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राघव जुयाल की कहानी जद्दोजहद से भरी हुई है। आज जिस स्लो मोशन जडांस के लिए वो फेमस है, वो उन्होंने बंदे कमरे में घंटों यूट्यूब देखकर सीखा। टैलेंट के दम पर इंडस्ट्री में डांस से लेकर एक्टर बनने तक में राघव ने जो मेहनत की है, वो कई लोगों के लिए मिसाल से कम नही है।
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जय महाअष्टमी🌹
महाअष्टमी पर माँ महागौरी की पूजा होती है। श्वेत वस्त्र वाली ये देवी पवित्रता, शांति और सुंदरता की प्रतीक हैं।🙏
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खेती और ग्रामीण विकास की UN की “100 Women Heroes” में चुनी गईं मिज़ोरम की स्ट्रॉबेरी किसान पी मारी-इ

साल 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने "अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष" घोषित किया है, ताकि खेती-खाद्य व्यवस्था में महिलाओं की उस भूमिका को पहचान मिले, जो अक्सर अनदेखी रह जाती है।

इसी मौक़े पर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने खेती, खाद्य व्यवस्था और ग्रामीण विकास में बेहतरीन योगदान देने वाली 100 महिलाओं को सम्मानित करने की पहल शुरू की, “100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development”। इस सूची में मिज़ोरम की एक किसान भी हैं, पी मारी-इ।

FAO ने उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती के प्रति समर्पण, लगातार मेहनत और ग्रामीण विकास में योगदान के लिए चुना है। उनके प्रयास क्षेत्र की दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल हैं। इससे पहले वे मिज़ोरम हॉर्टी फ़ेयर 2026 में लॉन्गतलाई ज़िले की सर्वश्रेष्ठ किसान भी चुनी गई थीं।

पर यह सब शुरू कैसे हुआ? लॉन्गतलाई ज़िले के सांगाउ गाँव की 35 साल की ZT लालरिथांगी को सब "पी मारी-इ" कहते हैं। कभी वे निजी स्कूल में पढ़ाती थीं। समाजशास्त्र में पोस्टग्रेजुएट थीं, सरकारी नौकरी का सपना था, पर परीक्षाएँ पास नहीं हुईं। खेती का कोई प्रशिक्षण नहीं था।

तीन बच्चों की परवरिश के बीच वे देर रात खेती के वीडियो देखकर सीखती थीं। पड़ोसी ज़िले सियाहा के किसानों की स्ट्रॉबेरी की सफलता सुनकर 2024 में उन्होंने क़रीब 1,000 पौधे लगाए। अधिकारियों ने बताया कि स्ट्रॉबेरी विभाग की परियोजना में नहीं है, फिर भी उन्होंने अपने दम पर शुरुआत कर दी। सरकारी मदद बाद में मिली।

पहले साल क़रीब 1.5 लाख रुपये की कमाई ने हौसला बढ़ाया। आज दो हेक्टेयर में 10,000 से ज़्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे हैं, साथ में एवोकाडो और केला भी। उनके अनुसार 2025 में कमाई 10 लाख रुपये से ज़्यादा रही। कुछ स्ट्रॉबेरी से वे वाइन बनाकर बेचती हैं, और स्ट्रॉबेरी जूस पर भी काम कर रही हैं। इस सफ़र का श्रेय वे अपने परिवार, बागवानी विभाग और अपनी आस्था को देती हैं।

21 सितंबर को FAO की ईमेल से उन्हें चयन की जानकारी मिली। 131 देशों से 600 से ज़्यादा नामांकन आए थे, और चुनी गईं 100 महिलाएँ। सम्मान समारोह रोम के वर्ल्ड फ़ूड फ़ोरम में 12 से 16 अक्टूबर के बीच है, और उन्हें वहाँ बुलाया गया है।

यह कहानी सिर्फ़ स्ट्रॉबेरी की नहीं, उस हिम्मत की है जो नौकरी न मिलने पर रुकती नहीं, नया रास्ता खोज लेती है। सांगाउ गाँव के छोटे से खेत से निकली यह कोशिश उन सब महिलाओं के लिए रोशनी है, जो सोचती हैं कि बिना ट्रेनिंग या साधन के कुछ बड़ा नहीं हो सकता।

[Mizoram strawberry farmer chosen for FAO 100 Women Heroes, International Year of the Woman Farmer 2026 India, ZT Lalrithangi Pi Mari-i strawberry farming story]
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