Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
डॉ. बी. आर. आंबेडकर और बौद्ध धर्म :
1907— बुद्ध के जीवन से परिचय: विद्यार्थी जीवन में शिक्षक कृष्णाजी अर्जुन केलुसकर ने आंबेडकर को गौतम बुद्ध के जीवन पर लिखी अपनी पुस्तक भेंट की।
13 oct 1935—येवला सम्मेलन: आंबेडकर ने घोषणा की कि वे हिंदू के रूप में जन्मे हैं, लेकिन हिंदू के रूप में मृत्यु नहीं प्राप्त करेंगे। उस समय उन्होंने किसी विशेष धर्म को अंतिम रूप से नहीं चुना था।
1950—बौद्ध धर्म में रुचि: बौद्ध धर्म पर भाषण दिए तथा मई में श्रीलंका के कोलंबो जाकर बौद्ध जगत से संपर्क बढ़ाया।
1954—धर्मांतरण की योजना: बौद्ध धर्म पर पुस्तक लिखने और उसके पूरा होने के बाद धर्म ग्रहण करने की योजना व्यक्त की।
1955—भारतीय बौद्ध महासभा: बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार एवं संगठनात्मक विकास के लिए इसकी स्थापना की।
1956—The Buddha and His Dhamma: बौद्ध दर्शन पर पुस्तक की पांडुलिपि पूरी की।
14 oct 1956—नागपुर में धर्मांतरण: विजयादशमी के दिन भदंत चंद्रमणि महास्थवीर से दीक्षा लेकर बौद्ध धर्म अपनाया। इसके बाद पत्नी सविता आंबेडकर और बड़ी संख्या में अनुयायियों ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया।
https://t.me/historyfact00
1907— बुद्ध के जीवन से परिचय: विद्यार्थी जीवन में शिक्षक कृष्णाजी अर्जुन केलुसकर ने आंबेडकर को गौतम बुद्ध के जीवन पर लिखी अपनी पुस्तक भेंट की।
13 oct 1935—येवला सम्मेलन: आंबेडकर ने घोषणा की कि वे हिंदू के रूप में जन्मे हैं, लेकिन हिंदू के रूप में मृत्यु नहीं प्राप्त करेंगे। उस समय उन्होंने किसी विशेष धर्म को अंतिम रूप से नहीं चुना था।
1950—बौद्ध धर्म में रुचि: बौद्ध धर्म पर भाषण दिए तथा मई में श्रीलंका के कोलंबो जाकर बौद्ध जगत से संपर्क बढ़ाया।
1954—धर्मांतरण की योजना: बौद्ध धर्म पर पुस्तक लिखने और उसके पूरा होने के बाद धर्म ग्रहण करने की योजना व्यक्त की।
1955—भारतीय बौद्ध महासभा: बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार एवं संगठनात्मक विकास के लिए इसकी स्थापना की।
1956—The Buddha and His Dhamma: बौद्ध दर्शन पर पुस्तक की पांडुलिपि पूरी की।
14 oct 1956—नागपुर में धर्मांतरण: विजयादशमी के दिन भदंत चंद्रमणि महास्थवीर से दीक्षा लेकर बौद्ध धर्म अपनाया। इसके बाद पत्नी सविता आंबेडकर और बड़ी संख्या में अनुयायियों ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया।
https://t.me/historyfact00
👏1🙏1
Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
🔸राखलदास बनर्जी और माधो सरूप वत्स की जयंती पर, एएसआई उन अग्रदूतों को याद करता है जिन्होंने भारतीय पुरातत्व की विरासत को आकार दिया।
🔸हम पुरातत्व के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को नमन करते हैं।
🔸यह एक स्मरण है कि पुरातत्व आज जिस मुकाम पर है, वह ऐसे स्वदेशी दिग्गजों के कारण ही संभव हो पाया है, जिनकी लगन विद्वानों और उत्साही लोगों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।
🔸हम पुरातत्व के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को नमन करते हैं।
🔸यह एक स्मरण है कि पुरातत्व आज जिस मुकाम पर है, वह ऐसे स्वदेशी दिग्गजों के कारण ही संभव हो पाया है, जिनकी लगन विद्वानों और उत्साही लोगों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।
🤣2❤1🔥1
No Document No History
Join for...Political science quiz 9.30 pm Topic--- मौलिक अधिकार https://t.me/+7dfjQXgz3Z82YTE9
कुछ लोग पॉलिटिकल साइंस के ग्रुप की डिमांड कर रहे थे ज्वाइन कर ले वो सब
Uppcs TGT PGT वाले
Uppcs TGT PGT वाले
❤2🤣2
संविधान और अनुच्छेद 32 पर महत्त्वपूर्ण कथन–
आंबेडकर ने संविधान सभा में अनुच्छेद 32 के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि उनसे संविधान के किसी एक अनुच्छेद को सबसे महत्त्वपूर्ण बताने के लिए कहा जाए, तो वे अनुच्छेद 32 का उल्लेख करेंगे।
कब कहा: 9 दिसंबर 1948 को संविधान सभा में अनुच्छेद 32 पर चर्चा के दौरान।
संदर्भ: अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
महत्त्व: इसे आंबेडकर के संवैधानिक विचारों के प्रमुख उदाहरणों में गिना जाता है।
https://t.me/historyfact00
आंबेडकर ने संविधान सभा में अनुच्छेद 32 के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि उनसे संविधान के किसी एक अनुच्छेद को सबसे महत्त्वपूर्ण बताने के लिए कहा जाए, तो वे अनुच्छेद 32 का उल्लेख करेंगे।
कब कहा: 9 दिसंबर 1948 को संविधान सभा में अनुच्छेद 32 पर चर्चा के दौरान।
संदर्भ: अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
महत्त्व: इसे आंबेडकर के संवैधानिक विचारों के प्रमुख उदाहरणों में गिना जाता है।
https://t.me/historyfact00
❤1👍1🔥1👏1
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs)
मनोवैज्ञानिक जीवनी-लेखन (Psychobiography)
मनोविश्लेषक एरिक एरिकसन की पुस्तक 'Gandhi's Truth' आधुनिक भारतीय इतिहास के संदर्भ में मनोवैज्ञानिक जीवनी-लेखन
(मनो-इतिहास) का सर्वोत्तम उदाहरण मानी जाती है।
🔥2❤1
No Document No History
B.L.Grover ,A.m.,y.part 1.pdf
Save kr lo sabhi,
Baad main delete kar dena,
Ye copy right wali book hain
Baad main delete kar dena,
Ye copy right wali book hain
प्राचीन भारत के जितने भी क्विज है जो भी एडमिन लोग अपने ग्रुप में क्विज करवाते हैं वो हम पर भेज देंगे तो बहुत बड़ी कृपा होगी
सबको फ्री में pdf देते हैं
सबको फ्री में pdf देते हैं
🤣4❤2🍓1
🤣3
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📰बिपिन चंद्र पाल की पत्रिका New India ने लॉर्ड कर्जन और लॉर्ड रिपन की नीतियों की तुलना की थी।
लॉर्ड रिपन: भारतीयों को धीरे-धीरे स्वशासन (Self-government) की ओर ले जाना चाहता था।
लॉर्ड कर्जन: भारत में ऐसी सरकार सुनिश्चित करना चाहता था जो ब्रिटिश सरकार के हितों के अनुसार काम करे।
👉🏻New India ने 15 जुलाई 1905 को कर्जन के उन प्रयासों की आलोचना की जिनका उद्देश्य जनता और शिक्षित मध्यम वर्ग के बीच एक मज़बूत राजनीतिक एकता बनने से रोकना था
📌कर्जन की विदेश नीति
कर्जन का प्रमुख उद्देश्य भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की सुरक्षा और मध्य एशिया में रूसी प्रभाव को सीमित करना था।
1903–1904 का तिब्बत अभियान: फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में ब्रिटिश अभियान ल्हासा पहुँचा।
1904 की ल्हासा संधि: तिब्बत के साथ व्यापार संबंधी समझौता हुआ; ब्रिटेन ने व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त कीं और चुंबी घाटी पर जुर्माने की अदायगी से जुड़ा कब्ज़ा किया।
1907 का एंग्लो-रूसी कन्वेंशन: ब्रिटेन और रूस के बीच फारस, अफगानिस्तान तथा तिब्बत से संबंधित प्रभाव-क्षेत्रों और संबंधों को लेकर समझौता हुआ।
https://t.me/historyfact00
लॉर्ड रिपन: भारतीयों को धीरे-धीरे स्वशासन (Self-government) की ओर ले जाना चाहता था।
लॉर्ड कर्जन: भारत में ऐसी सरकार सुनिश्चित करना चाहता था जो ब्रिटिश सरकार के हितों के अनुसार काम करे।
👉🏻New India ने 15 जुलाई 1905 को कर्जन के उन प्रयासों की आलोचना की जिनका उद्देश्य जनता और शिक्षित मध्यम वर्ग के बीच एक मज़बूत राजनीतिक एकता बनने से रोकना था
📌कर्जन की विदेश नीति
कर्जन का प्रमुख उद्देश्य भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की सुरक्षा और मध्य एशिया में रूसी प्रभाव को सीमित करना था।
1903–1904 का तिब्बत अभियान: फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में ब्रिटिश अभियान ल्हासा पहुँचा।
1904 की ल्हासा संधि: तिब्बत के साथ व्यापार संबंधी समझौता हुआ; ब्रिटेन ने व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त कीं और चुंबी घाटी पर जुर्माने की अदायगी से जुड़ा कब्ज़ा किया।
1907 का एंग्लो-रूसी कन्वेंशन: ब्रिटेन और रूस के बीच फारस, अफगानिस्तान तथा तिब्बत से संबंधित प्रभाव-क्षेत्रों और संबंधों को लेकर समझौता हुआ।
https://t.me/historyfact00
❤2👏1