जगतगुरु शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती महाभाग के अमृत वचन
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विश्व को दिशा देने की क्षमता श्रोतीय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष में होती है।

जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
हर हर महादेव। 💐💐
प्रश्न : लोकतांत्रिक युग में हिंदू राष्ट्र की स्थापना हो कैसे सकेगी?

जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
हर हर महादेव। 💐💐
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पृथ्वि को धारण करने वाले सात तत्व में गौमाता का प्रथम स्थान है।
गोवर्धन मठ पूरी शंकराचार्य महाभाग।।
#गौहत्या_बंद_करो_सरकार
हर हर महादेव 💐🚩
जय श्री गुरुदेव
ध्यान रहे, हमें नीति, शक्ति, सद्भाव और सामञ्जस्य (तालमेल) के बल पर भारत को अखण्ड करना है। अपने मानबिन्दुओं की रक्षा के लिए ओजस्वी बनना है। केसरिया त्रिकोण वस्त्र पर स्वास्तिक चिह्नयुक्त हमारा ध्वज है। दिशाहीन शासनतन्त्र को विश्वमञ्च से विदाकर धर्मनियन्त्रित पक्षपातविहीन शोषणविनिर्मुक्त शासनतन्त्र की स्थापना हमारा लक्ष्य है। श्रीहरि गुरु का हमारे सिर पर वरद हस्त है। हमारी विजय सुनिश्चित है। ओजस्वी और विजयी बननेके लिए भगवान् सूर्य और गुरुदेवकी प्रार्थना हमारा कर्त्तव्य है। ईश्वरके नामपर उद्यमहीन न बनना, उद्यम के नाम पर अहंकारी न बनना, हमारा व्रत है । ईश्वरसे प्राप्त शक्ति का सदुपयोग करना और ईश्वर की कृपा का ध्यान रखना हमारा धर्म है । आलस्य, प्रमाद, लोभ, भय , भावुकता और अविवेक के वश में होकर लक्ष्यहीन न होना हमारा शील है। अपने विश्वहितकारी प्रशस्त मानबिन्दुओं के प्रति दार्शनिकता, वैज्ञानिकता और शीलके बलपर मानवमात्र को आस्थान्वित करना हमारा अभियान है। प्रार्थना, संघशक्ति, उद्योगशीलता, सेवा और स्वस्थ मार्गदर्शन के बल पर लक्ष्यसिद्धि हमारी साधना है ।

- !!श्री पूर्वाम्नाय शंकराचार्य महाभाग:!!
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प्रश्न : युग चक्र कैसे चलता है?
पूरी शंकराचार्य महाभाग का समाधान।।
हर हर महादेव 💐🚩
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यह भ्रम है की स्त्रियों और शूद्रों पर सबसे अधिक निषेधाज्ञा है।।

जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
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प्रश्न : क्या चारो शंकराचार्य आपस में मेलजोल रखते है?

जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
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विषय : ज्योतिर्लिंग तत्व

जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
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प्रश्न : ढोल, गंवार,पशु, शुद्र और नारी के प्रति ताड़न का तातपर्य क्या है?
समाधान :
जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
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विषय : शाकाहारी भोजन मांसाहारी भोजन से श्रेष्ठ है।
वक्ता : जगतगुरु शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
जय गुरुदेव।।
हर हर महादेव। 💐💐
पुरीशंकराचार्यस्वामीश्री निश्चलानन्दसरस्वती जी महाराज :-

प्रकृति जो क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त करती है उसमें बड़े बड़े भी चार खाने चित हो जाते हैं :-

पुरीशंकराचार्यजी :- महायान्त्रिक युग में तात्कालिकी उपयोगिता ने किसी भी उत्तम उपलब्धि के लिये , जितना धैर्य चाहिये उसका विलोप कर दिया है । इसिलिये मानव जीवन की अपूर्वता महत्ता पर ही एक प्रकार से ग्रहण लग चुका है । उस पर विचारकों को विचार करना चाहिये ।

अब तो दो ही बात है । या तो बुद्धिपूर्वक व्यक्ति महायंत्रो के प्रचुर आविष्कार प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगावे या फिर प्रकृति प्रतिबन्ध लगावेगी तो बहुत कष्ट होगा । उसके लिये उद्यत रहें । प्रकृति अपने आप में क्रान्ति करती है क्योंकी भगवान की शक्ति प्रकृति है । प्रकृति के परिकर पृथ्वी , पानी , प्रकाश , पवन आदि हैं ।

मयाध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम ।
‍हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते।। ( श्रीमदभगवदगीता ९.१०)

प्रकृति जब क्रान्ति का मार्ग निकालती है तो बहुत विस्फोटक वो मार्ग अन्यो के लिये सिद्ध होता है । प्रकृति जब कदम उठावे उससे पहले विवेक पूर्वक मनुष्य को कदम उठाने की आवश्यकता है ।

लोग सोच सकते हैं की प्रकृति तो जड़ है कदम कैसे उठाती है तो भागवत में उसका उदाहरण दिया गया चौथे स्कन्ध में । जब वेन का शासन था , तो सज्जन दाने दाने के लिये मोहताज थे और दुर्जन रबड़ी , कचौरी , मालपुआ से खेलते थे । पृथ्वी ने सोचा दुर्जन रबड़ी , कचौरी , मालपुऐ छकते हैं , सज्जन दाने दाने के लिये मोहताज हैं । अब सज्जन की बात तो छोड़ दो दुर्जनों को भूखे मारो । अन्न देना बंद कर दिया ।

भूदेवी ने अन्न देना बंद कर दिया । सज्जन तो पहले ही मर रहे थे , अन्न के बिना दुर्जन भी मरने लगे । चांदी सोना तो खाके जीवित नहीं रह सकते थे या नोटों का बण्डल आजकल की दृष्टि से ।

ऐसे ही देहरादून में मैं था । श्री गंगा जी को लेकर , एक गोष्ठी में किसी ने कह दिया हिन्दूओं में दमखम नहीं है गंगा की रक्षा कर सकें । हम ठेकेदार के ऐजेंट हैं विद्युत परियोजना , नहर परियोजना , सुरंग परियोजना आदि के माध्यम से हमें गंगा जी को जिस दशा जिस दिशा तक पहुंचाना है पहुंचाते रहेंगें हमको कोई चुनौति प्राप्त नहीं है , सरकार हमारे साथ है , हिन्दूओं से कोई चुनौती प्राप्त नहीं है ।

मेरे मुंह से निकल गया , प्रकृति कैसे मार्ग निकालती है जिसके साथ तुम अन्याय कर रहे हो , वो गंगा ही कैसे मार्ग निकालती है तुम देख लेना । केदारनाथ की घटना मालूम है ना ? इसका मतलब क्या होता है ? जब मनुष्य स्वस्थ क्रान्ति नहीं कर पाता या उधर ध्यान नहीं देता तो प्रकृति जो क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त करती है उसमें बड़े बड़े भी चार खाने चित हो जाते हैं । प्रकृति जो भगवान की शक्ति है अपने परिकर उर्जा के चारों स्त्रोत पृथ्वी , पानी , प्रकाश , पवन के माध्यम से स्वस्थ क्रान्ति का मार्ग निकाले उसके पहले ही हमको सतर्क और सावधान होना चाहिये ।
जय गुरुदेव 💐💐🙏🏼
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प्रश्न : वर्तमान महामारी का कारण एवं निवारण क्या है?
समाधान :
जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
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प्रश्न : गरीबो को दूध देने की बजाय शिव लिंग पर क्यों डाला जाता है?
समाधान :
जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के अमृत वचन।
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#भगवान #बुध्द #ब्राह्मण थे- #जगद्गुरु #शंकराचार्य

अनन्त श्री विभूषित श्री पुरीपीठाधिश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य भगवान के अमृतवचन :-
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विषय :- बुद्ध दो हुऐ हैं । ब्राह्मणवंशी बुद्ध ( विष्णु अवतार ) और क्षत्रियवंशी बुद्ध ।
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बुद्ध दो हुऐ हैं । एक भगवान विष्णु के जो दशावतार हुऐ हैं उनमें बुद्ध हुऐ हैं । जितने भी कर्मकांडी भारत , नेपाल , भूटान में हैं " बौद्धावतारे "ऐसा पढ़ते हैं लेकिन बुद्ध कौन हुऐ इसका ज्ञान उन्हें नहीं । एक बुद्ध हुऐ हैं नेपाल में , उनकी ससुराल भी नेपाल में , उनका जन्म भी नेपाल में , वो क्षत्रिय कुल में हुऐ हैं । उनको सिद्धि भले ही बौद्ध गया में मिली हो लेकिन जन्मस्थल की दृष्टि से वे नेपाल में हुऐ हैं और क्षत्रिय कुल में हुऐ हैं । लेकिन भविष्य पुराण के अनुसार विचार करें तो ब्राह्मणकुल में बौद्धावतार हुआ है । बौद्धावतार का क्षेत्र भविष्यदगति से श्रीमदभागवत में है "किकटेषु भविष्यति " । किकट में भगवान विष्णु बुद्ध का अवतार लेंगें । बौद्धावतार कीकट में होगा । किकट शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में भी किया गया है औेर सायणाचार्य के भाष्य में यह कहा गया कि देश या क्षेत्र विशेष का नाम किकट है । लेकिन वो क्षेत्र विशेष कौन है ऐसा वहां नहीं लिखा गया । श्रीधर स्वामी ने जिन्होंने श्रीमदभागवत पर भाष्य लिखा श्रीधरी टिका आज पूरे विश्व में चर्चित है , चैतन्य महाप्रभु भी उस टिका पर लट्टू थे । उन श्रीधर स्वामी ने किकट का अर्थ किय‍ा है गया क्षेत्र । " किकटेषु भविष्यति " किकट का अर्थ " गया " किया है , गया क्षेत्र । हमने लगभग दस वर्ष पहले ही यहां के महानुभावों से कहा कि गया क्षेत्र में , जैसे पुरुषोत्तम क्षेत्र है उसके अंर्तगत पुरी है , इसी प्रकार किकट क्षेत्र के अंर्तगत गया भी है । चारों ओर अनुंसंधान होना चाहिये कि ब्राह्मण कुल में भगवान बुद्ध का अवतार कहां हुआ । कुछ महानुभावों ने चार साल पहले लगभग बताया कि टिले पर ब्राह्मणों का गांव है और वहां बुद्ध की प्राचीन मूर्ति है । मैं एक संकेत कर दूं अग्नि पुराण में भगवान बुद्ध का ध्यान बताया गया । इन बौद्धों ने क्या किया उस श्लोक के आधार पर भगवान बुद्ध का जो चित्र बन सकता है वही बना के रख दिया । अग्नि पुराण में जो भगवान बुद्ध का ध्यान लिखा गया है उसके आधार पर जो भगवान बुद्ध की आकृति बनती है चित्र बनता है गौतम बुद्ध के अनुयायीयों ने उसी को बुद्ध के रुप में ख्यापित कर लिया । दूसरी बात क्या है अमरसिंह हुऐ हैं जिन्होंने अमरकोष की रचना की , वो बौद्ध थे उन्होंने बहुत ही चतुराई का परिचय दिया । भगवान बुद्ध और गौतम बुद्ध के नाम एक साथ लिख दिया । बीच में विभाजक के रुप में एक शब्द का प्रयोग कर दिया जिसका अर्थ लोग नहीं समझ पाते कि विभाजक है ताकि भविष्य में लोग ब्राह्मण कुल में अवर्तीण बुद्ध को भूल जायें , गौतम बुद्ध ही बुद्ध के रुप में चर्चित हो जायें । एक औेर कारण है गौतम गोत्र दोनों बुद्ध का था । क्षत्रिय कुल में उत्पन्न बुद्ध का गोत्र भी गौतम और ब्राह्मण कुल में गया क्षेत्र में उत्पन्न बुद्ध का गोत्र भी । क्षत्रिय , वैश्य के गोत्र तो ब्राह्मणों के अाधार पर ,ऋषियों के अाधार पर चलते हैं , इस भ्रम के कारण भी , दोनों का गोत्र मिलने के कारण भी ब्राह्मण कुल में उत्पन्न जो हमारे विष्णु के अवतार बुद्ध उनको हम लोग भूल गये । हमको जिस कुल में जो उत्पन्न हुऐ हैं उसके प्रति आदर है , आदर्श कोई भी हो सकते हैं इसको लेकर कोई परहेज नहीं । क्या हम भगवान राम को ब्राह्मण कुल में उत्पन्न सिद्ध करेंगें.. नहीं , हमारे आराध्य हैं लेकिन क्षत्रिय वंश में हुऐ , भगवान श्री कृष्ण को क्या हम ब्राह्मण बनाना चाहेंगें , क्षत्रिय कुल में होते हुऐ हमारे आराध्य हुऐ । लेकिन सत्य का गला ना घोंटा जाये ।
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प्रश्न : भगवान बुद्ध दशावतारों में क्यों और कैसे आये?
समाधान :
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हर हर शंकर जय जय शंकर 💐
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मोदी जी की प्रसंशा एवं धनाढ्य लोग लोकडाउन की अवधि में मंदिरों और मठो का ध्यान रखे
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