'अंटार्कटिका की बर्फ में सुलझाया ब्रह्मांड का रहस्य!'
आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी के जनक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का फिजिक्स नोबेल पुरस्कार; अंतरिक्ष से आने वाले रहस्यमयी न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने की खोजी तकनीक, करीब ₹11.5 करोड़ की पुरस्कार राशि
#NobelPrize #PhysicsNobel2026 #FrancisHalzen #IceCube
{Nobel Prize in Physics 2026 Francis, Halzen, IceCube Neutrino Observatory Nobel Prize}
आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी के जनक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का फिजिक्स नोबेल पुरस्कार; अंतरिक्ष से आने वाले रहस्यमयी न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने की खोजी तकनीक, करीब ₹11.5 करोड़ की पुरस्कार राशि
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{Nobel Prize in Physics 2026 Francis, Halzen, IceCube Neutrino Observatory Nobel Prize}
2026 का Nobel Prize in Chemistry फ्रांस में जन्मे 95 वर्षीय वैज्ञानिक Henri B. Kagan और जापानी वैज्ञानिक Kenso Soai को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों को asymmetric organic synthesis में non-linear effects और autocatalysis से जुड़ी खोजों के लिए सम्मानित किया गया। उनकी रिसर्च ने यह समझने में बड़ी मदद की कि प्रकृति में एक ही तरह की molecular handedness यानी homochirality कैसे विकसित हो सकती है और mirror-image molecules के बीच चयनात्मक reactions कैसे संभव होती हैं।
यह खोज सिर्फ chemistry तक सीमित नहीं है, बल्कि medicines, pharmaceuticals और life sciences में भी इसकी अहमियत है, क्योंकि कई drugs में molecule का सही “handed form” ही असरदार होता है।
यह खोज सिर्फ chemistry तक सीमित नहीं है, बल्कि medicines, pharmaceuticals और life sciences में भी इसकी अहमियत है, क्योंकि कई drugs में molecule का सही “handed form” ही असरदार होता है।
ये खबर भी आज सुर्खियों में है। तस्वीर में साड़ी पहनकर दौड़ती हुई महिला का नाम कविता देवी है। रामगढ़ के दुलमी की रहने वाली है। पति गुजरात में मजदूरी करते थे लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया, कुछ दिन बाद इनके भैसुर का भी निधन हो गया उसके बाद इसके कंधों पर बहुत बड़ा बोझ आ गया। ईट भट्ठे में मजदूरी कर अपने दो बच्चे और सास ससुर को किसी तरह पाल पोस रही है।
सोचिए..आज के दौर में जहां जिम जाने का अलग कपड़ा, रात में सोने का नाइट सूट होता है लोगों के पास, वहीं ये अपने भविष्य को किसी तरह सवारने के लिए कड़ी धूप में साड़ी और खाली पैर ही होमगार्ड बहाली का ट्रायल दे रही है और वो भी रेतीली जमीन पर खाली पैर। इस समाचार ने अंदर तक झकझोर दिया।
जी भी हो इस बहन की हिम्मत और जज्बे की दाद देनी पड़ेगी कि इतनी कठिन परिस्थितियों में भी इनका हौसला बुलंद है।
सोचिए..आज के दौर में जहां जिम जाने का अलग कपड़ा, रात में सोने का नाइट सूट होता है लोगों के पास, वहीं ये अपने भविष्य को किसी तरह सवारने के लिए कड़ी धूप में साड़ी और खाली पैर ही होमगार्ड बहाली का ट्रायल दे रही है और वो भी रेतीली जमीन पर खाली पैर। इस समाचार ने अंदर तक झकझोर दिया।
जी भी हो इस बहन की हिम्मत और जज्बे की दाद देनी पड़ेगी कि इतनी कठिन परिस्थितियों में भी इनका हौसला बुलंद है।
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