मैंने धर्म-परीक्षा में 100/100 अंक प्राप्त किए और "असली हिन्दू" की श्रेणी में आया/आई। आप भी अपनी परीक्षा लें! https://1008gurudharmquiz.manus.space
1008gurudharmquiz.manus.space
धर्म-परीक्षा: क्या आप 'सत्य-सनातनी' हैं?
यह
क्या मोदी ने हम हिन्दुओं के लिए मरघट मे जाने की व्यवस्था तैयार करली है कौन कौन मान रहा है??
Anonymous Poll
33%
हां हम मान रहे हैं!
67%
ना ऐसा नहीं है!
4%
पता नहीं!
✍1
बदलते भारत की छवी
Video
आप लोग देख रहे हों ये देश की सर्वोच्च न्यायालय के वक़ील है और ये पूर्ण रूप से स्पस्ट कर रहे हें कि उस मोदी ने किया क्या है फ़िर भी आप लोग मौन धारण कियो हुवे हों कौन क्यों आपको कोई बचाएगा??
🙏3
🚩हर हर महादेव हर🚩
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
👉🏻कल शनिवार है और साथ-साथ
प्रदोष भी हों रहा है तो ये शनि प्रदोष कहलाता है
🛕 उस दिन मंदिर जा करूशंकरजी कि पूजा अर्चना करने से शनिदेव से संबंधित सभी प्रकार की परेशानियों का सामना प्राप्त होता
👉🏻शनि दोष का निवारण मिल जाता है
👉🏻जैसे किसीकी जन्म कुंडली में विष योग बन रहा हों या शनि निच गत हों या शनि पर चंद्र की कु दृष्टी दोष हों रहा हों कैसा भी दोष हों ये सब कुछ हद तक शांत होकर अपने दुष्ट प्रभाव को कम कर देता है
👉🏻तो ऐसे मे आपको पहले य़ह पता होना चाहिए कि उसके क्या-क्या लक्षण होते हैं
👉🏻जैसे काम ना होना
होते हुवे काम है अटक जाना
बना हुवा काम बिगड़ जाना
आलस आना काम ना करने की प्रबल इच्छा होना
👉🏻ये सब शनि चंद्र के साथ-साथ होने के कारण होता है तो अब आप इसका निराकरण भी जान लीजिए
👉🏻आपकों कुछ नहीं करना होता है शनिवार के दिन सुबह सुबह जल्दी उठ जाए और स्नानादि निवृत्त होकर शंकर जी के मंदिर जाए साथ में गौ माता का दूध पित्तल के लौटे मे ले जाए साथ में थोड़े काले तिल मिलाकर ले जाना हैऔर शिवजी का अभिषेक करना होगा और ओम नमः शिवाय का जाप करना अनिवार्य है
👉🏻अपने कष्टों को दूर करके लिए महादेव जी को प्रार्थना करे और मंदिर मे शांत मन होकर कुछ देर वही पर बैठकर ध्यान लगाएं
🌄संध्या काल मे शनि चालीसा का पाठ करें और आपसे बन सके तो लगातार 21 दिन तक रोज ऐसा करे निश्चित रूप से आपकों लाभ प्राप्त होगा
आप कुंडली विश्लेषण करवाना चाहते हैं तो आप हमारा 🤙🏻 कर सकतें
☎️ 7575091399
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
👉🏻कल शनिवार है और साथ-साथ
प्रदोष भी हों रहा है तो ये शनि प्रदोष कहलाता है
🛕 उस दिन मंदिर जा करूशंकरजी कि पूजा अर्चना करने से शनिदेव से संबंधित सभी प्रकार की परेशानियों का सामना प्राप्त होता
👉🏻शनि दोष का निवारण मिल जाता है
👉🏻जैसे किसीकी जन्म कुंडली में विष योग बन रहा हों या शनि निच गत हों या शनि पर चंद्र की कु दृष्टी दोष हों रहा हों कैसा भी दोष हों ये सब कुछ हद तक शांत होकर अपने दुष्ट प्रभाव को कम कर देता है
👉🏻तो ऐसे मे आपको पहले य़ह पता होना चाहिए कि उसके क्या-क्या लक्षण होते हैं
👉🏻जैसे काम ना होना
होते हुवे काम है अटक जाना
बना हुवा काम बिगड़ जाना
आलस आना काम ना करने की प्रबल इच्छा होना
👉🏻ये सब शनि चंद्र के साथ-साथ होने के कारण होता है तो अब आप इसका निराकरण भी जान लीजिए
👉🏻आपकों कुछ नहीं करना होता है शनिवार के दिन सुबह सुबह जल्दी उठ जाए और स्नानादि निवृत्त होकर शंकर जी के मंदिर जाए साथ में गौ माता का दूध पित्तल के लौटे मे ले जाए साथ में थोड़े काले तिल मिलाकर ले जाना हैऔर शिवजी का अभिषेक करना होगा और ओम नमः शिवाय का जाप करना अनिवार्य है
👉🏻अपने कष्टों को दूर करके लिए महादेव जी को प्रार्थना करे और मंदिर मे शांत मन होकर कुछ देर वही पर बैठकर ध्यान लगाएं
🌄संध्या काल मे शनि चालीसा का पाठ करें और आपसे बन सके तो लगातार 21 दिन तक रोज ऐसा करे निश्चित रूप से आपकों लाभ प्राप्त होगा
आप कुंडली विश्लेषण करवाना चाहते हैं तो आप हमारा 🤙🏻 कर सकतें
☎️ 7575091399
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
*पिंक रेवोल्यूशन: भारत में गौवंश और अन्य प्राणी के मांस और पोल्ट्री उद्योग का आधुनिकीकरण*
पिंक रेवोल्यूशन भारत में मांस (मुख्य रूप से भैंस का मांस), मुर्गी पालन (पोल्ट्री), प्याज उत्पादन, झींगा (prawn) फार्मिंग और कभी-कभी फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र से जुड़ी एक तकनीकी और औद्योगिक क्रांति है। इसका नाम मांस के गुलाबी रंग से प्रेरित है, जो पारंपरिक विधियों से आधुनिक, स्वच्छ और निर्यात-उन्मुख उत्पादन की ओर संक्रमण को दर्शाता है। यह क्रांति भारत को वैश्विक स्तर पर मांस निर्यातक के रूप में मजबूत बनाने का प्रयास है, जहां देश दुनिया का सबसे बड़ा गौवंश के मांस निर्यातक बन चुका है।
*इतिहास*
पिंक रेवोल्यूशन की जड़ें 1990 के दशक में हैं, जब भारत में आर्थिक उदारीकरण ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई। *दुर्गेश पटेल* को इस क्रांति का 'पिता' माना जाता है, जिन्होंने 1996 में इस अवधारणा को गढ़ा। हालांकि, कुछ स्रोतों के अनुसार, इसे औपचारिक रूप से 2014 में *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बढ़ावा मिला,* जब भारत ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़कर दुनिया का शीर्ष गौवंश के मांस निर्यातक बना। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की रिपोर्ट "इंडियन मीट इंडस्ट्री पर्स्पेक्टिव" ने इसकी सराहना की। 2014-15 में मांस निर्यात ने बासमती चावल को पीछे छोड़ दिया, और मुर्गी उद्योग का मूल्य 700 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जो 8-15% की वार्षिक वृद्धि दर पर बढ़ रहा है।
*उद्देश्य*
इस क्रांति का मुख्य लक्ष्य मांस और पोल्ट्री प्रसंस्करण को आधुनिक बनाना है, ताकि उत्पादकता बढ़े, वैश्विक मानकों का पालन हो और निर्यात बढ़े। अन्य उद्देश्य हैं:
- स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना, ताकि जेनेटिक्स रोगों (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां) से बचा जा सके।
- घरेलू बाजार को विकसित करना, जहां प्रति व्यक्ति मांस खपत वर्तमान में मात्र 6 ग्राम प्रतिदिन है, जिसे अगले दशक में 50 ग्राम तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
- कथित ग्रामीण रोजगार सृजन और पशुपालन की दक्षता बढ़ाना, जैसे बेहतर प्रजनन, पोषण और फार्मिंग प्रथाओं के माध्यम से।
- प्याज और झींगा उत्पादन में भी तकनीकी सुधार, जो निर्यात को बढ़ावा दें।
प्रमुख पहलें
सरकार ने कई नीतियां और योजनाएं लागू कीं:
- *राष्ट्रीय मांस एवं पोल्ट्री प्रसंस्करण बोर्ड* : खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अधीन, जो इस क्षेत्र को निर्देशित करता है।
- *कर छूट और सब्सिडी*: मांस-पोल्ट्री क्षेत्र पर कोई उत्पाद शुल्क या आयकर नहीं; निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं; परिवहन सब्सिडी उपलब्ध। अर्थात गाय काटने ने लिए सरकार स्वयं पैसे देती है।
- *विदेशी निवेश*: 100% FDI की अनुमति, जिससे निजी निवेश बढ़ा।
- *स्लॉटरहाउस आधुनिकीकरण योजना*: पूरे देश में आधुनिक कत्लखानों का निर्माण, जहां अपशिष्ट कम हो, गुणवत्ता बनी रहे और प्रदूषण रोका जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी पर इकाइयां स्थापित।
- *कोल्ड चेन और परीक्षण सुविधाएं*: कोल्ड स्टोरेज, मांस परीक्षण लैब और स्वच्छ प्रसंस्करण के लिए निवेश।
- प्रमुख निर्यातक राज्य: पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश (गौवंश मांस के लिए); आयातक देश: सऊदी अरब, मिस्र, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, यूएई।
इसके अलावा, स्लॉटरहाउस के उप-उत्पादों (जैसे चमड़ा, हड्डियां) का उपयोग अतिरिक्त आय के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
आर्थिक और रोजगार प्रभाव
पिंक रेवोल्यूशन ने भारत को वैश्विक मांस बाजार में 2% हिस्सेदारी दी है, जबकि देश के पास दुनिया की सबसे बड़ी पशुधन आबादी है।
- *आर्थिक वृद्धि*: 2009-13 के बीच निर्यात 44% बढ़ा; 2012-13 में 1.1 मिलियन टन मांस ($2.3 बिलियन मूल्य) निर्यात। मुर्गी मांस में भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, और गौवंश के मांस में दूसरा।
- *रोजगार*: ग्रामीण श्रमिकों के 10% को पशुपालन, प्रसंस्करण और संबद्ध क्षेत्रों (जैसे चारा उत्पादन, पशु चिकित्सा) में रोजगार। यह ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन और कृषि मूल्य वर्धन (कुल कृषि GDP का 26%) को बढ़ावा देता है।
- *निर्यात लाभ*: कम उत्पादन लागत के कारण भारत ब्राजील/ऑस्ट्रेलिया से सस्ता गौवंश मांस निर्यात करता है, खासकर खाड़ी और पूर्वी एशिया को। शहरीकरण और प्रोटीन मांग से घरेलू बाजार भी फल-फूल रहा है।
चुनौतियां हालांकि सफल, कई बाधाएं बाकी हैं:
- *बुनियादी ढांचा की कमी*: आधुनिक कत्लखाने, कोल्ड स्टोरेज और परीक्षण लैबों की अपर्याप्तता, जो अपव्यय और दूषितता बढ़ाती है।
- *नियमन और गुणवत्ता*: एकसमान उत्पादन/निर्यात नीतियां न होना; स्वच्छता मानकों का पालन।
पिंक रेवोल्यूशन भारत में मांस (मुख्य रूप से भैंस का मांस), मुर्गी पालन (पोल्ट्री), प्याज उत्पादन, झींगा (prawn) फार्मिंग और कभी-कभी फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र से जुड़ी एक तकनीकी और औद्योगिक क्रांति है। इसका नाम मांस के गुलाबी रंग से प्रेरित है, जो पारंपरिक विधियों से आधुनिक, स्वच्छ और निर्यात-उन्मुख उत्पादन की ओर संक्रमण को दर्शाता है। यह क्रांति भारत को वैश्विक स्तर पर मांस निर्यातक के रूप में मजबूत बनाने का प्रयास है, जहां देश दुनिया का सबसे बड़ा गौवंश के मांस निर्यातक बन चुका है।
*इतिहास*
पिंक रेवोल्यूशन की जड़ें 1990 के दशक में हैं, जब भारत में आर्थिक उदारीकरण ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई। *दुर्गेश पटेल* को इस क्रांति का 'पिता' माना जाता है, जिन्होंने 1996 में इस अवधारणा को गढ़ा। हालांकि, कुछ स्रोतों के अनुसार, इसे औपचारिक रूप से 2014 में *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बढ़ावा मिला,* जब भारत ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़कर दुनिया का शीर्ष गौवंश के मांस निर्यातक बना। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की रिपोर्ट "इंडियन मीट इंडस्ट्री पर्स्पेक्टिव" ने इसकी सराहना की। 2014-15 में मांस निर्यात ने बासमती चावल को पीछे छोड़ दिया, और मुर्गी उद्योग का मूल्य 700 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जो 8-15% की वार्षिक वृद्धि दर पर बढ़ रहा है।
*उद्देश्य*
इस क्रांति का मुख्य लक्ष्य मांस और पोल्ट्री प्रसंस्करण को आधुनिक बनाना है, ताकि उत्पादकता बढ़े, वैश्विक मानकों का पालन हो और निर्यात बढ़े। अन्य उद्देश्य हैं:
- स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना, ताकि जेनेटिक्स रोगों (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां) से बचा जा सके।
- घरेलू बाजार को विकसित करना, जहां प्रति व्यक्ति मांस खपत वर्तमान में मात्र 6 ग्राम प्रतिदिन है, जिसे अगले दशक में 50 ग्राम तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
- कथित ग्रामीण रोजगार सृजन और पशुपालन की दक्षता बढ़ाना, जैसे बेहतर प्रजनन, पोषण और फार्मिंग प्रथाओं के माध्यम से।
- प्याज और झींगा उत्पादन में भी तकनीकी सुधार, जो निर्यात को बढ़ावा दें।
प्रमुख पहलें
सरकार ने कई नीतियां और योजनाएं लागू कीं:
- *राष्ट्रीय मांस एवं पोल्ट्री प्रसंस्करण बोर्ड* : खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अधीन, जो इस क्षेत्र को निर्देशित करता है।
- *कर छूट और सब्सिडी*: मांस-पोल्ट्री क्षेत्र पर कोई उत्पाद शुल्क या आयकर नहीं; निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं; परिवहन सब्सिडी उपलब्ध। अर्थात गाय काटने ने लिए सरकार स्वयं पैसे देती है।
- *विदेशी निवेश*: 100% FDI की अनुमति, जिससे निजी निवेश बढ़ा।
- *स्लॉटरहाउस आधुनिकीकरण योजना*: पूरे देश में आधुनिक कत्लखानों का निर्माण, जहां अपशिष्ट कम हो, गुणवत्ता बनी रहे और प्रदूषण रोका जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी पर इकाइयां स्थापित।
- *कोल्ड चेन और परीक्षण सुविधाएं*: कोल्ड स्टोरेज, मांस परीक्षण लैब और स्वच्छ प्रसंस्करण के लिए निवेश।
- प्रमुख निर्यातक राज्य: पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश (गौवंश मांस के लिए); आयातक देश: सऊदी अरब, मिस्र, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, यूएई।
इसके अलावा, स्लॉटरहाउस के उप-उत्पादों (जैसे चमड़ा, हड्डियां) का उपयोग अतिरिक्त आय के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
आर्थिक और रोजगार प्रभाव
पिंक रेवोल्यूशन ने भारत को वैश्विक मांस बाजार में 2% हिस्सेदारी दी है, जबकि देश के पास दुनिया की सबसे बड़ी पशुधन आबादी है।
- *आर्थिक वृद्धि*: 2009-13 के बीच निर्यात 44% बढ़ा; 2012-13 में 1.1 मिलियन टन मांस ($2.3 बिलियन मूल्य) निर्यात। मुर्गी मांस में भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, और गौवंश के मांस में दूसरा।
- *रोजगार*: ग्रामीण श्रमिकों के 10% को पशुपालन, प्रसंस्करण और संबद्ध क्षेत्रों (जैसे चारा उत्पादन, पशु चिकित्सा) में रोजगार। यह ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन और कृषि मूल्य वर्धन (कुल कृषि GDP का 26%) को बढ़ावा देता है।
- *निर्यात लाभ*: कम उत्पादन लागत के कारण भारत ब्राजील/ऑस्ट्रेलिया से सस्ता गौवंश मांस निर्यात करता है, खासकर खाड़ी और पूर्वी एशिया को। शहरीकरण और प्रोटीन मांग से घरेलू बाजार भी फल-फूल रहा है।
चुनौतियां हालांकि सफल, कई बाधाएं बाकी हैं:
- *बुनियादी ढांचा की कमी*: आधुनिक कत्लखाने, कोल्ड स्टोरेज और परीक्षण लैबों की अपर्याप्तता, जो अपव्यय और दूषितता बढ़ाती है।
- *नियमन और गुणवत्ता*: एकसमान उत्पादन/निर्यात नीतियां न होना; स्वच्छता मानकों का पालन।
- *पर्यावरण और नैतिक मुद्दे*: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जल उपभोग, एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग।
- *बाजार हिस्सेदारी*: वैश्विक बाजार में मात्र 2% हिस्सा, जबकि क्षमता अधिक।
- *राजनीतिक विवाद*: धार्मिक/राजनीतिक कारणों से विवाद, जैसे गौ-रक्षा आंदोलन।
कुल मिलाकर, पिंक रेवोल्यूशन ने भारत के पशुपालन क्षेत्र को एक वैश्विक शक्ति बनाया है जिसमे भारत की 2% हिस्सेदारी है।
नारायण अब क्या कहेंगे आप?
यह हिंदु का सरकार है? फैसला आप पर।
साभार : ग्रोक संकलित
जय गौमाता 💐
जय गोपाल 💐
- *बाजार हिस्सेदारी*: वैश्विक बाजार में मात्र 2% हिस्सा, जबकि क्षमता अधिक।
- *राजनीतिक विवाद*: धार्मिक/राजनीतिक कारणों से विवाद, जैसे गौ-रक्षा आंदोलन।
कुल मिलाकर, पिंक रेवोल्यूशन ने भारत के पशुपालन क्षेत्र को एक वैश्विक शक्ति बनाया है जिसमे भारत की 2% हिस्सेदारी है।
नारायण अब क्या कहेंगे आप?
यह हिंदु का सरकार है? फैसला आप पर।
साभार : ग्रोक संकलित
जय गौमाता 💐
जय गोपाल 💐
*पैसा दान पेटी में न डालकर वहां के सेवारत पूजारीगण एवं ब्राह्मणों को हाथों हाथ दे दानपेटी में न डालें!!*
_मंदिरों में दान पेटी को हटा दिया जाए तो सरकार - मंदिर के ट्रस्टी तो भूखे ही मर जाएंगे। अधिकांश मंदिरों में ट्रस्ट मंडल के अकाउंट होते हैं ओडिट होते है जो पैसा पूजारी की जेब में नहीं जाता लेकिन धर्म के अनाधिकृत सभी वर्ण धर्म कर्म से बहिष्कृत पतित -महापातकीओ की जेब में जाता है। पूजारी की जेब में तो जाता नहीं। पूजारी या भगवान को कुछ फर्क नही पड़ेगा ? क्योंकि ज्यादातर पूजारी तो पगार पर ही निर्भर होते है।_
*पं० धवलकुमार शास्त्री गुजरात*
_मंदिरों में दान पेटी को हटा दिया जाए तो सरकार - मंदिर के ट्रस्टी तो भूखे ही मर जाएंगे। अधिकांश मंदिरों में ट्रस्ट मंडल के अकाउंट होते हैं ओडिट होते है जो पैसा पूजारी की जेब में नहीं जाता लेकिन धर्म के अनाधिकृत सभी वर्ण धर्म कर्म से बहिष्कृत पतित -महापातकीओ की जेब में जाता है। पूजारी की जेब में तो जाता नहीं। पूजारी या भगवान को कुछ फर्क नही पड़ेगा ? क्योंकि ज्यादातर पूजारी तो पगार पर ही निर्भर होते है।_
*पं० धवलकुमार शास्त्री गुजरात*
👍2
✨ Numerology Consultation at just ₹999/-
🔗 Plus Lifetime Connected Guidance
📅 Valid only on Shivratri Day
🎁 Book in advance & receive a Surprise Gift!
This consultation covers:
✔ Career Growth
✔ Financial Stability
✔ Relationships & Marriage
✔ Health Guidance
✔ Name Correction
👩💼 Meett Mahaakaal Mahaadev
🔮 Numerologist & Crystal Healer
📞 Call/WhatsApp: 7575091399
📢 Share this special festive offer with your family & friends
⏳ Limited slots available — Book today!
🔗 Plus Lifetime Connected Guidance
📅 Valid only on Shivratri Day
🎁 Book in advance & receive a Surprise Gift!
This consultation covers:
✔ Career Growth
✔ Financial Stability
✔ Relationships & Marriage
✔ Health Guidance
✔ Name Correction
👩💼 Meett Mahaakaal Mahaadev
🔮 Numerologist & Crystal Healer
📞 Call/WhatsApp: 7575091399
📢 Share this special festive offer with your family & friends
⏳ Limited slots available — Book today!
🌿 प्रातर्मंगलम् प्रेम🌿
🔥फाल्गुन अमावस्या की पौराणिक कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण परिवार था, जिसमें पति-पत्नी और उनकी एक पुत्री थी। उनका जीवन सामान्य ही चल रहा था। जैसे-जैसे वर्ष बीतते गए, उनकी पुत्री भी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। बढ़ती उम्र के साथ उसमें स्त्रियों के गुणों का भी विकास होने लगा था। वह दिखने में अत्यंत ही सुंदर, सुशील और सर्व गुण सम्पन्न थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।
🔥एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें। ब्राह्मण पुत्री की सेवा से साधु महाराज का मन बहुत प्रसन्न हुआ और उन्होंने कन्या को लंबी उम्र का आशीर्वाद तो दिया, साथ ही यह भी बताया कि उसके हथेली में विधवा योग है।
🔥इस बात से चिंतित होकर दीन ब्राह्मण ने पंडित से पूछा- पुत्री के इस वैधव्य दोष का निवारण कैसे होगा?
🔥साधु महाराज ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दें, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है।
🔥साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है। यह बात सुनकर ब्राह्मणि ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। अगले दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती। एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि- तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता।
🔥 बहू ने कहा- मां जी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है।
🔥जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं? तब कन्या ने साधु द्वारा कही गई सारी बात बताई। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गई। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा। सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर उस कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया।
🔥उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी। उस दिन अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया।
🔥ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई। धोबिन का पति वापस जीवित हो गया। इसलिए माना जाता है कि इस दिन व्रत आदि करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अतः जो व्यक्ति अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं की भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है ॥🌿🔥
॥ ॐमंगलम् ॐकार मंगलम् ॐश्रीहरि-हरिॐ॥🔥🙏
🌿 जय-जयश्रीसीताराम प्रेम 🙏🚩🌹🔥💐
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी ✍🏻
🔥फाल्गुन अमावस्या की पौराणिक कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण परिवार था, जिसमें पति-पत्नी और उनकी एक पुत्री थी। उनका जीवन सामान्य ही चल रहा था। जैसे-जैसे वर्ष बीतते गए, उनकी पुत्री भी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। बढ़ती उम्र के साथ उसमें स्त्रियों के गुणों का भी विकास होने लगा था। वह दिखने में अत्यंत ही सुंदर, सुशील और सर्व गुण सम्पन्न थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।
🔥एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें। ब्राह्मण पुत्री की सेवा से साधु महाराज का मन बहुत प्रसन्न हुआ और उन्होंने कन्या को लंबी उम्र का आशीर्वाद तो दिया, साथ ही यह भी बताया कि उसके हथेली में विधवा योग है।
🔥इस बात से चिंतित होकर दीन ब्राह्मण ने पंडित से पूछा- पुत्री के इस वैधव्य दोष का निवारण कैसे होगा?
🔥साधु महाराज ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दें, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है।
🔥साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है। यह बात सुनकर ब्राह्मणि ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। अगले दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती। एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि- तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता।
🔥 बहू ने कहा- मां जी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है।
🔥जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं? तब कन्या ने साधु द्वारा कही गई सारी बात बताई। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गई। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा। सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर उस कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया।
🔥उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी। उस दिन अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया।
🔥ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई। धोबिन का पति वापस जीवित हो गया। इसलिए माना जाता है कि इस दिन व्रत आदि करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अतः जो व्यक्ति अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं की भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है ॥🌿🔥
॥ ॐमंगलम् ॐकार मंगलम् ॐश्रीहरि-हरिॐ॥🔥🙏
🌿 जय-जयश्रीसीताराम प्रेम 🙏🚩🌹🔥💐
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी ✍🏻
👍1🙏1
गिरनार पर्वत प्रादूरर्भाव
गिरनार कई सदियों पुराना हे। हो सकता हे चार अरब वर्षसे भी ज्यादा पुराना हो। उसका प्रमाण भी मिलता हे जो इस प्रकार हे।
वशिष्ट मुनि माता अरुंधतिके साथ वहां रहते थे। उस समय ये गिरनार पर्वतकी सिर्फ पांच चोटियां अंबाजी चोटी, गोरखनाथ चोटी, दत्तात्रेय चोटी, जैन चोटी, माली परब थी और बिचमें बड़ी खाई थी। इस समय यह लोकवायका प्रचलित थी की जो कोई पुरुष उस खाईसे गिरकर आत्महत्या कर लेता हे तो वह दूसरे जन्ममें राजा बनता हे।
एक बार वशिष्ठ मुनिकी गाय उस खाइमें गिर गई। मुनिने भगवान विष्णुसे प्रार्थना की, की प्रभु ये तो मेरी गाय गिर गई लेकिन कोई मनुष्य ओर कई प्राणी भी इसमें गिरकर मर जायेंगे। यह सुनकर भगवानने इंद्रको आज्ञा दी की इसकी व्यवस्था तुम तत्काल करो। इंद्रने सुमेरु पर्वतकों आज्ञा दी की तूम उस खाईको पूरा करनेका काम करो।
सुमेरु पर्वतके पांच पुत्र थे। उसने सबको पुछा की मेरा यह काम कौन करेगा ? तब उसका सबसे छोटा पुत्र मेरु बोला कि यह काम में करूंगा। मेरु पर्वत आकर उस पांचों चोटियों के बीच बैठ गया और तबसे ये खाई बंद हुई। ये इतिहास आपको कहीं से भी नहीं मिलेगा।
जय गिरनारी
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
गिरनार कई सदियों पुराना हे। हो सकता हे चार अरब वर्षसे भी ज्यादा पुराना हो। उसका प्रमाण भी मिलता हे जो इस प्रकार हे।
वशिष्ट मुनि माता अरुंधतिके साथ वहां रहते थे। उस समय ये गिरनार पर्वतकी सिर्फ पांच चोटियां अंबाजी चोटी, गोरखनाथ चोटी, दत्तात्रेय चोटी, जैन चोटी, माली परब थी और बिचमें बड़ी खाई थी। इस समय यह लोकवायका प्रचलित थी की जो कोई पुरुष उस खाईसे गिरकर आत्महत्या कर लेता हे तो वह दूसरे जन्ममें राजा बनता हे।
एक बार वशिष्ठ मुनिकी गाय उस खाइमें गिर गई। मुनिने भगवान विष्णुसे प्रार्थना की, की प्रभु ये तो मेरी गाय गिर गई लेकिन कोई मनुष्य ओर कई प्राणी भी इसमें गिरकर मर जायेंगे। यह सुनकर भगवानने इंद्रको आज्ञा दी की इसकी व्यवस्था तुम तत्काल करो। इंद्रने सुमेरु पर्वतकों आज्ञा दी की तूम उस खाईको पूरा करनेका काम करो।
सुमेरु पर्वतके पांच पुत्र थे। उसने सबको पुछा की मेरा यह काम कौन करेगा ? तब उसका सबसे छोटा पुत्र मेरु बोला कि यह काम में करूंगा। मेरु पर्वत आकर उस पांचों चोटियों के बीच बैठ गया और तबसे ये खाई बंद हुई। ये इतिहास आपको कहीं से भी नहीं मिलेगा।
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव ✍🏻
*सूर्यादिग्रह मंडल का संक्षिप्त विवरण* भाग -१
☀️मेरूपर्वत के चारों ओर घुमने वाले सूर्य के रथका संवत्सररूप पहिया देवताओं के दिन और रात अर्थात् उत्तरायण और दक्षिणायनके क्रमसे सदा घूमा करता है। ☀️ वहां के निवासी ब्रह्मारुप भगवान् हरिकी ब्रह्मसालोक्यादिकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोसे आराधना करते हुए इस प्रकार स्तुति करते हैं -
*यत्तत्कर्ममयं लिङ्गं ब्रह्मलिङ्गं जनोऽर्चयेत्।*
*एकान्तमद्वयं शान्तं तस्मै भगवते नम इति।।* जो साक्षात् कर्मफलरूप है और एक परमेश्वरमें ही जिनकी पूर्ण स्थिति है तथा जिनकी सभी लोग पूजा करते हैं, ब्रह्मज्ञानके साधनरुप उन अद्वितीय और शान्तस्वरुप ब्रह्ममूर्ति भगवान् को मेरा नमस्कार है 🙏।।
राजन्! इसके आगे लोकालोक नामका पर्वत है।यह पृथ्वीके सब ओर सूर्य और सूर्य आदि के द्वारा प्रकाशित और अप्रकाशित प्रदेशों के बीचमे उनका विभाग करने के लिए स्थित है। सूर्य आदि से प्रकाशित और अप्रकाशित भूभागोके बीचमे होने के कारण ही इसका नाम लोकालोक नाम पर्वत पड़ा।
यह समस्त भूगोल पचास करोड़ योजन है। इसका चौथाई भाग साढ़े बारह करोड़ योजन विस्तारवाला यह लोकालोक पर्वत है। जिसे परमात्माने त्रिलोकों के बहार उसके चारों ओर सीमा के रूप मे स्थापित किया है यह इतना ऊंचा और लंबा है कि इसके एक और से तीनों लोकोको प्रकाशित करनेवाली सूर्यसे लेकर ध्रुवपर्यन्त समस्त ज्योतिर्मण्डलकी किरणें दूसरी और नहीं जा सकती।।
इस लोकालोक पर्वत के उपर चारों दिशाओंमें समस्त संसार के गुरु स्वयंभू श्री ब्रह्माजीने सम्पूर्ण लोकोंकी स्थितिके लिये *ऋषभ,पुष्करचूड,वामन और अपराजित नामके गजराज* नियुक्त किये है।
*अण्डमध्यगत: सूर्यो द्यावाभूम्योर्यदन्तरम्।*
*सूर्याण्डगोलयोर्मध्ये कोट्य: स्यु: पञ्चविंशति:*
राजन्! स्वर्ग और पृथ्वीके बीचमें जो ब्रह्माण्डका केन्द्र है, वहीं ☀️सूर्य की स्थिति है। सूर्य और ब्रह्मांडगोलक के बीचमे सब और से पच्चीस करोड़ (२५००००००) योजन का अंतर है। *मृतेऽण्ड एष एतस्मिन् यदभूत्ततो मार्तण्ड इति व्यपदेश:।* सूर्य इस मृत अर्थात् मरे हुए अचेतन अण्ड में वैराजरूपसे विराजते हैं,इसी से इसका नाम *"मार्तण्ड"* हुआ है। ये हिरण्यमय ज्योतिर्मय ब्रह्माण्ड से प्रकट हुए इसलिए इन्हे *"हिरण्यगर्भ"* भी कहते हैं।।
सूर्य के द्वारा ही दिशा, आकाश,द्युलोक(अन्तरिक्षल़क), भूर्लोक, स्वर्ग और मोक्षके प्रदेश, नरक और रसातल तथा अन्य समस्त भागों का विभाजन होता है।। *देवतिर्यङ्मनुष्याणां सरीसृपसवीरूधाम्। सर्वजीवनिकायानां सूर्य आत्मा दृगीश्वर:* सूर्य ही देवता, तिर्यक, मनुष्य, सरीसृप और लता वृक्षादि समस्त जीवसमूहोंके आत्मा और नेत्रेन्द्रिय के अधिष्ठाता है।।
*ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी* ✍🏻
☀️मेरूपर्वत के चारों ओर घुमने वाले सूर्य के रथका संवत्सररूप पहिया देवताओं के दिन और रात अर्थात् उत्तरायण और दक्षिणायनके क्रमसे सदा घूमा करता है। ☀️ वहां के निवासी ब्रह्मारुप भगवान् हरिकी ब्रह्मसालोक्यादिकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोसे आराधना करते हुए इस प्रकार स्तुति करते हैं -
*यत्तत्कर्ममयं लिङ्गं ब्रह्मलिङ्गं जनोऽर्चयेत्।*
*एकान्तमद्वयं शान्तं तस्मै भगवते नम इति।।* जो साक्षात् कर्मफलरूप है और एक परमेश्वरमें ही जिनकी पूर्ण स्थिति है तथा जिनकी सभी लोग पूजा करते हैं, ब्रह्मज्ञानके साधनरुप उन अद्वितीय और शान्तस्वरुप ब्रह्ममूर्ति भगवान् को मेरा नमस्कार है 🙏।।
राजन्! इसके आगे लोकालोक नामका पर्वत है।यह पृथ्वीके सब ओर सूर्य और सूर्य आदि के द्वारा प्रकाशित और अप्रकाशित प्रदेशों के बीचमे उनका विभाग करने के लिए स्थित है। सूर्य आदि से प्रकाशित और अप्रकाशित भूभागोके बीचमे होने के कारण ही इसका नाम लोकालोक नाम पर्वत पड़ा।
यह समस्त भूगोल पचास करोड़ योजन है। इसका चौथाई भाग साढ़े बारह करोड़ योजन विस्तारवाला यह लोकालोक पर्वत है। जिसे परमात्माने त्रिलोकों के बहार उसके चारों ओर सीमा के रूप मे स्थापित किया है यह इतना ऊंचा और लंबा है कि इसके एक और से तीनों लोकोको प्रकाशित करनेवाली सूर्यसे लेकर ध्रुवपर्यन्त समस्त ज्योतिर्मण्डलकी किरणें दूसरी और नहीं जा सकती।।
इस लोकालोक पर्वत के उपर चारों दिशाओंमें समस्त संसार के गुरु स्वयंभू श्री ब्रह्माजीने सम्पूर्ण लोकोंकी स्थितिके लिये *ऋषभ,पुष्करचूड,वामन और अपराजित नामके गजराज* नियुक्त किये है।
*अण्डमध्यगत: सूर्यो द्यावाभूम्योर्यदन्तरम्।*
*सूर्याण्डगोलयोर्मध्ये कोट्य: स्यु: पञ्चविंशति:*
राजन्! स्वर्ग और पृथ्वीके बीचमें जो ब्रह्माण्डका केन्द्र है, वहीं ☀️सूर्य की स्थिति है। सूर्य और ब्रह्मांडगोलक के बीचमे सब और से पच्चीस करोड़ (२५००००००) योजन का अंतर है। *मृतेऽण्ड एष एतस्मिन् यदभूत्ततो मार्तण्ड इति व्यपदेश:।* सूर्य इस मृत अर्थात् मरे हुए अचेतन अण्ड में वैराजरूपसे विराजते हैं,इसी से इसका नाम *"मार्तण्ड"* हुआ है। ये हिरण्यमय ज्योतिर्मय ब्रह्माण्ड से प्रकट हुए इसलिए इन्हे *"हिरण्यगर्भ"* भी कहते हैं।।
सूर्य के द्वारा ही दिशा, आकाश,द्युलोक(अन्तरिक्षल़क), भूर्लोक, स्वर्ग और मोक्षके प्रदेश, नरक और रसातल तथा अन्य समस्त भागों का विभाजन होता है।। *देवतिर्यङ्मनुष्याणां सरीसृपसवीरूधाम्। सर्वजीवनिकायानां सूर्य आत्मा दृगीश्वर:* सूर्य ही देवता, तिर्यक, मनुष्य, सरीसृप और लता वृक्षादि समस्त जीवसमूहोंके आत्मा और नेत्रेन्द्रिय के अधिष्ठाता है।।
*ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी* ✍🏻
बदलते भारत की छवी
https://www.instagram.com/reel/DSJrbTiDyJC/?igsh=MXB0aXo5cm5kb3Vrbw==
किसानो पर लाठी चार्ज किया जा रहा है