विश्व मत्स्य दिवस (World Fisheries Day) प्रतिवर्ष 21 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास और स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को उजागर करना है.
मुख्य बिंदु
तिथि: 21 नवंबर
उद्देश्य: दुनिया भर में मछुआरों, मछली किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के योगदान को मान्यता देना और उनके साथ एकजुटता प्रदर्शित करना। साथ ही, अत्यधिक मछली पकड़ने, आवास विनाश और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
इतिहास: पहला विश्व मत्स्य दिवस 21 नवंबर 2015 को नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय मछुआरा संगठन (International Fishermen's Organization) के उद्घाटन के दौरान मनाया गया था। हालाँकि, इसकी शुरुआत वर्ष 1997 में "वर्ल्ड फोरम ऑफ फिश हार्वेस्टर्स एंड फिशवर्कर्स" की बैठक के दौरान हुई थी।
भारत में महत्व: भारत मत्स्य उत्पादन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और यह क्षेत्र देश के भीतर 2.8 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र के सतत विकास के लिए नीली क्रांति योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) जैसी कई पहलें शुरू की हैं।
मुख्य बिंदु
तिथि: 21 नवंबर
उद्देश्य: दुनिया भर में मछुआरों, मछली किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के योगदान को मान्यता देना और उनके साथ एकजुटता प्रदर्शित करना। साथ ही, अत्यधिक मछली पकड़ने, आवास विनाश और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
इतिहास: पहला विश्व मत्स्य दिवस 21 नवंबर 2015 को नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय मछुआरा संगठन (International Fishermen's Organization) के उद्घाटन के दौरान मनाया गया था। हालाँकि, इसकी शुरुआत वर्ष 1997 में "वर्ल्ड फोरम ऑफ फिश हार्वेस्टर्स एंड फिशवर्कर्स" की बैठक के दौरान हुई थी।
भारत में महत्व: भारत मत्स्य उत्पादन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और यह क्षेत्र देश के भीतर 2.8 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र के सतत विकास के लिए नीली क्रांति योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) जैसी कई पहलें शुरू की हैं।
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▶️भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विमेंस ब्लाइंड टी20 वर्ल्ड कप 2025 जीत लिया है।
▶️23 नवंबर (रविवार) को कोलंबो के पी. सरवनमुट्टू स्टेडियम में आयोजित फाइनल में भारतीय टीम ने नेपाल को 7 विकेट से हराया।
▶️खिताबी मुकाबले में नेपाल ने भारत को जीत के लिए 115 रनों का टारगेट दिया था, जिसे उसने 12.1 ओवर में हासिल कर लिया।
▶️23 नवंबर (रविवार) को कोलंबो के पी. सरवनमुट्टू स्टेडियम में आयोजित फाइनल में भारतीय टीम ने नेपाल को 7 विकेट से हराया।
▶️खिताबी मुकाबले में नेपाल ने भारत को जीत के लिए 115 रनों का टारगेट दिया था, जिसे उसने 12.1 ओवर में हासिल कर लिया।
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पौधा जब सूखता है, फूल जब मुरझाता है, या पत्ते जब टूटते हैं… हम सोचते हैं यह बस प्रकृति का सामान्य नियम है। लेकिन जगदीश चन्द्र बोस ने दुनिया को चौंका दिया — उन्होंने साबित किया कि पौधों में भी जीवन होता है, वे दर्द महसूस करते हैं और हर बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हैं।
उन्होंने क्रेस्कोग्राफ नाम की मशीन बनाई, जो पौधों की नन्ही-सी धड़कन, उनका तनाव, उनका सुख-दुख रिकॉर्ड कर सकती थी। पानी देने पर उनकी “खुशी” और चोट लगने पर उनके “दर्द” को वैज्ञानिक रूप से मापा गया।
बोस ने यह समझाया कि पेड़-पौधे हमेशा चुप नहीं होते, उनकी भाषा है — बस हम सुन नहीं पाते।
आज हर पर्यावरण संरक्षण की आवाज़ में बोस की खोज की गूँज है — जब भी कोई पौधा कटता है, वह सिर्फ एक शाखा नहीं टूटती… बल्कि एक जीव की संवेदना चोट खाती है।
और यही नहीं — बोस ने वायरलेस कम्युनिकेशन, मिलीमीटर वेव्स और सेमीकंडक्टर डिवाइस जैसे आधुनिक विज्ञान की नींव भी रखी।
उन्होंने क्रेस्कोग्राफ नाम की मशीन बनाई, जो पौधों की नन्ही-सी धड़कन, उनका तनाव, उनका सुख-दुख रिकॉर्ड कर सकती थी। पानी देने पर उनकी “खुशी” और चोट लगने पर उनके “दर्द” को वैज्ञानिक रूप से मापा गया।
बोस ने यह समझाया कि पेड़-पौधे हमेशा चुप नहीं होते, उनकी भाषा है — बस हम सुन नहीं पाते।
आज हर पर्यावरण संरक्षण की आवाज़ में बोस की खोज की गूँज है — जब भी कोई पौधा कटता है, वह सिर्फ एक शाखा नहीं टूटती… बल्कि एक जीव की संवेदना चोट खाती है।
और यही नहीं — बोस ने वायरलेस कम्युनिकेशन, मिलीमीटर वेव्स और सेमीकंडक्टर डिवाइस जैसे आधुनिक विज्ञान की नींव भी रखी।
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वर्ष 1949 में 26 नवम्बर को संविधान सभा द्वारा संविधान को स्वीकृत किया गया, जो 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया भारत का संविधान हमें विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव देता है। हम सभी भारतवासियों को अपने संविधान पर गर्व है आप सभी देशवासियों को #संविधान_दिवस की शुभकामनाएँ🙏
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