""हमेशा याद रखना—चाहे सवाल कितनी भी बदतमीज़ी से पूछा जाए,
उसका जवाब हमेशा तमीज़ से देना।""
क्योकि......
""History will not record that question, we will record your answer.”"
उसका जवाब हमेशा तमीज़ से देना।""
क्योकि......
""History will not record that question, we will record your answer.”"
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
“History is not meant to be read from one side. This dialogue reminds us why understanding both perspectives matters more than choosing sides.”🇮🇳
राष्ट्रवाद, धर्म और एकता पर टकराव: सावरकर–शौकत अली संवाद (1925)📖✍🏻
Source:- वी डी सावरकर, सावरकर समग्र, नई दिल्ली, प्रभात प्रकाशन,2000, खंड 7, पृ. 316-24
पेज नंबर के साथ है
Must Read with an Open Mind.🙂
https://t.me/historyfact00
राष्ट्रवाद, धर्म और एकता पर टकराव: सावरकर–शौकत अली संवाद (1925)📖✍🏻
Source:- वी डी सावरकर, सावरकर समग्र, नई दिल्ली, प्रभात प्रकाशन,2000, खंड 7, पृ. 316-24
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
की एक बहुत बड़ी श्रृंखला
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NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
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2PM
8PM
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Forwarded from इतिहास ज्ञान गंगा (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
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UGC NET. इतिहास
इतिहास की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें (UGC NET/ PGT/TGT)
💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
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💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
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Forwarded from No Document No History (💃 श्री.रामसिंग राजपूत ⛳ 🧘)
अदवतय_समजशसतर_परफसर_रमशवर_मशर.pdf
7 MB
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Forwarded from No Document No History (♥️ श्री.रामसिंग राजपूत ⛳ ♥️)
06_Chapter 3-1.pdf
3.7 MB
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आधुनिक काल में वेश्याओं की संख्या में महाराष्ट्र, कर्नाटक की देवदासियों के कारण बहुत बड़ी मात्रा में वृद्धि हो गई। औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप देहातों से महानगरों की ओर काम-काज की तलाश में चले आ रहे पुरूषों के कारण वेश्याओं की वृद्धि हुई नजर आती है। नगरों में जगह की समस्या होने के कारण मनुष्य अपने परिवार को साथ नहीं रख सकता। अतः उसकी नैसर्गिक कामेच्छा की तृप्ति के लिए उसे वेश्या के पास जाना पड़ता है। इन जैसे देहातों से नगरों में आनेवाले पुरूर्षों के कारण वेश्याओं की मांग बढ़ गई। अतः कम समय में जादा-से-जादा धन कमाने की लालसा पालनेवाली नारी वेश्या व्यवसाय की ओर आकर्षित होने लगी।
वेश्यावृत्ति का मूल कारण पुरुष की काम-वासना ही मानना होगा क्योंकि घर में बीबी से लैंगिक सुख प्राप्त न होने के कारण पुरूष अन्य मार्ग की तलाश करता है। इन पुरूषों की तलाश वेश्या के पास ही आकर खत्म होती है। अतः स्पष्ट है कि स्त्री को वेश्यावृत्ति का स्वीकार करवाने के पिछे पुरूषों की काम-वासना ही है। वैसे कोई भी नारी स्वेच्छा से इस घृणित व्यवसाय को नहीं अपनाती। स्त्री को वेश्या बनने के लिए मजबूर करनेवाले कारणों में आर्थिक कारण सबसे प्रभावी है। आर्थिक दृष्टि से पराधीन नारी आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र होने के लिए वेश्यावृत्ति स्वीकारती है। नौकरी करनेवाली नारी को नौकरी पाने के लिए तथा मिली हुई नौकरी को स्थाई बनाने के लिए वेश्या की तरह अपने आधिकारियों को खुश करना पढ़ता है।
वेश्यावृत्ति के स्वरूप को ध्यान में रखकर वेश्याओं को जिन कोटि में विभाजित किया है उनमें कोठे की वेश्या का जीवन अत्यंत दीन, हीन होता है। अन्य कोटि की वेश्याओं की तरह उन्हें किसी भी प्रकार का स्वातंत्र्य नहीं होता। इन वेश्याओं के सामने वेश्या व्यवसाय करते समय अनेक कठिनाइयाँ आती हैं।
वेश्यावृत्ति को खत्म करने के लिए शासन, संस्था तथा व्यक्तिगत रूप में जितने भी प्रयास किए उनमें से किसी को भी वेश्यावृत्ति बंद करने में या वेश्या निर्मूलन करने में सफलता प्राप्त नहीं हुई। इसका कारण यह कि समाज द्वारा इन्हें घृणित समझा जाता है और उन्हें समाज किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करता। सभी वेश्याएँ धन के पिछे भागनेवाली नहीं होती उनमें से कुछ ऐसी भी होती हैं जो ग्राहकों को सही रास्ता दिखाती हैं। इससे वेश्या नारी के ऊंचे प्रतिमान का पता चलता है। प्रत्येक नारी वेश्या नहीं होती परंतु प्रत्येक वेश्या नारी होती है।
वेश्यावृत्ति का मूल कारण पुरुष की काम-वासना ही मानना होगा क्योंकि घर में बीबी से लैंगिक सुख प्राप्त न होने के कारण पुरूष अन्य मार्ग की तलाश करता है। इन पुरूषों की तलाश वेश्या के पास ही आकर खत्म होती है। अतः स्पष्ट है कि स्त्री को वेश्यावृत्ति का स्वीकार करवाने के पिछे पुरूषों की काम-वासना ही है। वैसे कोई भी नारी स्वेच्छा से इस घृणित व्यवसाय को नहीं अपनाती। स्त्री को वेश्या बनने के लिए मजबूर करनेवाले कारणों में आर्थिक कारण सबसे प्रभावी है। आर्थिक दृष्टि से पराधीन नारी आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र होने के लिए वेश्यावृत्ति स्वीकारती है। नौकरी करनेवाली नारी को नौकरी पाने के लिए तथा मिली हुई नौकरी को स्थाई बनाने के लिए वेश्या की तरह अपने आधिकारियों को खुश करना पढ़ता है।
वेश्यावृत्ति के स्वरूप को ध्यान में रखकर वेश्याओं को जिन कोटि में विभाजित किया है उनमें कोठे की वेश्या का जीवन अत्यंत दीन, हीन होता है। अन्य कोटि की वेश्याओं की तरह उन्हें किसी भी प्रकार का स्वातंत्र्य नहीं होता। इन वेश्याओं के सामने वेश्या व्यवसाय करते समय अनेक कठिनाइयाँ आती हैं।
वेश्यावृत्ति को खत्म करने के लिए शासन, संस्था तथा व्यक्तिगत रूप में जितने भी प्रयास किए उनमें से किसी को भी वेश्यावृत्ति बंद करने में या वेश्या निर्मूलन करने में सफलता प्राप्त नहीं हुई। इसका कारण यह कि समाज द्वारा इन्हें घृणित समझा जाता है और उन्हें समाज किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करता। सभी वेश्याएँ धन के पिछे भागनेवाली नहीं होती उनमें से कुछ ऐसी भी होती हैं जो ग्राहकों को सही रास्ता दिखाती हैं। इससे वेश्या नारी के ऊंचे प्रतिमान का पता चलता है। प्रत्येक नारी वेश्या नहीं होती परंतु प्रत्येक वेश्या नारी होती है।
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