नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को।
'पद्मभूषण' से सम्मानित, ‘राष्ट्रकवि’ मैथिलीशरण गुप्त जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन 🙏
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को।
'पद्मभूषण' से सम्मानित, ‘राष्ट्रकवि’ मैथिलीशरण गुप्त जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन 🙏
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दैनिक उपयोग के कई विद्युत उपकरणों के अनावश्यक उपयोग को बंद या कम करके कुशलता से ऊर्जा की बचत की जा सकती है जो भविष्य के लिए ज़रूरी है. आईए, अपने बेहतर भविष्य के लिए ऊर्जा संरक्षण का संकल्प लें💡
#राष्ट्रीय_ऊर्जा_संरक्षण_दिवस
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भारत के लिए गर्व का पल है। तमिलनाडु की वरिष्ठ IAS अधिकारी सुप्रिया साहू को संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान Champions of the Earth Award दिया गया है।
उन्हें यह अवॉर्ड UNEP द्वारा नैरोबी (केन्या) में आयोजित समारोह में दिया गया। यह अवॉर्ड पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में असाधारण नेतृत्व के लिए दिया जाता है।
पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में सुप्रिया साहू ने प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, इकोसिस्टम रिस्टोरेशन और सस्टेनेबल कूलिंग जैसे अहम क्षेत्रों में प्रभावशाली काम किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई सिर्फ सरकारों की नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से ही एक आंदोलन बन सकती है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए आर्द्रभूमि संरक्षण, मैंग्रोव विस्तार और प्लास्टिक कम करने जैसे प्रयासों को और तेज करने की बात कही। यह सम्मान भारत की वैश्विक पर्यावरण नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
उन्हें यह अवॉर्ड UNEP द्वारा नैरोबी (केन्या) में आयोजित समारोह में दिया गया। यह अवॉर्ड पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में असाधारण नेतृत्व के लिए दिया जाता है।
पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में सुप्रिया साहू ने प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, इकोसिस्टम रिस्टोरेशन और सस्टेनेबल कूलिंग जैसे अहम क्षेत्रों में प्रभावशाली काम किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई सिर्फ सरकारों की नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से ही एक आंदोलन बन सकती है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए आर्द्रभूमि संरक्षण, मैंग्रोव विस्तार और प्लास्टिक कम करने जैसे प्रयासों को और तेज करने की बात कही। यह सम्मान भारत की वैश्विक पर्यावरण नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।