CGPSC & CgVyapam
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Reality Of SSC Exams
https://youtube.com/watch?v=POSqmsH4ZnU&si=OOd6XfR2mN8mzJaf

नीतीश राजपूत का यह वीडियो कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में हो रही कथित धांधली और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं पर केंद्रित है। वीडियो की शुरुआत में बताया गया है कि कैसे पहले SSC की परीक्षाएं पेपर लीक और कुप्रबंधन का शिकार थीं, जिसके बाद TCS (Tata Consultancy Services) को लाया गया और परीक्षाओं में सुधार आया। लेकिन हाल ही में, 'एडुक्विटी' (Eduquity) नामक एक कंपनी, जिसका राजस्व कुछ साल पहले मात्र 7 करोड़ रुपये था, को बड़े पैमाने पर सरकारी टेंडर मिलने लगे और वह 135 करोड़ से अधिक की कंपनी बन गई। वीडियो में दावा किया गया है कि NTA और मध्य प्रदेश (MP) की परीक्षाओं के बाद अब SSC के टेंडर नियमों में भी बदलाव किए गए—जैसे टर्नओवर की शर्तें घटाना और तकनीकी क्षमता (Technical Score) का वेटेज कम करना—ताकि बड़ी और अनुभवी कंपनी TCS को बाहर कर एडुक्विटी को टेंडर दिया जा सके। एडुक्विटी ने TCS के मुकाबले बहुत कम बोली लगाकर यह कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया।
​वीडियो में मध्य प्रदेश पटवारी परीक्षा घोटाले का भी प्रमुखता से जिक्र है, जो एडुक्विटी द्वारा आयोजित कराई गई थी। इसमें एक ही कॉलेज (जो एक भाजपा विधायक से जुड़ा बताया गया है) से कई टॉपर्स निकले थे, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा, एडुक्विटी द्वारा SSC परीक्षाएं कराने पर सर्वर डाउन होना, दूरदराज के इलाकों में सेंटर देना और 'सब-कॉन्ट्रैक्टिंग' (अपना काम दूसरी कंपनियों जैसे इनोवेटिव व्यू को सौंपना) जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। नीतीश राजपूत ने तर्क दिया है कि टेंडर प्रक्रिया में पैसे बचाने के चक्कर में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, क्योंकि एडुक्विटी के पास TCS जैसा मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, जिसका खामियाजा गरीब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

एडुक्विटी टेक्नोलॉजीज (Eduquity Technologies Pvt. Ltd.) ने यूट्यूबर नीतीश राजपूत के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2.5 करोड़ रुपये का मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि नीतीश राजपूत के वीडियो में दिखाए गए तथ्य गलत और भ्रामक हैं, जिससे उनकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है। एडुक्विटी ने कोर्ट से वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग भी की है। वहीं, नीतीश राजपूत ने वीडियो हटाने से इनकार कर दिया है और उनका कहना है कि उन्होंने जो भी जानकारी दी है, वह आरटीआई (RTI) और पब्लिक रिकॉर्ड्स पर आधारित है। फिलहाल यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
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