. ऋषि पंचमी”
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारम्भ बुधवार 27 अगस्त 2025 को सायं 03:44 पर हो रहा है, जो अगले दिन गुरुवार 28 अगस्त 2025 को सायं 05:56 तक रहेगी।
धार्मिक मान्यतानुसार, ऋषि पंचमी का अवसर मुख्य रूप से सप्तर्षि के रूप में प्रसिद्ध सात महान ऋषियों को समर्पित है। ऋषि पंचमी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ ऋषियों के पूजन के बाद कथापाठ और व्रत रखा जाता है।
ऋषि पंचमी का पवित्र दिन महान भारतीय ऋषियों की स्मृति में मनाया जाता है। सप्तर्षि से जुड़े हुए सात ऋषियों के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने पृथ्वी से बुराई को खत्म करने के लिए स्वयं के जीवन का त्याग किया और मानव जाति के सुधार के लिए काम किया। हिंदू मान्यताओं और शास्त्रों में, यह उल्लेख किया गया है कि ये संत अपने भक्तों को अपने ज्ञान और बुद्धि से शिक्षित करते हैं ताकि हर कोई दान, मानवता और ज्ञान के मार्ग का पालन कर सके।
ऋषि पंचमी का महत्व और पूजाविधि
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखना काफी ज्यादा फलदायी होता है इस व्रत को भक्ति और श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस दिन ऋषियों का पूर्ण विधि-विधान से पूजन के बाद कथा सुनने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यह व्रत लोगों के पापों का नाश करता है और अच्छे फल देता है। यह व्रत और ऋषियों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता, समर्पण और सम्मान की भावना को दर्शाता है।
ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं सरोवर या नदी विशेषकर गंगा में स्नान करती हैं। ऐसी मान्यता है कि रजस्वला के समय होने वाली तकलीफ तथा अन्य दोष के निवारण के लिए महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत करती हैं और स्नान करती हैं। आज के दिन महिलाएं सप्तऋषियों की पूजा करती हैं और दोष निवारण के लिए कामना करती हैं।
पहले यह व्रत सभी वर्णों के पुरुषों के लिए बताया गया था लेकिन समय के साथ-साथ अब यह व्रत अधिकतर महिलाएँ करती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।
ऋषि पंचमी की पूजा में महिलाएं सप्त ऋषियों की मूर्ति बनाती हैं और उसकी पूजा करती हैं। इसमें प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की पूजा भी की जाती है। उसके बाद ऋषि पंचमी की कथा सुनती हैं। ऋषि पंचमी के व्रत में महिलाएं फलाहार करती हैं और अन्य व्रत के नियमों का पालन करती हैं। दिन के अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराती हैं और स्वयं पारण कर व्रत को पूर्ण करती हैं। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। इस व्रत में दिन में एक बार भोजन करना चाहिए।
ऋषि पंचमी की पूजा के लिए सप्तऋषियों की प्रतिमाओं की स्थापना कर उन्हें पंचामृत स्नान दें, जिसके बाद उनपर चंदन का लेप लगाएँ और फूलों एवं सुगंधित पदार्थों, दीप, धूप आदि अर्पण करें इसके साथ ही श्वेत वस्त्रों, यज्ञोपवीतों और नैवेद्य से पूजा और मंत्र का जाप करें।
ऋषि पंचमी व्रत की कथा
काफी समय पहले विदर्भ नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहते थे, उनके परिवार में एक पुत्र व पुत्री थी। ब्राह्मण पुत्री का विवाह अच्छे ब्राह्मण कुल में कर देता है लेकिन काल के प्रभाव स्वरूप कन्या का पति अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है। जिसके बाद विधवा अपने घर लौट जाती है।
एक दिन आधी रात में विधवा के शरीर में कीड़े पैदा होने लगते हैं। ऐसी हालत देखकर उसके पिता एक ऋषि के पास ले जाते हैं। ऋषि कहते हैं कि कन्या पूर्व जन्म में ब्राह्मणी थी और इसनें एक बार रजस्वला होने पर भी घर के बर्तन छू लिए और काम करने लगी। बस इसी पाप की वजह से इसके शरीर में कीड़े पड़ गए।
दरअसल, शास्त्रों में रजस्वला स्त्री का कार्य निषेध बताया गया है लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया और इसका दण्ड भोगना पड़ रहा है। तब ऋषि कहते हैं कि अगर वह कन्या ऋषि पंचमी का व्रत करें और पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा और क्षमा प्रार्थना करे और उसे अपने पापों से मुक्ति मिल जाएगी।
इस प्रकार कन्या द्वारा ऋषि पंचमी का व्रत करने से उसे पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
० ० ०
॥जय जय श्री राधे॥
**शुभ प्रभात नमस्कार *
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारम्भ बुधवार 27 अगस्त 2025 को सायं 03:44 पर हो रहा है, जो अगले दिन गुरुवार 28 अगस्त 2025 को सायं 05:56 तक रहेगी।
धार्मिक मान्यतानुसार, ऋषि पंचमी का अवसर मुख्य रूप से सप्तर्षि के रूप में प्रसिद्ध सात महान ऋषियों को समर्पित है। ऋषि पंचमी के दिन पूरे विधि-विधान के साथ ऋषियों के पूजन के बाद कथापाठ और व्रत रखा जाता है।
ऋषि पंचमी का पवित्र दिन महान भारतीय ऋषियों की स्मृति में मनाया जाता है। सप्तर्षि से जुड़े हुए सात ऋषियों के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने पृथ्वी से बुराई को खत्म करने के लिए स्वयं के जीवन का त्याग किया और मानव जाति के सुधार के लिए काम किया। हिंदू मान्यताओं और शास्त्रों में, यह उल्लेख किया गया है कि ये संत अपने भक्तों को अपने ज्ञान और बुद्धि से शिक्षित करते हैं ताकि हर कोई दान, मानवता और ज्ञान के मार्ग का पालन कर सके।
ऋषि पंचमी का महत्व और पूजाविधि
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखना काफी ज्यादा फलदायी होता है इस व्रत को भक्ति और श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस दिन ऋषियों का पूर्ण विधि-विधान से पूजन के बाद कथा सुनने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यह व्रत लोगों के पापों का नाश करता है और अच्छे फल देता है। यह व्रत और ऋषियों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता, समर्पण और सम्मान की भावना को दर्शाता है।
ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं सरोवर या नदी विशेषकर गंगा में स्नान करती हैं। ऐसी मान्यता है कि रजस्वला के समय होने वाली तकलीफ तथा अन्य दोष के निवारण के लिए महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत करती हैं और स्नान करती हैं। आज के दिन महिलाएं सप्तऋषियों की पूजा करती हैं और दोष निवारण के लिए कामना करती हैं।
पहले यह व्रत सभी वर्णों के पुरुषों के लिए बताया गया था लेकिन समय के साथ-साथ अब यह व्रत अधिकतर महिलाएँ करती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।
ऋषि पंचमी की पूजा में महिलाएं सप्त ऋषियों की मूर्ति बनाती हैं और उसकी पूजा करती हैं। इसमें प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की पूजा भी की जाती है। उसके बाद ऋषि पंचमी की कथा सुनती हैं। ऋषि पंचमी के व्रत में महिलाएं फलाहार करती हैं और अन्य व्रत के नियमों का पालन करती हैं। दिन के अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराती हैं और स्वयं पारण कर व्रत को पूर्ण करती हैं। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। इस व्रत में दिन में एक बार भोजन करना चाहिए।
ऋषि पंचमी की पूजा के लिए सप्तऋषियों की प्रतिमाओं की स्थापना कर उन्हें पंचामृत स्नान दें, जिसके बाद उनपर चंदन का लेप लगाएँ और फूलों एवं सुगंधित पदार्थों, दीप, धूप आदि अर्पण करें इसके साथ ही श्वेत वस्त्रों, यज्ञोपवीतों और नैवेद्य से पूजा और मंत्र का जाप करें।
ऋषि पंचमी व्रत की कथा
काफी समय पहले विदर्भ नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहते थे, उनके परिवार में एक पुत्र व पुत्री थी। ब्राह्मण पुत्री का विवाह अच्छे ब्राह्मण कुल में कर देता है लेकिन काल के प्रभाव स्वरूप कन्या का पति अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है। जिसके बाद विधवा अपने घर लौट जाती है।
एक दिन आधी रात में विधवा के शरीर में कीड़े पैदा होने लगते हैं। ऐसी हालत देखकर उसके पिता एक ऋषि के पास ले जाते हैं। ऋषि कहते हैं कि कन्या पूर्व जन्म में ब्राह्मणी थी और इसनें एक बार रजस्वला होने पर भी घर के बर्तन छू लिए और काम करने लगी। बस इसी पाप की वजह से इसके शरीर में कीड़े पड़ गए।
दरअसल, शास्त्रों में रजस्वला स्त्री का कार्य निषेध बताया गया है लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया और इसका दण्ड भोगना पड़ रहा है। तब ऋषि कहते हैं कि अगर वह कन्या ऋषि पंचमी का व्रत करें और पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा और क्षमा प्रार्थना करे और उसे अपने पापों से मुक्ति मिल जाएगी।
इस प्रकार कन्या द्वारा ऋषि पंचमी का व्रत करने से उसे पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
० ० ०
॥जय जय श्री राधे॥
**शुभ प्रभात नमस्कार *
*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞*
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०५ ) पंचमी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🙏 ऋषि पंचमी 🙏
🍀 गुरु पंचमी 🍀
🌺 रक्षा पंचमी ( बंगाल ) 🌺
🌸 मेलापाट ( कश्मीर ) 🌸
🌼 संवत्सरी - पंचमी पक्ष ( जैन ) 🌼
2️⃣8️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..गुरुवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..चित्रा 🦚
🪔 *योग*…….शुक्ल 🪔
✳️ *करण*…..बव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०७ः०० 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२ः१८ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल ….दोपहर ०२ः१७ से ०३ः५२ 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल २९-०८-२५ शुक्रवार 🌺🌺
🌞 सूर्य षष्ठी 🌞
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०५ ) पंचमी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🙏 ऋषि पंचमी 🙏
🍀 गुरु पंचमी 🍀
🌺 रक्षा पंचमी ( बंगाल ) 🌺
🌸 मेलापाट ( कश्मीर ) 🌸
🌼 संवत्सरी - पंचमी पक्ष ( जैन ) 🌼
2️⃣8️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..गुरुवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..चित्रा 🦚
🪔 *योग*…….शुक्ल 🪔
✳️ *करण*…..बव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०७ः०० 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२ः१८ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल ….दोपहर ०२ः१७ से ०३ः५२ 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल २९-०८-२५ शुक्रवार 🌺🌺
🌞 सूर्य षष्ठी 🌞
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
*विवरण:*
ज्योतिष की दुनिया में कदम रखें और अपने भविष्य को समझें! हमारे अनुभवी ज्योतिषी आपकी कुंडली का विश्लेषण करके आपके जीवन के रहस्यों को खोलेंगे।
*सेवाएं:*
- कुंडली विश्लेषण
- ज्योतिषीय भविष्यवाणी
- ग्रहों के प्रभाव का विश्लेषण
- राशियों के अनुसार भविष्य की जानकारी
*लाभ:*
- अपने भविष्य को जानने का अवसर
- जीवन के निर्णयों में मदद
- आत्म-ज्ञान और आत्म-विकास
*कॉल टू एक्शन:*
अब कॉल करें और अपने भविष्य को जानने के लिए एक मुलाकात बुक करें!
*संपर्क जानकारी:*
☎️[7575091399]
🪀[94263 60094]
📧 Geereejaaptiaastropoint@gmail.com
ज्योतिष की दुनिया में कदम रखें और अपने भविष्य को समझें! हमारे अनुभवी ज्योतिषी आपकी कुंडली का विश्लेषण करके आपके जीवन के रहस्यों को खोलेंगे।
*सेवाएं:*
- कुंडली विश्लेषण
- ज्योतिषीय भविष्यवाणी
- ग्रहों के प्रभाव का विश्लेषण
- राशियों के अनुसार भविष्य की जानकारी
*लाभ:*
- अपने भविष्य को जानने का अवसर
- जीवन के निर्णयों में मदद
- आत्म-ज्ञान और आत्म-विकास
*कॉल टू एक्शन:*
अब कॉल करें और अपने भविष्य को जानने के लिए एक मुलाकात बुक करें!
*संपर्क जानकारी:*
☎️[7575091399]
🪀[94263 60094]
📧 Geereejaaptiaastropoint@gmail.com
*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞*
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०६ ) षष्ठी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🌞 सूर्यषष्ठी 🌞
🌸 चंपाषष्ठी 🌸
💐 मंथन षष्ठी ( बंगाल ) 💐
🍀 बलराम जयंती 🍀
🌼 कार्तिक स्वामी दर्शन 🌼
🌺 मेलापाट ( कश्मीर ) 🌺
🦚 सोमनाथ व्रत ( उड़ीसा ) 🦚
2️⃣9️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..शुक्रवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..स्वाति 🦚
🪔 *योग*…….ब्रह्मा 🪔
✳️ *करण*…..कौलव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः५९ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२:४५ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल ….प्रातः ११ः०९ से १२ः४४ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल ३०-०८-२५ शनिवार 🌺🌺
💐 ललिता सप्तमी 💐
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०६ ) षष्ठी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🌞 सूर्यषष्ठी 🌞
🌸 चंपाषष्ठी 🌸
💐 मंथन षष्ठी ( बंगाल ) 💐
🍀 बलराम जयंती 🍀
🌼 कार्तिक स्वामी दर्शन 🌼
🌺 मेलापाट ( कश्मीर ) 🌺
🦚 सोमनाथ व्रत ( उड़ीसा ) 🦚
2️⃣9️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..शुक्रवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..स्वाति 🦚
🪔 *योग*…….ब्रह्मा 🪔
✳️ *करण*…..कौलव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः५९ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२:४५ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल ….प्रातः ११ः०९ से १२ः४४ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल ३०-०८-२५ शनिवार 🌺🌺
💐 ललिता सप्तमी 💐
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞*
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०८ ) अष्टमी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🙏 दुर्गाष्टमी 🙏
🌺 राधाष्टमी 🌺
🌼 धरो आठम 🌼
🌸 दधिची जयंती 🌸
🦚 गौरी आवाहन सायं ०५ः२७ तक 🦚
🪻 महालक्ष्मी व्रतारंभ 🪻
🍁 भद्रा समाप्त प्रातः ११ः५५ 🍁
🍀 बिछुड़ा 🍀
3️⃣1️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..रविवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..अनुराधा 🦚
🪔 *योग*…….वैधृति 🪔
✳️ *करण*….. विष्टि ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः५७ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. वृश्चिक 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२:२३ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल …सायं ०५ः२४ से ०६ः५७ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल ०१-०९-२५ सोमवार 🌺🌺
🙏 श्रीहरि जयंती 🙏
🌼 अदुःख नवमी 🌼
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०८ ) अष्टमी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🙏 दुर्गाष्टमी 🙏
🌺 राधाष्टमी 🌺
🌼 धरो आठम 🌼
🌸 दधिची जयंती 🌸
🦚 गौरी आवाहन सायं ०५ः२७ तक 🦚
🪻 महालक्ष्मी व्रतारंभ 🪻
🍁 भद्रा समाप्त प्रातः ११ः५५ 🍁
🍀 बिछुड़ा 🍀
3️⃣1️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..रविवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..अनुराधा 🦚
🪔 *योग*…….वैधृति 🪔
✳️ *करण*….. विष्टि ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः५७ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. वृश्चिक 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२:२३ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल …सायं ०५ः२४ से ०६ः५७ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल ०१-०९-२५ सोमवार 🌺🌺
🙏 श्रीहरि जयंती 🙏
🌼 अदुःख नवमी 🌼
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
*अंक ज्योतिष विशेषज्ञ*
*आपके जीवन की संख्याओं का रहस्य उजागर करें!*
- *जन्म तिथि और नाम संख्या विश्लेषण*
- *व्यक्तिगत संख्या का अर्थ और प्रभाव*
- *जीवन में सफलता और समृद्धि के तरीके*
*मिलें और जानें अपने जीवन की संख्याओं का रहस्य!*
*नाम:मीत महाकाल महादेव*
☎️7575091399
🪀94263 60094
📧Geereejaaptiaastropoint@gmail.com
*अंक ज्योतिष से अपने जीवन को बेहतर बनाएं!*
https://chat.whatsapp.com/C0VWmJn49dwKT2k2MTESox?mode=ac_t
*आपके जीवन की संख्याओं का रहस्य उजागर करें!*
- *जन्म तिथि और नाम संख्या विश्लेषण*
- *व्यक्तिगत संख्या का अर्थ और प्रभाव*
- *जीवन में सफलता और समृद्धि के तरीके*
*मिलें और जानें अपने जीवन की संख्याओं का रहस्य!*
*नाम:मीत महाकाल महादेव*
☎️7575091399
🪀94263 60094
📧Geereejaaptiaastropoint@gmail.com
*अंक ज्योतिष से अपने जीवन को बेहतर बनाएं!*
https://chat.whatsapp.com/C0VWmJn49dwKT2k2MTESox?mode=ac_t
Forwarded from Bajrang dal || बजरंग दल
ओम शांति💐🙏🏻 धन्यवाद साथियों🚩
नगर पालिका परिषद मोदीनगर के चक्कर में रहते तो सुबह तक शायद इनका शरीर भी ना मिल पाता!
एवं सूचना मिलते ही रात्रि में ही अंतिम संस्कार कराया।
👇🏻Share-Follow-Support 🤝🚩
https://whatsapp.com/channel/0029VbAj81xEKyZDxT6Jf80T
नगर पालिका परिषद मोदीनगर के चक्कर में रहते तो सुबह तक शायद इनका शरीर भी ना मिल पाता!
एवं सूचना मिलते ही रात्रि में ही अंतिम संस्कार कराया।
👇🏻Share-Follow-Support 🤝🚩
https://whatsapp.com/channel/0029VbAj81xEKyZDxT6Jf80T
🙏1
*🌑खग्रास चन्द्रग्रहण- 7 सितंबर 2025 (भारत में दिखेगा, नियम पालनीय है ।)*
*💁🏻ग्रहण समय-* रात्रि 9 बजकर 57 मिनट से देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक ।
*💁🏻सुतक प्रारम्भ-* 7 सितंबर, रविवार दोपहर 12:57 से
*💁🏻सूतक प्रारम्भ (बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं के लिए) -* 7 सितम्बर शाम 5-27 से ग्रहण प्रारम्भ होने तक
*🔹ग्रहण भारत में दिखेगा इसलिये ग्रहण के नियम पालनीय आवश्यक है ।*
*📜ग्रहणकाल में क्या करें, क्या न करें ? सम्पूर्ण जानकारी👇🏼*
🔹चन्द्रग्रहण में 3 प्रहर (9 घंटे) और सूर्यग्रहण में 4 प्रहर (12 घंटे) पहले से सूतक माना जाता है । इस समय सशक्त व्यक्तियों को भोजन छोड़ देना चाहिए । इससे आयु, आरोग्य, बुद्धि की विलक्षणता बनी रहेगी । परंतु जो बालक, बूढ़े, बीमार व गर्भवती स्त्रियाँ हैं वे ग्रहण से 1.5 प्रहर (4.5 घंटे) पहले तक चुपचाप कुछ खा-पी लें तो चल सकता है । इसके बाद खाने से स्वास्थ्य की बड़ी हानि होती है । गर्भवती महिलाओं को तो ग्रहण के समय खास सावधान रहना चाहिए ।
🔹सूतक (ग्रहण-वेध) के पहले जिन पदार्थों में कुश, तिल या तुलसी-पत्ते डाल दिये जाते हैं वे सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते । दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें । कुश आदि डला पानी सूतककाल में उपयोग में ला सकते हैं ।
*📜ग्रहणकाल में भूलकर भी न करें ?👇🏼*
🔹ग्रहण में अगर सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जीवन होगा । अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दंडित हो जायेंगे, दुःखी हो जायेंगे ।
*💁🏻ग्रहणकाल में –*
(1) भोजन करनेवाला अधोगति को जाता है ।
(2) जो नींद करता है उसको रोग जरूर पकड़ेगा, उसकी रोगप्रतिकारकता का गला घुटेगा ।
(3) जो पेशाब करता है उसके घर में दरिद्रता आती है । जो शौच जाता है उसको कृमिरोग होता है तथा कीट की योनि में जाना पड़ता है ।
(4) जो संसार-व्यवहार (सम्भोग) करते हैं उनको सूअर की योनि में जाना पड़ता है ।
(5) तेल-मालिश करने या उबटन लगाने से कुष्ठरोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।
(6) ठगाई करनेवाला सर्पयोनि में जाता है । चोरी करनेवाले को दरिद्रता पकड़ लेती है ।
(7) जीव-जंतु या किसी प्राणी की हत्या करनेवाले को नारकीय योनियों में जाना पड़ता है ।
(8) पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि न तोड़ें । दंतधावन, अभी ब्रश समझ लो, न करें ।
(9) चिंता करते हैं तो बुद्धिनाश होता है ।
*📜ये करने से सँवरेगा इहलोक–परलोक 👇🏼*
(1) सूर्यग्रहण के समय रुद्राक्ष-माला धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं परंतु फैक्ट्रियों में बननेवाले नकली रुद्राक्ष नहीं, असली रुद्राक्ष हों ।
(2) मंत्रदीक्षा में मिले मंत्र का ग्रहण के समय जप करने से उसकी सिद्धि हो जाती है ।
(3) *महर्षि वेदव्यासजी कहते हैं :* ‘‘चन्द्रग्रहण के समय किया हुआ जप लाख गुना और सूर्यग्रहण के समय किया हुआ जप 10 लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है ।’’
*तो स्वास्थ्य-मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना ।*
🔹ग्रहण के समय किया हुआ ऐसा-वैसा कोई भी गलत या पाप कर्म अनंत गुना हो जाता है और इस समय भगवद्-चिंतन, भगवद्-ध्यान, भगवद्-ज्ञान का लाभ ले तो वह व्यक्ति सहज में भगवद्-धाम, भगवद्-रस को पाता है ।
🔹ग्रहण के समय अगर भगवद्-विरह पैदा हो जाता है तो वह भगवान को पाने में बिल्कुल पक्का है, उसने भगवान को पा लिया समझ लो । ग्रहण के समय किया हुआ जप, मौन, ध्यान, प्रभु-सुमिरन अनेक गुना हो जाता है । *ग्रहण के बाद वस्त्रसहित स्नान करें ।*
*📜कल्पनातीत मेधाशक्ति बढ़ाने का प्रयोग- 👇🏼*
🔹नारद पुराण के अनुसार सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण के समय उपवास करे और ब्राह्मी घृत को उँगली से स्पर्श करे एवं उसे देखते हुए *‘ॐ नमो नारायणाय ।’* मंत्र का 8000 बार (80 माला) जप करे । थोड़ा शांत बैठे । ग्रहण–समाप्ति पर स्नान के बाद घी का पान करे तो बुद्धि विलक्षण ढंग से चमकेगी, बुद्धिशक्ति बढ़ जायेगी, कल्पनातीत मेधाशक्ति, कवित्वशक्ति और वचनसिद्धि (वाक्–सिद्धि) प्राप्त हो जायेगी ।
🕉️🙏🚩🕉️🙏🚩🕉️
*💁🏻ग्रहण समय-* रात्रि 9 बजकर 57 मिनट से देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक ।
*💁🏻सुतक प्रारम्भ-* 7 सितंबर, रविवार दोपहर 12:57 से
*💁🏻सूतक प्रारम्भ (बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं के लिए) -* 7 सितम्बर शाम 5-27 से ग्रहण प्रारम्भ होने तक
*🔹ग्रहण भारत में दिखेगा इसलिये ग्रहण के नियम पालनीय आवश्यक है ।*
*📜ग्रहणकाल में क्या करें, क्या न करें ? सम्पूर्ण जानकारी👇🏼*
🔹चन्द्रग्रहण में 3 प्रहर (9 घंटे) और सूर्यग्रहण में 4 प्रहर (12 घंटे) पहले से सूतक माना जाता है । इस समय सशक्त व्यक्तियों को भोजन छोड़ देना चाहिए । इससे आयु, आरोग्य, बुद्धि की विलक्षणता बनी रहेगी । परंतु जो बालक, बूढ़े, बीमार व गर्भवती स्त्रियाँ हैं वे ग्रहण से 1.5 प्रहर (4.5 घंटे) पहले तक चुपचाप कुछ खा-पी लें तो चल सकता है । इसके बाद खाने से स्वास्थ्य की बड़ी हानि होती है । गर्भवती महिलाओं को तो ग्रहण के समय खास सावधान रहना चाहिए ।
🔹सूतक (ग्रहण-वेध) के पहले जिन पदार्थों में कुश, तिल या तुलसी-पत्ते डाल दिये जाते हैं वे सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते । दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें । कुश आदि डला पानी सूतककाल में उपयोग में ला सकते हैं ।
*📜ग्रहणकाल में भूलकर भी न करें ?👇🏼*
🔹ग्रहण में अगर सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जीवन होगा । अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दंडित हो जायेंगे, दुःखी हो जायेंगे ।
*💁🏻ग्रहणकाल में –*
(1) भोजन करनेवाला अधोगति को जाता है ।
(2) जो नींद करता है उसको रोग जरूर पकड़ेगा, उसकी रोगप्रतिकारकता का गला घुटेगा ।
(3) जो पेशाब करता है उसके घर में दरिद्रता आती है । जो शौच जाता है उसको कृमिरोग होता है तथा कीट की योनि में जाना पड़ता है ।
(4) जो संसार-व्यवहार (सम्भोग) करते हैं उनको सूअर की योनि में जाना पड़ता है ।
(5) तेल-मालिश करने या उबटन लगाने से कुष्ठरोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।
(6) ठगाई करनेवाला सर्पयोनि में जाता है । चोरी करनेवाले को दरिद्रता पकड़ लेती है ।
(7) जीव-जंतु या किसी प्राणी की हत्या करनेवाले को नारकीय योनियों में जाना पड़ता है ।
(8) पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि न तोड़ें । दंतधावन, अभी ब्रश समझ लो, न करें ।
(9) चिंता करते हैं तो बुद्धिनाश होता है ।
*📜ये करने से सँवरेगा इहलोक–परलोक 👇🏼*
(1) सूर्यग्रहण के समय रुद्राक्ष-माला धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं परंतु फैक्ट्रियों में बननेवाले नकली रुद्राक्ष नहीं, असली रुद्राक्ष हों ।
(2) मंत्रदीक्षा में मिले मंत्र का ग्रहण के समय जप करने से उसकी सिद्धि हो जाती है ।
(3) *महर्षि वेदव्यासजी कहते हैं :* ‘‘चन्द्रग्रहण के समय किया हुआ जप लाख गुना और सूर्यग्रहण के समय किया हुआ जप 10 लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है ।’’
*तो स्वास्थ्य-मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना ।*
🔹ग्रहण के समय किया हुआ ऐसा-वैसा कोई भी गलत या पाप कर्म अनंत गुना हो जाता है और इस समय भगवद्-चिंतन, भगवद्-ध्यान, भगवद्-ज्ञान का लाभ ले तो वह व्यक्ति सहज में भगवद्-धाम, भगवद्-रस को पाता है ।
🔹ग्रहण के समय अगर भगवद्-विरह पैदा हो जाता है तो वह भगवान को पाने में बिल्कुल पक्का है, उसने भगवान को पा लिया समझ लो । ग्रहण के समय किया हुआ जप, मौन, ध्यान, प्रभु-सुमिरन अनेक गुना हो जाता है । *ग्रहण के बाद वस्त्रसहित स्नान करें ।*
*📜कल्पनातीत मेधाशक्ति बढ़ाने का प्रयोग- 👇🏼*
🔹नारद पुराण के अनुसार सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण के समय उपवास करे और ब्राह्मी घृत को उँगली से स्पर्श करे एवं उसे देखते हुए *‘ॐ नमो नारायणाय ।’* मंत्र का 8000 बार (80 माला) जप करे । थोड़ा शांत बैठे । ग्रहण–समाप्ति पर स्नान के बाद घी का पान करे तो बुद्धि विलक्षण ढंग से चमकेगी, बुद्धिशक्ति बढ़ जायेगी, कल्पनातीत मेधाशक्ति, कवित्वशक्ति और वचनसिद्धि (वाक्–सिद्धि) प्राप्त हो जायेगी ।
🕉️🙏🚩🕉️🙏🚩🕉️
ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य बातें
〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️
1👉 सूतक एवं ग्रहण काल में अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, नाखून काटना इत्यादि वर्जित है।
2👉 किसी से किसी भी प्रकार का झूठ, छल-कपट इत्यादि करने से बचें।
3👉 गर्भवती स्त्री को ग्रहण काल में सब्जी काटना, पापड़ सेकना इत्यादि कोई भी उत्तेजक कार्य नहीं करना चाहिए। तथा धार्मिक ग्रंथों का पाठ, श्रवण करते हुए उसमें प्रसन्नचित रहना चाहिए !
4👉 बड़े-बूढ़े, रोगी, बालक और गर्भवती स्त्रियों को यथा अनुकूल भोजन या दबाई आदि लेने में कोई दोष नहीं है।
5👉 ग्रहण सूतक आरम्भ से पूर्व दूध, जल आदि तरल द्रव्यों में कुशा तृण या तुलसी रखना श्रयेकर !
6👉 कांसे की कटोरी या थाली में घी डालकर उसमें अपना चेहरा देखने व उपरान्त उसका दान करने से ग्रह जन्य अरिष्ठों-कष्टों की शांति ।
7👉 ग्रहण काल में मंत्र जाप, महामंत्र ॐ नमः शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र जप शुभऔर अतः प्रभु चिन्तन करते रहें और प्रसन्न रहे।
〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️
〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️
1👉 सूतक एवं ग्रहण काल में अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, नाखून काटना इत्यादि वर्जित है।
2👉 किसी से किसी भी प्रकार का झूठ, छल-कपट इत्यादि करने से बचें।
3👉 गर्भवती स्त्री को ग्रहण काल में सब्जी काटना, पापड़ सेकना इत्यादि कोई भी उत्तेजक कार्य नहीं करना चाहिए। तथा धार्मिक ग्रंथों का पाठ, श्रवण करते हुए उसमें प्रसन्नचित रहना चाहिए !
4👉 बड़े-बूढ़े, रोगी, बालक और गर्भवती स्त्रियों को यथा अनुकूल भोजन या दबाई आदि लेने में कोई दोष नहीं है।
5👉 ग्रहण सूतक आरम्भ से पूर्व दूध, जल आदि तरल द्रव्यों में कुशा तृण या तुलसी रखना श्रयेकर !
6👉 कांसे की कटोरी या थाली में घी डालकर उसमें अपना चेहरा देखने व उपरान्त उसका दान करने से ग्रह जन्य अरिष्ठों-कष्टों की शांति ।
7👉 ग्रहण काल में मंत्र जाप, महामंत्र ॐ नमः शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र जप शुभऔर अतः प्रभु चिन्तन करते रहें और प्रसन्न रहे।
〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️
*ग्रहण का सूतक लग गया है, सभी अपना ध्यान रखें,*
‼️ देवी दुर्गा के सोलह नाम और उनका अर्थ ‼️
देवी की पूजा सबसे पहले किसने और कहां शुरु की, फिर मनुष्यों में देवी पूजन की परम्परा कैसे शुरु हुई ? जानें, वेद में बताए गए देवी के अत्यंत मंगलकारी नाम ।
देवी दुर्गा परमात्मा श्रीकृष्ण की शक्तिरूपा हैं । वे देवताओं और मनुष्यों द्वारा स्मरण करने पर उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करती हैं और उनके भय और दु:ख का नाश कर देती हैं । इसीलिए सबसे पहले परमात्मा श्रीकृष्ण ने सृष्टि के आदिकाल में गोलोक स्थित वृन्दावन के रासमण्डल में देवी की पूजा की थी ।
दूसरी बार भगवान विष्णु के सो जाने पर मधु और कैटभ से भय होने पर ब्रह्माजी ने उनकी पूजा की। तीसरी बार त्रिपुर दैत्य से युद्ध के समय महादेवजी ने देवी की पूजा की । चौथी बार दुर्वासा के शाप से जब देवराज इन्द्र राजलक्ष्मी से वंचित हो गए तब उन्होंने देवी की आराधना की थी । तब से मुनियों, सिद्धों, देवताओं तथा महर्षियों द्वारा संसार में सब जगह देवी की पूजा होने लगी।
वेद में वर्णित दुर्गा के कल्याणकारी 16 नाम और उनका अर्थ
वेद की कौथुमी शाखा में दुर्गा के सोलह नाम बताये गये हैं जो सबके लिए बहुत ही कल्याणकारी हैं–
दुर्गा, नारायणी, ईशाना, विष्णुमाया, शिवा, सती, नित्या, सत्या, भगवती, सर्वाणी, सर्वमंगला, अम्बिका, वैष्णवी, गौरी, पार्वती और सनातनी।
भगवान विष्णु ने इन सोलह नामों का अर्थ इस प्रकार किया है–
१. दुर्गा–दुर्ग + आ। ‘दुर्ग’ शब्द का अर्थ दैत्य, महाविघ्न, भवबंधन, कर्म, शोक, दु:ख, नरक, यमदण्ड, जन्म, भय और रोग है । ‘आ’ शब्द ‘हन्ता’ का वाचक है। अत: जो देवी इन दैत्य और महाविघ्न आदि का नाश करती हैं, उसे ‘दुर्गा’ कहा गया है।
२. नारायणी–यह दुर्गा यश, तेज, रूप और गुणों में नारायण के समान हैं तथा नारायण की ही शक्ति हैं, इसलिए ‘नारायणी’ कही गयी हैं।
३. ईशाना–ईशान + आ। ‘ईशान’ शब्द सम्पूर्ण सिद्धियों के अर्थ में प्रयोग किया जाता है और ‘आ’ शब्द दाता का वाचक है। अत: वह सम्पूर्ण सिद्धियों को देने वाली ‘ईशाना’ कही जाती हैं।
४. विष्णुमाया–सृष्टि के समय परमात्मा विष्णु ने माया की सृष्टि कर समस्त विश्व को मोहित किया । वह विष्णुशक्ति माया ही ‘विष्णुमाया’ कही गयी हैं।
५. शिवा–शिव + आ। ‘शिव’ शब्द कल्याण का और ‘आ’ शब्द प्रिय और दाता का वाचक है। अत: वह कल्याणस्वरूपा हैं, शिवप्रिया हैं और शिवदायिनी हैं; इसलिए ‘शिवा’ कही गयी हैं।
६. सती–देवी दुर्गा प्रत्येक युग में विद्यमान, पतिव्रता एवं सद्बुद्धि देने वाली हैं। इसलिए उन्हें ‘सती’ कहते हैं ।
७. नित्या–जैसे भगवान नित्य हैं, वैसे ही भगवती भी ‘नित्या’ हैं। प्रलय के समय वे अपनी माया से परमात्मा श्रीकृष्ण में विलीन हो जाती हैं । अत: वे ‘नित्या’ कहलाती हैं ।
८. सत्या–जिस प्रकार भगवान सत्य हैं, उसी तरह देवी दुर्गा सत्यस्वरूपा हैं । इसलिए ‘सत्या’ कही जाती हैं।
९. भगवती–‘भग’ शब्द ऐश्वर्य के अर्थ में प्रयोग होता है, अत: सम्पूर्ण ऐश्वर्य आदि प्रत्येक युग में जिनके अंदर विद्यमान हैं, वे देवी दुर्गा ‘भगवती’ कही गयी हैं।
१०. सर्वाणी–देवी दुर्गा संसार के समस्त प्राणियों को जन्म, मृत्यु, जरा और मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं इसलिए ‘सर्वाणी’ कही जाती हैं।
११. सर्वमंगला–‘मंगल’ शब्द का अर्थ मोक्ष है और ‘आ’ शब्द का अर्थ है दाता। अत: जो मोक्ष प्रदान करती हैं उन्हें ‘सर्वमंगला’ कहते हैं।
१२. अम्बिका–देवी दुर्गा सबके द्वारा पूजित और वन्दित हैं तथा तीनों लोकों की माता हैं, इसलिए ‘अम्बिका’ कहलाती हैं ।
१३. वैष्णवी–देवी श्रीविष्णु की भक्ता, और उनकी शक्ति हैं । सृष्टिकाल में विष्णु के द्वारा ही उनकी सृष्टि हुई है इसलिए उन्हें ‘वैष्णवी’ कहा जाता है ।
१४. गौरी–भगवान शिव सबके गुरु हैं और देवी उनकी प्रिया हैं; इसलिए उनको ‘गौरी’ कहा गया है।
१५. पार्वती–देवी पर्वत गिरिराज हिमालय की पुत्री हैं, पर्वत पर प्रकट हुई हैं और पर्वत की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिए उनहें ‘पार्वती’ कहते हैं।
१६. सनातनी–‘सना’ का अर्थ है सर्वदा और ‘तनी’ का अर्थ है विद्यमान । सब जगह और सब काल में विद्यमान होने से वे देवी ‘सनातनी’ कही गयीं है।
मेरे WhatsApp ग्रुप में शामिल हों. https://chat.whatsapp.com/I9B7WcgQG0cJjgoNtBa4vm?mode=ems_qr_t
देवी की पूजा सबसे पहले किसने और कहां शुरु की, फिर मनुष्यों में देवी पूजन की परम्परा कैसे शुरु हुई ? जानें, वेद में बताए गए देवी के अत्यंत मंगलकारी नाम ।
देवी दुर्गा परमात्मा श्रीकृष्ण की शक्तिरूपा हैं । वे देवताओं और मनुष्यों द्वारा स्मरण करने पर उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करती हैं और उनके भय और दु:ख का नाश कर देती हैं । इसीलिए सबसे पहले परमात्मा श्रीकृष्ण ने सृष्टि के आदिकाल में गोलोक स्थित वृन्दावन के रासमण्डल में देवी की पूजा की थी ।
दूसरी बार भगवान विष्णु के सो जाने पर मधु और कैटभ से भय होने पर ब्रह्माजी ने उनकी पूजा की। तीसरी बार त्रिपुर दैत्य से युद्ध के समय महादेवजी ने देवी की पूजा की । चौथी बार दुर्वासा के शाप से जब देवराज इन्द्र राजलक्ष्मी से वंचित हो गए तब उन्होंने देवी की आराधना की थी । तब से मुनियों, सिद्धों, देवताओं तथा महर्षियों द्वारा संसार में सब जगह देवी की पूजा होने लगी।
वेद में वर्णित दुर्गा के कल्याणकारी 16 नाम और उनका अर्थ
वेद की कौथुमी शाखा में दुर्गा के सोलह नाम बताये गये हैं जो सबके लिए बहुत ही कल्याणकारी हैं–
दुर्गा, नारायणी, ईशाना, विष्णुमाया, शिवा, सती, नित्या, सत्या, भगवती, सर्वाणी, सर्वमंगला, अम्बिका, वैष्णवी, गौरी, पार्वती और सनातनी।
भगवान विष्णु ने इन सोलह नामों का अर्थ इस प्रकार किया है–
१. दुर्गा–दुर्ग + आ। ‘दुर्ग’ शब्द का अर्थ दैत्य, महाविघ्न, भवबंधन, कर्म, शोक, दु:ख, नरक, यमदण्ड, जन्म, भय और रोग है । ‘आ’ शब्द ‘हन्ता’ का वाचक है। अत: जो देवी इन दैत्य और महाविघ्न आदि का नाश करती हैं, उसे ‘दुर्गा’ कहा गया है।
२. नारायणी–यह दुर्गा यश, तेज, रूप और गुणों में नारायण के समान हैं तथा नारायण की ही शक्ति हैं, इसलिए ‘नारायणी’ कही गयी हैं।
३. ईशाना–ईशान + आ। ‘ईशान’ शब्द सम्पूर्ण सिद्धियों के अर्थ में प्रयोग किया जाता है और ‘आ’ शब्द दाता का वाचक है। अत: वह सम्पूर्ण सिद्धियों को देने वाली ‘ईशाना’ कही जाती हैं।
४. विष्णुमाया–सृष्टि के समय परमात्मा विष्णु ने माया की सृष्टि कर समस्त विश्व को मोहित किया । वह विष्णुशक्ति माया ही ‘विष्णुमाया’ कही गयी हैं।
५. शिवा–शिव + आ। ‘शिव’ शब्द कल्याण का और ‘आ’ शब्द प्रिय और दाता का वाचक है। अत: वह कल्याणस्वरूपा हैं, शिवप्रिया हैं और शिवदायिनी हैं; इसलिए ‘शिवा’ कही गयी हैं।
६. सती–देवी दुर्गा प्रत्येक युग में विद्यमान, पतिव्रता एवं सद्बुद्धि देने वाली हैं। इसलिए उन्हें ‘सती’ कहते हैं ।
७. नित्या–जैसे भगवान नित्य हैं, वैसे ही भगवती भी ‘नित्या’ हैं। प्रलय के समय वे अपनी माया से परमात्मा श्रीकृष्ण में विलीन हो जाती हैं । अत: वे ‘नित्या’ कहलाती हैं ।
८. सत्या–जिस प्रकार भगवान सत्य हैं, उसी तरह देवी दुर्गा सत्यस्वरूपा हैं । इसलिए ‘सत्या’ कही जाती हैं।
९. भगवती–‘भग’ शब्द ऐश्वर्य के अर्थ में प्रयोग होता है, अत: सम्पूर्ण ऐश्वर्य आदि प्रत्येक युग में जिनके अंदर विद्यमान हैं, वे देवी दुर्गा ‘भगवती’ कही गयी हैं।
१०. सर्वाणी–देवी दुर्गा संसार के समस्त प्राणियों को जन्म, मृत्यु, जरा और मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं इसलिए ‘सर्वाणी’ कही जाती हैं।
११. सर्वमंगला–‘मंगल’ शब्द का अर्थ मोक्ष है और ‘आ’ शब्द का अर्थ है दाता। अत: जो मोक्ष प्रदान करती हैं उन्हें ‘सर्वमंगला’ कहते हैं।
१२. अम्बिका–देवी दुर्गा सबके द्वारा पूजित और वन्दित हैं तथा तीनों लोकों की माता हैं, इसलिए ‘अम्बिका’ कहलाती हैं ।
१३. वैष्णवी–देवी श्रीविष्णु की भक्ता, और उनकी शक्ति हैं । सृष्टिकाल में विष्णु के द्वारा ही उनकी सृष्टि हुई है इसलिए उन्हें ‘वैष्णवी’ कहा जाता है ।
१४. गौरी–भगवान शिव सबके गुरु हैं और देवी उनकी प्रिया हैं; इसलिए उनको ‘गौरी’ कहा गया है।
१५. पार्वती–देवी पर्वत गिरिराज हिमालय की पुत्री हैं, पर्वत पर प्रकट हुई हैं और पर्वत की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिए उनहें ‘पार्वती’ कहते हैं।
१६. सनातनी–‘सना’ का अर्थ है सर्वदा और ‘तनी’ का अर्थ है विद्यमान । सब जगह और सब काल में विद्यमान होने से वे देवी ‘सनातनी’ कही गयीं है।
मेरे WhatsApp ग्रुप में शामिल हों. https://chat.whatsapp.com/I9B7WcgQG0cJjgoNtBa4vm?mode=ems_qr_t
हर हर महादेव हर
आप कुंडली विश्लेषण करवाना चाहते हैं?
आप कुंडली विश्लेषण करवाना चाहते हैं?
Anonymous Poll
100%
हां
0%
ना
0%
पता नहीं
0%
कुंडली हे ही नहीं