Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
अगर कम समय मै नेट jrf चाहिए तो यह बुक फ़ॉलो करो,💖
ज्ञान और रिजल्ट दोनो मिल जाएगा...👍
उसको खरीद कर 3 बार पढ़ लो...इतिहास मै 70+ स्कोर पक्का हो जायेगा....✅✅✅
चैनेल मै बहुत बार बुक बता दी गई है...😪
बार बार सिर्फ़ किताबे पूछने मै समय न खराब करे...🌺
https://t.me/Ramsing2023
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अगर केवल एक ही गाइड पढना है तो श्री.पप्पुसिंह प्रजापत सर की अभी न्यू आई है....💗
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No Document No History pinned «प्रिय दोस्तों, नेट के लिए इम्पॉटेंट बुक.... प्राचीन भारत - पप्पुसिंह प्रजापत जी / सौरभ चौबे जी(दोनो मै से कोई भी एक फ़ॉलो करे.) (पप्पुसिंह प्रजापत सर की बहुत डीपली है...उसको पढोगे तो इतिहास/ इंडियन कल्चर/अर्चियोलॉजी तीनो मै काफी लाभ मिलेगा..⭐️ ) मध्य…»
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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बेलगाँव कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी जी ने क्रांतिकारियों की जो आलोचना की थी। उसके प्रत्युत्तर में शचींद्र ने महात्मा गांधी को एक पत्र लिखा। शचीन्द्र गांधीजी के धीरे-धीरे करके स्वतन्त्रता प्राप्त करने की नीति की बड़ी आलोचना करते थे। गांधी जी ने यंग इंडिया के 12 फ़रवरी 1925 के अंक में इस पत्र को ज्यों का त्यों प्रकाशित कर दिया और साथ ही अपना उत्तर भी।
लगभग इसी समय सूर्य कुमार सेन के नेतृत्व में चटगाँव दल का, शचीन्द्र के प्रयत्न से, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से संबंध हो गया। शचींद्र बंगाल आर्डिनेंस के अधीन गिरफ्तार कर लिए गए। उनकी गिरफ्तारी के पहले 'दि रिवोलूशनरी' नाम का पर्चा पंजाब से लेकर वर्मा तक बँटा। इस पर्चे के लेखक और प्रकाशक के रूप में बाँकुड़ा में शचींद्र पर मुकदमा चला और राजद्रोह के अपराध में उन्हें दो वर्ष के कारावास का दंड मिला। कैद की हालत में ही वे काकोरी काण्ड में शामिल किए गए और संगठन के प्रमुख नेता के रूप में उन्हें पुनः अप्रैल, 1927 में आजन्म कारावास की सजा दी गई।
1937 में संयुक्त प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल की स्थापना के बाद अन्य क्रांतिकारियों के साथ वे रिहा किए गए। रिहा होने पर कुछ दिनों वे कांग्रेस के प्रतिनिधि थे, परन्तु बाद को वे फारवर्ड ब्लाक में शामिल हुए। इसी समय काशी में उन्होंने 'अग्रगामी' नाम से एक दैनिक पत्र निकाला। वह स्वयं इस पत्र के संपादक थे। द्वितीय महायुद्ध छिड़ने के कोई साल भर बाद 1940 में उन्हें पुनः नजरबंद कर राजस्थान के देवली शिविर में भेज दिया गया। उनकी बनारस की सम्पत्ति भी अंग्रेजों ने जब्त कर ली। वहाँ यक्ष्मा रोग (टीबी) से आक्रान्त होने पर इलाज के लिए उन्हें रिहा कर दिया गया। परन्तु बीमारी बढ़ गई और 7 फरवरी 1942 को उनकी मृत्यु हो गई।
https://t.me/historyfact00
लगभग इसी समय सूर्य कुमार सेन के नेतृत्व में चटगाँव दल का, शचीन्द्र के प्रयत्न से, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से संबंध हो गया। शचींद्र बंगाल आर्डिनेंस के अधीन गिरफ्तार कर लिए गए। उनकी गिरफ्तारी के पहले 'दि रिवोलूशनरी' नाम का पर्चा पंजाब से लेकर वर्मा तक बँटा। इस पर्चे के लेखक और प्रकाशक के रूप में बाँकुड़ा में शचींद्र पर मुकदमा चला और राजद्रोह के अपराध में उन्हें दो वर्ष के कारावास का दंड मिला। कैद की हालत में ही वे काकोरी काण्ड में शामिल किए गए और संगठन के प्रमुख नेता के रूप में उन्हें पुनः अप्रैल, 1927 में आजन्म कारावास की सजा दी गई।
1937 में संयुक्त प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल की स्थापना के बाद अन्य क्रांतिकारियों के साथ वे रिहा किए गए। रिहा होने पर कुछ दिनों वे कांग्रेस के प्रतिनिधि थे, परन्तु बाद को वे फारवर्ड ब्लाक में शामिल हुए। इसी समय काशी में उन्होंने 'अग्रगामी' नाम से एक दैनिक पत्र निकाला। वह स्वयं इस पत्र के संपादक थे। द्वितीय महायुद्ध छिड़ने के कोई साल भर बाद 1940 में उन्हें पुनः नजरबंद कर राजस्थान के देवली शिविर में भेज दिया गया। उनकी बनारस की सम्पत्ति भी अंग्रेजों ने जब्त कर ली। वहाँ यक्ष्मा रोग (टीबी) से आक्रान्त होने पर इलाज के लिए उन्हें रिहा कर दिया गया। परन्तु बीमारी बढ़ गई और 7 फरवरी 1942 को उनकी मृत्यु हो गई।
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Forwarded from Pooja Pandey
सैनिकों को वेतन दिलाने की प्रशासनिक ज़िम्मेदारी = वज़ीर
👉 सैनिकों की भर्ती, रिकॉर्ड और निरीक्षण = आरिज-ए-मुमालिक
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No Document No History
इतिहास के प्रश्न भेजिए..
ठीक है थोडी देर मे भेजते हैं
https://t.me/+nqCH8jHzE905OGRl
NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
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Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ: (history)
Group admin: @tikam_ambedkar (JRF-90AIR)
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
गांधी–स्मटस समझौता 1914 और इंडियन रिलीफ एक्ट–
1. पृष्ठभूमि– गांधी 1893 से दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।ट्रांसवाल और नेटाल में भारतीयों पर कई भेदभावपूर्ण कानून लागू थे
1906 से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया लंबे संघर्ष,जेल यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सरकार वार्ता को तैयार हुई
2. गांधी–स्मटस समझौता
यह समझौता गांधी और दक्षिण अफ्रीका के गृह मंत्री जनरल जान क्रिश्चियन स्मटस के बीच हुआ यह समझौता भारतीय सत्याग्रहियों की जीत माना जाता है समझौते के बाद भारतीयों का आंदोलन स्थगित कर दिया गया
3. समझौते की मुख्य शर्तें
भारतीयों पर लगाया गया £3 का अपमानजनक कर समाप्त किया गया भारतीय विवाहों को कानूनी मान्यता दी गई पहले से पंजीकृत भारतीयों को नए पंजीकरण प्रमाण-पत्र लेने की बाध्यता समाप्त की गई भारतीयों को अवैध प्रवासी मानकर प्रताड़ित करने की नीति में ढील दी गई
4. इंडियन रिलीफ एक्ट 1914
गांधी–स्मटस समझौते को लागू करने के लिए 1914 में इंडियन रिलीफ एक्ट पारित किया गया इसे दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संघर्ष की सबसे बड़ी कानूनी सफलता माना जाता है
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1. पृष्ठभूमि– गांधी 1893 से दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।ट्रांसवाल और नेटाल में भारतीयों पर कई भेदभावपूर्ण कानून लागू थे
1906 से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया लंबे संघर्ष,जेल यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सरकार वार्ता को तैयार हुई
2. गांधी–स्मटस समझौता
यह समझौता गांधी और दक्षिण अफ्रीका के गृह मंत्री जनरल जान क्रिश्चियन स्मटस के बीच हुआ यह समझौता भारतीय सत्याग्रहियों की जीत माना जाता है समझौते के बाद भारतीयों का आंदोलन स्थगित कर दिया गया
3. समझौते की मुख्य शर्तें
भारतीयों पर लगाया गया £3 का अपमानजनक कर समाप्त किया गया भारतीय विवाहों को कानूनी मान्यता दी गई पहले से पंजीकृत भारतीयों को नए पंजीकरण प्रमाण-पत्र लेने की बाध्यता समाप्त की गई भारतीयों को अवैध प्रवासी मानकर प्रताड़ित करने की नीति में ढील दी गई
4. इंडियन रिलीफ एक्ट 1914
गांधी–स्मटस समझौते को लागू करने के लिए 1914 में इंडियन रिलीफ एक्ट पारित किया गया इसे दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संघर्ष की सबसे बड़ी कानूनी सफलता माना जाता है
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