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7 फरवरी 1856–
अवध के नवाब वाजिद अली शाह ने अपने राज्य का ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में शांतिपूर्ण विलय कर दिया।
अवध के नवाब वाजिद अली शाह ने अपने राज्य का ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में शांतिपूर्ण विलय कर दिया।
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No Document No History
7 फरवरी 1856– अवध के नवाब वाजिद अली शाह ने अपने राज्य का ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में शांतिपूर्ण विलय कर दिया।
बहुत-बहुत धन्यवाद जी आपका,
ऐसे ऐतिहासिक फैक्ट भेजते रहिए✅ ✨
ऐसे ऐतिहासिक फैक्ट भेजते रहिए
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7 फरवरी 1942–
स्वतंत्रता सेनानी और 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' के संस्थापक सचिंद्रनाथ सान्याल का निधन 👏📖✍️
स्वतंत्रता सेनानी और 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' के संस्थापक सचिंद्रनाथ सान्याल का निधन 👏📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
सचिंद्र सान्याल और जवाहर लाल नेहरू 📖✍️
https://t.me/historyfact00
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🔥1
Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
प्रिय दोस्तों,
नेट के लिए इम्पॉटेंट बुक....
प्राचीन भारत -
पप्पुसिंह प्रजापत जी / सौरभ चौबे जी(दोनो मै से कोई भी एक फ़ॉलो करे.)
(पप्पुसिंह प्रजापत सर की बहुत डीपली है...उसको पढोगे तो इतिहास/ इंडियन कल्चर/अर्चियोलॉजी तीनो मै काफी लाभ मिलेगा..
मध्य कालीन भारत -
पप्पुसिंह प्रजापत जी / सौरभ चौबे जी( पप्पुसिंह प्रजापत जी इनकी अभी एक न्यू बूक् आयी है उसमे पुरा मध्यकाल अच्छे से कवर कर दिया है...)
आधुनिक भारत -
आरविंद् जी भास्कर और परीक्षा वाणी करो...सबसे अच्छी बुक यही है,इनको ही पढ़े...
वस्तुनिष्ट बुक
-
१ पप्पुसिंह प्रजापत जी (बेस्ट बुक है)
२ रवि कूलरिया जी (इनकी भी प्राचीन,मध्यकाल और आधुनिक बहुत बढ़िया बुक आयी है)
३. आधुनिक भारत वस्तुनिष्ट - आरविंद भास्कर जी
४. इतिहास लेखन अथवा दर्शन - पप्पू सिंह प्रजापत जी
भारतीय इतिहास (आरम्भ से आजादी तक) - मूल्य - 580 rs✅
यह एक गाइड बुक है...अगर आप बाकी कोई बुक नही पढना चाहते तो इसको भी ऑप्शन मै रख सकते हो,⭐️ 🍎
कम किताबे सेलेक्ट करो और बार बार पढो....
.
मार्केट में बहुत सारी वस्तुनिष्ठ किताबे है आप जितनी प्रैक्टिस करोगे उतना अच्छा रहेगा.
..
विशेष सूचना...आप एक साथ सभी बुक नही पढ़ सकते है... सिलेक्टेड पढ़े,.. सभी लेखक अच्छे होते है सिर्फ़ मैटर बुक मै कम ज्यादा रहता है....
विशेष सूचना - इतिहास से संबधित सभी बुक रिव्यु देखने के लिए आप श्री.रवी कूलरिया जी इनका यू tube चैनल को फ़ॉलो करे....लिंक
https://youtube.com/@360history?si=XJz5STJ8HX0FTwMt
https://t.me/Ramsing2023
श्री.रामसिंग राजपूत
8 Th नेट इन History
(JRF - History & Indian Culture)
छत्रपति संभाजी नगर महाराष्ट्र
मो न 8605529729 व्हाट्सअप
छावा...
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
अगर कम समय मै नेट jrf चाहिए तो यह बुक फ़ॉलो करो,💖
ज्ञान और रिजल्ट दोनो मिल जाएगा...👍
उसको खरीद कर 3 बार पढ़ लो...इतिहास मै 70+ स्कोर पक्का हो जायेगा....✅✅✅
चैनेल मै बहुत बार बुक बता दी गई है...😪
बार बार सिर्फ़ किताबे पूछने मै समय न खराब करे...🌺
https://t.me/Ramsing2023
ज्ञान और रिजल्ट दोनो मिल जाएगा...
अगर केवल एक ही गाइड पढना है तो श्री.पप्पुसिंह प्रजापत सर की अभी न्यू आई है....💗
उसको खरीद कर 3 बार पढ़ लो...इतिहास मै 70+ स्कोर पक्का हो जायेगा....✅✅✅
चैनेल मै बहुत बार बुक बता दी गई है...
बार बार सिर्फ़ किताबे पूछने मै समय न खराब करे...
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No Document No History pinned «प्रिय दोस्तों, नेट के लिए इम्पॉटेंट बुक.... प्राचीन भारत - पप्पुसिंह प्रजापत जी / सौरभ चौबे जी(दोनो मै से कोई भी एक फ़ॉलो करे.) (पप्पुसिंह प्रजापत सर की बहुत डीपली है...उसको पढोगे तो इतिहास/ इंडियन कल्चर/अर्चियोलॉजी तीनो मै काफी लाभ मिलेगा..⭐️ ) मध्य…»
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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बेलगाँव कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी जी ने क्रांतिकारियों की जो आलोचना की थी। उसके प्रत्युत्तर में शचींद्र ने महात्मा गांधी को एक पत्र लिखा। शचीन्द्र गांधीजी के धीरे-धीरे करके स्वतन्त्रता प्राप्त करने की नीति की बड़ी आलोचना करते थे। गांधी जी ने यंग इंडिया के 12 फ़रवरी 1925 के अंक में इस पत्र को ज्यों का त्यों प्रकाशित कर दिया और साथ ही अपना उत्तर भी।
लगभग इसी समय सूर्य कुमार सेन के नेतृत्व में चटगाँव दल का, शचीन्द्र के प्रयत्न से, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से संबंध हो गया। शचींद्र बंगाल आर्डिनेंस के अधीन गिरफ्तार कर लिए गए। उनकी गिरफ्तारी के पहले 'दि रिवोलूशनरी' नाम का पर्चा पंजाब से लेकर वर्मा तक बँटा। इस पर्चे के लेखक और प्रकाशक के रूप में बाँकुड़ा में शचींद्र पर मुकदमा चला और राजद्रोह के अपराध में उन्हें दो वर्ष के कारावास का दंड मिला। कैद की हालत में ही वे काकोरी काण्ड में शामिल किए गए और संगठन के प्रमुख नेता के रूप में उन्हें पुनः अप्रैल, 1927 में आजन्म कारावास की सजा दी गई।
1937 में संयुक्त प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल की स्थापना के बाद अन्य क्रांतिकारियों के साथ वे रिहा किए गए। रिहा होने पर कुछ दिनों वे कांग्रेस के प्रतिनिधि थे, परन्तु बाद को वे फारवर्ड ब्लाक में शामिल हुए। इसी समय काशी में उन्होंने 'अग्रगामी' नाम से एक दैनिक पत्र निकाला। वह स्वयं इस पत्र के संपादक थे। द्वितीय महायुद्ध छिड़ने के कोई साल भर बाद 1940 में उन्हें पुनः नजरबंद कर राजस्थान के देवली शिविर में भेज दिया गया। उनकी बनारस की सम्पत्ति भी अंग्रेजों ने जब्त कर ली। वहाँ यक्ष्मा रोग (टीबी) से आक्रान्त होने पर इलाज के लिए उन्हें रिहा कर दिया गया। परन्तु बीमारी बढ़ गई और 7 फरवरी 1942 को उनकी मृत्यु हो गई।
https://t.me/historyfact00
लगभग इसी समय सूर्य कुमार सेन के नेतृत्व में चटगाँव दल का, शचीन्द्र के प्रयत्न से, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से संबंध हो गया। शचींद्र बंगाल आर्डिनेंस के अधीन गिरफ्तार कर लिए गए। उनकी गिरफ्तारी के पहले 'दि रिवोलूशनरी' नाम का पर्चा पंजाब से लेकर वर्मा तक बँटा। इस पर्चे के लेखक और प्रकाशक के रूप में बाँकुड़ा में शचींद्र पर मुकदमा चला और राजद्रोह के अपराध में उन्हें दो वर्ष के कारावास का दंड मिला। कैद की हालत में ही वे काकोरी काण्ड में शामिल किए गए और संगठन के प्रमुख नेता के रूप में उन्हें पुनः अप्रैल, 1927 में आजन्म कारावास की सजा दी गई।
1937 में संयुक्त प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल की स्थापना के बाद अन्य क्रांतिकारियों के साथ वे रिहा किए गए। रिहा होने पर कुछ दिनों वे कांग्रेस के प्रतिनिधि थे, परन्तु बाद को वे फारवर्ड ब्लाक में शामिल हुए। इसी समय काशी में उन्होंने 'अग्रगामी' नाम से एक दैनिक पत्र निकाला। वह स्वयं इस पत्र के संपादक थे। द्वितीय महायुद्ध छिड़ने के कोई साल भर बाद 1940 में उन्हें पुनः नजरबंद कर राजस्थान के देवली शिविर में भेज दिया गया। उनकी बनारस की सम्पत्ति भी अंग्रेजों ने जब्त कर ली। वहाँ यक्ष्मा रोग (टीबी) से आक्रान्त होने पर इलाज के लिए उन्हें रिहा कर दिया गया। परन्तु बीमारी बढ़ गई और 7 फरवरी 1942 को उनकी मृत्यु हो गई।
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