CGPSC & CgVyapam
2.41K subscribers
10.3K photos
126 videos
780 files
252 links
Download Telegram
👍2
⭕️वर्ष 2025 में सुर्खियों में रहे नाम
❤5
❤2
👍1
❤2
जल संरक्षण अवार्ड में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, टीना डाबी और नागार्जुन गौड़ा जैसे चर्चित IAS अधिकारियों पर उठे सवाल

​देश में जल संरक्षण के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय जल पुरस्कार' और 'जल संचय जन भागीदारी' योजना विवादों के घेरे में आ गई है। हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किए गए कुछ जिलों पर फर्जी आंकड़ों और एआई (AI) निर्मित तस्वीरों के जरिए पुरस्कार जीतने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में देश के चर्चित आईएएस अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के बाड़मेर जिले में कलेक्टर टीना डाबी के नेतृत्व में हुए कार्यों पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर जल संरक्षण के जो ढांचे दिखाए गए, उनमें भारी गड़बड़ी है। एक ही टैंक की तस्वीर को अलग-अलग गांवों और लाभार्थियों के नाम पर अपलोड करने और छत की फोटो को पानी का टैंक बताने जैसे दावे सामने आए हैं। हालांकि, टीना डाबी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को भ्रामक बताया है और कहा है कि वायरल स्क्रीनशॉट उस पोर्टल के नहीं हैं जिसके लिए उन्हें अवार्ड मिला है।

​वहीं, मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का मामला और भी गंभीर बताया जा रहा है। यहाँ कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन बी गौड़ा पर आरोप है कि उन्होंने अवार्ड जीतने के लिए एआई (AI) जेनरेटेड फर्जी तस्वीरों का सहारा लिया।

खंडवा को जल संरक्षण में देश में प्रथम स्थान और 2 करोड़ रुपये का पुरस्कार मिला था। एक मीडिया जांच में दावा किया गया है कि पोर्टल पर दिखाए गए कई तालाब और चेक डैम जमीन पर मौजूद ही नहीं हैं। कहीं सिर्फ गड्ढे खोदे गए तो कहीं पुरानी दीवारों पर नया प्लास्टर कर उसे नया प्रोजेक्ट बता दिया गया।

​इन खुलासों ने डिजिटल गवर्नेंस और जियो-टैगिंग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। विपक्ष ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

स्रोत: NewsPinch
Link : https://youtu.be/4md-Gvp6VTc?si=iQh3GgPsP72dv2JN
छग में भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले में अधिकारियों और दलालों का बड़ा खेल उजागर:

छत्तीसगढ़ में ED और EOW की कार्रवाई
​छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'भारतमाला परियोजना' (रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर) के तहत भूमि अधिग्रहण में करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों के मुआवजे में भारी हेराफेरी की गई। तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू सहित कई अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बैक डेट में जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और एक ही प्लॉट को कई टुकड़ों में बांटकर मुआवजे की रकम को कई गुना बढ़ा दिया। एसडीएम निर्भय कुमार साहू CGPSC 2011 के टॉपर रहें हैं.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की संयुक्त कार्रवाई में रायपुर और महासमंद जिलों में छापेमारी की गई है, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच गहरे गठजोड़ का खुलासा हुआ है।

​ अभनपुर क्षेत्र के नायक बंधा और उरला गांवों में करीब 29.5 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कागजों में 78 करोड़ रुपये का बताकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

​जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा का नाम सामने आया है, जिसकी पत्नी तहसीलदार रविंद्र कौर बताई गई हैं। इसके अलावा उमा तिवारी, केदार तिवारी और कई अन्य दलालों ने भी फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाई। EOW ने विशेष अदालत में 7500 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें गोपाल राम वर्मा और नरेंद्र कुमार नायक जैसे सरकारी अधिकारियों समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

​विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि यह घोटाला 350 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है, जबकि EOW ने अभी तक 323 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का अनुमान लगाया है।

फिलहाल, कई आरोपी जेल में हैं जबकि कुछ अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। इस खुलासे ने विकास के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।

स्रोत: Newspinch
Link : https://youtu.be/CD6AxEQvES0?si=DX1OIgbVBkMYZHsq
❤1
⭕️ बुलेट ट्रेन - सूरत -बिलिमोरा ( पहला चरण)
दूसरा चरण - वापी से सूरत
⭕️ भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना
लागत - 146 करोड़
❤2
⭕️ भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर गुवाहाटी से कोलकाता
❤1