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🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*
*21-05-2025 कण-कण में महादेव*💕
*श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*
*21-05-2025 कण-कण में महादेव*💕
🙏1
गुरु कब जरूरी है ????
अक्सर कई साधक मुझसे प्रश्न करते है की
" कौनसी साधनाएं गुरू के बिना कर सकते है और कौनसी गुरु धारण करके ही करनी चाहिए ? "
इस विषय में कुछ जरूरी तथ्य बता रहा हु जिसे समझने के बाद आशा है कि आपको सही चीजें समझ आ जाएगी।
1 आप जो भी व्रत,उपवास और अन्य सामान्य सेवा पूजा करते है उसके लिए आपको किसी भी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है। एकादशी व्रत,लक्ष्मी माता का व्रत या अन्य सामान्य व्रत और उपवास आदि कोई भी साधक अपनी इच्छा अनुसार श्रद्धा और विश्वास से कर सकता है।
नोट : यदि आप किसी देवता के व्रत या उपवास की मन्नत रखते है तो आपको अवश्य ही वो पूरा करना आवश्यक है।
2 जीवन में श्रद्धा और विश्वास से और भक्तिभाव से किसी भी देवता की सेवा,पूजा और आराधना करते है तो उसके लिए भी गुरु की आवश्यकता नही रहती है। जैसे कि कोई व्यक्ति को बाबा काल भैरव पर पूर्ण विश्वास है और वो नित्य भगवान काल भैरव के नाम से दीपक अगरबती करता है और उनकी यथा शक्ति भोग आदि देकर सेवा करता है तो उसके लिए उसे किसी भी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है।
नोट : ये कार्य यदि बिना स्वार्थ के करते है और केवल भक्ति भाव से करते है तब तक उचित है मगर यदि यही काम स्वार्थवश होकर करते है तो अवश्य ही उचित ढंग से सेवा करनी आवश्यक है। मगर ये आप किसी अच्छे साधक से बाबा की सही सेवा सीखकर स्वयं कर सकते है। इसके लिए गुरु की जरूरत नहीं है।
3 यदि कोई व्यक्ति नित्य चालीसा पाठ और बावनी पाठ या फिर इसी प्रकार के देवी देवताओं के महिमा वाले स्तोत्र और चालीसा आदि का पाठ करता है या संकल्प के साथ अनुष्ठान भी करता है तो उसके लिए भी उसे गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है।
नॉट : ये चालीसा और स्तोत्र पाठ सौम्य देवताओं के लिए ही उचित है। उग्र देवताओं के चालीसा या स्तोत्र पाठ बिना गुरु के नहीं करने चाहिए। दूसरा ये भी हैै कि हनुमान जी जैसे अत्यंत वैष्णव देवता के चालीसा आदि के पाठ के समय उनके नियमों का पालन करना आवश्यक है।
4 जन साधारण प्रचलित सात्विक देवता जैसे गणेशजी,हनुमान जी,राम जी, कृष्ण जी,लक्ष्मी जी,सरस्वती जी,महादेव जी जैसे सात्विक देवता के नमः वाले सरल मंत्र जैसे श्री गणेशाय नमः जैसे मंत्र का नित्य माला से या बिना माला से भी यदि आपके इष्ट देवता मानकर आप जप आदि करते है तो उसके लिए भी आपको किसी भी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है।
नोट : उग्र देवताओं के मंत्र नित्य जप बिना मार्गदर्शन के नहीं करने चाहिए। सात्विक देवताओं के मंत्र भी "ॐ" लगाकर बिना गुरु के नहीं करने चाहिए। आप चाहे तो "श्री" लगाकर या फिर सिर्फ सीधा ही जप कर सकते है।
5 नाम मंत्र का जप चाहे वो किसी भी देवता का हो कोई भी साधक बिन गुरु के कर सकते है। जैसे सीताराम, हरे कृष्ण, राम राम,महादेव महादेव, जय दुर्गे आदि नाम बिना किसी भी गुरु की सहायता के साधक कर सकते है।
नोट: उग्र देवताओं के नाम जप उचित साधक के मार्गदर्शन में करे। क्योंकि उग्र देवता के नाम जप से उस देवता की ऊर्जा आपसे जुड़ना शुरू होती है। इसी लिए उचित मार्गदर्शन जरूरी है। मगर ज्यादातर देवताओं के नाम मंत्र जप से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं है। मगर उग्र देवता के नाम जप से उग्र ऊर्जा भी कनेक्ट होगी। इसके लिए आपको योग्य मार्गदर्शक की जरूरत रहेगी।
6 यदि आप विशेष तांत्रोक्त मंत्र की साधना करना चाहते है, विशेष या कोई भी ॐ वाले मंत्र का अनुष्ठान करना चाहते है,यदि आप किसी भी प्रकार की तांत्रिक साधना करना चाहते है या फिर आप किसी भी उद्देश्य या कामनापूर्ति के लिए अनुष्ठान करना चाहते है तो उसके लिए गुरु की आवश्यकता अवश्य रहेगी।
नोट: कामनापूर्ति का अनुष्ठान विधि विधान से संकल्प के साथ होते है। ऐसे सभी अनुष्ठान हेतु गुरु की आवश्यकता रहेगी।
7 आप कोई भी प्रत्यक्षीकरण की साधना करते है,उच्चकोटी महाविद्या आदि साधनाएं करते है या फिर आप अप्सरा, यक्षिणी,बेताल, प्रेत, पिशाच, आदि या देवी देवता के प्रत्यक्षीकरण की साधना करते है तो इसके लिए गुरु की आवश्यकता रहेगी। इसमें बिना गुरु के रत्तीभर भी चलना मुश्किल है।
नोट : इसी प्रकार की साधनाओं में बिना सोचे भी गुरु नही बनाना चाहिए। बल्कि उचित सिद्ध साधक और उचित मार्ग से दीक्षित साधक को ही गुरु बनाना चाहिए जो वास्तव में गुरु बनाने योग्य हो।
सांदीपनी गुरुकुल स्वाध्याय केन्द्र, उज्जैन 8602666380/6260144580
अक्सर कई साधक मुझसे प्रश्न करते है की
" कौनसी साधनाएं गुरू के बिना कर सकते है और कौनसी गुरु धारण करके ही करनी चाहिए ? "
इस विषय में कुछ जरूरी तथ्य बता रहा हु जिसे समझने के बाद आशा है कि आपको सही चीजें समझ आ जाएगी।
1 आप जो भी व्रत,उपवास और अन्य सामान्य सेवा पूजा करते है उसके लिए आपको किसी भी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है। एकादशी व्रत,लक्ष्मी माता का व्रत या अन्य सामान्य व्रत और उपवास आदि कोई भी साधक अपनी इच्छा अनुसार श्रद्धा और विश्वास से कर सकता है।
नोट : यदि आप किसी देवता के व्रत या उपवास की मन्नत रखते है तो आपको अवश्य ही वो पूरा करना आवश्यक है।
2 जीवन में श्रद्धा और विश्वास से और भक्तिभाव से किसी भी देवता की सेवा,पूजा और आराधना करते है तो उसके लिए भी गुरु की आवश्यकता नही रहती है। जैसे कि कोई व्यक्ति को बाबा काल भैरव पर पूर्ण विश्वास है और वो नित्य भगवान काल भैरव के नाम से दीपक अगरबती करता है और उनकी यथा शक्ति भोग आदि देकर सेवा करता है तो उसके लिए उसे किसी भी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है।
नोट : ये कार्य यदि बिना स्वार्थ के करते है और केवल भक्ति भाव से करते है तब तक उचित है मगर यदि यही काम स्वार्थवश होकर करते है तो अवश्य ही उचित ढंग से सेवा करनी आवश्यक है। मगर ये आप किसी अच्छे साधक से बाबा की सही सेवा सीखकर स्वयं कर सकते है। इसके लिए गुरु की जरूरत नहीं है।
3 यदि कोई व्यक्ति नित्य चालीसा पाठ और बावनी पाठ या फिर इसी प्रकार के देवी देवताओं के महिमा वाले स्तोत्र और चालीसा आदि का पाठ करता है या संकल्प के साथ अनुष्ठान भी करता है तो उसके लिए भी उसे गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है।
नॉट : ये चालीसा और स्तोत्र पाठ सौम्य देवताओं के लिए ही उचित है। उग्र देवताओं के चालीसा या स्तोत्र पाठ बिना गुरु के नहीं करने चाहिए। दूसरा ये भी हैै कि हनुमान जी जैसे अत्यंत वैष्णव देवता के चालीसा आदि के पाठ के समय उनके नियमों का पालन करना आवश्यक है।
4 जन साधारण प्रचलित सात्विक देवता जैसे गणेशजी,हनुमान जी,राम जी, कृष्ण जी,लक्ष्मी जी,सरस्वती जी,महादेव जी जैसे सात्विक देवता के नमः वाले सरल मंत्र जैसे श्री गणेशाय नमः जैसे मंत्र का नित्य माला से या बिना माला से भी यदि आपके इष्ट देवता मानकर आप जप आदि करते है तो उसके लिए भी आपको किसी भी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती है।
नोट : उग्र देवताओं के मंत्र नित्य जप बिना मार्गदर्शन के नहीं करने चाहिए। सात्विक देवताओं के मंत्र भी "ॐ" लगाकर बिना गुरु के नहीं करने चाहिए। आप चाहे तो "श्री" लगाकर या फिर सिर्फ सीधा ही जप कर सकते है।
5 नाम मंत्र का जप चाहे वो किसी भी देवता का हो कोई भी साधक बिन गुरु के कर सकते है। जैसे सीताराम, हरे कृष्ण, राम राम,महादेव महादेव, जय दुर्गे आदि नाम बिना किसी भी गुरु की सहायता के साधक कर सकते है।
नोट: उग्र देवताओं के नाम जप उचित साधक के मार्गदर्शन में करे। क्योंकि उग्र देवता के नाम जप से उस देवता की ऊर्जा आपसे जुड़ना शुरू होती है। इसी लिए उचित मार्गदर्शन जरूरी है। मगर ज्यादातर देवताओं के नाम मंत्र जप से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं है। मगर उग्र देवता के नाम जप से उग्र ऊर्जा भी कनेक्ट होगी। इसके लिए आपको योग्य मार्गदर्शक की जरूरत रहेगी।
6 यदि आप विशेष तांत्रोक्त मंत्र की साधना करना चाहते है, विशेष या कोई भी ॐ वाले मंत्र का अनुष्ठान करना चाहते है,यदि आप किसी भी प्रकार की तांत्रिक साधना करना चाहते है या फिर आप किसी भी उद्देश्य या कामनापूर्ति के लिए अनुष्ठान करना चाहते है तो उसके लिए गुरु की आवश्यकता अवश्य रहेगी।
नोट: कामनापूर्ति का अनुष्ठान विधि विधान से संकल्प के साथ होते है। ऐसे सभी अनुष्ठान हेतु गुरु की आवश्यकता रहेगी।
7 आप कोई भी प्रत्यक्षीकरण की साधना करते है,उच्चकोटी महाविद्या आदि साधनाएं करते है या फिर आप अप्सरा, यक्षिणी,बेताल, प्रेत, पिशाच, आदि या देवी देवता के प्रत्यक्षीकरण की साधना करते है तो इसके लिए गुरु की आवश्यकता रहेगी। इसमें बिना गुरु के रत्तीभर भी चलना मुश्किल है।
नोट : इसी प्रकार की साधनाओं में बिना सोचे भी गुरु नही बनाना चाहिए। बल्कि उचित सिद्ध साधक और उचित मार्ग से दीक्षित साधक को ही गुरु बनाना चाहिए जो वास्तव में गुरु बनाने योग्य हो।
सांदीपनी गुरुकुल स्वाध्याय केन्द्र, उज्जैन 8602666380/6260144580
*23 मई अपरा एकादशी*
अपरा एकादशी व्रत महात्म्य
तिथि: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी
विशेषता: पापनाशिनी, पुण्यवर्धिनी, मोक्षदायिनी
"व्रतेन हि विनिर्मुक्तो जन्तुः पापैः समन्वितः।
एकादश्यामुपोष्यैव विष्णुलोकं स गच्छति॥"
(पद्म पुराण)
अपरा एकादशी का शास्त्रीय महत्व:
अपरा एकादशी को ‘निरजला एकादशी’ से पूर्व आने वाली एकादशी माना गया है और इसे “अपराद्धों से मुक्ति दिलाने वाली” एकादशी कहा गया है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो जीवन में बिना जाने अनेक पापों में संलग्न हो जाते हैं – जैसे मिथ्या बोलना, छल-कपट करना, धन का अपव्यय, गुरु-अपमान, संतान का तिरस्कार आदि।
पद्म पुराण, विष्णु धर्मोत्तर और स्कंद पुराण में वर्णित है कि जो मनुष्य श्रद्धा पूर्वक इस एकादशी का व्रत करता है, वह पंचमहापापों से भी मुक्त हो जाता है।
व्रत व पूजन की विधि:
1. व्रत का संकल्प:
सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
2. उपवास व नियम:
इस दिन अन्न, अनाज, चावल, दाल, मसूर, तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज से परहेज करें। फलाहार करें। पूर्ण व्रत (निर्जल या फलाहारी) करने से पुण्य अधिक होता है।
3. विष्णु पूजन:
भगवान श्रीहरि की पीले वस्त्र, तुलसी, चंदन, धूप-दीप से पूजा करें।
शंख में गंगाजल भरकर अभिषेक करें।
शास्त्रों के अनुसार शंख से अभिषेक करने पर ऋण, रोग, विवाद और दरिद्रता का नाश होता है और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है।
विशेषत: दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक विशेष फलदायी है।
इस दिन के पुण्य व दान की महिमा:
इस दिन किया गया गाय, वस्त्र, अन्न, जल, दीप, और स्वर्णदान अक्षय पुण्य देने वाला होता है।
पितरों के लिए जलदान व तिलदान करने से श्राद्ध का भी फल प्राप्त होता है।
वृद्ध, रोगी व दरिद्रों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा देने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है।
विशेष पाठ व मंत्र:
1. श्री विष्णु महामंत्र:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
इस मंत्र का 108 बार जप करने से जीवन के सारे संकट दूर होते हैं।
घर में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और धन-समृद्धि, संतान सुख, वैवाहिक शांति प्राप्त होती है।
2. विष्णु सहस्रनाम पाठ की महिमा:
इस दिन सहस्रनाम का पाठ करने से पितृ दोष, ग्रह दोष और जीवन के अदृश्य विघ्न समाप्त होते हैं।
यह पाठ मानसिक शांति, भक्ति में दृढ़ता और भाग्यवृद्धि का साधन है।
पौराणिक संदर्भ:
महाभारत में युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा —
"हे माधव! कौन-सा व्रत ऐसा है जिससे सभी पाप कट जाएं?"
श्रीकृष्ण बोले —
"अपरा एकादशी व्रत वह उत्तम उपाय है जिससे न केवल पापों का विनाश होता है बल्कि मोक्ष भी प्राप्त होता है। इस दिन जो भक्त शंख से मेरा अभिषेक करता है, उसे समस्त दैविक संकटों से मुक्ति मिलती है।"
संदेश:
“अपरा एकादशी – आत्मशुद्धि, पापनाश और विष्णु कृपा प्राप्ति का महान अवसर है।”
आप सभी भक्तों को अपरा एकादशी की मंगलमयी शुभकामनाएँ।
श्रीहरि आप पर अपनी कृपा बनाए रखें।
अपरा एकादशी व्रत महात्म्य
तिथि: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी
विशेषता: पापनाशिनी, पुण्यवर्धिनी, मोक्षदायिनी
"व्रतेन हि विनिर्मुक्तो जन्तुः पापैः समन्वितः।
एकादश्यामुपोष्यैव विष्णुलोकं स गच्छति॥"
(पद्म पुराण)
अपरा एकादशी का शास्त्रीय महत्व:
अपरा एकादशी को ‘निरजला एकादशी’ से पूर्व आने वाली एकादशी माना गया है और इसे “अपराद्धों से मुक्ति दिलाने वाली” एकादशी कहा गया है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो जीवन में बिना जाने अनेक पापों में संलग्न हो जाते हैं – जैसे मिथ्या बोलना, छल-कपट करना, धन का अपव्यय, गुरु-अपमान, संतान का तिरस्कार आदि।
पद्म पुराण, विष्णु धर्मोत्तर और स्कंद पुराण में वर्णित है कि जो मनुष्य श्रद्धा पूर्वक इस एकादशी का व्रत करता है, वह पंचमहापापों से भी मुक्त हो जाता है।
व्रत व पूजन की विधि:
1. व्रत का संकल्प:
सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
2. उपवास व नियम:
इस दिन अन्न, अनाज, चावल, दाल, मसूर, तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज से परहेज करें। फलाहार करें। पूर्ण व्रत (निर्जल या फलाहारी) करने से पुण्य अधिक होता है।
3. विष्णु पूजन:
भगवान श्रीहरि की पीले वस्त्र, तुलसी, चंदन, धूप-दीप से पूजा करें।
शंख में गंगाजल भरकर अभिषेक करें।
शास्त्रों के अनुसार शंख से अभिषेक करने पर ऋण, रोग, विवाद और दरिद्रता का नाश होता है और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है।
विशेषत: दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक विशेष फलदायी है।
इस दिन के पुण्य व दान की महिमा:
इस दिन किया गया गाय, वस्त्र, अन्न, जल, दीप, और स्वर्णदान अक्षय पुण्य देने वाला होता है।
पितरों के लिए जलदान व तिलदान करने से श्राद्ध का भी फल प्राप्त होता है।
वृद्ध, रोगी व दरिद्रों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा देने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है।
विशेष पाठ व मंत्र:
1. श्री विष्णु महामंत्र:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
इस मंत्र का 108 बार जप करने से जीवन के सारे संकट दूर होते हैं।
घर में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और धन-समृद्धि, संतान सुख, वैवाहिक शांति प्राप्त होती है।
2. विष्णु सहस्रनाम पाठ की महिमा:
इस दिन सहस्रनाम का पाठ करने से पितृ दोष, ग्रह दोष और जीवन के अदृश्य विघ्न समाप्त होते हैं।
यह पाठ मानसिक शांति, भक्ति में दृढ़ता और भाग्यवृद्धि का साधन है।
पौराणिक संदर्भ:
महाभारत में युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा —
"हे माधव! कौन-सा व्रत ऐसा है जिससे सभी पाप कट जाएं?"
श्रीकृष्ण बोले —
"अपरा एकादशी व्रत वह उत्तम उपाय है जिससे न केवल पापों का विनाश होता है बल्कि मोक्ष भी प्राप्त होता है। इस दिन जो भक्त शंख से मेरा अभिषेक करता है, उसे समस्त दैविक संकटों से मुक्ति मिलती है।"
संदेश:
“अपरा एकादशी – आत्मशुद्धि, पापनाश और विष्णु कृपा प्राप्ति का महान अवसर है।”
आप सभी भक्तों को अपरा एकादशी की मंगलमयी शुभकामनाएँ।
श्रीहरि आप पर अपनी कृपा बनाए रखें।
Forwarded from Numerology and crystal (Geereejaapti asrto point महाकाल की महाकाली)
ये ओरिजिनल रूद्राक्ष हे जैसी जिसकी समस्या होती है उसे उसकी समस्या के अनुसार वो रूद्राक्ष दिया जाता है उसके नाम का संकल्प ले कर के jagrut कर के वों रूद्राक्ष उसे दिया जाएगा अगर किसी को चाहिए तो हमे व्यक्तिगत रूप से मेसेज करे हम उसे मार्गदर्शन करेंगे
हर हर महादेव हर आप सब का दिन मंगलमय हो 🙏🏻
हर हर महादेव हर आप सब का दिन मंगलमय हो 🙏🏻
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक - 23 मई 2025*
🌤️ *दिन - शुक्रवार*
🌤️ *विक्रत संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - ग्रीष्म ॠतु*
🌤️ *मास - ज्येष्ठ (गुजरात-महाराष्ट्र वैशाख)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - एकादशी रात्रि 10:29 तक तत्पश्चात द्वादशी*
🌤️ *नक्षत्र - उत्तरभाद्रपद शाम 04:02 तक तत्पश्चात रेवती*
🌤️ *योग -प्रीति शाम 06:37 तक तत्पश्चात आयुष्मान*
🌤️ *राहुकाल - सुबह 10:56 से दोपहर 12:36 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 05:59*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:11*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- अपरा-जलक्रीडा-भद्रकाली एकादशी;पंचक*
💥 *विशेष- *हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *अपरा एकादशी* 🌷
➡️ *22 मई 2025 गुरूवार को रात्रि 01:12 यानि (23 मई 01:12 AM) से 23 मई, शुक्रवार को रात्रि 10:29 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष - 23 मई, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
🙏🏻 *‘अपरा एकादशी’ को उपवास करके भगवान वामन की पूजा करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो श्रीविष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है ।इसका महात्म पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *शनिप्रदोष व्रत* 🌷
🙏🏻 *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 24 मई, शनिवार को शनिप्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा*
🙏🏻 *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।*
🙏🏻 *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।*
🙏🏻 *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।*
👉🏻 *ये उपाय करें*
*सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।*
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻
🌤️ *दिनांक - 23 मई 2025*
🌤️ *दिन - शुक्रवार*
🌤️ *विक्रत संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - ग्रीष्म ॠतु*
🌤️ *मास - ज्येष्ठ (गुजरात-महाराष्ट्र वैशाख)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - एकादशी रात्रि 10:29 तक तत्पश्चात द्वादशी*
🌤️ *नक्षत्र - उत्तरभाद्रपद शाम 04:02 तक तत्पश्चात रेवती*
🌤️ *योग -प्रीति शाम 06:37 तक तत्पश्चात आयुष्मान*
🌤️ *राहुकाल - सुबह 10:56 से दोपहर 12:36 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 05:59*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:11*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- अपरा-जलक्रीडा-भद्रकाली एकादशी;पंचक*
💥 *विशेष- *हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *अपरा एकादशी* 🌷
➡️ *22 मई 2025 गुरूवार को रात्रि 01:12 यानि (23 मई 01:12 AM) से 23 मई, शुक्रवार को रात्रि 10:29 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष - 23 मई, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
🙏🏻 *‘अपरा एकादशी’ को उपवास करके भगवान वामन की पूजा करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो श्रीविष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है ।इसका महात्म पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *शनिप्रदोष व्रत* 🌷
🙏🏻 *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 24 मई, शनिवार को शनिप्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा*
🙏🏻 *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।*
🙏🏻 *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।*
🙏🏻 *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।*
👉🏻 *ये उपाय करें*
*सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।*
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻
जरा सोचो .......
अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर हो या नालन्दा विश्वविद्यालय को आग की भेट चढ़ाने वाले बख्तियार खिलजी दोनो ने प्राचीन ज्ञान को नष्ट करने का बर्बर कार्य किया परन्तु इतिहास में इसे छोटी घटना बना कर भुला दिया गया, क्यों ??
तैमूर, नादिर, गौरी, गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बर्बर हत्यारो को विजेता के रूप में हमे इतिहास की किताबो में परोसा गया , क्यो ?
अल-तकिय्या (धार्मिक झूठ ) में लिप्त अपने इन पैशाचिक गुणों के कारण इन्होंने अपने अंदर एक ऐसी कला विकसित की जिससे इन्होंने केवल समस्त जनसामान्य को ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिरो को भी अब तक भ्रमित करके रखा है। ये घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद ... स्वयं को जुल्म का शिकार (विक्टिम) प्रदर्शित करने में माहिर है।
इनकी यह कला है ...झूठा नैरेटिव गढ़ने की ..
इन्होंने अपनी इस कला से ... उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया ... वरन् उल्टे सभी धार्मिक जनों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया। उनकी यही कुटिलता के जाल में समस्त हिन्दूसमाज फंस कर रह गया है।
जो एक मस्तिष्क, एक आवाज, एक इकाई, एक ही खलीफाई सेना के रूप में आपके सामने आपका वजूद मिटाने को खड़े हों, या गंगा-जमुनी तहज़ीब ओढ़े .... मौन समर्थन करके ... ताकत पकड़ने तक के इन्तेज़ार में खड़े हुए है, उनसे बचाव कैसे ??
जरा देखिये और सोचिये ... अपने चारों ओर, वे आपके चारों ओर मौजूद हैं ... पर कभी भी .... इस्लाम को दुनिया में ज़लील करने वाले आतंकवाद के खिलाफ सरकार पर दबाव नहीं बनाते ... क्योंकि यही बर्बरता उनकी उनकी शिकारी-लुटेरी सभ्यता की आत्मा है, वजूद का अहम हिस्सा है ।
-उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद खुले बाजारों में बेचा लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे।
-उन्होंने 1946 में लगभग 100% पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया व पाकिस्तान का निर्माण कराने के बाद ... सफलतापूर्वक हिंदुओं पर नैरेटिव थोप दिया ... कि संविधान के कारण उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया ... जबकि संविधान विभाजन (1947) के तीन वर्ष बाद 1950 में लागू हुआ था।
-उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी धार्मिक मान्यता के कारण तुर्की के खलीफा के पक्ष में ... खिलाफत आंदोलन में भाग लिया ... पर नैरेटिव इस तरह गढ़ा कि भारत की स्वतंत्रता में उन्होंने बराबर भाग लिया।जबकि वे अंग्रेजों से सत्ता हथियाकर ... भारत में खलीफाई सल्तनत बनाने के लिए लड़े थे ।
-सर सैयद अहमद शाह से लेकर जिन्ना तक ... वे अंग्रेजों की गोदी में खेलते रहे ... लेकिन माफीनामे की पर्ची सफलतापूर्वक ... सावरकर के माथे पर लगा दी गयी ।
-संसार में नब्बे प्रतिशत आतंकवादी घटनाएं अंजाम देने व जिम्मेवारी लेने के बावजूद भी ... सफलता पूर्वक स्थापित कर देते हैं कि ... आतंकवाद का कोई धर्म नहीं ... लेकिन कोर्ट में निर्दोष साबित हुए ... साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित के माध्यम से ... *हिंदू आतंकवाद* का नैरेटिव गढ़ देते हैं।
-बछडाचोर अखलाक व एक चोर तबरेज की पिटाई में हुई दुर्घटनावश मृत्यु को मोबलिंचिंग का नैरेटिव गढ़ देते हैं लेकिन.. चंदन गुप्ता और निरीह ... भरत यादव , अंकित शर्मा जैसे अनेको की दर्दनाक मृत्यु को सामान्य घटना साबित कर देते हैं।
आप कैसे लड़ोगे इन संगठित विकृत मानसिकता से ? क्योकि हम में से ही कुछ लोग सेक्युलरिज़्म-लिबरंडिज्म की शक्ल में ... हरदम इनके रहबर व हमदर्द बनकर बराबर मौज़ूद बने रहते हैं ...
इसलिए ऐ काफ़िरों ....
जातीय मतभेद से ऊपर उठकर ... मिलकर आत्मरक्षा में संगठित प्रयास ही ... अब अन्तिम विकल्प शेष रह गया है ! समय रहते इस अन्तिम अवसर का लाभ सभी सिर जोड़ - बन्द मुट्ठी एकता से उठा लो या फिर अलग-२ बिखरी डण्डियों की तरह ... टूटने व भाड़ में जलने को तैयार रहो ।
याद रहे...आंख मूंदने से कभी .....असत्य का नाश नहीं होता
वरन सत्यानाश ही होता है ।
ऐक बनों - नेक बनों - संगठित रहो - सुरक्षित रहो।।
।। जय जय श्रीराम ।।
🙏🔴
अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर हो या नालन्दा विश्वविद्यालय को आग की भेट चढ़ाने वाले बख्तियार खिलजी दोनो ने प्राचीन ज्ञान को नष्ट करने का बर्बर कार्य किया परन्तु इतिहास में इसे छोटी घटना बना कर भुला दिया गया, क्यों ??
तैमूर, नादिर, गौरी, गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बर्बर हत्यारो को विजेता के रूप में हमे इतिहास की किताबो में परोसा गया , क्यो ?
अल-तकिय्या (धार्मिक झूठ ) में लिप्त अपने इन पैशाचिक गुणों के कारण इन्होंने अपने अंदर एक ऐसी कला विकसित की जिससे इन्होंने केवल समस्त जनसामान्य को ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिरो को भी अब तक भ्रमित करके रखा है। ये घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद ... स्वयं को जुल्म का शिकार (विक्टिम) प्रदर्शित करने में माहिर है।
इनकी यह कला है ...झूठा नैरेटिव गढ़ने की ..
इन्होंने अपनी इस कला से ... उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया ... वरन् उल्टे सभी धार्मिक जनों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया। उनकी यही कुटिलता के जाल में समस्त हिन्दूसमाज फंस कर रह गया है।
जो एक मस्तिष्क, एक आवाज, एक इकाई, एक ही खलीफाई सेना के रूप में आपके सामने आपका वजूद मिटाने को खड़े हों, या गंगा-जमुनी तहज़ीब ओढ़े .... मौन समर्थन करके ... ताकत पकड़ने तक के इन्तेज़ार में खड़े हुए है, उनसे बचाव कैसे ??
जरा देखिये और सोचिये ... अपने चारों ओर, वे आपके चारों ओर मौजूद हैं ... पर कभी भी .... इस्लाम को दुनिया में ज़लील करने वाले आतंकवाद के खिलाफ सरकार पर दबाव नहीं बनाते ... क्योंकि यही बर्बरता उनकी उनकी शिकारी-लुटेरी सभ्यता की आत्मा है, वजूद का अहम हिस्सा है ।
-उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद खुले बाजारों में बेचा लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे।
-उन्होंने 1946 में लगभग 100% पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया व पाकिस्तान का निर्माण कराने के बाद ... सफलतापूर्वक हिंदुओं पर नैरेटिव थोप दिया ... कि संविधान के कारण उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया ... जबकि संविधान विभाजन (1947) के तीन वर्ष बाद 1950 में लागू हुआ था।
-उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी धार्मिक मान्यता के कारण तुर्की के खलीफा के पक्ष में ... खिलाफत आंदोलन में भाग लिया ... पर नैरेटिव इस तरह गढ़ा कि भारत की स्वतंत्रता में उन्होंने बराबर भाग लिया।जबकि वे अंग्रेजों से सत्ता हथियाकर ... भारत में खलीफाई सल्तनत बनाने के लिए लड़े थे ।
-सर सैयद अहमद शाह से लेकर जिन्ना तक ... वे अंग्रेजों की गोदी में खेलते रहे ... लेकिन माफीनामे की पर्ची सफलतापूर्वक ... सावरकर के माथे पर लगा दी गयी ।
-संसार में नब्बे प्रतिशत आतंकवादी घटनाएं अंजाम देने व जिम्मेवारी लेने के बावजूद भी ... सफलता पूर्वक स्थापित कर देते हैं कि ... आतंकवाद का कोई धर्म नहीं ... लेकिन कोर्ट में निर्दोष साबित हुए ... साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित के माध्यम से ... *हिंदू आतंकवाद* का नैरेटिव गढ़ देते हैं।
-बछडाचोर अखलाक व एक चोर तबरेज की पिटाई में हुई दुर्घटनावश मृत्यु को मोबलिंचिंग का नैरेटिव गढ़ देते हैं लेकिन.. चंदन गुप्ता और निरीह ... भरत यादव , अंकित शर्मा जैसे अनेको की दर्दनाक मृत्यु को सामान्य घटना साबित कर देते हैं।
आप कैसे लड़ोगे इन संगठित विकृत मानसिकता से ? क्योकि हम में से ही कुछ लोग सेक्युलरिज़्म-लिबरंडिज्म की शक्ल में ... हरदम इनके रहबर व हमदर्द बनकर बराबर मौज़ूद बने रहते हैं ...
इसलिए ऐ काफ़िरों ....
जातीय मतभेद से ऊपर उठकर ... मिलकर आत्मरक्षा में संगठित प्रयास ही ... अब अन्तिम विकल्प शेष रह गया है ! समय रहते इस अन्तिम अवसर का लाभ सभी सिर जोड़ - बन्द मुट्ठी एकता से उठा लो या फिर अलग-२ बिखरी डण्डियों की तरह ... टूटने व भाड़ में जलने को तैयार रहो ।
याद रहे...आंख मूंदने से कभी .....असत्य का नाश नहीं होता
वरन सत्यानाश ही होता है ।
ऐक बनों - नेक बनों - संगठित रहो - सुरक्षित रहो।।
।। जय जय श्रीराम ।।
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