Forwarded from कैलाश के निवासी (Meett Meett)
भ्रष्टाचार किस हद्द से बाहर निकल गया है
*कमादा एकादशी व्रत कथा*
श्रीकृष्ण के प्रिय सखा अर्जुन ने कहा - "हे कमलनयन! मैं आपको कोटि-कोटि नमन करता हूँ। हे जगदीश्वर! मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप कृपा कर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी कथा का भी वर्णन सुनाइये। इस एकादशी का क्या नाम है? इस व्रत को पहले किसने किया और इसके करने से किस फल की प्राप्ति होती है?"
श्रीकृष्ण ने कहा - "हे अर्जुन! एक बार यही प्रश्न राजा दिलीप ने गुरु वशिष्ठ से किया था, वह वृत्तान्त मैं तुम्हें सुनाता हूँ। राजा दिलीप ने गुरु वशिष्ठ से पूँछा - 'हे गुरुदेव! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? उसमें किस देवता का पूजन होता है तथा उसका क्या विधान है? वह आप कृपापूर्वक बताइये।'
मुनि वशिष्ठ ने कहा - 'हे राजन! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम कामदा एकादशी है। यह समस्त पापों को नष्ट करने वाली है। जैसे अग्नि काष्ठ को जलाकर राख कर देती है, वैसे ही कामदा एकादशी के पुण्य के प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। इसके उपवास से मनुष्य निकृष्ट योनि से मुक्त हो जाता है और अन्ततः उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। अब मैं इस एकादशी का माहात्म्य सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक श्रवण करो- प्राचीन समय में भागीपुर नामक एक नगर था। जिस पर पुण्डरीक नाम का राजा राज्य करता था। राजा पुण्डरीक अनेक ऐश्वर्यों से युक्त था। उसके राज्य में अनेक अप्सराएँ, गन्धर्व, किन्नर आदि वास करते थे। उसी नगर में ललित और ललिता नाम के गायन विद्या में पारन्गत गन्धर्व स्त्री-पुरुष अति सम्पन्न घर में निवास करते हुए विहार किया करते थे। उन दोनों में इतना प्रेम था कि वे अलग हो जाने की कल्पना मात्र से ही व्यथित हो उठते थे। एक बार राजा पुण्डरीक गन्धर्वों सहित सभा में विराजमान थे। वहाँ गन्धर्वों के साथ ललित भी गायन कर रहा था। उस समय उसकी प्रियतमा ललिता वहाँ उपस्थित नहीं थी। गायन करते-करते अचानक उसे उसका ख्याल आ गया, जिसके कारण वह अशुद्ध गायन करने लगा। नागराज कर्कोटक ने राजा पुण्डरीक से उसकी शिकायत की। इस पर राजा को भयंकर क्रोध आया और उन्होंने क्रोधवश ललित को शाप (श्राप) दे दिया - 'अरे नीच! तू मेरे सम्मुख गायन करते हुए भी अपनी स्त्री का स्मरण कर रहा है, इससे तू नरभक्षी दैत्य बनकर अपने कर्म का फल भोग।'
ललित गन्धर्व उसी समय राजा पुण्डरीक के शाप (श्राप) से एक भयंकर दैत्य में बदल गया। उसका मुख विकराल हो गया। उसके नेत्र सूर्य, चन्द्र के समान प्रदीप्त होने लगे। मुँह से आग की भयंकर ज्वालाएँ निकलने लगीं, उसकी नाक पर्वत की कन्दरा के समान विशाल हो गई और गर्दन पहाड़ के समान दिखायी देने लगी। उसकी भुजाएँ दो-दो योजन लम्बी हो गईं। इस प्रकार उसका शरीर आठ योजन का हो गया। इस तरह राक्षस बन जाने पर वह अनेक दुःख भोगने लगा। अपने प्रियतम ललित का ऐसा हाल होने पर ललिता अथाह दुःख से व्यथित हो उठी। वह अपने पति के उद्धार के लिए विचार करने लगी कि मैं कहाँ जाऊँ और क्या करूँ? किस जतन से अपने पति को इस नरक तुल्य कष्ट से मुक्त कराऊँ?
राक्षस बना ललित घोर वनों में रहते हुए अनेक प्रकार के पाप करने लगा। उसकी स्त्री ललिता भी उसके पीछे-पीछे जाती और उसकी हालत देखकर विलाप करने लगती।
एक बार वह अपने पति के पीछे-पीछे चलते हुए विन्ध्याचल पर्वत पर पहुँच गई। उस स्थान पर उसने श्रृंगी मुनि का आश्रम देखा। वह शीघ्रता से उस आश्रम में गई और मुनि के सामने पहुँचकर दण्डवत् प्रणाम कर विनीत भाव से प्रार्थना करने लगी - 'हे महर्षि! मैं वीरधन्वा नामक गन्धर्व की पुत्री ललिता हूँ, मेरा पति राजा पुण्डरीक के शाप (श्राप) से एक भयंकर दैत्य बन गया है। उससे मुझे अपार दुःख हो रहा है। अपने पति के कष्ट के कारण मैं बहुत दुखी हूँ। हे मुनिश्रेष्ठ! कृपा करके आप उसे राक्षस योनि से मुक्ति का कोई उत्तम उपाय बताएँ।'
समस्त वृत्तान्त सुनकर मुनि श्रृंगी ने कहा - 'हे पुत्री! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम कामदा एकादशी है। उसके व्रत करने से प्राणी के सभी मनोरथ शीघ्र ही पूर्ण हो जाते हैं।
यदि तू उसके व्रत के पुण्य को अपने पति को देगी तो वह सहज ही राक्षस योनि से मुक्त हो जाएगा और राजा का शाप (श्राप) शान्त हो जाएगा।'
ऋषि के कहे अनुसार ललिता ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और द्वादशी के दिन ब्राह्मणों के समक्ष अपने व्रत का फल अपने पति को दे दिया और ईश्वर से प्रार्थना करने लगी - 'हे प्रभु! मैंने जो यह उपवास किया है, उसका फल मेरे पतिदेव को मिले, जिससे उनकी राक्षस योनि से शीघ्र ही मुक्ति हो।'
एकादशी का फल देते ही उसका पति राक्षस योनि से मुक्त हो गया और अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त हुआ। वह अनेक सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलंकृत होकर पहले की भाँति ललिता के साथ विहार करने लगा।
श्रीकृष्ण के प्रिय सखा अर्जुन ने कहा - "हे कमलनयन! मैं आपको कोटि-कोटि नमन करता हूँ। हे जगदीश्वर! मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप कृपा कर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी कथा का भी वर्णन सुनाइये। इस एकादशी का क्या नाम है? इस व्रत को पहले किसने किया और इसके करने से किस फल की प्राप्ति होती है?"
श्रीकृष्ण ने कहा - "हे अर्जुन! एक बार यही प्रश्न राजा दिलीप ने गुरु वशिष्ठ से किया था, वह वृत्तान्त मैं तुम्हें सुनाता हूँ। राजा दिलीप ने गुरु वशिष्ठ से पूँछा - 'हे गुरुदेव! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? उसमें किस देवता का पूजन होता है तथा उसका क्या विधान है? वह आप कृपापूर्वक बताइये।'
मुनि वशिष्ठ ने कहा - 'हे राजन! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम कामदा एकादशी है। यह समस्त पापों को नष्ट करने वाली है। जैसे अग्नि काष्ठ को जलाकर राख कर देती है, वैसे ही कामदा एकादशी के पुण्य के प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। इसके उपवास से मनुष्य निकृष्ट योनि से मुक्त हो जाता है और अन्ततः उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। अब मैं इस एकादशी का माहात्म्य सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक श्रवण करो- प्राचीन समय में भागीपुर नामक एक नगर था। जिस पर पुण्डरीक नाम का राजा राज्य करता था। राजा पुण्डरीक अनेक ऐश्वर्यों से युक्त था। उसके राज्य में अनेक अप्सराएँ, गन्धर्व, किन्नर आदि वास करते थे। उसी नगर में ललित और ललिता नाम के गायन विद्या में पारन्गत गन्धर्व स्त्री-पुरुष अति सम्पन्न घर में निवास करते हुए विहार किया करते थे। उन दोनों में इतना प्रेम था कि वे अलग हो जाने की कल्पना मात्र से ही व्यथित हो उठते थे। एक बार राजा पुण्डरीक गन्धर्वों सहित सभा में विराजमान थे। वहाँ गन्धर्वों के साथ ललित भी गायन कर रहा था। उस समय उसकी प्रियतमा ललिता वहाँ उपस्थित नहीं थी। गायन करते-करते अचानक उसे उसका ख्याल आ गया, जिसके कारण वह अशुद्ध गायन करने लगा। नागराज कर्कोटक ने राजा पुण्डरीक से उसकी शिकायत की। इस पर राजा को भयंकर क्रोध आया और उन्होंने क्रोधवश ललित को शाप (श्राप) दे दिया - 'अरे नीच! तू मेरे सम्मुख गायन करते हुए भी अपनी स्त्री का स्मरण कर रहा है, इससे तू नरभक्षी दैत्य बनकर अपने कर्म का फल भोग।'
ललित गन्धर्व उसी समय राजा पुण्डरीक के शाप (श्राप) से एक भयंकर दैत्य में बदल गया। उसका मुख विकराल हो गया। उसके नेत्र सूर्य, चन्द्र के समान प्रदीप्त होने लगे। मुँह से आग की भयंकर ज्वालाएँ निकलने लगीं, उसकी नाक पर्वत की कन्दरा के समान विशाल हो गई और गर्दन पहाड़ के समान दिखायी देने लगी। उसकी भुजाएँ दो-दो योजन लम्बी हो गईं। इस प्रकार उसका शरीर आठ योजन का हो गया। इस तरह राक्षस बन जाने पर वह अनेक दुःख भोगने लगा। अपने प्रियतम ललित का ऐसा हाल होने पर ललिता अथाह दुःख से व्यथित हो उठी। वह अपने पति के उद्धार के लिए विचार करने लगी कि मैं कहाँ जाऊँ और क्या करूँ? किस जतन से अपने पति को इस नरक तुल्य कष्ट से मुक्त कराऊँ?
राक्षस बना ललित घोर वनों में रहते हुए अनेक प्रकार के पाप करने लगा। उसकी स्त्री ललिता भी उसके पीछे-पीछे जाती और उसकी हालत देखकर विलाप करने लगती।
एक बार वह अपने पति के पीछे-पीछे चलते हुए विन्ध्याचल पर्वत पर पहुँच गई। उस स्थान पर उसने श्रृंगी मुनि का आश्रम देखा। वह शीघ्रता से उस आश्रम में गई और मुनि के सामने पहुँचकर दण्डवत् प्रणाम कर विनीत भाव से प्रार्थना करने लगी - 'हे महर्षि! मैं वीरधन्वा नामक गन्धर्व की पुत्री ललिता हूँ, मेरा पति राजा पुण्डरीक के शाप (श्राप) से एक भयंकर दैत्य बन गया है। उससे मुझे अपार दुःख हो रहा है। अपने पति के कष्ट के कारण मैं बहुत दुखी हूँ। हे मुनिश्रेष्ठ! कृपा करके आप उसे राक्षस योनि से मुक्ति का कोई उत्तम उपाय बताएँ।'
समस्त वृत्तान्त सुनकर मुनि श्रृंगी ने कहा - 'हे पुत्री! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम कामदा एकादशी है। उसके व्रत करने से प्राणी के सभी मनोरथ शीघ्र ही पूर्ण हो जाते हैं।
यदि तू उसके व्रत के पुण्य को अपने पति को देगी तो वह सहज ही राक्षस योनि से मुक्त हो जाएगा और राजा का शाप (श्राप) शान्त हो जाएगा।'
ऋषि के कहे अनुसार ललिता ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और द्वादशी के दिन ब्राह्मणों के समक्ष अपने व्रत का फल अपने पति को दे दिया और ईश्वर से प्रार्थना करने लगी - 'हे प्रभु! मैंने जो यह उपवास किया है, उसका फल मेरे पतिदेव को मिले, जिससे उनकी राक्षस योनि से शीघ्र ही मुक्ति हो।'
एकादशी का फल देते ही उसका पति राक्षस योनि से मुक्त हो गया और अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त हुआ। वह अनेक सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलंकृत होकर पहले की भाँति ललिता के साथ विहार करने लगा।
कामदा एकादशी के प्रभाव से वह पहले की भाँति सुन्दर हो गया और मृत्यु के बाद दोनों पुष्पक विमान पर बैठकर विष्णुलोक को चले गये।
हे अर्जुन! इस उपवास को विधानपूर्वक करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत के पुण्य से मनुष्य ब्रह्महत्यादि के पाप और राक्षस आदि योनि से मुक्त हो जाते हैं। संसार में इससे उत्तम दूसरा कोई व्रत नहीं है। इसकी कथा व माहात्म्य के श्रवण व पठन से अनन्त फलों की प्राप्ति होती है।
कथा-सार
प्राणी अपने सुखों का चिन्तन करे, यह बुरा नहीं है, किन्तु समय-असमय ऐसा चिन्तन प्राणी को उसके दायित्वों से विमुख कर देता है, जिससे उसे भयंकर कष्ट भोगने पड़ते हैं। गन्धर्व ललित ने भी राक्षस होकर निन्दित कर्म किये और कष्ट भोगे, परन्तु भगवान श्रीहरि की अनुकम्पा का कोई अन्त नहीं है।
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी ✍🏻
🙏🏻🚩🙏🏻
हे अर्जुन! इस उपवास को विधानपूर्वक करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत के पुण्य से मनुष्य ब्रह्महत्यादि के पाप और राक्षस आदि योनि से मुक्त हो जाते हैं। संसार में इससे उत्तम दूसरा कोई व्रत नहीं है। इसकी कथा व माहात्म्य के श्रवण व पठन से अनन्त फलों की प्राप्ति होती है।
कथा-सार
प्राणी अपने सुखों का चिन्तन करे, यह बुरा नहीं है, किन्तु समय-असमय ऐसा चिन्तन प्राणी को उसके दायित्वों से विमुख कर देता है, जिससे उसे भयंकर कष्ट भोगने पड़ते हैं। गन्धर्व ललित ने भी राक्षस होकर निन्दित कर्म किये और कष्ट भोगे, परन्तु भगवान श्रीहरि की अनुकम्पा का कोई अन्त नहीं है।
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी ✍🏻
🙏🏻🚩🙏🏻
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 08 अप्रैल 2026*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत - 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत - 1948*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - वसंत ऋतु*
🌤️ *मास - वैशाख (गुजरात- महाराष्ट्र अनुसार चैत्र)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - षष्ठी शाम 07:01 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र - मूल पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग - वरीयान शाम 05:11 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️*राहुकाल - दोपहर 12:41 से दोपहर 02:14 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:27*
🌤️ *सूर्यास्त - 06:54*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - पूज्य बापूजी का अवतरण दिवस अर्थात विश्व सेवा-सत्संग दिवस*
💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *पेशाब में जलन होती हो तो* 🌷
👉🏻 *कपड़े को गीला करके नाभि पर रखे तो पेशाब में और पेशाब की जगह होनेवाली जलन शीघ्र ही कम हो जायेगी |*
🙏🏻
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *वास्तु शास्त्र* 🌷
🏡 *एक घर में होना चाहिए एक मंदिर*
*एक घर में अलग-अलग पूजाघर बनवाने की बजाए मिल- जुलकर एक मंदिर बनवाए। एक घर में कई मंदिर होने पर वहां के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *घर में बरकत नहीं हो तो* 🌷
💵 *घर में बरकत नहीं होती तो खडी हल्दी की सात गाँठे और खड़ा नमक कपडे में बांध लें और कटोरी में रख दें घर के किसी भी कोने में, बरकत होगी |*
🙏🏻
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🌷🙏🏻🌹जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 8 अप्रैल
दिनांक 8 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 8, 17, 26
शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44
शुभ वर्ष : 2042
ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता
शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे।
सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे,
सेहत: स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा।
🌹 आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 08 अप्रैल 2026*
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन मानसिक रूप से शांति वाला रहेगा। धर्म-कर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित होने के अवसर मिलेंगे। कार्य व्यवसाय में भी आज गति आएगी। आर्थिक कामनाये अधूरी रहने पर भी खुश रहने का सफल प्रयास करेंगे। परिजनों से भावनात्मक सम्बन्ध रहने से मन को शान्ति मिलेगी। परन्तु आज प्रेम प्रसंगों से दूरी बनाना ही बेहतर रहेगा अन्यथा धन और पारिवारिक मान हानि हो सकती है। किसी मांगलिक आयोजन में जाने के कारण अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा फिर भी आनंददायक वातावरण मिलने से खर्च व्यर्थ नहीं लगेगा। स्त्री पक्ष से विशेष निकटता रहेगी।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन भी आप सभी कार्यो को मन के अनुसार कर सकेंगे। धन संबंधित परेशानी आज नही रहेगी। दिन आपकी मनोकामनाओ की पूर्ति कराने वाला रहेगा। दिन भर मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहेंगे। झगड़ो को टालने के लिए छोटी-मोटी बातों को अनदेखा करें। कार्य क्षेत्र पर परिश्रम के अनुसार लाभ मिलेने से संतोष रहेगा। नए कार्यो में निवेश कर सकते है। पैतृक संपत्ति के मामलो में उलझने रहेंगी परन्तु पारिवारिक सदस्यों में आपसी सामंजस्य बना रहेगा। किसी से बहस ना करें।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज आप जिस भी कार्य को करने का मन बनाएंगे उसकी सफलता के प्रति आशंकित रहंगे लेकिन आज आत्मविश्वास बड़ा रहने से थोड़े से परिश्रम से सफलता पा लेंगे। आज आप आत्मनिर्भर होकर कार्य करना ज्यादा पसंद करेंगे किसी का दखल देना अखरेगा। बहुप्रतीक्षित अतिमहत्त्वपूर्ण कार्य पूरा होगा। धन लाभ रुक-रुक कर होता रहेगा। घर में सुख के साधनों की खरीददारी की योजना बनेगी। नए सम्बन्ध बनने से अतिरिक्त आय के मार्ग भी खुलेंगे। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति से आज पीछे नहीं
🌤️ *दिनांक - 08 अप्रैल 2026*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत - 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत - 1948*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - वसंत ऋतु*
🌤️ *मास - वैशाख (गुजरात- महाराष्ट्र अनुसार चैत्र)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - षष्ठी शाम 07:01 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र - मूल पूर्ण रात्रि तक*
🌤️ *योग - वरीयान शाम 05:11 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️*राहुकाल - दोपहर 12:41 से दोपहर 02:14 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:27*
🌤️ *सूर्यास्त - 06:54*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - पूज्य बापूजी का अवतरण दिवस अर्थात विश्व सेवा-सत्संग दिवस*
💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *पेशाब में जलन होती हो तो* 🌷
👉🏻 *कपड़े को गीला करके नाभि पर रखे तो पेशाब में और पेशाब की जगह होनेवाली जलन शीघ्र ही कम हो जायेगी |*
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🌷 *वास्तु शास्त्र* 🌷
🏡 *एक घर में होना चाहिए एक मंदिर*
*एक घर में अलग-अलग पूजाघर बनवाने की बजाए मिल- जुलकर एक मंदिर बनवाए। एक घर में कई मंदिर होने पर वहां के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *घर में बरकत नहीं हो तो* 🌷
💵 *घर में बरकत नहीं होती तो खडी हल्दी की सात गाँठे और खड़ा नमक कपडे में बांध लें और कटोरी में रख दें घर के किसी भी कोने में, बरकत होगी |*
🙏🏻
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🌷🙏🏻🌹जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष 🌹
आपका जन्मदिन: 8 अप्रैल
दिनांक 8 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है।
आपके लिए खास
शुभ दिनांक : 8, 17, 26
शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44
शुभ वर्ष : 2042
ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता
शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी
आपकी जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल
करियर: व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे।
सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे,
सेहत: स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा।
🌹 आज का राशिफल 🌹
*दिनांक : 08 अप्रैल 2026*
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन मानसिक रूप से शांति वाला रहेगा। धर्म-कर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित होने के अवसर मिलेंगे। कार्य व्यवसाय में भी आज गति आएगी। आर्थिक कामनाये अधूरी रहने पर भी खुश रहने का सफल प्रयास करेंगे। परिजनों से भावनात्मक सम्बन्ध रहने से मन को शान्ति मिलेगी। परन्तु आज प्रेम प्रसंगों से दूरी बनाना ही बेहतर रहेगा अन्यथा धन और पारिवारिक मान हानि हो सकती है। किसी मांगलिक आयोजन में जाने के कारण अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा फिर भी आनंददायक वातावरण मिलने से खर्च व्यर्थ नहीं लगेगा। स्त्री पक्ष से विशेष निकटता रहेगी।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन भी आप सभी कार्यो को मन के अनुसार कर सकेंगे। धन संबंधित परेशानी आज नही रहेगी। दिन आपकी मनोकामनाओ की पूर्ति कराने वाला रहेगा। दिन भर मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहेंगे। झगड़ो को टालने के लिए छोटी-मोटी बातों को अनदेखा करें। कार्य क्षेत्र पर परिश्रम के अनुसार लाभ मिलेने से संतोष रहेगा। नए कार्यो में निवेश कर सकते है। पैतृक संपत्ति के मामलो में उलझने रहेंगी परन्तु पारिवारिक सदस्यों में आपसी सामंजस्य बना रहेगा। किसी से बहस ना करें।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज आप जिस भी कार्य को करने का मन बनाएंगे उसकी सफलता के प्रति आशंकित रहंगे लेकिन आज आत्मविश्वास बड़ा रहने से थोड़े से परिश्रम से सफलता पा लेंगे। आज आप आत्मनिर्भर होकर कार्य करना ज्यादा पसंद करेंगे किसी का दखल देना अखरेगा। बहुप्रतीक्षित अतिमहत्त्वपूर्ण कार्य पूरा होगा। धन लाभ रुक-रुक कर होता रहेगा। घर में सुख के साधनों की खरीददारी की योजना बनेगी। नए सम्बन्ध बनने से अतिरिक्त आय के मार्ग भी खुलेंगे। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति से आज पीछे नहीं
हटेंगे।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
लाभ की स्थिति आज भी यथावत बनी रहेगी लेकिन आज आप कार्यो के प्रति ज्यादा गंभीर नही रहेंगे व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा रहने पर भी धन की आमद आवश्यकता अनुसार हो जाएगी। आज व्यवसाय में जोखिम लेने से ना डरे धन प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ेंगी। परन्तु नौकरी पेशा जातक अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें। धर्म-कर्म पर खर्च होगा। व्यावसायिक यात्रा से भी धन लाभ होने की सम्भवना है यात्रा में सतर्क भी रहें। पैतृक संपत्ति सम्बंधित कार्य आज भी अधूरे रहने से हताश होंगे। सरकारी कार्य में समय एवं धन व्यर्थ होगा। परिजनों की भावना समझने का प्रयास करें।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज भी आपकी बौद्धिक क्षमता अन्य लोगो पर प्रभाव डालने वाली रहेगी लेकिन आज आर्थिक अथवा पारिवारिक कारणों से किसी की सहायता ना चाहकर भी लेनी ही पड़ेगी। व्यवसाय से आशा अधिक रहेगी परन्तु निष्कर्ष उम्मीद के अनुसार नही होगा। आप कार्यो की भरमार रहने के कारण भ्रमित हो सकते है। परिश्रम का उचित फल नहीं मिलेगा दोपहर तक कार्यो में व्यवधान आने से निराश रहेंगे परन्तु संध्या के समय किसी परिचित के सहयोग से लाभ होने से खर्च निकल जाएंगे। सरकारी कार्य टालें। परिवार के प्रति अधिक भावनात्मक बनेंगे। आध्यात्म में रूचि होने पर भी समय नहीं दे पाएंगे। व्यसनों से दूर रहें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आपको आज का दिन भी धैर्य से बिताने की सलाह है। घर एवं बाहर ना चाहकर भी कलह के प्रसंग बनेंगे। स्वभाव में आज चतुराई अधिक रहेगी हर किसी को स्वार्थ सिद्धि की भावना से देखने के कारण व्यवहारिकता में कमी आएगी।
दिनचर्या अस्तव्यस्त रहने से मनोकामना अधूरी रह सकती है। कार्य क्षेत्र पर किसी से ना उलझे पद एवं प्रतिष्ठा की हानि हो सकती है। सांसारिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के कारण स्वयं की अनदेखी करनी पड़ेगी परन्तु इसके बदले धन लाभ होने से संतोष रहेगा। धर्म-कर्म में अधिक रुचि रहेगी धार्मिक कार्यक्रमो में उपस्थिति देंगे। घर के बुजुर्गो से नए अनुभव मिलेंगे। पत्नी संतान का सुख मिलेगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिये सभी कार्यो में सुअवसर दिलाएगा इसका लाभ उठाएं किसी परिजन के कारण मानसिक अशांति बनेगी फिर भी कार्य क्षेत्र पर घर की समस्याओं को ना लाये संध्या बाद स्थिति बदलने से कार्यो में बाधा आने लगेगी। आज के दिन आकस्मिक घटनाएं अधिक घटित होंगी चाहे वो आर्थिक या पारिवारिक हों। नौकरी पेशा जातको को भी मेहनत का फल मिलेगा सम्मान में वृद्धि के साथ आय के नवीन मार्ग खुलेंगे। बेरोजगारों को थोड़ा प्रयास करने पर रोजगार उपलब्ध हो सकता है। खर्च भी अचानक होने से थोड़ी असहजता रहेगी। सरकार से सहयोग मिल सकता है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन अधिक परिश्रम वाला रहेगा इसके अनुपात में उचित लाभ भी होने से संतोष में रहेंगे परन्तु धन लाभ के लिये प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। कार्यो को लेकर पहले थोड़ा आशंकित रहेंगे परन्तु एक बार सफलता मिलने पर यही क्रम दिन भर बना रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन बेहद खास रहेगा परन्तु उधार के व्यहार आज ना ही करें तो बेहतर रहेगा। नौकरी पेशा जातक आज भी व्यस्तता के चलते घर में आलोचना का शिकार बनेंगे। सामाजिक स्तर पर आपकी छवि निखरेगी। स्वास्थ्य थोड़ा नरम गरम रहेगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन पिछले दिनों की अपेक्षा बेहतर रूप से व्यतीत करेंगे। व्यवसाय से कम समय मे ज्यादा मुनाफा पा सकेंगे वही सार्वजिनक क्षेत्र पर भी सम्मान के अधिकारी बनेंगे। घर एवं बाहर अनुकूल वातावरण मिलने से मनचाहा कार्य करने में सुविधा रहेगी। धार्मिक गतिविधयों में जाने से मानसिक शांति मिलेगी। विदेश से आनंद दायक समाचार अथवा विदेश जाने में आ रही बाधा शांत होने से राहत मिलेगी। घर में सुख के साधनो की खरीददारी पर खर्च करेंगे। आर्थिक रूप से भी आज का दिन शुभ रहेगा कार्य व्यवसाय में मध्यान तक कोटा पूरा कर लेंगे। संध्या का समय परिवार के साथ बितायेंगे।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन भी आपके लिये संघर्ष पूर्ण रहेगा। प्रातः काल से ही दिनचार्य अस्त-व्यस्त बनेगी जिसके संध्या तक ऐसे ही बने रहने से आर्थिक एवं पारिवारिक समस्या यथावत रहेगा। प्रातः काल से ही आँख में जलन अथवा अंगों में दर्द रहने से निष्क्रियता रहेगी। कार्यो में उत्साहहीनता रहने के कारण पूर्व निर्धारित योजनाएं टालनी पड़ सकती है। व्यवसायिक स्थल पर प्रतिस्पर्धा के कारण टकराव की स्थिति बनेगी। आज के दिन शालीनता के साथ व्यवहार करना फायदेमंद रहेगा। अधिक क्रोध एवं ईर्ष्या की प्रवृति धन के साथ आपसी व्यवहार बिगाड़ेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
लाभ की स्थिति आज भी यथावत बनी रहेगी लेकिन आज आप कार्यो के प्रति ज्यादा गंभीर नही रहेंगे व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा रहने पर भी धन की आमद आवश्यकता अनुसार हो जाएगी। आज व्यवसाय में जोखिम लेने से ना डरे धन प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ेंगी। परन्तु नौकरी पेशा जातक अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें। धर्म-कर्म पर खर्च होगा। व्यावसायिक यात्रा से भी धन लाभ होने की सम्भवना है यात्रा में सतर्क भी रहें। पैतृक संपत्ति सम्बंधित कार्य आज भी अधूरे रहने से हताश होंगे। सरकारी कार्य में समय एवं धन व्यर्थ होगा। परिजनों की भावना समझने का प्रयास करें।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज भी आपकी बौद्धिक क्षमता अन्य लोगो पर प्रभाव डालने वाली रहेगी लेकिन आज आर्थिक अथवा पारिवारिक कारणों से किसी की सहायता ना चाहकर भी लेनी ही पड़ेगी। व्यवसाय से आशा अधिक रहेगी परन्तु निष्कर्ष उम्मीद के अनुसार नही होगा। आप कार्यो की भरमार रहने के कारण भ्रमित हो सकते है। परिश्रम का उचित फल नहीं मिलेगा दोपहर तक कार्यो में व्यवधान आने से निराश रहेंगे परन्तु संध्या के समय किसी परिचित के सहयोग से लाभ होने से खर्च निकल जाएंगे। सरकारी कार्य टालें। परिवार के प्रति अधिक भावनात्मक बनेंगे। आध्यात्म में रूचि होने पर भी समय नहीं दे पाएंगे। व्यसनों से दूर रहें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आपको आज का दिन भी धैर्य से बिताने की सलाह है। घर एवं बाहर ना चाहकर भी कलह के प्रसंग बनेंगे। स्वभाव में आज चतुराई अधिक रहेगी हर किसी को स्वार्थ सिद्धि की भावना से देखने के कारण व्यवहारिकता में कमी आएगी।
दिनचर्या अस्तव्यस्त रहने से मनोकामना अधूरी रह सकती है। कार्य क्षेत्र पर किसी से ना उलझे पद एवं प्रतिष्ठा की हानि हो सकती है। सांसारिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के कारण स्वयं की अनदेखी करनी पड़ेगी परन्तु इसके बदले धन लाभ होने से संतोष रहेगा। धर्म-कर्म में अधिक रुचि रहेगी धार्मिक कार्यक्रमो में उपस्थिति देंगे। घर के बुजुर्गो से नए अनुभव मिलेंगे। पत्नी संतान का सुख मिलेगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिये सभी कार्यो में सुअवसर दिलाएगा इसका लाभ उठाएं किसी परिजन के कारण मानसिक अशांति बनेगी फिर भी कार्य क्षेत्र पर घर की समस्याओं को ना लाये संध्या बाद स्थिति बदलने से कार्यो में बाधा आने लगेगी। आज के दिन आकस्मिक घटनाएं अधिक घटित होंगी चाहे वो आर्थिक या पारिवारिक हों। नौकरी पेशा जातको को भी मेहनत का फल मिलेगा सम्मान में वृद्धि के साथ आय के नवीन मार्ग खुलेंगे। बेरोजगारों को थोड़ा प्रयास करने पर रोजगार उपलब्ध हो सकता है। खर्च भी अचानक होने से थोड़ी असहजता रहेगी। सरकार से सहयोग मिल सकता है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन अधिक परिश्रम वाला रहेगा इसके अनुपात में उचित लाभ भी होने से संतोष में रहेंगे परन्तु धन लाभ के लिये प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। कार्यो को लेकर पहले थोड़ा आशंकित रहेंगे परन्तु एक बार सफलता मिलने पर यही क्रम दिन भर बना रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन बेहद खास रहेगा परन्तु उधार के व्यहार आज ना ही करें तो बेहतर रहेगा। नौकरी पेशा जातक आज भी व्यस्तता के चलते घर में आलोचना का शिकार बनेंगे। सामाजिक स्तर पर आपकी छवि निखरेगी। स्वास्थ्य थोड़ा नरम गरम रहेगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन पिछले दिनों की अपेक्षा बेहतर रूप से व्यतीत करेंगे। व्यवसाय से कम समय मे ज्यादा मुनाफा पा सकेंगे वही सार्वजिनक क्षेत्र पर भी सम्मान के अधिकारी बनेंगे। घर एवं बाहर अनुकूल वातावरण मिलने से मनचाहा कार्य करने में सुविधा रहेगी। धार्मिक गतिविधयों में जाने से मानसिक शांति मिलेगी। विदेश से आनंद दायक समाचार अथवा विदेश जाने में आ रही बाधा शांत होने से राहत मिलेगी। घर में सुख के साधनो की खरीददारी पर खर्च करेंगे। आर्थिक रूप से भी आज का दिन शुभ रहेगा कार्य व्यवसाय में मध्यान तक कोटा पूरा कर लेंगे। संध्या का समय परिवार के साथ बितायेंगे।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन भी आपके लिये संघर्ष पूर्ण रहेगा। प्रातः काल से ही दिनचार्य अस्त-व्यस्त बनेगी जिसके संध्या तक ऐसे ही बने रहने से आर्थिक एवं पारिवारिक समस्या यथावत रहेगा। प्रातः काल से ही आँख में जलन अथवा अंगों में दर्द रहने से निष्क्रियता रहेगी। कार्यो में उत्साहहीनता रहने के कारण पूर्व निर्धारित योजनाएं टालनी पड़ सकती है। व्यवसायिक स्थल पर प्रतिस्पर्धा के कारण टकराव की स्थिति बनेगी। आज के दिन शालीनता के साथ व्यवहार करना फायदेमंद रहेगा। अधिक क्रोध एवं ईर्ष्या की प्रवृति धन के साथ आपसी व्यवहार बिगाड़ेगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन भी स्थिति आपके पक्ष में ही रहेगी लेकिन आज आपका सनकी मिजाज लाभ में विलंब करेगा। परिजनों की सही बात को गलत सिद्ध करने पर झगड़ा हो सकता है कुछ देर में ही शांति स्थापित हो जाएगी। सामाजिक क्षेत्र पर पूर्व में किये गए कार्यो से सम्मान मिलेगा। समाज के सम्मानित व्यक्तियों के साथ उठना-बैठना होगा। पौराणीक धार्मिक क्षेत्रो के दर्शन की लालसा रहेगी शीघ्र ही इसके फलीभूत होने की सम्भवना है। दानपुण्य पर खर्च करेंगे। संध्या के समय मानसिक शान्ति के लिए मित्र-परिजनों के साथ बाहर घूमने की योजना बनाएंगे। परिवार में शांति रहेगी
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आपको अवश्य कुछ ना कुछ लाभ देकर ही जायेगा। दिन के आरंभ से मध्यान बाद तक कार्यो को गंभीर होकर करेंगे इसके बाद का समय मौज-मस्ती में बीतेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन पिछले कुछ दिनों से बेहतर रहेगा। कार्य क्षेत्र से अतिरिक्त आय होगी। रुके हुए कार्य पूर्ण होने से भी धन के स्त्रोत्र बढ़ेंगे। सामाजिक गतिविधियों में पूरा समय नही दे सकेंगे। आवश्यक कार्य दिन रहते पूर्ण करलें इसके बाद जारी हानि के योग बन रहे है। पर्यटन पार्टी की योजना बनाई जाएगी। उत्तम भोजन के साथ गृहस्थ का सुख मिलेगा। परिजनों के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी ✍🏻
आज के दिन भी स्थिति आपके पक्ष में ही रहेगी लेकिन आज आपका सनकी मिजाज लाभ में विलंब करेगा। परिजनों की सही बात को गलत सिद्ध करने पर झगड़ा हो सकता है कुछ देर में ही शांति स्थापित हो जाएगी। सामाजिक क्षेत्र पर पूर्व में किये गए कार्यो से सम्मान मिलेगा। समाज के सम्मानित व्यक्तियों के साथ उठना-बैठना होगा। पौराणीक धार्मिक क्षेत्रो के दर्शन की लालसा रहेगी शीघ्र ही इसके फलीभूत होने की सम्भवना है। दानपुण्य पर खर्च करेंगे। संध्या के समय मानसिक शान्ति के लिए मित्र-परिजनों के साथ बाहर घूमने की योजना बनाएंगे। परिवार में शांति रहेगी
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आपको अवश्य कुछ ना कुछ लाभ देकर ही जायेगा। दिन के आरंभ से मध्यान बाद तक कार्यो को गंभीर होकर करेंगे इसके बाद का समय मौज-मस्ती में बीतेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन पिछले कुछ दिनों से बेहतर रहेगा। कार्य क्षेत्र से अतिरिक्त आय होगी। रुके हुए कार्य पूर्ण होने से भी धन के स्त्रोत्र बढ़ेंगे। सामाजिक गतिविधियों में पूरा समय नही दे सकेंगे। आवश्यक कार्य दिन रहते पूर्ण करलें इसके बाद जारी हानि के योग बन रहे है। पर्यटन पार्टी की योजना बनाई जाएगी। उत्तम भोजन के साथ गृहस्थ का सुख मिलेगा। परिजनों के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।
ज्योतिषाचार्या मित महाकाल महादेव और योगाचार्य प्रशांत सैनी ज़ी ✍🏻
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*🙏 हर हर महादेव🙏*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
*🌞 दिनांक - 11 अप्रैल 2026*
*⛅दिन - शनिवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - वैशाख*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - नवमी मध्यरात्रि 12:37 तक तत्पश्चात् दशमी*
*⛅नक्षत्र - उत्तराषाढा दोपहर 01:39 तक तत्पश्चात् श्रवण*
*⛅योग - सिद्ध शाम 06:39 तक तत्पश्चात् साध्य*
*⛅राहुकाल - सुबह 09:19 से सुबह 10:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:10*
*⛅सूर्यास्त - 06:46 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:24 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 01:39 से प्रातः 06:09 अप्रैल 12 तक)*
*🌥️विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के सामन त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🌹 शनिवार के दिन का विशेष प्रयोग 🌹*
*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*
*🚩अकाल मृत्यु व घर में बार बार मृत्यु होने पर*
*🔸जिसे मौत का अत्यधिक भय होता है या घर में मौतें बार-बार होती हों, तो शनिवार को "ॐ नमः शिवाय" का जप करें और पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करें । खाली १०८ बार जप करें तो दीर्घायुष्य का धनी होगा । अकाल मृत्यु व एक्सिडेंट आदि का भय नहीं होगा । ऐसा १७ शनिवार या २६ शनिवार करें, नहीं तो कम से कम ७ शनिवार तो जरूर करें ।*
*🔸विघ्न-बाधाओं व दुर्घटना से बचने का आसान उपाय🔸*
*ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।*
*उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।*
*🔸रोज सुबह उठने पर अथवा घर से बाहर जाते समय एक माला (१०८)इस मंत्र का जप कर लें तो विघ्न-बाधारहित, दुर्घटनारहित गाड़ी अपने रास्ते सफर करती रहेगी । और जीवन की शाम होने से पहले रोज उस (परम् पिता परमात्मा जी) की शरण में थोड़ी देर शांत रहा करें।*
*राधे राधे जी 💐*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
*🌞 दिनांक - 11 अप्रैल 2026*
*⛅दिन - शनिवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - वैशाख*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - नवमी मध्यरात्रि 12:37 तक तत्पश्चात् दशमी*
*⛅नक्षत्र - उत्तराषाढा दोपहर 01:39 तक तत्पश्चात् श्रवण*
*⛅योग - सिद्ध शाम 06:39 तक तत्पश्चात् साध्य*
*⛅राहुकाल - सुबह 09:19 से सुबह 10:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:10*
*⛅सूर्यास्त - 06:46 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:24 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 01:39 से प्रातः 06:09 अप्रैल 12 तक)*
*🌥️विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के सामन त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🌹 शनिवार के दिन का विशेष प्रयोग 🌹*
*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*
*🚩अकाल मृत्यु व घर में बार बार मृत्यु होने पर*
*🔸जिसे मौत का अत्यधिक भय होता है या घर में मौतें बार-बार होती हों, तो शनिवार को "ॐ नमः शिवाय" का जप करें और पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करें । खाली १०८ बार जप करें तो दीर्घायुष्य का धनी होगा । अकाल मृत्यु व एक्सिडेंट आदि का भय नहीं होगा । ऐसा १७ शनिवार या २६ शनिवार करें, नहीं तो कम से कम ७ शनिवार तो जरूर करें ।*
*🔸विघ्न-बाधाओं व दुर्घटना से बचने का आसान उपाय🔸*
*ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।*
*उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।*
*🔸रोज सुबह उठने पर अथवा घर से बाहर जाते समय एक माला (१०८)इस मंत्र का जप कर लें तो विघ्न-बाधारहित, दुर्घटनारहित गाड़ी अपने रास्ते सफर करती रहेगी । और जीवन की शाम होने से पहले रोज उस (परम् पिता परमात्मा जी) की शरण में थोड़ी देर शांत रहा करें।*
*राधे राधे जी 💐*
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अम्बानी अदानी मोदी गोदी शाह को अब कब तक सपोर्ट करते रहोगे?
हम ही ने उसे उस जगह पर बैठाया था तो अब हम ही को ही उसे नीचे उतरना चाहिए
बहुत ही देर हों गई है पर अभी भी समय है
हम ही ने उसे उस जगह पर बैठाया था तो अब हम ही को ही उसे नीचे उतरना चाहिए
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