*
*16-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🙏 *!! श्रीहरि !!* 🙏

🌤️ *दिनांक - 16 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन - शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - शिशिर ॠतु*
🌤️ *मास - माघ (गुजरात-महाराष्ट्र पौष)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - त्रयोदशी रात्रि 10:21 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
🌤️ *नक्षत्र - मूल पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग - ध्रुव रात्रि 09:06 तक तत्पश्चात व्याघात*
🌤️ *राहुकाल - सुबह 11:26 से दोपहर 12:49 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 07:19*
🌤️ *सूर्यास्त - 06:17*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- प्रदोष व्रत,मासिक शिवरात्रि*
💥 *विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩 ~*सनातन पंचांग* ~🚩

🌷 *मौनी अमावस्या* 🌷
🙏🏻 *18 जनवरी 2026 रविवार को मौनी अमावस्‍या है उस दिन प्रयाग में स्नान की तिथि है | आप सब प्रयाग तो नहीं जाओगे पर अपने घर पे ही उस दिन स्नान करते समय –*
🌷 *ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा | ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा |*
🙏🏻 *ये मंत्र बोलकर उबटन जो बापूजी ने बताया था उस उबटन को शरीर पर लगाकर स्नान करें तो गंगा स्नान का पुण्य मिलता है | अमावस्या के दिन तो जरुर करें | उस दिन गीता का सातवाँ अध्याय का पाठ करें और भगवान ने धन दिया है तो उस दिन घर में आटे की, बेसन की २ – ४ किलो मिठाई बना ले और गरीब बच्चे-बच्चियों में बाँट आयें, अपने पितरो के नाम दादा, दादी, नानी उनके नाम से बाँट कर आ जायें |*

🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷
➡️ *18 जनवरी 2026 रविवार को मौनी अमावस्‍या, माघ अमावस्‍या एवं दर्श अमावस्या है।*
🔥 *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*
🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।*
🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*
🔥 *आहुति मंत्र* 🔥
🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🌷 *मौनी अमावस्या का मंत्र* 🌷
🙏🏻 *भविष्योत्तर पुराण में बताया है कि माघी अमावश्या के दिन अगर भगवान ब्रम्हाजी का कोई पूजन करे, श्लोक और गायत्री मंत्र बोलकर जो ब्रम्हाजी को नमन करते हैं और थोड़ी देर शांत बैठे और फिर गुरुमंत्र का जप करें तो उनको विशेष लाभ होता है | जो भाई-बहन जो सत्संग में आते हैं वो दैवी सम्पदा पायें और लौकिक सम्पदा भी पायें | किसी के सिर पे भार न रहें | दैवी सम्पदा से खूब धनवान हों और लौकिक धन की भी कमी न रहें |*
🌷 *मंत्र इस प्रकार है –*
*स्थानं स्वर्गेथ पाताले यन्मर्ते किंचिदत्तंम | तद्व्पोंत्य संधिग्धम पद्मयोंने प्रसादत: ||*
🌷 *गायत्री मंत्र –*
*ॐ भू भुर्व: स्व: तत सवितुर्वरेण्यं | भर्गो देवस्य धीमहि | धियो यो न: प्रचोदयात् ||*

🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷
🏡 *घर में हर अमावस्या अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*

🙏 *नारायण नारायण* 🙏

🚩 *~ सनातन पंचांग ~🚩*


ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
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🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*
*17-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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शकुन शास्त्र के 12 सूत्र
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घर में हर छोटी वस्तु का अपना महत्व होता है। कभी-कभी बेकार समझी जाने वाली वस्तु भी घर में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर देती है। गृहस्थी में रोजाना काम में आने वाली चीजों से भी शकुन-अपशकुन जुड़े होते हैं, जो जीवन में कई महत्वपूर्ण मोड़ लाते हैं। शकुन शुभ फल देते हैं, वहीं अपशकुन इंसान को आने वाले संकटों से सावधान करते हैं। हम आपको घर से जुड़ी वस्तुओं के शकुनों के बारे में बता रहे हैं।

1-दूध का शकुन
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सुबह-सुबह दूध को देखना शुभ कहा जाता है। दूध का उबलकर गिरना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति, संपत्ति, मान व वैभव की उन्नति होती है। दूध का बिखर जाना अपशकुन मानते हैं, जो किसी दुर्घटना का संकेत है। दूध को जान-बूझकर छलकाना अपशकुन माना जाता है , जो घर में कलह का कारण है।
2-दर्पण का शकुन
हर घर में दर्पण का बहुत महत्व है। दर्पण से जुड़े कई शकुन-अपशकुन मनुष्य जीवन को कहीं न कहीं प्रभावित अवश्य करते हैं। दर्पण का हाथ से छूटकर टूट जाना अशुभ माना जाता है। एक वर्ष तक के बच्चे को दर्पण दिखाना अशुभ होता है। यदि कोई नव विवाहिता अपनी शादी का जोड़ा पहन कर श्रृंगार सहित खुद को टूटे दर्पण में देखती है तो भी अपशकुन होता है। तात्पर्य यह है कि दर्पण का टूटना हर दृष्टिकोण से अशुभ ही होता है। इसके लिए यदि दर्पण टूट जाए तो इसके टूटे हुए टुकड़ों को इकटठा करके बहते जल में डाल देने से संकट टल जाते हैं।

3-पैसे का शकुन
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आज के इस युग में पैसे को भगवान माना जाता है। जेब को खाली रखना अपशकुन मानते हैं। कहा जाता है कि पैसे को अपने कपड़ों की हर जेब में रखना चाहिए। कभी भी पर्स खाली नहीं रखना चाहिए।

4-चाकू का शकुन
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चाकू एक ऐसी वस्तु है, जिसके बिना किसी भी घर में काम नहीं चल सकता। इसकी जरूरत हर छोटे-छोटे कार्य में पड़ती है। इससे जुड़े भी अनेक शकुन-अपशकुन होते हैं। डाइनिंग टेबल पर छुरी-कांटे का क्रास करके रखना अशुभ मानते हैं, इसके कारण घर के सदस्यों में झगड़ा हो जाता है। मेज से चाकू का नीचे गिरना भी अशुभ होता है। नवजात शिशु के तकिए के नीचे चाकू रखना शुभ होता है तथा छोटे बच्चे के गले में छोटा सा चाकू डालना भी अच्छा होता है। इससे बच्चों की बुरी आत्माओं से रक्षा होती है व नींद में बच्चे रोते भी नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति आपको चाकू भेंट करे तो इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए एक सिक्का अवश्य दें।

5-झाडू का शकुन
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घर के एक कोने में पड़े हुए झाडू को घर की लक्ष्मी मानते हैं, क्योंकि यह दरिद्रता को घर से बाहर निकालता है। इससे भी कई शकुन व अपशकुन जुड़े हैं। दीपावली के त्यौहार पर नया झाडू घर में लाना लक्ष्मी जी के आगमन का शुभ शकुन है। नए घर में गृह प्रवेश से पूर्व नए झाडू का घर में लाना शुभ होता है। झाडू के ऊपर पांव रखना गलत समझा जाता है। यह माना जाता है कि व्यक्ति घर आई लक्ष्मी को ठुकरा रहा है। कोई छोटा बच्चा अचानक घर में झाडू लगाने लगे तो समझ लीजिए कि घर में कोई अवांछित मेहमान के आने का संकेत है। सूर्यास्त के बाद घर में झाडू लगाना अपशकुन होता है, क्योंकि यह व्यक्ति के दुर्भाग्य को निमंत्रण देता है।

6-बाल्टी का शकुन
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सुबह के समय यदि पानी या दूध से भरी बाल्टी दिखाई दे तो शुभ होता है। इससे मन में सोचे कार्य पूरे होते हैं। खाली बाल्टी देखना अपशकुन समझा जाता है, जो बने-बनाए कार्यों को बिगाड़ देता है। रात को खाली बाल्टी को प्रायः उल्टा करके रखना चाहिए एवं घर में एक बाल्टी को अवश्य भरकर रखें, ताकि सुबह उठकर घर के सदस्य उसे देख सकें।

7-लोहे का शकुन
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घर में लोहे का होना शुभ कहा जाता है। लोहे में एक शक्ति होती है, जो बुरी आत्माओं को घर से भगा देती है। पुराने व जंग लगे लोहे को घर में रखना अशुभ है। घर में लोहे का सामान साफ करके रखें।

8-हेयरपिन का शकुन
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हेयरपिन एक बहुत ही मामूली सी चीज है, परंतु इसका प्रभाव बड़ा आश्चर्यजनक होता है। यदि किसी व्यक्ति को राह में कोई हेयरपिन पड़ा मिल जाये तो समझो कि उसे कोई नया मित्र मिलने वाला है। वहीं यदि हेयर पिन खो जाये तो व्यक्ति के नए दुश्मन पैदा होने वाले हैं। हेयरपिन को घर में कहीं लटका दिया जाए तो यह अच्छे भाग्य का प्रतीक है।

9-काले वस्त्र का शकुन
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काले वस्त्र बहुत अशुभ माने जाते हैं। किसी व्यक्ति के घर से बाहर जाते समय यदि कोई आदमी काले वस्त्र पहने हुए दिखाई दे तो अपशकुन माना जाता है, जिसके बुरे प्रभाव से जाने वाले व्यक्ति की दुर्घटना हो सकती है। अतः ऐसे व्यक्ति को अपना जाना कुछ मिनट के लिए स्थगित कर देना चाहिए।



ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*
*19-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*
*20-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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माघ शुक्लीय गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है सभी यथा शक्ति रात्रिकालीन स्तोत्र पाठ, जपादि अवश्य करें संभव हो तो अर्गला स्तोत्र का पाठ करें अभावेण दुर्गा चालीसा का पठन अवश्य करें इस नवदिवसीय साधन का बहुत ही महत्व है .....
🙏🏻


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*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*
*23-01-2026 कण-कण में महादेव*💕
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. “बसन्त पंचमी”

बसन्त पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं।
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें बसन्त लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। बसन्त ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह बसन्त पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

बसन्त पंचमी कथा

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है–

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसन्त पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूँ भारत के कई हिस्सों में बसन्त पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

महत्व

बसन्त ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।
यों तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है, पर बसन्त पंचमी (माघ शुक्ल 5) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन माँ शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए बसन्त पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और माँ सरस्वती की वंदना से करते हैं।

पौराणिक महत्व

यह पर्व हमें अतीत की अनेक प्रेरक घटनाओं की भी याद दिलाता है। सर्वप्रथम तो यह हमें त्रेता युग से जोड़ती है। रावण द्वारा सीता के हरण के बाद श्रीराम उसकी खोज में दक्षिण की ओर बढ़े। इसमें जिन स्थानों पर वे गये, उनमें दंडकारण्य भी था। यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी। जब राम उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध-बुध खो बैठी और चख-चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी। प्रेम में पगे झूठे बेरों वाली इस घटना को रामकथा के सभी गायकों ने अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत किया। दंडकारण्य का वह क्षेत्र इन दिनों गुजरात और मध्य प्रदेश
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में फैला है। गुजरात के डांग जिले में वह स्थान है जहां शबरी माँ का आश्रम था। बसन्त पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहाँ आये थे। उस क्षेत्र के वनवासी आज भी एक शिला को पूजते हैं, जिसके बारे में उनकी आस्था है कि श्रीराम आकर यहीं बैठे थे। वहां शबरी माता का मंदिर भी है।

ऐतिहासिक महत्व

बसन्त पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया और उनकी आंखें फोड़ दीं।
इसके बाद की घटना तो जगप्रसिद्ध ही है। गौरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा। पृथ्वीराज के साथी कवि चंदबरदाई के परामर्श पर गौरी ने ऊंचे स्थान पर बैठकर तवे पर चोट मारकर संकेत किया। तभी चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया।

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान॥

पृथ्वीराज चौहान ने इस बार भूल नहीं की। उन्होंने तवे पर हुई चोट और चंदबरदाई के संकेत से अनुमान लगाकर जो बाण मारा, वह गौरी के सीने में जा धंसा। इसके बाद चंदबरदाई और पृथ्वीराज ने भी एक दूसरे के पेट में छुरा भौंककर आत्मबलिदान दे दिया। (1192 ई) यह घटना भी बसन्त पंचमी वाले दिन ही हुई थी।
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“ॐ जय देवी शारदेय नमः”



ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
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🌷🙏मां सरस्वती का जन्म कैसे हुआ?🙏🌷
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सबसे पहले आप सभी को सहपरिवर बसंत पंचमी
की अशिम हार्दिक शुभकामनाएं!🌷आप सभी का जीवन मंगलमय है।🌹🙏🏻

बसंत पंचमी का हर साल माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं।
🌷
ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की। लेकिन अपने सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।
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विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का. पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ।
यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी।
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ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई। उस वीणा की मधुर ध्वनि से संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है। मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है।
🌷
मां सरस्वती का संबंध बुद्धि से है, ज्ञान से है. यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, यदि आपके जीवन में निराशा का भाव बहुत बढ़ गया है, तो मां सरस्वती का पूजन अवश्य करें। मां के आशीर्वाद से आपका ज्ञान बढ़ेगा और आप जीवन में सही निर्णय लेकर आगे बढ़ने में सफल होंगे।।🦤🌷
🙏🏻🌺 श्री सरस्वत्यै नमः 🙏🏻🌺
🌷🌷जय मां सरस्वती जी 🙏🏻🙏🏻


ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻