🌸 *नवरात्रि साधना से आत्मा और जीवन का शुद्धिकरण*
नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि *साधना और आत्मशुद्धि का अवसर* है। इन नौ दिनों में व्यक्ति उपवास, जप, ध्यान और संयम से अपने मन और शरीर को अनुशासित करता है। साधना से *नकारात्मक विचार और अशुद्ध भावनाएँ* दूर होती हैं, और भीतर शांति, विश्वास व ऊर्जा का संचार होता है। देवी के नौ रूपों की आराधना से जीवन में *धैर्य, शक्ति, करुणा और विवेक* जैसे गुण विकसित होते हैं। साधना के ये दिन हमें याद दिलाते हैं कि *आंतरिक विजय ही बाहरी सफलता की कुंजी* है।
🌿 *नवरात्रि साधना आत्मिक उन्नति और जीवन संतुलन का माध्यम है*
नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि *साधना और आत्मशुद्धि का अवसर* है। इन नौ दिनों में व्यक्ति उपवास, जप, ध्यान और संयम से अपने मन और शरीर को अनुशासित करता है। साधना से *नकारात्मक विचार और अशुद्ध भावनाएँ* दूर होती हैं, और भीतर शांति, विश्वास व ऊर्जा का संचार होता है। देवी के नौ रूपों की आराधना से जीवन में *धैर्य, शक्ति, करुणा और विवेक* जैसे गुण विकसित होते हैं। साधना के ये दिन हमें याद दिलाते हैं कि *आंतरिक विजय ही बाहरी सफलता की कुंजी* है।
🌿 *नवरात्रि साधना आत्मिक उन्नति और जीवन संतुलन का माध्यम है*
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🌸 *नवरात्रि और स्त्री शक्ति का महत्व*
नवरात्रि केवल देवी की आराधना नहीं, बल्कि *स्त्री शक्ति के सम्मान और पहचान* का पर्व है। यह हमें याद दिलाती है कि सृष्टि का संतुलन तभी संभव है जब स्त्री का योगदान स्वीकारा और सराहा जाए। देवी दुर्गा के नौ रूप जीवन के अलग-अलग पहलुओं में *धैर्य, साहस, करुणा और विवेक* का संदेश देते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि *स्त्री केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की धुरी है*। नवरात्रि मनाकर हम न केवल देवी का पूजन करते हैं, बल्कि स्त्री शक्ति का आदर भी करते हैं।
🌿 *नवरात्रि हमें स्त्री शक्ति के महत्व को जीने की प्रेरणा देती है*
नवरात्रि केवल देवी की आराधना नहीं, बल्कि *स्त्री शक्ति के सम्मान और पहचान* का पर्व है। यह हमें याद दिलाती है कि सृष्टि का संतुलन तभी संभव है जब स्त्री का योगदान स्वीकारा और सराहा जाए। देवी दुर्गा के नौ रूप जीवन के अलग-अलग पहलुओं में *धैर्य, साहस, करुणा और विवेक* का संदेश देते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि *स्त्री केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की धुरी है*। नवरात्रि मनाकर हम न केवल देवी का पूजन करते हैं, बल्कि स्त्री शक्ति का आदर भी करते हैं।
🌿 *नवरात्रि हमें स्त्री शक्ति के महत्व को जीने की प्रेरणा देती है*
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🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक - 24 सितम्बर 2025*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल*
🌤️ *तिथि - तृतीया पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *नक्षत्र - चित्रा शाम 04:16 तक तत्पश्चात स्वाती*
🌤️ *योग - इन्द्र रात्रि 09:03 तक तत्पश्चात वैधृति*
🌤️ *राहुकाल - दोपहर 12:30 से दोपहर 02:01 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:29*
🌤️ *सूर्यास्त - 06:31*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - तृतीया वृद्धि तिथि*
💥 *विशेष - तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं मां चंद्रघंटा*
*नवरात्रि की तृतीया तिथि यानी तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है । इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश किया था। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वत: प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।*
🌷 *रोग, शोक दूर करती हैं मां कूष्मांडा* 🌷
*नवरात्रि की चतुर्थी तिथि की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। देवी कूष्मांडा रोगों को तुरंत नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है। मां दुर्गा के इस चतुर्थ रूप कूष्मांडा ने अपने उदर से अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न किया। इसी वजह से दुर्गा के इस स्वरूप का नाम कूष्मांडा पड़ा।*
🙏🏻 *मां कूष्मांडा के पूजन से हमारे शरीर का अनाहत चक्रजागृत होता है। इनकी उपासना से हमारे समस्त रोग व शोक दूर हो जाते हैं। साथ ही, भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य के साथ-साथ सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख भी प्राप्त होते हैं।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
*तृतीया तिथि यानी की तीसरे दिन को माता दुर्गा को दूध का भोग लगाएं ।इससे दुखों से मुक्ति मिलती है ।*
🙏🏻 *नवरात्रि के चौथे दिन यानी चतुर्थी तिथि को माता दुर्गा को मालपुआ का भोग लगाएं ।इससे समस्याओं का अंत होता है ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *नवरात्रि के दिनों में जप करने का मंत्र* 🌷
👉🏻 *नवरात्रि के दिनों में ' ॐ श्रीं ॐ ' का जप करें ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *विद्यार्थी के लिए* 🌷
🔥 *नवरात्रि के दिनों में खीर की २१ या ५१ आहुति गायत्री मंत्र बोलते हुए दें । इससे विद्यार्थी को बड़ा लाभ होगा।*
📒 *वैदिक पंचांग प्रकाशित स्थल ~ (गुजरात)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻
🌤️ *दिनांक - 24 सितम्बर 2025*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल*
🌤️ *तिथि - तृतीया पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *नक्षत्र - चित्रा शाम 04:16 तक तत्पश्चात स्वाती*
🌤️ *योग - इन्द्र रात्रि 09:03 तक तत्पश्चात वैधृति*
🌤️ *राहुकाल - दोपहर 12:30 से दोपहर 02:01 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:29*
🌤️ *सूर्यास्त - 06:31*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - तृतीया वृद्धि तिथि*
💥 *विशेष - तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं मां चंद्रघंटा*
*नवरात्रि की तृतीया तिथि यानी तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है । इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश किया था। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वत: प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।*
🌷 *रोग, शोक दूर करती हैं मां कूष्मांडा* 🌷
*नवरात्रि की चतुर्थी तिथि की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। देवी कूष्मांडा रोगों को तुरंत नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है। मां दुर्गा के इस चतुर्थ रूप कूष्मांडा ने अपने उदर से अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न किया। इसी वजह से दुर्गा के इस स्वरूप का नाम कूष्मांडा पड़ा।*
🙏🏻 *मां कूष्मांडा के पूजन से हमारे शरीर का अनाहत चक्रजागृत होता है। इनकी उपासना से हमारे समस्त रोग व शोक दूर हो जाते हैं। साथ ही, भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य के साथ-साथ सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख भी प्राप्त होते हैं।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷
*तृतीया तिथि यानी की तीसरे दिन को माता दुर्गा को दूध का भोग लगाएं ।इससे दुखों से मुक्ति मिलती है ।*
🙏🏻 *नवरात्रि के चौथे दिन यानी चतुर्थी तिथि को माता दुर्गा को मालपुआ का भोग लगाएं ।इससे समस्याओं का अंत होता है ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *नवरात्रि के दिनों में जप करने का मंत्र* 🌷
👉🏻 *नवरात्रि के दिनों में ' ॐ श्रीं ॐ ' का जप करें ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *विद्यार्थी के लिए* 🌷
🔥 *नवरात्रि के दिनों में खीर की २१ या ५१ आहुति गायत्री मंत्र बोलते हुए दें । इससे विद्यार्थी को बड़ा लाभ होगा।*
📒 *वैदिक पंचांग प्रकाशित स्थल ~ (गुजरात)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻
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Forwarded from कैलाश के निवासी (Meett Meett)
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📸 श्री कुबेरेश्वर महादेव कुबेर भंडारी करनाली धाम
🌸 प्रातः श्रृंगार दर्शन
🌒 आश्विन शुक्ल तृतीया
🙏 नवरात्रि – विनायक चतुर्थी विशेष
📿 गुरुवार, 25 सितंबर 2025
🔱 कुबेरदादा के दिव्य श्रृंगार दर्शन से जीवन में सुख-समृद्धि और मंगल की प्राप्ति हो 🙏✨
🌸 प्रातः श्रृंगार दर्शन
🌒 आश्विन शुक्ल तृतीया
🙏 नवरात्रि – विनायक चतुर्थी विशेष
📿 गुरुवार, 25 सितंबर 2025
🔱 कुबेरदादा के दिव्य श्रृंगार दर्शन से जीवन में सुख-समृद्धि और मंगल की प्राप्ति हो 🙏✨
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस "रोहिंटन नरीमन" इनके पूर्वज मुसलमानों से प्रताड़ित होकर ईरान से भागकर भारत में शरण लेने आए थे...
"रोहिंटन नरीमन" के पूर्वज ईरान के मूलनिवासी थे फारसी थे...
फिर जब ईरान में आतंकवादी मजहब ईस्लाम आया तब पारसियों पर इतना अत्याचार हुआ कि बहुत से भागकर अन्यत्र चले गए उन्ही में से नरिमन के परिवार व अन्य एक छोटी सी बोट कुछ पारसीयों के साथ बैठकर अपनी पवित्र अग्नि लेकर एक अनजान सफर पर निकल गए...
उन्हें पता ही नहीं था कि हम अनजान सफर पर कहाँ जा रहे हैं...
समुद्र की लहरों ने उनकी नाव को गुजरात के वलसाड जिले के सँजाण तट पर लाकर लगा दिया...
जिनमें कुल 22 पुरुष करीब 20 बच्चे और कुछ पारसी महिलाएं थी...
संजान के राजा अपने राज्य में इन्हें शरण नहीं देना चाहते थे क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि यह लोग किस देश से आए हैं उनकी संस्कृति क्या है
लेकिन राजा ने सीधे मना नहीं कर सकते थे तो उन्होंने इनके मुखिया के पास दूध से भरा हुआ गिलास भेजा
फिर पारसी मुखिया ने उस दूध के गिलास में एक चम्मच चीनी डालकर राजा के पास भेज दिया यानी कि एक चम्मच चीनी डालने से दूध बाहर भी नहीं छलका और वह चीनी उस दूध में घुल मिल गया
यानी पारसी मुखिया ने यह संदेश दिया कि आप हमें इजाजत दीजिए हम यहां घुल मिलकर रहेंगे फिर राजा ने इन्हें न सिर्फ जगह दिया बल्कि उन्हें नवसारी वलसाड में काफी जमीन में भी दिया उसके बाद से पारसी समुदाय भारत में निर्बाध फला फूला
बड़े-बड़े व्यापारिक घराने "बिजनेस हाउस" इनका है टाटा, गोदरेज, वाडिया ये सब पारसी ही है
हिंदुओं ने पारसियों को न सिर्फ पूरी मदद की बल्कि उनको सहयोग भी दिया..
लेकिन इन ज़नाब रोहिंटन नरीमन ने कहा कि मैंने एक बच्चे की इतिहास की किताब देखी तो दंग रह गया...
उस किताब में अकबर को सिर्फ एक क्रूर तानाशाह और बड़े पैमाने पर लोगों को कत्ल कराने वाला बताया गया है। अकबर और मुगल वंश का क्या योगदान है, उसके बारे में सारी चीजें मिटा दी गई हैं। अब इतिहास की किताबों में उनके बारे में कोई जगह नहीं है।
उन्हें ये भी पता होना चाहिए कि ईरान के इतिहास में पारसियों का क्या योगदान रहा है...
और आज मौजूदा ईरान के इतिहास में पारसियों का कोई चैप्टर नहीं है कोई नाम लेवा भी शायद ही कोई है...
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"रोहिंटन नरीमन" के पूर्वज ईरान के मूलनिवासी थे फारसी थे...
फिर जब ईरान में आतंकवादी मजहब ईस्लाम आया तब पारसियों पर इतना अत्याचार हुआ कि बहुत से भागकर अन्यत्र चले गए उन्ही में से नरिमन के परिवार व अन्य एक छोटी सी बोट कुछ पारसीयों के साथ बैठकर अपनी पवित्र अग्नि लेकर एक अनजान सफर पर निकल गए...
उन्हें पता ही नहीं था कि हम अनजान सफर पर कहाँ जा रहे हैं...
समुद्र की लहरों ने उनकी नाव को गुजरात के वलसाड जिले के सँजाण तट पर लाकर लगा दिया...
जिनमें कुल 22 पुरुष करीब 20 बच्चे और कुछ पारसी महिलाएं थी...
संजान के राजा अपने राज्य में इन्हें शरण नहीं देना चाहते थे क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि यह लोग किस देश से आए हैं उनकी संस्कृति क्या है
लेकिन राजा ने सीधे मना नहीं कर सकते थे तो उन्होंने इनके मुखिया के पास दूध से भरा हुआ गिलास भेजा
फिर पारसी मुखिया ने उस दूध के गिलास में एक चम्मच चीनी डालकर राजा के पास भेज दिया यानी कि एक चम्मच चीनी डालने से दूध बाहर भी नहीं छलका और वह चीनी उस दूध में घुल मिल गया
यानी पारसी मुखिया ने यह संदेश दिया कि आप हमें इजाजत दीजिए हम यहां घुल मिलकर रहेंगे फिर राजा ने इन्हें न सिर्फ जगह दिया बल्कि उन्हें नवसारी वलसाड में काफी जमीन में भी दिया उसके बाद से पारसी समुदाय भारत में निर्बाध फला फूला
बड़े-बड़े व्यापारिक घराने "बिजनेस हाउस" इनका है टाटा, गोदरेज, वाडिया ये सब पारसी ही है
हिंदुओं ने पारसियों को न सिर्फ पूरी मदद की बल्कि उनको सहयोग भी दिया..
लेकिन इन ज़नाब रोहिंटन नरीमन ने कहा कि मैंने एक बच्चे की इतिहास की किताब देखी तो दंग रह गया...
उस किताब में अकबर को सिर्फ एक क्रूर तानाशाह और बड़े पैमाने पर लोगों को कत्ल कराने वाला बताया गया है। अकबर और मुगल वंश का क्या योगदान है, उसके बारे में सारी चीजें मिटा दी गई हैं। अब इतिहास की किताबों में उनके बारे में कोई जगह नहीं है।
उन्हें ये भी पता होना चाहिए कि ईरान के इतिहास में पारसियों का क्या योगदान रहा है...
और आज मौजूदा ईरान के इतिहास में पारसियों का कोई चैप्टर नहीं है कोई नाम लेवा भी शायद ही कोई है...
🔴
🚩🐅 शारदीय नवरात्र चतुर्थ दिवस 🐅🙏🏻
👣🐅 *जय माँ कुष्मांडा* 🐅👣
🙏🏻या देवी सर्वभूतेषु कुष्मांडा रुपेण संस्थिता।🌹
🙏🏻 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।🌹
नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कुष्माण्डा की पूजा होती है। माँ के समस्त रूपों की तरह ये अवतार भी अति मनमोहक और सभी सुख प्रदान करने वाला है।
🙏🏻 सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।🌷👣
🙏🏻दधाना हस्तपद्याभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु में।।👣
देवी कुष्मांडा ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदि शक्ति हैं। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। शब्द कुष्माण्डा का संधि विच्छेद कुछ इस प्रकार है- कुसुम का अर्थ है फूलों के समान हंसी (मुस्कान) और आण्ड का अर्थ है ब्रह्माण्ड अर्थात वो देवी जिन्होंने अपनी मंद (फूलों) सी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को अपने गर्भ से उत्पन्न किया है।
इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं।
इनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है।
माँ कुष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी आराधना करने से भक्तों को तेज, ज्ञान, प्रेम, उर्जा, वर्चस्व, आयु, यश, बल, आरोग्य प्राप्त होता है। इनको साधने से भक्तों के सभी प्रकार के रोग, शोक, पीड़ा, व्याधि शारीरिक कष्ट समाप्त होते हैं।
नवरात्र पूजन के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा के पूजन, मंत्र जाप, ध्यान, स्तोत्र, कवच पाठ करने से सूर्य ग्रह से जुड़ी समस्त पीड़ाएं दूर हो जाती है। जिससे समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
🚩माँ का स्वरूप...‼️
देवी कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। ये बाघ की सवारी करती हुई अष्टभुजाधारी मस्तक पर रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट पहने उज्जवल स्वरूप दुर्गा हैं।
🚩ध्यान...‼️
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्।।
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्।।
पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्।
कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ।।
🚩स्तोत्र......
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।।
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।।
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दुरूख शोक निवारिणाम्।
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।।
🚩कवच.......
हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्।।
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा।
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु।।
भगवती कूष्माण्डा का ध्यान, स्तोत्र, कवच का पाठ करने से अनाहत चक्र जाग्रत हो जाता है, जिससे समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं तथा आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
🚩उपासना मंत्र...‼️
सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तुमे।।
या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
🚩अर्थ...‼️
हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कुष्माण्डा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।
प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह मंत्र सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में चतुर्थ दिन यथासम्भव इसका जाप करना चाहिए।
माँ कुष्मांडा आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करें।👏
👣🐅।।जय माँ आदिशक्ति कुष्मांडा।।🐅👣
👣🐅 *जय माँ कुष्मांडा* 🐅👣
🙏🏻या देवी सर्वभूतेषु कुष्मांडा रुपेण संस्थिता।🌹
🙏🏻 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।🌹
नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कुष्माण्डा की पूजा होती है। माँ के समस्त रूपों की तरह ये अवतार भी अति मनमोहक और सभी सुख प्रदान करने वाला है।
🙏🏻 सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।🌷👣
🙏🏻दधाना हस्तपद्याभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु में।।👣
देवी कुष्मांडा ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदि शक्ति हैं। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। शब्द कुष्माण्डा का संधि विच्छेद कुछ इस प्रकार है- कुसुम का अर्थ है फूलों के समान हंसी (मुस्कान) और आण्ड का अर्थ है ब्रह्माण्ड अर्थात वो देवी जिन्होंने अपनी मंद (फूलों) सी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को अपने गर्भ से उत्पन्न किया है।
इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं।
इनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है।
माँ कुष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी आराधना करने से भक्तों को तेज, ज्ञान, प्रेम, उर्जा, वर्चस्व, आयु, यश, बल, आरोग्य प्राप्त होता है। इनको साधने से भक्तों के सभी प्रकार के रोग, शोक, पीड़ा, व्याधि शारीरिक कष्ट समाप्त होते हैं।
नवरात्र पूजन के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा के पूजन, मंत्र जाप, ध्यान, स्तोत्र, कवच पाठ करने से सूर्य ग्रह से जुड़ी समस्त पीड़ाएं दूर हो जाती है। जिससे समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
🚩माँ का स्वरूप...‼️
देवी कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। ये बाघ की सवारी करती हुई अष्टभुजाधारी मस्तक पर रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट पहने उज्जवल स्वरूप दुर्गा हैं।
🚩ध्यान...‼️
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्।।
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्।।
पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्।
कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ।।
🚩स्तोत्र......
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।।
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।।
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दुरूख शोक निवारिणाम्।
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।।
🚩कवच.......
हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्।।
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा।
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु।।
भगवती कूष्माण्डा का ध्यान, स्तोत्र, कवच का पाठ करने से अनाहत चक्र जाग्रत हो जाता है, जिससे समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं तथा आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
🚩उपासना मंत्र...‼️
सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तुमे।।
या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
🚩अर्थ...‼️
हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कुष्माण्डा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।
प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह मंत्र सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में चतुर्थ दिन यथासम्भव इसका जाप करना चाहिए।
माँ कुष्मांडा आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करें।👏
👣🐅।।जय माँ आदिशक्ति कुष्मांडा।।🐅👣
*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞*
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
🙏🙏🙏 शारदीय नवरात्र 🙏🙏🙏
⛳ *तिथि*……( ०३ ) तृतीया ⛳️
🙏 विनायक चतुर्थी 🙏
🌺 मानाचतुर्थी ( उड़ीसा- बंगाल ) 🌺
🍀 भद्रा प्रारंभ रात्रि ०८ः१९ से 🍀
2️⃣5️⃣-0️⃣9️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..गुरुवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..स्वाति 🦚
🪔 *योग*……..वैधृति 🪔
✳️*करण*…….वणिज ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः३० 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः३२ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀
🪷 *मास*.……….आश्विन 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२७🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१ 🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः१२ से १२ः५० तक 🪻
🌚 राहुकाल …..दोपहर ०२ः०१ से ०३ः३१ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल २६-०९-२५ शुक्रवार 🌺🌺
🙏 ललिता पंचमी 🙏
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
🙏🙏🙏 शारदीय नवरात्र 🙏🙏🙏
⛳ *तिथि*……( ०३ ) तृतीया ⛳️
🙏 विनायक चतुर्थी 🙏
🌺 मानाचतुर्थी ( उड़ीसा- बंगाल ) 🌺
🍀 भद्रा प्रारंभ रात्रि ०८ः१९ से 🍀
2️⃣5️⃣-0️⃣9️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..गुरुवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..स्वाति 🦚
🪔 *योग*……..वैधृति 🪔
✳️*करण*…….वणिज ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः३० 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः३२ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀
🪷 *मास*.……….आश्विन 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२७🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१ 🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः१२ से १२ः५० तक 🪻
🌚 राहुकाल …..दोपहर ०२ः०१ से ०३ः३१ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🌺🌺 कल २६-०९-२५ शुक्रवार 🌺🌺
🙏 ललिता पंचमी 🙏
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
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Dr. BR Ambedkar वो व्यक्तित्व हैं जिनकी राजनीतिक पार्टियों ने अपने स्वार्थ के लिए उपयोग किया है और आज भी कर रहे हैं लेकिन कोई इस बात पर बात नहीं करता कि वो व्यक्ति असल जीवन में कैसा था। कोई भी तथ्यो पर बात नहीं करता है और एक आम इंसान को भगवान बना दिया है राजनीति के गलियारो से लेकर सविंधनिक संस्था के उच्च्तम पदो तक Ambedkar को पूजा जाता है! जबकी इनकी भूमिका हर कार्य क्षेत्र में कुछ अधिक रही नहीं लेकिन एक तबके के लोगो को रुजाने के लिए आज भी ये झूठ का झुनझुना बजया जाता है! आख़िर कब तक ?
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