प्रिय साथी परीक्षार्थियों,
यह पोस्ट किसी को समझाने या ज्ञान बाँटने के लिए नहीं है। सच कहूँ तो यह उन बातों का बोझ है जो बहुत समय से मन में दबा हुआ था।
देखा जाए तो हम सब एक ही रास्ते पर चल रहे हैं। सपने बड़े हैं, जिम्मेदारियाँ उससे भी बड़ी। दिन-रात मेहनत करने का दावा भी हम सब करते हैं। लेकिन कभी रुककर खुद से यह सवाल पूछा है—क्या हम सच में आगे बढ़ रहे हैं, या बस चलते रहने का नाटक कर रहे हैं?
आज खुद से ईमानदारी से पूछिए—
क्या आप सच में तैयारी कर रहे हैं, या बस व्यस्त दिखने की कोशिश कर रहे हैं?
आज पढ़ाई का सबसे बड़ा जरिया बना टेलीग्राम, धीरे-धीरे हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है।
✅ . व्यस्त रहने का धोखा
दिन भर क्विज़, पोल, टेस्ट, PDFs…
सुबह से रात तक मोबाइल हाथ में रहता है और दिन के अंत में एक तसल्ली होती है—“आज तो खूब पढ़ लिया।”
पर सच्चाई यह है कि हमने ज़्यादातर समय सिर्फ स्क्रीन को छुआ है, दिमाग को नहीं।
किसी क्विज़ में टॉप करना और असली परीक्षा में चयन पाना—इन दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का फर्क है।
✅ . भीड़ में खोती पहचान
हर ग्रुप में एक्टिव रहना, हर चर्चा में अपनी राय देना—यह सब देखने में तैयारी लगता है।
लेकिन NET जैसे इम्तिहानों के नतीजे साफ बताते हैं—चयन उनका नहीं होता जो सबसे ज़्यादा ऑनलाइन दिखते हैं, बल्कि उनका होता है जो खामोशी से, लगातार, किताबों के साथ जूझते हैं।
भीड़ में रहने से आत्मसंतोष मिल सकता है, चयन नहीं।
मोबाइल से थोड़ी दूरी बना के देखिए।
ग्रुप्स में आना कम करिए।
Quiz quiz खेलना बंद करे (Brna ugc net तुमको quiz bna dega)
किताब खोलिए।
और खुद के लिए लड़ना शुरू करिए।
शुभकामनाओं सहित,
आप ही जैसी एक परीक्षार्थी✅ ✨ ✌ 👍
यह पोस्ट किसी को समझाने या ज्ञान बाँटने के लिए नहीं है। सच कहूँ तो यह उन बातों का बोझ है जो बहुत समय से मन में दबा हुआ था।
देखा जाए तो हम सब एक ही रास्ते पर चल रहे हैं। सपने बड़े हैं, जिम्मेदारियाँ उससे भी बड़ी। दिन-रात मेहनत करने का दावा भी हम सब करते हैं। लेकिन कभी रुककर खुद से यह सवाल पूछा है—क्या हम सच में आगे बढ़ रहे हैं, या बस चलते रहने का नाटक कर रहे हैं?
आज खुद से ईमानदारी से पूछिए—
क्या आप सच में तैयारी कर रहे हैं, या बस व्यस्त दिखने की कोशिश कर रहे हैं?
आज पढ़ाई का सबसे बड़ा जरिया बना टेलीग्राम, धीरे-धीरे हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है।
दिन भर क्विज़, पोल, टेस्ट, PDFs…
सुबह से रात तक मोबाइल हाथ में रहता है और दिन के अंत में एक तसल्ली होती है—“आज तो खूब पढ़ लिया।”
पर सच्चाई यह है कि हमने ज़्यादातर समय सिर्फ स्क्रीन को छुआ है, दिमाग को नहीं।
किसी क्विज़ में टॉप करना और असली परीक्षा में चयन पाना—इन दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का फर्क है।
हर ग्रुप में एक्टिव रहना, हर चर्चा में अपनी राय देना—यह सब देखने में तैयारी लगता है।
लेकिन NET जैसे इम्तिहानों के नतीजे साफ बताते हैं—चयन उनका नहीं होता जो सबसे ज़्यादा ऑनलाइन दिखते हैं, बल्कि उनका होता है जो खामोशी से, लगातार, किताबों के साथ जूझते हैं।
भीड़ में रहने से आत्मसंतोष मिल सकता है, चयन नहीं।
मोबाइल से थोड़ी दूरी बना के देखिए।
ग्रुप्स में आना कम करिए।
Quiz quiz खेलना बंद करे (Brna ugc net तुमको quiz bna dega)
किताब खोलिए।
और खुद के लिए लड़ना शुरू करिए।
शुभकामनाओं सहित,
आप ही जैसी एक परीक्षार्थी
Post Credit - जिन्होंने लिखा है उनके परमीशन लेकर शेयर की गई है...✅
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
छठीं शताब्दी सा.सं.पू. में सबसे शक्तिशाली महाजनपद मगध, कोसल, वत्स और अवति थे। UGC-NET PYQ✍️
https://t.me/tikam_ambedakr00
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
कोसल महाजनपद.
कोसल का शक्तिशाली राज्य पूरब में सदानीरा (गंडक) नदी, पश्चिम में गोमती तथा दक्षिण में सर्पिका या स्यानडिक (साई) नदी तथा उत्तर में नेपाल की पहाड़ियों से घिरा हुआ था। सरयू नदी इस राज्य को उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में विभाजित करती थी। श्रावस्ती (आधुनिक साहेत-माहेत) उत्तरी कोसल की राजधानी थी तथा कुशावती दक्षिण कोसल की राजधानी थी। साकेत और अयोध्या इस राज्य के दो प्रमुख नगर थे। जिनकी राजनीतिक सहभागिता ओशय रही होगी। इसके अतिरिक्त सेतव्य, उपकठ, तथा कितागिरी अन्य छोटे नगर थे। कोसल अपने राजनीतिक विकास के क्रम में काशी को भी सम्मिलित कर लिया। एक समय में इसकी शक्ति कपिलवस्तु के शाक्यों पर भी थी तथा केशपुत्र के कलामों पर भी। प्रसेनजित जब कोसल का राजा था। तब वह बुद्ध का समकालीन था और पालि स्त्रोतों में उसकी कई बार चर्चा की गयी है।
(Question UGC-NET PYQ)
https://t.me/tikam_ambedakr00
कोसल का शक्तिशाली राज्य पूरब में सदानीरा (गंडक) नदी, पश्चिम में गोमती तथा दक्षिण में सर्पिका या स्यानडिक (साई) नदी तथा उत्तर में नेपाल की पहाड़ियों से घिरा हुआ था। सरयू नदी इस राज्य को उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में विभाजित करती थी। श्रावस्ती (आधुनिक साहेत-माहेत) उत्तरी कोसल की राजधानी थी तथा कुशावती दक्षिण कोसल की राजधानी थी। साकेत और अयोध्या इस राज्य के दो प्रमुख नगर थे। जिनकी राजनीतिक सहभागिता ओशय रही होगी। इसके अतिरिक्त सेतव्य, उपकठ, तथा कितागिरी अन्य छोटे नगर थे। कोसल अपने राजनीतिक विकास के क्रम में काशी को भी सम्मिलित कर लिया। एक समय में इसकी शक्ति कपिलवस्तु के शाक्यों पर भी थी तथा केशपुत्र के कलामों पर भी। प्रसेनजित जब कोसल का राजा था। तब वह बुद्ध का समकालीन था और पालि स्त्रोतों में उसकी कई बार चर्चा की गयी है।
(Question UGC-NET PYQ)
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
1942 के आंदोलन के लिए sujhaye gye kuch नारे / शब्द :Get Out,Retreat India' और 'Withdraw India'.क्विट इंडिया
अंग्रेज़ों को दी जाने वाली अंतिम चेतावनी जोश से भरी हुई होनी चाहिए थी. इसलिए ही महात्मा गांधी कई लोगों से सलाह ली ताकि ऐसा नारा दिया जा सके जिसमें प्रतिबद्धता दिखे. इसके बाद कई लोगों ने अपने विचार रखे.
इनमें से एक विचार था '
Get Out'
लेकिन इसमें एक तरह की बदतमीज़ी भी थी इसलिए गांधी ने इस विचार को खारिज कर दिया.
फिर सरदार पटेल ने दो नारे सुझाए '
Retreat India' और 'Withdraw India'.
हालांकि इन्हें भी बहुत पसंद नहीं किया गया.
इसी बीच यूसुफ़ महर अली ने '
क्विट इंडिया'
का सुझाव दिया और महात्मा गांधी ने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया. इससे पहले जब साइमन आयोग के ख़िलाफ़ आंदोलन हुआ था तब यूसुफ़ महर अली ने ही 'साइमन गो बैक' का नारा दिया था.
इस दौर में यूसुफ़ महर अली कांग्रेस के सक्रिय सदस्य थे. वो कांग्रेस के समाजवादी विचारधारा वाले नेताओं में प्रमुख नेता थे. वो मुंबई शहर के मेयर भी थे जहां इस ऐतिहासिक आंदोलन की घोषणा हुई थी.
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Ghatna_Chakra_Ancient_History_NCERT_Class_6_12_Hindi_Medium_2024.pdf
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NCERT_सार_भाग_2_मध्यकालीन_इतिहास_2025_S_E_Book@ParikshaPlanner_pdf.pdf
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NCERT_सार_भाग_3_आधुनिक_इतिहास_2025_S_E_Book@ParikshaPlanner_pdf.pdf
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NCERT_सार_कला_एवं_संस्कृति_भाग_4_2025_25124_S_E_book_combined@ParikshaPlanner.pdf
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Ghatna_Chakra_NCERT_Summary_Part_5_ECONOMICS_Book_2024_Hindi_Medium.pdf
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NCERT_सार_पर्यावरण_भाग_6_2024_24126_S_E_Book_combined_1.pdf
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