व्याख्या:-
[C ]तीनों कथन सही हैं...
⚡️स्थगन का आशय है अस्थाई रूप से संसद का कामकाज बंद होना।
⚡️स्थगन चाहे निश्चित काल के लिए हो या अनिश्चितकाल के लिए ,यह सदन के अध्यक्ष या सभापति द्वारा ही किया जाता है।
⚡️अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने का अर्थ है, सभा की बैठक के लिए कोई तारीख निर्धारित किए बिना ही सभा की बैठक को समाप्त करना।
⚡️सामान्यतः किसी भी सभा के अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित होने के बाद राष्ट्रपति उसका सत्रावसान करता है।
⚡️किसी भी सदन का पीठासीन गणपूर्ति के अभाव में संबंधित सदन को स्थगित या अधिवेशन को निलंबित कर सकता है।
⚡️जबकि लोकसभा अथवा राज्यसभा को स्थगित या निलंबित करने का अधिकार अध्यक्ष या सभापति का है।
जब सदन की अगली बैठक की तिथि निर्धारित ना हो तो उसे अनिश्चितकालीन स्थगन कहा जाता है।
⚡️संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल 6 महीने से अधिक नहीं हो सकता।
[C ]तीनों कथन सही हैं...
⚡️स्थगन का आशय है अस्थाई रूप से संसद का कामकाज बंद होना।
⚡️स्थगन चाहे निश्चित काल के लिए हो या अनिश्चितकाल के लिए ,यह सदन के अध्यक्ष या सभापति द्वारा ही किया जाता है।
⚡️अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने का अर्थ है, सभा की बैठक के लिए कोई तारीख निर्धारित किए बिना ही सभा की बैठक को समाप्त करना।
⚡️सामान्यतः किसी भी सभा के अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित होने के बाद राष्ट्रपति उसका सत्रावसान करता है।
⚡️किसी भी सदन का पीठासीन गणपूर्ति के अभाव में संबंधित सदन को स्थगित या अधिवेशन को निलंबित कर सकता है।
⚡️जबकि लोकसभा अथवा राज्यसभा को स्थगित या निलंबित करने का अधिकार अध्यक्ष या सभापति का है।
जब सदन की अगली बैठक की तिथि निर्धारित ना हो तो उसे अनिश्चितकालीन स्थगन कहा जाता है।
⚡️संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल 6 महीने से अधिक नहीं हो सकता।
वित्त विधेयक के जरिए संशोधनो से तैयार की गई थी ,चुनावी बांड की जमीन..
चुनावी बॉन्ड:-
🌟लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर से चुनावी बॉन्ड की ऑडिट रिपोर्ट सामने आ गई है।
🌟भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा किया है कि, पिछले वित्त वर्ष में चुनावी बॉन्ड से उसे 1294.14 करोड़ रुपए का चंदा मिला है।
🌟यह चुनावी बॉन्ड से मिला अब तक का सबसे ज्यादा भुगतान है। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को मिले चंदे से सात गुना अधिक है।
🌟चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा की कुल आय 1917.12 करोड़ रुपए रही वहीं कांग्रेेस की आय सिर्फ 452.37 करोड़ रुपए रही।
🌟एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक मार्च 2018 से जुलाई 2023 के बीच चुनावी बॉन्ड से 13,000 करोड़ रुपए का दान राजनीतिक पार्टियों को मिला।
🌟एसबीआई ने 9,208 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड बेचे। इनकी 58 प्रतिशत राशि भाजपा को मिली।
🌟18 से 22 के बीच पार्टियों को बॉन्ड से मिलने वाले चंदे में 743 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
🌟केंद्र सरकार ने 2017 के बजट में चुनावी बॉन्ड की घोषणा की और 2018 में इसे लागू किया गया।
🌟हर तिमाही एसबीआई 10 दिन के लिए चुनावी बॉन्ड जारी करता है।
🌟बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान गुप्त रहती है। इसके माध्यम से अपनी पसंदीदा पार्टी को चंदा दिया जा सकता है।
🌟भाजपा को हुई कुल आय 2,360 का 54 फीसदी पैसा चुनावी बॉन्ड से आया है। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है।
🌟व्यक्ति, कंपनी और चुनावी ट्रस्ट से 648 करोड़ रुपए का दान भाजपा को मिला पिछले यह साल 721.7 करोड़ रुपए था।
🌟बैंक में जमा धनराशि पर 237.3 करोड़ रुपए ब्याज भी भाजपा को मिला है।
🌟भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आय में गिरावट जारी है। पिछले वित्त वर्ष में मात्र 452 करोड़ रुपए की आय हुई। इससे पहले आय 541 करोड़ रुपए थी।
🌟चुनावी बॉन्ड से महज 171 करोड़ रुपए मिले पहले 236 करोड़ रुपए मिले थे।
🌟पिछले वित्त वर्ष में चुनाव के दौरान भाजपा ने 1,092.15 करोड़ रुपए खर्च किया है। भाजपा के कुल खर्च का 80 फीसदी विज्ञापन पर हुआ। विज्ञापन पर भाजपा ने 432.14 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
🌟कांग्रेस का खर्च पांच गुना कम है। कांग्रेस ने चुनाव में महज 192.55 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पिछले वित्त वर्ष में भाजपा का कुल खर्च 1361.68 करोड़ रुपए रहा वहीं कांग्रेस का कुल खर्च 467.13 करोड़ रुपए रहा।
🌟अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित कर दिया, सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना कि ,बॉन्ड संविधान के अनुच्छेद 19(1)A में निहित 'सूचना के अधिकार' का उल्लंघन करता है...
🌟लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर से चुनावी बॉन्ड की ऑडिट रिपोर्ट सामने आ गई है।
🌟भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा किया है कि, पिछले वित्त वर्ष में चुनावी बॉन्ड से उसे 1294.14 करोड़ रुपए का चंदा मिला है।
🌟यह चुनावी बॉन्ड से मिला अब तक का सबसे ज्यादा भुगतान है। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को मिले चंदे से सात गुना अधिक है।
🌟चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा की कुल आय 1917.12 करोड़ रुपए रही वहीं कांग्रेेस की आय सिर्फ 452.37 करोड़ रुपए रही।
🌟एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक मार्च 2018 से जुलाई 2023 के बीच चुनावी बॉन्ड से 13,000 करोड़ रुपए का दान राजनीतिक पार्टियों को मिला।
🌟एसबीआई ने 9,208 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड बेचे। इनकी 58 प्रतिशत राशि भाजपा को मिली।
🌟18 से 22 के बीच पार्टियों को बॉन्ड से मिलने वाले चंदे में 743 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
🌟केंद्र सरकार ने 2017 के बजट में चुनावी बॉन्ड की घोषणा की और 2018 में इसे लागू किया गया।
🌟हर तिमाही एसबीआई 10 दिन के लिए चुनावी बॉन्ड जारी करता है।
🌟बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान गुप्त रहती है। इसके माध्यम से अपनी पसंदीदा पार्टी को चंदा दिया जा सकता है।
🌟भाजपा को हुई कुल आय 2,360 का 54 फीसदी पैसा चुनावी बॉन्ड से आया है। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है।
🌟व्यक्ति, कंपनी और चुनावी ट्रस्ट से 648 करोड़ रुपए का दान भाजपा को मिला पिछले यह साल 721.7 करोड़ रुपए था।
🌟बैंक में जमा धनराशि पर 237.3 करोड़ रुपए ब्याज भी भाजपा को मिला है।
🌟भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आय में गिरावट जारी है। पिछले वित्त वर्ष में मात्र 452 करोड़ रुपए की आय हुई। इससे पहले आय 541 करोड़ रुपए थी।
🌟चुनावी बॉन्ड से महज 171 करोड़ रुपए मिले पहले 236 करोड़ रुपए मिले थे।
🌟पिछले वित्त वर्ष में चुनाव के दौरान भाजपा ने 1,092.15 करोड़ रुपए खर्च किया है। भाजपा के कुल खर्च का 80 फीसदी विज्ञापन पर हुआ। विज्ञापन पर भाजपा ने 432.14 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
🌟कांग्रेस का खर्च पांच गुना कम है। कांग्रेस ने चुनाव में महज 192.55 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पिछले वित्त वर्ष में भाजपा का कुल खर्च 1361.68 करोड़ रुपए रहा वहीं कांग्रेस का कुल खर्च 467.13 करोड़ रुपए रहा।
🌟अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित कर दिया, सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना कि ,बॉन्ड संविधान के अनुच्छेद 19(1)A में निहित 'सूचना के अधिकार' का उल्लंघन करता है...
👍2
🔅एक्ट ईस्ट पॉलिसी:-
🌟यह ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ का ही उन्नत रूप है।
🌟यह विभिन्न स्तरों पर विशाल एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने हेतु एक राजनयिक पहल है।
🌟इस पॉलिसी के तहत द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तरों पर कनेक्टिविटी, व्यापार, संस्कृति, रक्षा और लोगों-से-लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ गहन और निरंतर संपर्क को बढ़ावा दिया जाता है।
🔅लक्ष्य:-
आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना तथा एक सक्रिय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाकर भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थित देशों के साथ रणनीतिक संबंध विकसित कर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के आर्थिक विकास में सुधार करना जो कि दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है।
🌟यह ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ का ही उन्नत रूप है।
🌟यह विभिन्न स्तरों पर विशाल एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने हेतु एक राजनयिक पहल है।
🌟इस पॉलिसी के तहत द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तरों पर कनेक्टिविटी, व्यापार, संस्कृति, रक्षा और लोगों-से-लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ गहन और निरंतर संपर्क को बढ़ावा दिया जाता है।
🔅लक्ष्य:-
आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना तथा एक सक्रिय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाकर भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थित देशों के साथ रणनीतिक संबंध विकसित कर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के आर्थिक विकास में सुधार करना जो कि दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है।
👍2
🔅लुक ईस्ट पॉलिसी:-
🌟रणनीतिक साझेदार सोवियत संघ के विघटन (शीत युद्ध, 1991 के अंत में ) के प्रभाव से उबरने के लिये भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास किया।
🌟इन प्रयासों में वर्ष 1992 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने लुक ईस्ट पॉलिसी की शुरुआत की ताकि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के साथ भारत के संबंधों को रणनीतिक रूप दिया जा सके और एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के रणनीतिक प्रभाव को प्रतिसंतुलित किया जा सके।
🌟रणनीतिक साझेदार सोवियत संघ के विघटन (शीत युद्ध, 1991 के अंत में ) के प्रभाव से उबरने के लिये भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास किया।
🌟इन प्रयासों में वर्ष 1992 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने लुक ईस्ट पॉलिसी की शुरुआत की ताकि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के साथ भारत के संबंधों को रणनीतिक रूप दिया जा सके और एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के रणनीतिक प्रभाव को प्रतिसंतुलित किया जा सके।
🌟APAAR
▪️पूर्ण नाम:-
AUTOMATED PERMANENT ACEDMIC ACCOUNT REGISTRY..
▪️14फरवरी 2024 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी ने "अपार" (APAAR) पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया...
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि "एक राष्ट्र एक छात्र" योजना के तहत 25 करोड़ छात्रों की यूनिक APAAR आईडी तैयार हो चुकी हैं.....
APAAR 12 अंक की एक यूनिक छात्र आईडी हैं जिसमें नर्सरी में लेकर पीएचडी तक छात्र के सभी दस्तावेज लिंक होंगे।
इसे नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा हैं।
APAAR को आधार नंबर और ABHA (आयुषमान भारत हेल्थ अकाउंट नंबर ) नंबर, की तर्ज पर लागू किया जा रहा हैं।
इसे आयुष्मान भारत योजना के तहत जारी किया जा रहा हैं।
इस खाता नंबर में भारत के नागरिकों की स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी उपलब्ध होगी।
Kr Dogiwal√
▪️पूर्ण नाम:-
AUTOMATED PERMANENT ACEDMIC ACCOUNT REGISTRY..
▪️14फरवरी 2024 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी ने "अपार" (APAAR) पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया...
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि "एक राष्ट्र एक छात्र" योजना के तहत 25 करोड़ छात्रों की यूनिक APAAR आईडी तैयार हो चुकी हैं.....
APAAR 12 अंक की एक यूनिक छात्र आईडी हैं जिसमें नर्सरी में लेकर पीएचडी तक छात्र के सभी दस्तावेज लिंक होंगे।
इसे नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा हैं।
APAAR को आधार नंबर और ABHA (आयुषमान भारत हेल्थ अकाउंट नंबर ) नंबर, की तर्ज पर लागू किया जा रहा हैं।
इसे आयुष्मान भारत योजना के तहत जारी किया जा रहा हैं।
इस खाता नंबर में भारत के नागरिकों की स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी उपलब्ध होगी।
Kr Dogiwal√
🌟चुनावी बांड योजना को तो असंवैधानिक करार दिया गया ,परन्तु दुर्भाग्य कि बात हैं कि,मौजूदा केंद्र सरकार ने यहां तक कह दिया था कि- चुनावी बॉन्ड में कौन सा उद्योगपति कौन सी पार्टी को धन दे रहा है, ये सब जनता को जानने का अधिकार नहीं हैं,
परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने तो केवल बॉन्ड को असंवैधानिक ही नहीं करार दिया बल्कि बड़ी लताड़ भी लगाई... और कहा कि यह योजना सूचना का अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं..
और ये काला धन इक्कठा करने का माध्यम भी हो सकता हैं।
और ये भी कहा अब तक लिए गए बॉन्ड को वापस करना होगा,
ये आंकड़ा बता रहा हैं कि किस पार्टी को चुनावी बॉन्ड से अब तक कितनी धन राशि मिली है..
परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने तो केवल बॉन्ड को असंवैधानिक ही नहीं करार दिया बल्कि बड़ी लताड़ भी लगाई... और कहा कि यह योजना सूचना का अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं..
और ये काला धन इक्कठा करने का माध्यम भी हो सकता हैं।
और ये भी कहा अब तक लिए गए बॉन्ड को वापस करना होगा,
ये आंकड़ा बता रहा हैं कि किस पार्टी को चुनावी बॉन्ड से अब तक कितनी धन राशि मिली है..