भारत का हस्तलिखित संविधान दुनिया की सबसे बड़ी और अनोखी पांडुलिपियों में से एक है, जिसे पूरी तरह हाथ से लिखा गया था। 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने के पीछे यह ऐतिहासिक क्षण है जब संविधान सभा ने इसे औपचारिक रूप से अपनाया था।
संविधान की यह 13 किलो वजनी मूल प्रति आज संसद भवन की लाइब्रेरी में एक एयरटाइट नाइट्रोजन चैंबर में रखी गई है।
मूल संविधान को ऑक्सीकरण, नमी, रोशनी और कीड़ों से बचाने के लिए इसे एक विशेष एयरटाइट नाइट्रोजन गैस चैंबर में रखा गया है।
क्योंकि—
-काली स्याही समय के साथ ऑक्सीडाइज होकर फीकी पड़ सकती है
-कागज नमी और हवा से खराब हो सकता है
-नाइट्रोजन एक स्थिर गैस है, जो किसी भी रासायनिक प्रतिक्रिया को होने नहीं देती
-इससे दस्तावेज़ सदियों तक बिना खराब हुए सुरक्षित रह सकता है
पहले इसे हीलियम गैस चैंबर में रखा गया था, लेकिन लीक की समस्या के बाद इसे अमेरिका की मदद से नाइट्रोजन चैंबर में शिफ्ट किया गया।
संविधान की यह 13 किलो वजनी मूल प्रति आज संसद भवन की लाइब्रेरी में एक एयरटाइट नाइट्रोजन चैंबर में रखी गई है।
मूल संविधान को ऑक्सीकरण, नमी, रोशनी और कीड़ों से बचाने के लिए इसे एक विशेष एयरटाइट नाइट्रोजन गैस चैंबर में रखा गया है।
क्योंकि—
-काली स्याही समय के साथ ऑक्सीडाइज होकर फीकी पड़ सकती है
-कागज नमी और हवा से खराब हो सकता है
-नाइट्रोजन एक स्थिर गैस है, जो किसी भी रासायनिक प्रतिक्रिया को होने नहीं देती
-इससे दस्तावेज़ सदियों तक बिना खराब हुए सुरक्षित रह सकता है
पहले इसे हीलियम गैस चैंबर में रखा गया था, लेकिन लीक की समस्या के बाद इसे अमेरिका की मदद से नाइट्रोजन चैंबर में शिफ्ट किया गया।
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