लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से 2006 में MBBS पूरी करने वाली डॉ. प्रियंका शुक्ला वर्तमान में छत्तीसगढ़ कैडर की एक IAS अधिकारी हैं। उनके करियर में यह बड़ा बदलाव एक घटना के बाद आया।
बतौर डॉक्टर जब वे एक स्लम इलाके में गईं, तो उन्होंने एक महिला को गंदा पानी पीते और अपने बच्चों को पिलाते देखा। प्रियंका के मना करने पर उस महिला ने ताना मारते हुए कहा, "क्या तुम कहीं की कलेक्टर हो जो मुझे बता रही हो?"
इस बात के बाद प्रियंका ने अपना मेडिकल पेशा छोड़ दिया और UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। पहले प्रयास में असफल होने के बाद, उन्होंने साल 2009 में अपने दूसरे प्रयास में 73वीं रैंक हासिल कर देश की सबसे कठिन परीक्षा पास की।
अपने प्रशासनिक सेवाकाल के दौरान, विशेषकर कोरोना महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं के कुशल प्रबंधन और शानदार कार्य के लिए उन्हें 'राष्ट्रपति पदक' से भी सम्मानित किया जा चुका है।
बतौर डॉक्टर जब वे एक स्लम इलाके में गईं, तो उन्होंने एक महिला को गंदा पानी पीते और अपने बच्चों को पिलाते देखा। प्रियंका के मना करने पर उस महिला ने ताना मारते हुए कहा, "क्या तुम कहीं की कलेक्टर हो जो मुझे बता रही हो?"
इस बात के बाद प्रियंका ने अपना मेडिकल पेशा छोड़ दिया और UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। पहले प्रयास में असफल होने के बाद, उन्होंने साल 2009 में अपने दूसरे प्रयास में 73वीं रैंक हासिल कर देश की सबसे कठिन परीक्षा पास की।
अपने प्रशासनिक सेवाकाल के दौरान, विशेषकर कोरोना महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं के कुशल प्रबंधन और शानदार कार्य के लिए उन्हें 'राष्ट्रपति पदक' से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने माना कि NEET परीक्षा में गडबड़ी हुई हैं.
भ्रष्टाचार और सरकार की खराब प्रबंधन के कारण पता नहीं और कितने परीक्षाओं में ऐसी गडबड़ी हुयी होगीं और न जाने कितने योग्य युवाओ को नौकरी के बजाय बढ़ती उम्र, बेरोजगारी और खराब अर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ रहा हैं.
भ्रष्टाचार और सरकार की खराब प्रबंधन के कारण पता नहीं और कितने परीक्षाओं में ऐसी गडबड़ी हुयी होगीं और न जाने कितने योग्य युवाओ को नौकरी के बजाय बढ़ती उम्र, बेरोजगारी और खराब अर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ रहा हैं.
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