Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
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No Document No History:
30History
Uphesc Assistant Professor history syllabus
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Uphesc gs syllabus Assistant Professor exam✅ 👍 👍 👍 👍 2022✅
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किसी ने बहुत सही कहा है: अगर आप किताब से पढ़ाई करेंगे तो आपको नींद आ जाएगी।
और अगर जीवन आपको कुछ सिखाता है, तो आपकी नींद उड़ जाती है,
क्योंकि अनुभव के सबक किसी पन्ने पर लिखे नहीं होते..!
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No Document No History
https://youtu.be/POSqmsH4ZnU?si=lURLRlMD3MYnM-Ov
ढाई करोड़ का जुर्माना (मानहानि) लग गया इस वीडियो के कारण
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
• जन्म: 7 मई 1861, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
• मृत्यु: 7 अगस्त 1941
• वे 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बने।
• उनकी प्रसिद्ध कृति “गीतांजलि” है, जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला।
गीतांजलि (अंग्रेज़ी संस्करण, 1912) की भूमिका प्रसिद्ध आयरिश कवि डब्ल्यू. बी. यीट्स (W. B. Yeats) ने लिखी थी।
रवीन्द्रनाथ टैगोर और डब्ल्यू. बी. यीट्स की मुलाकात 1912 में लंदन में हुई थी।
जब टैगोर गीतांजलि का अंग्रेज़ी अनुवाद लेकर इंग्लैंड गए, तो वहाँ प्रसिद्ध चित्रकार विलियम रोथेनस्टीन ने उनकी कविताएँ पढ़ीं और प्रभावित होकर उन्हें साहित्यकारों से मिलवाया। रोथेनस्टीन ने ही टैगोर की कविताएँ यीट्स को दिखाईं।
टैगोर ने कविता, उपन्यास, नाटक, कहानियाँ और गीत लिखे। उनके साहित्य में मानवता, प्रकृति-प्रेम, राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता की झलक मिलती है।
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• मृत्यु: 7 अगस्त 1941
• वे 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बने।
• उनकी प्रसिद्ध कृति “गीतांजलि” है, जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला।
गीतांजलि (अंग्रेज़ी संस्करण, 1912) की भूमिका प्रसिद्ध आयरिश कवि डब्ल्यू. बी. यीट्स (W. B. Yeats) ने लिखी थी।
रवीन्द्रनाथ टैगोर और डब्ल्यू. बी. यीट्स की मुलाकात 1912 में लंदन में हुई थी।
जब टैगोर गीतांजलि का अंग्रेज़ी अनुवाद लेकर इंग्लैंड गए, तो वहाँ प्रसिद्ध चित्रकार विलियम रोथेनस्टीन ने उनकी कविताएँ पढ़ीं और प्रभावित होकर उन्हें साहित्यकारों से मिलवाया। रोथेनस्टीन ने ही टैगोर की कविताएँ यीट्स को दिखाईं।
टैगोर ने कविता, उपन्यास, नाटक, कहानियाँ और गीत लिखे। उनके साहित्य में मानवता, प्रकृति-प्रेम, राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता की झलक मिलती है।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
पहली बार संविधान का दर्शन
पहली बार संविधान का दर्शन तिलक के स्वराज विधेयक में हुआ।(1895)
Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖)
ITIHAS_JUNCTION
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🚩 महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी की 202वीं जयंती पर नमन 🚩
आज 12 फरवरी, 2026 को महान समाज सुधारक, दार्शनिक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 202वीं जन्म जयंती है।
📝 संक्षिप्त परिचय (Exam Key Points):
🔹 मूल नाम: मूलशंकर तिवारी
🔹 जन्म: 12 फरवरी, 1824 (टंकारा, गुजरात)
🔹 संस्था: आर्य समाज (स्थापना: 1875, मुंबई)
🔹 प्रसिद्ध नारा: "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas)
🔹 प्रमुख कृति: सत्यार्थ प्रकाश
💡 राष्ट्र और समाज को अमूल्य योगदान:
1️⃣ सामाजिक सुधार:
उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह, सती प्रथा और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। वे महिला शिक्षा और विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे।
2️⃣ स्वराज के प्रथम प्रणेता:
इतिहास में यह दर्ज है कि सबसे पहले 'स्वराज' शब्द का उपयोग स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने ही किया था। इसी विचार को बाद में लोकमान्य तिलक और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने आगे बढ़ाया।
3️⃣ वेदों का ज्ञान:
उनका मानना था कि भारत की सभी समस्याओं का समाधान वेदों में निहित है। उन्होंने अज्ञानता को दूर करने और वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
📌 निष्कर्ष:
स्वामी जी के विचार 19वीं सदी में जितने प्रभावशाली थे, आज 21वीं सदी में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी पुस्तक 'सत्यार्थ प्रकाश' आज भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक प्रमुख मार्गदर्शिका है।
आइये, हम उनके आदर्शों को अपनाकर एक उन्नत समाज का निर्माण करें।
✍️ @Itihaas_Junction
आज 12 फरवरी, 2026 को महान समाज सुधारक, दार्शनिक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 202वीं जन्म जयंती है।
📝 संक्षिप्त परिचय (Exam Key Points):
🔹 मूल नाम: मूलशंकर तिवारी
🔹 जन्म: 12 फरवरी, 1824 (टंकारा, गुजरात)
🔹 संस्था: आर्य समाज (स्थापना: 1875, मुंबई)
🔹 प्रसिद्ध नारा: "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas)
🔹 प्रमुख कृति: सत्यार्थ प्रकाश
💡 राष्ट्र और समाज को अमूल्य योगदान:
1️⃣ सामाजिक सुधार:
उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह, सती प्रथा और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। वे महिला शिक्षा और विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे।
2️⃣ स्वराज के प्रथम प्रणेता:
इतिहास में यह दर्ज है कि सबसे पहले 'स्वराज' शब्द का उपयोग स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने ही किया था। इसी विचार को बाद में लोकमान्य तिलक और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने आगे बढ़ाया।
3️⃣ वेदों का ज्ञान:
उनका मानना था कि भारत की सभी समस्याओं का समाधान वेदों में निहित है। उन्होंने अज्ञानता को दूर करने और वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
📌 निष्कर्ष:
स्वामी जी के विचार 19वीं सदी में जितने प्रभावशाली थे, आज 21वीं सदी में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी पुस्तक 'सत्यार्थ प्रकाश' आज भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक प्रमुख मार्गदर्शिका है।
आइये, हम उनके आदर्शों को अपनाकर एक उन्नत समाज का निर्माण करें।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
1857 का विद्रोह चर्बी लगे कारतूसों के विरोध से आरम्भ हुआ, जो मेरठ से फैलकर दिल्ली, अवध, मध्य भारत और बिहार तक पहुँच गया। इसमें सैनिकों के साथ-साथ असैनिक जनता ने भी भाग लिया। 1858 तक अंग्रेज़ों ने एक-एक क्षेत्र पर पुनः अधिकार कर लिया और अंततः पूरे भारत में अपनी सत्ता पुनः स्थापित कर ली।
1857–58 के विद्रोह का कालक्रम (index) देता है, जो परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें तिथि, स्थान और घटनाओं का सही क्रम मिलता है, जिससे chronology, MCQ और short questions सीधे पूछे जाते हैं।📝📒
https://t.me/historyfact00
1857–58 के विद्रोह का कालक्रम (index) देता है, जो परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें तिथि, स्थान और घटनाओं का सही क्रम मिलता है, जिससे chronology, MCQ और short questions सीधे पूछे जाते हैं।📝📒
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