Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
कांग्रेस के 1889 के अधिवेशन में 10 महिलाओं ने भाग लिया 📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
कादम्बिनी गांगुली 📖✍️
1889 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बंबई (पाँचवें) अधिवेशन में चुनी गई पहली महिला प्रतिनिधियों (delegates) में शामिल थीं।
1890 में कलकत्ता (छठे) कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने सभा को संबोधित किया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किसी अधिवेशन को संबोधित करने वाली पहली महिला थीं। यह भारतीय राजनीति और महिला भागीदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।
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1889 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बंबई (पाँचवें) अधिवेशन में चुनी गई पहली महिला प्रतिनिधियों (delegates) में शामिल थीं।
1890 में कलकत्ता (छठे) कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने सभा को संबोधित किया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किसी अधिवेशन को संबोधित करने वाली पहली महिला थीं। यह भारतीय राजनीति और महिला भागीदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
उत्तराखंड असिस्टेंट प्रोफेसर pyq 📖✍️
किसकी उपस्थित में उत्तराखंड में शुद्धि समारोह में हरिजनों को जनेऊ प्रदान कर उन्हें सवर्णों के समकक्ष बराबरी का दर्जा दिलाया ।
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किसकी उपस्थित में उत्तराखंड में शुद्धि समारोह में हरिजनों को जनेऊ प्रदान कर उन्हें सवर्णों के समकक्ष बराबरी का दर्जा दिलाया ।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
गांधीजी ने अपनी आत्मकथा 25 नवम्बर 1925 से लिखनी शुरू की यह पुस्तक पहले पुस्तक के रूप में नहीं बल्कि गुजराती साप्ताहिक नवजीवन में साप्ताहिक धारावाहिक के रूप में प्रकाशित हुई कुल 166 किस्तें 25 nov 1925 से 3 feb 1929 तक प्रकाशित हुईं।
उन्होंने 1921 में आत्मकथा लिखने का विचार किया था लेकिन राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण नहीं लिख सके
बाद में स्वामी आनंद तथा उनके अन्य सहयोगियों के आग्रह पर उन्होंने इसे लिखना स्वीकार किया
गांधीजी ने स्पष्ट लिखा कि उनका उद्देश्य पारंपरिक आत्मकथा लिखना नहीं बल्कि सत्य के साथ अपने प्रयोगों का वर्णन करना था
गांधी जी ने मूल पुस्तक गुजराती में लिखी थी उसका नाम–
સત્યના પ્રયોગો અથવા આત્મકથા
मुख्य अंग्रेज़ी अनुवाद महादेव देसाई ने किया
हालाँकि 1928–29 में कुछ अध्याय प्यारेलाल नय्यर ने अनुवादित किए क्योंकि उस समय महादेव देसाई अन्य कार्य में व्यस्त थे स्वयं गांधीजी ने इन अनुवादों की समीक्षा की थी।
1927 – पहला अंग्रेज़ी खंड
1929 – दूसरा अंग्रेज़ी खंड
बाद में 1940 में संशोधित संस्करण An Autobiography or The Story of My Experiments with Truth शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
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उन्होंने 1921 में आत्मकथा लिखने का विचार किया था लेकिन राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण नहीं लिख सके
बाद में स्वामी आनंद तथा उनके अन्य सहयोगियों के आग्रह पर उन्होंने इसे लिखना स्वीकार किया
गांधीजी ने स्पष्ट लिखा कि उनका उद्देश्य पारंपरिक आत्मकथा लिखना नहीं बल्कि सत्य के साथ अपने प्रयोगों का वर्णन करना था
गांधी जी ने मूल पुस्तक गुजराती में लिखी थी उसका नाम–
સત્યના પ્રયોગો અથવા આત્મકથા
मुख्य अंग्रेज़ी अनुवाद महादेव देसाई ने किया
हालाँकि 1928–29 में कुछ अध्याय प्यारेलाल नय्यर ने अनुवादित किए क्योंकि उस समय महादेव देसाई अन्य कार्य में व्यस्त थे स्वयं गांधीजी ने इन अनुवादों की समीक्षा की थी।
1927 – पहला अंग्रेज़ी खंड
1929 – दूसरा अंग्रेज़ी खंड
बाद में 1940 में संशोधित संस्करण An Autobiography or The Story of My Experiments with Truth शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
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