*वनेऽपि दोषाः प्रभवन्ति रागिणां*
*गृहेऽपि पञ्चेन्द्रियनिग्रहस्तपः।*
*अकुत्सिते कर्मणि यः प्रवर्तते*
*निवृत्तरागस्य गृहं तपोवनम्॥*
रागीको वनमें भी दोषोंकी जागृति हो जाती है और घरमें रहकर भी पाँचों इन्द्रियोंका संयम किया जाय तो वह तप ही है। जो निर्दोष कर्ममें प्रवृत्त होता है उस विरक्त पुरुषके लिये घर भी तपोवन ही है।
*गृहेऽपि पञ्चेन्द्रियनिग्रहस्तपः।*
*अकुत्सिते कर्मणि यः प्रवर्तते*
*निवृत्तरागस्य गृहं तपोवनम्॥*
रागीको वनमें भी दोषोंकी जागृति हो जाती है और घरमें रहकर भी पाँचों इन्द्रियोंका संयम किया जाय तो वह तप ही है। जो निर्दोष कर्ममें प्रवृत्त होता है उस विरक्त पुरुषके लिये घर भी तपोवन ही है।
*ऐसी पोस्ट कम ही आती है।*
विश्वका सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र भारतवर्ष ऋषिमुनियों द्वारा किया गया।
अनुसंधानः-
■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग
■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
■ 2 त्रुटि = 1 लव
■ 1 लव = 1 क्षण
■ 30 क्षण = 1 विपल
■ 60 विपल = 1 पल
■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट )
■ 2.5 घड़ी = 1 होरा(घन्टा )
■3 होरा=1 प्रहर व 8 प्रहर 1 दिवस (वार)
■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार)
■ 7 दिवस = 1 सप्ताह
■ 4 सप्ताह = 1 माह
■ 2 माह = 1 ऋतू
■ 6 ऋतू = 1 वर्ष
■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी
■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी
■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग
■ 2 युग = 1 द्वापर युग
■ 3 युग = 1 त्रैता युग
■ 4 युग = सतयुग
■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
■ 72 महायुग = मनवन्तर
■ 1000 महायुग = 1 कल्प
■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
■ महालय = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )
सम्पूर्ण विश्वका सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यहीं है जो हमारे देश भारतमें बना हुआ है ।
*ये हमारा भारत जिस पर सभी देशवासियों को
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव
योगाचार्य प्रशांत सैनी ✍🏻
विश्वका सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र भारतवर्ष ऋषिमुनियों द्वारा किया गया।
अनुसंधानः-
■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग
■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
■ 2 त्रुटि = 1 लव
■ 1 लव = 1 क्षण
■ 30 क्षण = 1 विपल
■ 60 विपल = 1 पल
■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट )
■ 2.5 घड़ी = 1 होरा(घन्टा )
■3 होरा=1 प्रहर व 8 प्रहर 1 दिवस (वार)
■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार)
■ 7 दिवस = 1 सप्ताह
■ 4 सप्ताह = 1 माह
■ 2 माह = 1 ऋतू
■ 6 ऋतू = 1 वर्ष
■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी
■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी
■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग
■ 2 युग = 1 द्वापर युग
■ 3 युग = 1 त्रैता युग
■ 4 युग = सतयुग
■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
■ 72 महायुग = मनवन्तर
■ 1000 महायुग = 1 कल्प
■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
■ महालय = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )
सम्पूर्ण विश्वका सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यहीं है जो हमारे देश भारतमें बना हुआ है ।
*ये हमारा भारत जिस पर सभी देशवासियों को
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यह