Forwarded from History Education 🔱❤
▪️जहाजपुर ( यज्ञपुर ) - भीलवाड़ा जिला
• राजा जनमेजय ने नागों का सर्वनाश करने के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था इसलिए इस यज्ञपुर कहा जाता है।
• बारह देवरा ( 12 मंदिरों का समूह )
•• यज्ञपुर का अपभ्रंश ही जहाजपुर हुआ जिसे राजस्थान सरकार ने पुनः यज्ञपुर कर इतिहास को जीवंत रूप दिया है।
https://t.me/HistoryEducation08
• राजा जनमेजय ने नागों का सर्वनाश करने के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था इसलिए इस यज्ञपुर कहा जाता है।
• बारह देवरा ( 12 मंदिरों का समूह )
•• यज्ञपुर का अपभ्रंश ही जहाजपुर हुआ जिसे राजस्थान सरकार ने पुनः यज्ञपुर कर इतिहास को जीवंत रूप दिया है।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर द्वारा 15/10/2026 को जारी की गई पीएच.डी. प्रवेश अधिसूचना 2026 (Ph.D. Admission Notification 2026) है
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Forwarded from History Education 🔱❤
अजयराज के काल को गोपीनाथ शर्मा 'चौहानों के साम्राज्य का निर्माण काल' मानते हैं।
अजयराज चौहान ने मालवा के परमार शासक नरवर्मन को परास्त किया था।
वर्ष 1113 में अजमेर नगर बसाकर उसे राजधानी बनाया और अजयमेरू दुर्ग का निर्माण कराया। अजयमेरू दुर्ग को ही तारागढ़ दुर्ग कहा जाता है।
अजयराज ने सर्वप्रथम श्री अजयदेव और अपनी रानी सोमलवती के नाम से चाँदी के सिक्के चलाये।
अजयराज ने पार्श्वनाथ के मंदिर के लिए 'सुवर्ण कलश' प्रदान किया। दिगम्बर और श्वेताम्बर के मध्य शास्त्रार्थ की अध्यक्षता अजयराज ने किया...
पृथ्वीराज-1 - सीकर के रैवासा के जीणमाता मंदिर से प्राप्त 1105 ई. के शिलालेख से जानकारी मिलती है कि चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम ने सर्वप्रथम 'परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी...
राजशेखर द्वारा रचित प्रबंध कोष में इसे 'तुर्क सेना का विजेता' कहा गया है....
अजयराज चौहान ने मालवा के परमार शासक नरवर्मन को परास्त किया था।
वर्ष 1113 में अजमेर नगर बसाकर उसे राजधानी बनाया और अजयमेरू दुर्ग का निर्माण कराया। अजयमेरू दुर्ग को ही तारागढ़ दुर्ग कहा जाता है।
अजयराज ने सर्वप्रथम श्री अजयदेव और अपनी रानी सोमलवती के नाम से चाँदी के सिक्के चलाये।
अजयराज ने पार्श्वनाथ के मंदिर के लिए 'सुवर्ण कलश' प्रदान किया। दिगम्बर और श्वेताम्बर के मध्य शास्त्रार्थ की अध्यक्षता अजयराज ने किया...
पृथ्वीराज-1 - सीकर के रैवासा के जीणमाता मंदिर से प्राप्त 1105 ई. के शिलालेख से जानकारी मिलती है कि चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम ने सर्वप्रथम 'परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी...
राजशेखर द्वारा रचित प्रबंध कोष में इसे 'तुर्क सेना का विजेता' कहा गया है....
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1. अमृतसर की संधि, 1809 ई.
(Treaty of Amritsar, 1809)
तिथि: 25 अप्रैल 1809 ई.
पक्षकार: महाराजा रणजीत सिंह और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी।
ब्रिटिश प्रतिनिधि: चार्ल्स मेटकॉफ (Charles Metcalfe)।
मुख्य उद्देश्य: रणजीत सिंह और अंग्रेजों के बीच सतलुज नदी के आसपास के क्षेत्रों को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान करना।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
सतलुज नदी के दोनों ओर के क्षेत्रों में अंग्रेजों और रणजीत सिंह के प्रभाव क्षेत्रों की सीमाएँ निर्धारित हुईं।
सतलुज के दक्षिण में स्थित सिस-सतलुज सिख राज्यों को ब्रिटिश संरक्षण प्राप्त हुआ।
रणजीत सिंह के सतलुज के दक्षिण की ओर विस्तार पर रोक लगी।
इस संधि से अंग्रेजों और रणजीत सिंह के बीच तत्काल संघर्ष की संभावना कम हुई।
महत्त्व: इस संधि ने महाराजा रणजीत सिंह के राज्य के विस्तार को सतलुज नदी के दक्षिण में सीमित कर दिया।
2. अमृतसर की संधि, 1846 ई.
(Treaty of Amritsar, 1846)
तिथि: 16 मार्च 1846 ई.
पक्षकार: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और जम्मू के राजा गुलाब सिंह।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845–1846 ई.) के बाद।
ब्रिटिश पक्ष के प्रमुख प्रतिनिधि: फ्रेडरिक करी (Frederick Currie) और हेनरी लॉरेंस (Henry Lawrence)।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
अंग्रेजों ने सिंधु नदी के पूर्व और रावी नदी के पश्चिम में स्थित निर्दिष्ट पहाड़ी क्षेत्रों को गुलाब सिंह के अधिकार में हस्तांतरित किया। इसमें चंबा शामिल था, जबकि लाहौल को बाहर रखा गया था।
गुलाब सिंह ने अंग्रेजों को 75 लाख नानकशाही रुपये देने पर सहमति व्यक्त की।
गुलाब सिंह ने ब्रिटिश सरकार की सर्वोच्चता स्वीकार की।
संधि ने जम्मू-कश्मीर में डोगरा शासन की स्थापना को औपचारिक रूप दिया।
महत्त्व: इस संधि के माध्यम से गुलाब सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा बने।
(Treaty of Amritsar, 1809)
तिथि: 25 अप्रैल 1809 ई.
पक्षकार: महाराजा रणजीत सिंह और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी।
ब्रिटिश प्रतिनिधि: चार्ल्स मेटकॉफ (Charles Metcalfe)।
मुख्य उद्देश्य: रणजीत सिंह और अंग्रेजों के बीच सतलुज नदी के आसपास के क्षेत्रों को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान करना।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
सतलुज नदी के दोनों ओर के क्षेत्रों में अंग्रेजों और रणजीत सिंह के प्रभाव क्षेत्रों की सीमाएँ निर्धारित हुईं।
सतलुज के दक्षिण में स्थित सिस-सतलुज सिख राज्यों को ब्रिटिश संरक्षण प्राप्त हुआ।
रणजीत सिंह के सतलुज के दक्षिण की ओर विस्तार पर रोक लगी।
इस संधि से अंग्रेजों और रणजीत सिंह के बीच तत्काल संघर्ष की संभावना कम हुई।
महत्त्व: इस संधि ने महाराजा रणजीत सिंह के राज्य के विस्तार को सतलुज नदी के दक्षिण में सीमित कर दिया।
2. अमृतसर की संधि, 1846 ई.
(Treaty of Amritsar, 1846)
तिथि: 16 मार्च 1846 ई.
पक्षकार: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और जम्मू के राजा गुलाब सिंह।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845–1846 ई.) के बाद।
ब्रिटिश पक्ष के प्रमुख प्रतिनिधि: फ्रेडरिक करी (Frederick Currie) और हेनरी लॉरेंस (Henry Lawrence)।
प्रमुख शर्तें एवं परिणाम:
अंग्रेजों ने सिंधु नदी के पूर्व और रावी नदी के पश्चिम में स्थित निर्दिष्ट पहाड़ी क्षेत्रों को गुलाब सिंह के अधिकार में हस्तांतरित किया। इसमें चंबा शामिल था, जबकि लाहौल को बाहर रखा गया था।
गुलाब सिंह ने अंग्रेजों को 75 लाख नानकशाही रुपये देने पर सहमति व्यक्त की।
गुलाब सिंह ने ब्रिटिश सरकार की सर्वोच्चता स्वीकार की।
संधि ने जम्मू-कश्मीर में डोगरा शासन की स्थापना को औपचारिक रूप दिया।
महत्त्व: इस संधि के माध्यम से गुलाब सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा बने।
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Forwarded from The Pratima Academy Channel
इतिहास दर्शन : लेखक पार्ट - 2
• जे.आर. मेक्लेन - द ड्रेन ऑफ वेल्थ एण्ड इंडियन नेशनलिज्म एट द टर्न ऑफ द सेंचुरी
• डब्ल्यू डिग्बी - प्रॉग्रेस ब्रिटिश इंडिया
• वी. एंस्टे - इकॉनॉमिक डेवलपमेंट ऑफ इंडिया
• इरफान हबीब - मिडिवल टेक्नोलॉजी : एक्सचेंज बिटवीन इंडिया एण्ड द इस्लामिक वर्ल्ड
• जोसफ नीधम - साइंस एण्ड सिविलाइजेशन इन चाईना
• इक्तिदार आलम खान - गनपाउडर एण्ड फायर पावर आर्म्स : वारफेयर इन मिडिवल इंडिया
• जीन डिलोश - मिलिट्री टेक्नोलॉजी इन होयसल स्कल्पचर
• अनिल सील - दी इमर्जेन्स ऑफ इंडियन नेशनलिज्म
• एस.अरसरत्नम - मैरीटाइम इण्डिया इन दी सेवेंटींथ सेंचुरी
• ओम प्रकाश - दी डच ईस्ट इंडिया कम्पनी एण्ड दी इकोनॉमी ऑफ बंगाल
• के.एस. मैथ्यू - पोर्तुगीज ट्रेड विद इण्डिया इन दी सिक्सटींथ सेंचुरी
• हेनरी बौर - रिव्यू ऑफ हिस्टोरिकल सिंथेसिस
• लुसियन फेब्वरे - द रीजन्स ऑफ फ्रांस: फ्रेके कांग्टे
• एमानुएल एल. आर. लाडूडी - द पीजेंट ऑफ द लैंग्युडोक
• फर्नाण्ड ब्रॉडेल - द मेडिटेरेनियन
• डी.एफ. फ्लेमिंग - द कोल्ड वार एण्ड Its ओरिजिंस
• कोलिन्स, लैरी और लेपीयर - फ्रीडम एट मिडनाइट
• जुडिथ ब्राउन - गांधीज राइज टू पॉवर
• सलमान रुश्दी - सैटेनिक वर्सेस
• एच.वी. हडसन - द ग्रेट डिवाइड : ब्रिटेन-इंडिया-पाकिस्तान
• मॉन्टेस्क्यू - द स्पिरिट ऑफ लॉज
• दांते - डिवाइन कॉमेडी
• रूसो - द सोशल कॉन्ट्रैक्ट
• मैकियावेली - द प्रिंस
• जैकब बरखार्ट - द सिविलाइजेशन ऑफ द रेनासांसे
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
गांधीजी अपनी बकरियों के साथ।
गांधीजी के बकरी के बारे में दिलचस्प तथ्य:
गांधीजी की बकरी का नाम निर्मला था। किस बकरी का नाम निर्मला था, पता नहीं। वो जहाँ भी जाते, उसे साथ ले के जाते थे ताकि उनको बकरी का ताज़ा दूध पीने को मिल सके.
कहा ये भी जाता है कि गांधीजी की बकरी काजू और बादाम खाती थी और उसके मेंटेनेंस का खर्चा इतना ज्यादा था कि एक बार सरोजिनी नायडू ने कहा था कि "गांधीजी की बकरी देश के लिए बहुत महंगी पड़ रही है "। वैसे उनकी रेल यात्रा भी देशवासियों के लिये बहुत महंगी पड़ती थी।
दरअसल गांधीजी के पास दो बकरियाँ थी एक काली और एक सफ़ेद।
✅ ✅ ✅
https://t.me/Ramsing2023
गांधीजी के बकरी के बारे में दिलचस्प तथ्य:
गांधीजी की बकरी का नाम निर्मला था। किस बकरी का नाम निर्मला था, पता नहीं। वो जहाँ भी जाते, उसे साथ ले के जाते थे ताकि उनको बकरी का ताज़ा दूध पीने को मिल सके.
कहा ये भी जाता है कि गांधीजी की बकरी काजू और बादाम खाती थी और उसके मेंटेनेंस का खर्चा इतना ज्यादा था कि एक बार सरोजिनी नायडू ने कहा था कि "गांधीजी की बकरी देश के लिए बहुत महंगी पड़ रही है "। वैसे उनकी रेल यात्रा भी देशवासियों के लिये बहुत महंगी पड़ती थी।
दरअसल गांधीजी के पास दो बकरियाँ थी एक काली और एक सफ़ेद।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
ब्रिटिश संसद ने अप्रैल 1772 में कंपनी की गतिविधियों की जाँच हेतु 31 सदस्यों की एक समिति गठित की जिसकी सिफारिश पर रेगुलेटिंग एक्ट पारित हुआ?
(A) गुप्त समिति (Secret Committee)
(B) प्रवर समिति (Select Committee)
(C) प्रशासनिक सुधार आयोग
(D) वेल्बी आयोग
उत्तर: (B) प्रवर समिति (Select Committee)
व्याख्या: अप्रैल 1772 में 31 सदस्यों की प्रवर समिति (सिलेक्ट कमेटी) बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटिश संसद ने 1773 में रेगुलेटिंग एक्ट पारित किया।
(A) गुप्त समिति (Secret Committee)
(B) प्रवर समिति (Select Committee)
(C) प्रशासनिक सुधार आयोग
(D) वेल्बी आयोग
उत्तर: (B) प्रवर समिति (Select Committee)
व्याख्या: अप्रैल 1772 में 31 सदस्यों की प्रवर समिति (सिलेक्ट कमेटी) बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटिश संसद ने 1773 में रेगुलेटिंग एक्ट पारित किया।
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9.30 pm
Topic--- नीति निर्देशक तत्व
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
खुश रहने के 6 नियम
1. कभी किसी से नफरत ना करें!
2.simple life जियें दिखावा ना करें।!
3. कभी भी किसी चीज की चिंता ना करें शांत रहे!
4. हर काम को उम्मीद के साथ करें!
5. अपना हर काम खूशी के साथ करें!
6. कितनी भी मुश्किल स्थिति क्यों न हो फिर भी हमेशा मुस्कुराते रहो।!
अगर अच्छा लगे तो सब जगह share करे....
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Forwarded from PDF WALLAH
History_Bhartiya_Itihas_Rajan_Sharma 6-12 .pdf
7.4 MB
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
वारेन हेस्टिंग्स ने मई 1772 में बंगाल में पाँच वर्षीय भूमि बंदोबस्त की योजना बनाने और लागू करने हेतु किस समिति का गठन किया?
(A) राजस्व बोर्ड (Board of Revenue)
(B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
(C) सिलेक्ट कमेटी
(D) कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कमेटी
उत्तर: (B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
व्याख्या: मई 1772 में सर्किट कमेटी नियुक्त की गई जिसमें हेस्टिंग्स और उसके चार परिषद सदस्य शामिल थे। इसने 5 वर्षीय नीलामी ठेका बंदोबस्त लागू किया।
(A) राजस्व बोर्ड (Board of Revenue)
(B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
(C) सिलेक्ट कमेटी
(D) कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कमेटी
उत्तर: (B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
व्याख्या: मई 1772 में सर्किट कमेटी नियुक्त की गई जिसमें हेस्टिंग्स और उसके चार परिषद सदस्य शामिल थे। इसने 5 वर्षीय नीलामी ठेका बंदोबस्त लागू किया।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
कॉर्नवालिस द्वारा पुनर्गठित सिविल अदालतों के पदानुक्रम में मुंसिफ अदालत के ऊपर कौन-सी अदालतें थीं जो 200 रुपये तक के मामलों की सुनवाई करती थीं?
(A) प्रांतीय अदालतें
(B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
(C) सदर दीवानी अदालत
(D) सर्किट कोर्ट
उत्तर: (B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
व्याख्या: 50 रुपये तक मुंसिफ, 200 रुपये तक रजिस्ट्रार, उसके ऊपर नगर/जिला अदालत, फिर 4 प्रांतीय अदालतें (कलकत्ता, मुर्शिदाबाद, ढाका, पटना) और शीर्ष पर सदर दीवानी अदालत थी।
(A) प्रांतीय अदालतें
(B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
(C) सदर दीवानी अदालत
(D) सर्किट कोर्ट
उत्तर: (B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
व्याख्या: 50 रुपये तक मुंसिफ, 200 रुपये तक रजिस्ट्रार, उसके ऊपर नगर/जिला अदालत, फिर 4 प्रांतीय अदालतें (कलकत्ता, मुर्शिदाबाद, ढाका, पटना) और शीर्ष पर सदर दीवानी अदालत थी।
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
First Grade / School Lecturer | UGC-NET/JRF | Assistant Professor
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⚠️ सबसे पहले एक जरूरी बात
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इतनी बड़ी सूची देखकर यह न सोचें कि आपको सारी किताबें पढ़नी या खरीदनी हैं।
हर किताब हर विद्यार्थी के लिए जरूरी नहीं होती। किताब चुनने से पहले अपना Exam Time, Target, तैयारी का Level और Reading Style जरूर देखें।
पर ध्यान दें।
⏳ 1 साल या उससे ज्यादा समय है तो Standard Books के साथ Reference Books से Concept और मजबूत कर सकते हैं।
किसी दूसरे विद्यार्थी के लिए अच्छी किताब जरूरी नहीं कि आपके लिए भी वही सबसे अच्छी हो।
किताबें आपकी तैयारी का साधन हैं, तैयारी का बोझ नहीं।
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🔴 1. PYQ / PRACTICE BOOKS
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• प्राचीन भारत
• मध्यकालीन भारत
• आधुनिक भारत
➜ PYQ + Objective Practice
• आरंभ से आज़ादी तक
➜ Competitive Exams
• प्राचीन भारत
• मध्यकालीन भारत
• आधुनिक भारत
• UGC-NET / History
• Previous Year Questions + Practice
• UGC-NET History
• Unit-wise Preparation + Practice
• UGC-NET History
• PYQ + Practice + Subject Coverage
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🟢 2. प्राचीन भारत
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📕 प्राचीन एवं पूर्व-मध्यकालीन भारत का इतिहास
➜ Detailed + Conceptual Study
📕 प्राचीन भारत का इतिहास / India's Ancient Past
➜ Conceptual Foundation
📕 प्राचीन भारत
➜ Reference + Competitive Preparation
📕 प्राचीन भारत का इतिहास
➜ Hindi Medium + Competitive Exams
📕 प्राचीन भारत
➜ Exam-oriented Preparation
📕 प्राचीन भारत
➜ Competitive Examination
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🔵 3. मध्यकालीन भारत
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📕 मध्यकालीन भारत
➜ Concept + Political/Social/Economic History
📕 मध्यकालीन भारत — भाग 1
📕 मध्यकालीन भारत — भाग 2
➜ Detailed Study
📕 मध्यकालीन भारत का इतिहास
➜ Reference Reading
📕 मध्यकालीन भारत
➜ Competitive + Conceptual Preparation
📕 मध्यकालीन भारत
➜ Exam-oriented Study
📕 मध्यकालीन भारत
➜ Revision + Competitive Preparation
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🟠 4. आधुनिक भारत
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📕 आधुनिक भारत का इतिहास
📕 भारत का स्वतंत्रता संग्राम
➜ Conceptual Understanding
📕 प्लासी से विभाजन तक
➜ Detailed + Analytical Study
📕 आधुनिक भारत
➜ Advanced / Analytical Reading
📕 आधुनिक भारत का इतिहास
➜ Competitive Exams + Revision
📕 आधुनिक भारत
➜ Exam-oriented Preparation
📕 आधुनिक भारत
➜ Competitive Examination
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🟣 5. विश्व इतिहास
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➜ आधुनिक विश्व इतिहास
➜ Mastering Modern World History
➜ World Civilizations
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🟤 6. इतिहासलेखन (HISTORIOGRAPHY)
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➜ UGC-NET/JRF के लिए महत्वपूर्ण।
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🟡 7. SOURCES + RESEARCH METHODOLOGY
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➜ इसके लिए UGC-NET History के Unit-wise Notes, IGNOU Material और PYQs साथ रखें।
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CONCEPT
↓
STANDARD BOOK
↓
NOTES
↓
PYQ
↓
REVISION
↓
MOCK / PRACTICE
हर विषय की 4–5 किताबें पढ़ना जरूरी नहीं है। सही किताब चुनें, उसे पूरा पढ़ें, Notes बनाएं, PYQs लगाएं और Revision करें।
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YouTube पर History 360 — रवि कुलरिया सर का चैनल देख सकते हैं। वहाँ अलग-अलग History Books के Book Reviews मिलते हैं।
किताब खरीदने से पहले Review देखकर भाषा, Content, Concept/Facts, Level और Presentation समझ सकते हैं।
अगली बार "कौन-सी किताब पढ़ूं?" पूछते समय अपना EXAM, TARGET, तैयारी का LEVEL और उपलब्ध TIME जरूर बताएं।
क्योंकि सही किताब का चुनाव
TIME + TARGET + LEVEL + READING STYLE
पर निर्भर करता है।
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ही तैयारी को मजबूत बनाती है।
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https://t.me/historyfact00
https://t.me/IAP606
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No Document No History
🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
📚 History PDFs | Notes | PYQs | Research Material
🎓 NET/JRF • SET • Assistant Professor • Competitive Exam
@RamsingRajput786 https://t.me/HistoryChatAdda
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