Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
DU phd entrance exam question 📖 ✍️
A. पुरन्दर की संधि (Treaty of Purandar) – 1 मार्च 1776
D. कर्नल गोडार्ड के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी सेना का पुणे पर आक्रमण का प्रयास छोड़कर पीछे हटना – अप्रैल 1781
C. महादजी सिंधिया द्वारा आधुनिक हथियारों के उत्पादन हेतु फाउंड्री स्थापित करना – 1784–1787 के बीच, डी बोइन (Benoît de Boigne) के सैन्य सुधारों के दौरान
B. बाजीराव द्वितीय की पुणे में पेशवा के रूप में पुनः स्थापना – 13 मई 1803 (द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा पुनर्स्थापना)
https://t.me/historyfact00
A. पुरन्दर की संधि (Treaty of Purandar) – 1 मार्च 1776
D. कर्नल गोडार्ड के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी सेना का पुणे पर आक्रमण का प्रयास छोड़कर पीछे हटना – अप्रैल 1781
C. महादजी सिंधिया द्वारा आधुनिक हथियारों के उत्पादन हेतु फाउंड्री स्थापित करना – 1784–1787 के बीच, डी बोइन (Benoît de Boigne) के सैन्य सुधारों के दौरान
B. बाजीराव द्वितीय की पुणे में पेशवा के रूप में पुनः स्थापना – 13 मई 1803 (द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा पुनर्स्थापना)
https://t.me/historyfact00
❤2👍1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
DU entrance exam question 📖✍️
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के प्रश्न को विशेष रूप से 1916 के लखनऊ अधिवेशन में उठाया था। इसके अतिरिक्त, 1917 में कांग्रेस नेताओं ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने इसी वर्ष इस व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की।
1. Lucknow Session (1916)
इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने एक प्रस्ताव (Resolution No. IX) पारित करके सरकार से इस अमानवीय व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
भारतीयों को अनुबंधित श्रमिक के रूप में उपनिवेशों में भेजने की प्रथा राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
2. 1917 में कांग्रेस का अभियान
लखनऊ अधिवेशन के बाद गांधी, Charles Freer Andrews तथा अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाया। जनता के दबाव और कांग्रेस के विरोध के कारण भारत सरकार ने मार्च 1917 में गिरमिटिया प्रथा को समाप्त करने की घोषणा की और यह व्यवस्था औपचारिक रूप से बंद कर दी गई।
https://t.me/historyfact00
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के प्रश्न को विशेष रूप से 1916 के लखनऊ अधिवेशन में उठाया था। इसके अतिरिक्त, 1917 में कांग्रेस नेताओं ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने इसी वर्ष इस व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की।
1. Lucknow Session (1916)
इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने एक प्रस्ताव (Resolution No. IX) पारित करके सरकार से इस अमानवीय व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
भारतीयों को अनुबंधित श्रमिक के रूप में उपनिवेशों में भेजने की प्रथा राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
2. 1917 में कांग्रेस का अभियान
लखनऊ अधिवेशन के बाद गांधी, Charles Freer Andrews तथा अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाया। जनता के दबाव और कांग्रेस के विरोध के कारण भारत सरकार ने मार्च 1917 में गिरमिटिया प्रथा को समाप्त करने की घोषणा की और यह व्यवस्था औपचारिक रूप से बंद कर दी गई।
https://t.me/historyfact00
❤2🔥1
Forwarded from History Education 🔱❤
🔸मेवाड़ के प्रमुख शासकों का कालक्रम
बप्पा रावल (734 ई. - ?): मेवाड़ में गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक।
रावल जैत्रसिंह (1213-1252 ई.): मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णिम काल; इल्तुतमिश को हराया।
रावल रतन सिंह (1302-1303 ई.): चित्तौड़ का पहला साका (अलाउद्दीन खिलजी के समय)।
राणा हम्मीर (1326-1364 ई.): सिसोदिया शाखा के संस्थापक, चित्तौड़ को पुनः जीता।
राणा लाखा (1382-1421 ई.): जावर में चांदी की खानें निकलीं।
राणा कुंभा (1433-1468 ई.): स्थापत्य कला के जनक (कुम्भलगढ़, विजय स्तंभ)।
महाराणा सांगा (1509-1528 ई.): खानवा का युद्ध (बाबर के विरुद्ध), मेवाड़ अपनी शक्ति के चरम पर था।
महाराणा उदय सिंह (1537-1572 ई.): उदयपुर की स्थापना (1559), अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567) के समय शासक।
महाराणा प्रताप (1572-1597 ई.): हल्दीघाटी युद्ध (1576), स्वतंत्रता के लिए संघर्ष।
महाराणा अमर सिंह-I (1597-1620 ई.): मुगलों (जहांगीर) से संधि।
महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.): औरंगजेब के विरुद्ध, राजसमंद झील का निर्माण।
बप्पा रावल (734 ई. - ?): मेवाड़ में गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक।
रावल जैत्रसिंह (1213-1252 ई.): मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णिम काल; इल्तुतमिश को हराया।
रावल रतन सिंह (1302-1303 ई.): चित्तौड़ का पहला साका (अलाउद्दीन खिलजी के समय)।
राणा हम्मीर (1326-1364 ई.): सिसोदिया शाखा के संस्थापक, चित्तौड़ को पुनः जीता।
राणा लाखा (1382-1421 ई.): जावर में चांदी की खानें निकलीं।
राणा कुंभा (1433-1468 ई.): स्थापत्य कला के जनक (कुम्भलगढ़, विजय स्तंभ)।
महाराणा सांगा (1509-1528 ई.): खानवा का युद्ध (बाबर के विरुद्ध), मेवाड़ अपनी शक्ति के चरम पर था।
महाराणा उदय सिंह (1537-1572 ई.): उदयपुर की स्थापना (1559), अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567) के समय शासक।
महाराणा प्रताप (1572-1597 ई.): हल्दीघाटी युद्ध (1576), स्वतंत्रता के लिए संघर्ष।
महाराणा अमर सिंह-I (1597-1620 ई.): मुगलों (जहांगीर) से संधि।
महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.): औरंगजेब के विरुद्ध, राजसमंद झील का निर्माण।
🤷♀1🔥1
Forwarded from History Education 🔱❤
▪️जहाजपुर ( यज्ञपुर ) - भीलवाड़ा जिला
• राजा जनमेजय ने नागों का सर्वनाश करने के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था इसलिए इस यज्ञपुर कहा जाता है।
• बारह देवरा ( 12 मंदिरों का समूह )
•• यज्ञपुर का अपभ्रंश ही जहाजपुर हुआ जिसे राजस्थान सरकार ने पुनः यज्ञपुर कर इतिहास को जीवंत रूप दिया है।
https://t.me/HistoryEducation08
• राजा जनमेजय ने नागों का सर्वनाश करने के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था इसलिए इस यज्ञपुर कहा जाता है।
• बारह देवरा ( 12 मंदिरों का समूह )
•• यज्ञपुर का अपभ्रंश ही जहाजपुर हुआ जिसे राजस्थान सरकार ने पुनः यज्ञपुर कर इतिहास को जीवंत रूप दिया है।
https://t.me/HistoryEducation08
❤1👏1
पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर द्वारा 15/10/2026 को जारी की गई पीएच.डी. प्रवेश अधिसूचना 2026 (Ph.D. Admission Notification 2026) है
💐👆
💐👆
❤1👍1
Forwarded from History Education 🔱❤
अजयराज के काल को गोपीनाथ शर्मा 'चौहानों के साम्राज्य का निर्माण काल' मानते हैं।
अजयराज चौहान ने मालवा के परमार शासक नरवर्मन को परास्त किया था।
वर्ष 1113 में अजमेर नगर बसाकर उसे राजधानी बनाया और अजयमेरू दुर्ग का निर्माण कराया। अजयमेरू दुर्ग को ही तारागढ़ दुर्ग कहा जाता है।
अजयराज ने सर्वप्रथम श्री अजयदेव और अपनी रानी सोमलवती के नाम से चाँदी के सिक्के चलाये।
अजयराज ने पार्श्वनाथ के मंदिर के लिए 'सुवर्ण कलश' प्रदान किया। दिगम्बर और श्वेताम्बर के मध्य शास्त्रार्थ की अध्यक्षता अजयराज ने किया...
पृथ्वीराज-1 - सीकर के रैवासा के जीणमाता मंदिर से प्राप्त 1105 ई. के शिलालेख से जानकारी मिलती है कि चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम ने सर्वप्रथम 'परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी...
राजशेखर द्वारा रचित प्रबंध कोष में इसे 'तुर्क सेना का विजेता' कहा गया है....
अजयराज चौहान ने मालवा के परमार शासक नरवर्मन को परास्त किया था।
वर्ष 1113 में अजमेर नगर बसाकर उसे राजधानी बनाया और अजयमेरू दुर्ग का निर्माण कराया। अजयमेरू दुर्ग को ही तारागढ़ दुर्ग कहा जाता है।
अजयराज ने सर्वप्रथम श्री अजयदेव और अपनी रानी सोमलवती के नाम से चाँदी के सिक्के चलाये।
अजयराज ने पार्श्वनाथ के मंदिर के लिए 'सुवर्ण कलश' प्रदान किया। दिगम्बर और श्वेताम्बर के मध्य शास्त्रार्थ की अध्यक्षता अजयराज ने किया...
पृथ्वीराज-1 - सीकर के रैवासा के जीणमाता मंदिर से प्राप्त 1105 ई. के शिलालेख से जानकारी मिलती है कि चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम ने सर्वप्रथम 'परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी...
राजशेखर द्वारा रचित प्रबंध कोष में इसे 'तुर्क सेना का विजेता' कहा गया है....
🙏1
1. अमृतसर की संधि, 1809 ई.
(Treaty of Amritsar, 1809)
तिथि: 25 अप्रैल 1809 ई.
पक्षकार: महाराजा रणजीत सिंह और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी।
ब्रिटिश प्रतिनिधि: चार्ल्स मेटकॉफ (Charles Metcalfe)।
मुख्य उद्देश्य: रणजीत सिंह और अंग्रेजों के बीच सतलुज नदी के आसपास के क्षेत्रों को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान करना।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
सतलुज नदी के दोनों ओर के क्षेत्रों में अंग्रेजों और रणजीत सिंह के प्रभाव क्षेत्रों की सीमाएँ निर्धारित हुईं।
सतलुज के दक्षिण में स्थित सिस-सतलुज सिख राज्यों को ब्रिटिश संरक्षण प्राप्त हुआ।
रणजीत सिंह के सतलुज के दक्षिण की ओर विस्तार पर रोक लगी।
इस संधि से अंग्रेजों और रणजीत सिंह के बीच तत्काल संघर्ष की संभावना कम हुई।
महत्त्व: इस संधि ने महाराजा रणजीत सिंह के राज्य के विस्तार को सतलुज नदी के दक्षिण में सीमित कर दिया।
2. अमृतसर की संधि, 1846 ई.
(Treaty of Amritsar, 1846)
तिथि: 16 मार्च 1846 ई.
पक्षकार: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और जम्मू के राजा गुलाब सिंह।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845–1846 ई.) के बाद।
ब्रिटिश पक्ष के प्रमुख प्रतिनिधि: फ्रेडरिक करी (Frederick Currie) और हेनरी लॉरेंस (Henry Lawrence)।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
अंग्रेजों ने सिंधु नदी के पूर्व और रावी नदी के पश्चिम में स्थित निर्दिष्ट पहाड़ी क्षेत्रों को गुलाब सिंह के अधिकार में हस्तांतरित किया। इसमें चंबा शामिल था, जबकि लाहौल को बाहर रखा गया था।
गुलाब सिंह ने अंग्रेजों को 75 लाख नानकशाही रुपये देने पर सहमति व्यक्त की।
गुलाब सिंह ने ब्रिटिश सरकार की सर्वोच्चता स्वीकार की।
संधि ने जम्मू-कश्मीर में डोगरा शासन की स्थापना को औपचारिक रूप दिया।
महत्त्व: इस संधि के माध्यम से गुलाब सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा बने।
(Treaty of Amritsar, 1809)
तिथि: 25 अप्रैल 1809 ई.
पक्षकार: महाराजा रणजीत सिंह और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी।
ब्रिटिश प्रतिनिधि: चार्ल्स मेटकॉफ (Charles Metcalfe)।
मुख्य उद्देश्य: रणजीत सिंह और अंग्रेजों के बीच सतलुज नदी के आसपास के क्षेत्रों को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान करना।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
सतलुज नदी के दोनों ओर के क्षेत्रों में अंग्रेजों और रणजीत सिंह के प्रभाव क्षेत्रों की सीमाएँ निर्धारित हुईं।
सतलुज के दक्षिण में स्थित सिस-सतलुज सिख राज्यों को ब्रिटिश संरक्षण प्राप्त हुआ।
रणजीत सिंह के सतलुज के दक्षिण की ओर विस्तार पर रोक लगी।
इस संधि से अंग्रेजों और रणजीत सिंह के बीच तत्काल संघर्ष की संभावना कम हुई।
महत्त्व: इस संधि ने महाराजा रणजीत सिंह के राज्य के विस्तार को सतलुज नदी के दक्षिण में सीमित कर दिया।
2. अमृतसर की संधि, 1846 ई.
(Treaty of Amritsar, 1846)
तिथि: 16 मार्च 1846 ई.
पक्षकार: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और जम्मू के राजा गुलाब सिंह।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845–1846 ई.) के बाद।
ब्रिटिश पक्ष के प्रमुख प्रतिनिधि: फ्रेडरिक करी (Frederick Currie) और हेनरी लॉरेंस (Henry Lawrence)।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
अंग्रेजों ने सिंधु नदी के पूर्व और रावी नदी के पश्चिम में स्थित निर्दिष्ट पहाड़ी क्षेत्रों को गुलाब सिंह के अधिकार में हस्तांतरित किया। इसमें चंबा शामिल था, जबकि लाहौल को बाहर रखा गया था।
गुलाब सिंह ने अंग्रेजों को 75 लाख नानकशाही रुपये देने पर सहमति व्यक्त की।
गुलाब सिंह ने ब्रिटिश सरकार की सर्वोच्चता स्वीकार की।
संधि ने जम्मू-कश्मीर में डोगरा शासन की स्थापना को औपचारिक रूप दिया।
महत्त्व: इस संधि के माध्यम से गुलाब सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा बने।
❤2👏1