डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh)—
भारत के वो प्रधानमंत्री जो कम बोलते थे, लेकिन जिनका काम आज भी बोलता है।
वे राजनीतिज्ञ कम और 'अर्थशास्त्री' (Economist) ज्यादा थे।
जब 1991 में भारत के पास सिर्फ 2 हफ्ते का पैसा बचा था और हमें अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था, तब इस शख्स ने कहा था— "दुनिया की कोई ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ गया हो।" (Victor Hugo quote).
यहाँ उस विद्वान प्रधानमंत्री के बारे में एक पोस्ट है।
blue मनमोहन सिंह: वो नीली पगड़ी, वो 1991 का बजट और उदारीकरण
अक्सर विपक्ष उन्हें 'मौन मोहन कहकर चिढ़ाता था, लेकिन जब 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु समझौता (Nuclear Deal) करने की बात आई, तो उन्होंने अपनी सरकार दांव पर लगा दी थी। उन्होंने दिखाया कि वे सिर्फ सुनते नहीं, फैसला भी लेते हैं।
डॉ. साहब की वो बातें जो इतिहास याद रखेगा:
1991 का जादुई बजट (Liberalization):
आज हम जो कोका-कोला पीते हैं, फोर्ड कार चलाते हैं या विदेशी कंपनियों में नौकरी करते हैं—यह सब 1991 के उस बजट की देन है।
वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने 'लाइसेंस राज' खत्म किया और भारत के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिए।
सबसे पढ़े-लिखे पीएम:
वे दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे नेताओं में से एक हैं (कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड से डिग्री)।
वे इतने काबिल थे कि जब वे वित्त मंत्री बने, तो उन्हें रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर का पद छोड़ना पड़ा था। यानी वे नोट पर हस्ताक्षर करने वाले गवर्नर से बजट बनाने वाले मंत्री बने।
सादगी और ईमानदारी:
10 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी उन पर भ्रष्टाचार का कोई निजी आरोप नहीं लगा।
वे कहते थे— "इतिहास मेरे प्रति मीडिया से ज्यादा दयालु रहेगा।" (History will be kinder to me than the media). और आज कई लोग इस बात को सच मानते हैं।
ओबामा के गुरु?
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उनका बहुत सम्मान करते थे।
ओबामा ने कहा था— "जब मनमोहन सिंह बोलते हैं, तो पूरी दुनिया सुनती है।"
वे भारतीय अर्थव्यवस्था के 'भीष्म पितामह' हैं।
भारत के वो प्रधानमंत्री जो कम बोलते थे, लेकिन जिनका काम आज भी बोलता है।
वे राजनीतिज्ञ कम और 'अर्थशास्त्री' (Economist) ज्यादा थे।
जब 1991 में भारत के पास सिर्फ 2 हफ्ते का पैसा बचा था और हमें अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था, तब इस शख्स ने कहा था— "दुनिया की कोई ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ गया हो।" (Victor Hugo quote).
यहाँ उस विद्वान प्रधानमंत्री के बारे में एक पोस्ट है।
blue मनमोहन सिंह: वो नीली पगड़ी, वो 1991 का बजट और उदारीकरण
अक्सर विपक्ष उन्हें 'मौन मोहन कहकर चिढ़ाता था, लेकिन जब 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु समझौता (Nuclear Deal) करने की बात आई, तो उन्होंने अपनी सरकार दांव पर लगा दी थी। उन्होंने दिखाया कि वे सिर्फ सुनते नहीं, फैसला भी लेते हैं।
डॉ. साहब की वो बातें जो इतिहास याद रखेगा:
1991 का जादुई बजट (Liberalization):
आज हम जो कोका-कोला पीते हैं, फोर्ड कार चलाते हैं या विदेशी कंपनियों में नौकरी करते हैं—यह सब 1991 के उस बजट की देन है।
वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने 'लाइसेंस राज' खत्म किया और भारत के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिए।
सबसे पढ़े-लिखे पीएम:
वे दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे नेताओं में से एक हैं (कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड से डिग्री)।
वे इतने काबिल थे कि जब वे वित्त मंत्री बने, तो उन्हें रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर का पद छोड़ना पड़ा था। यानी वे नोट पर हस्ताक्षर करने वाले गवर्नर से बजट बनाने वाले मंत्री बने।
सादगी और ईमानदारी:
10 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी उन पर भ्रष्टाचार का कोई निजी आरोप नहीं लगा।
वे कहते थे— "इतिहास मेरे प्रति मीडिया से ज्यादा दयालु रहेगा।" (History will be kinder to me than the media). और आज कई लोग इस बात को सच मानते हैं।
ओबामा के गुरु?
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उनका बहुत सम्मान करते थे।
ओबामा ने कहा था— "जब मनमोहन सिंह बोलते हैं, तो पूरी दुनिया सुनती है।"
वे भारतीय अर्थव्यवस्था के 'भीष्म पितामह' हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि बेहद कैलकुलेटेड तरीके से चीजों को दिखाया गया है। न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ है। कौन जिम्मेदार है मैं पता करूंगा। मामला यहां खत्म नहीं हो रहा। क्लास 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' संबंधी संदर्भों के प्रकाशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया।
सर्वोच्च अदालत ने विद्यालय शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक (Secretary of School Education, Ministry of Education and the NCERT Director) को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि उनके विरुद्ध कंटेप्ट ऑफ कोर्ट और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। न्यायालय ने कहा कि पहली नजर में अगर यह प्रकाशन न्यायपालिका को कलंकित करने के उद्देश्य से किया गया जानबूझकर कृत्य सिद्ध होता है, तो यह गंभीर मिस कंडक्ट है और आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है।
#SupremeCourt #NCERT #EducationMinistry #ContemptOfCourt #Judiciary #SchoolEducation #IndiaNews
सर्वोच्च अदालत ने विद्यालय शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक (Secretary of School Education, Ministry of Education and the NCERT Director) को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि उनके विरुद्ध कंटेप्ट ऑफ कोर्ट और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। न्यायालय ने कहा कि पहली नजर में अगर यह प्रकाशन न्यायपालिका को कलंकित करने के उद्देश्य से किया गया जानबूझकर कृत्य सिद्ध होता है, तो यह गंभीर मिस कंडक्ट है और आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है।
#SupremeCourt #NCERT #EducationMinistry #ContemptOfCourt #Judiciary #SchoolEducation #IndiaNews
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देश की स्वतन्त्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अदम्य साहस वीरता के मिसाल अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन🙏
राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा.
राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा.
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मीडिया के आगे भावुक हो गए अरविंद केजरीवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है.
अदालत के फ़ैसले पर अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है.
अदालत के फ़ैसले पर अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी है.
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दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने 27 फरवरी 2026 को शराब नीति (Excise Policy) केस में फैसला सुनाते हुए CBI के जांच अधिकारी (Investigating Officer) के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Action/Inquiry) का आदेश दिया है।
कोर्ट ने अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए मुख्य रूप से ये बातें कहीं:
बिना सबूत के केस बनाना: अधिकारी ने बिना किसी ठोस सबूत और तथ्यों की अनदेखी करते हुए लोगों (जैसे तत्कालीन अधिकारी कुलदीप सिंह) को आरोपी बनाया।
मनगढ़ंत और पहले से तय जांच: कोर्ट ने CBI की जांच को "Pre-meditated and choreographed" (पूर्व-नियोजित और रची हुई) बताया। कोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय एक पहले से तय कहानी (narrative) को सही साबित करने की कोशिश की।
गवाहों के साथ खेल: जांच अधिकारी पर आरोप लगा कि उसने जानबूझकर ऐसे तरीके अपनाए जिससे सच सामने लाने के बजाय सिर्फ अपने केस को बचाया जा सके (जैसे कुछ लोगों को एक ही समय में 'संदिग्ध' और 'सरकारी गवाह' दोनों बनाकर रखना)।
इसी के साथ, सबूतों के अभाव और जांच में इन गंभीर खामियों को देखते हुए कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को CBI के इस केस से बरी (Discharge) कर दिया है।
कोर्ट ने अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए मुख्य रूप से ये बातें कहीं:
बिना सबूत के केस बनाना: अधिकारी ने बिना किसी ठोस सबूत और तथ्यों की अनदेखी करते हुए लोगों (जैसे तत्कालीन अधिकारी कुलदीप सिंह) को आरोपी बनाया।
मनगढ़ंत और पहले से तय जांच: कोर्ट ने CBI की जांच को "Pre-meditated and choreographed" (पूर्व-नियोजित और रची हुई) बताया। कोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय एक पहले से तय कहानी (narrative) को सही साबित करने की कोशिश की।
गवाहों के साथ खेल: जांच अधिकारी पर आरोप लगा कि उसने जानबूझकर ऐसे तरीके अपनाए जिससे सच सामने लाने के बजाय सिर्फ अपने केस को बचाया जा सके (जैसे कुछ लोगों को एक ही समय में 'संदिग्ध' और 'सरकारी गवाह' दोनों बनाकर रखना)।
इसी के साथ, सबूतों के अभाव और जांच में इन गंभीर खामियों को देखते हुए कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को CBI के इस केस से बरी (Discharge) कर दिया है।
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