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गीता का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद सर चार्ल्स विल्किंस द्वारा किया गया और इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा प्रकाशित किया गया। इसमें भारत के प्रथम ब्रिटिश गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स द्वारा लिखित एक प्रस्तावना भी शामिल है, जिसमें हमें निम्नलिखित दूरदर्शी वाक्य मिलता है: 'भारतीय दर्शन के लेखक तब भी जीवित रहेंगे जब भारत में ब्रिटिश प्रभुत्व का अस्तित्व बहुत पहले समाप्त हो चुका होगा, और जब इसके धन और शक्ति के स्रोत विस्मृति में विलीन हो जाएंगे।'
एक शताब्दी बाद, गीता का एक और सुंदर अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित हुआ, जिसका नाम था सर एडविन अर्नोल्ड (1832-1904) द्वारा रचित 'द सॉन्ग सेलेस्टियल'। उन्होंने भारत में, पुणे और अन्य स्थानों पर काम करते हुए संस्कृत भाषा सीखी थी। उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव हो गया और इंग्लैंड लौटने के बाद उन्होंने यह उत्कृष्ट पुस्तक और बुद्ध पर एक और उतनी ही उत्कृष्ट पुस्तक, 'द लाइट ऑफ एशिया' लिखी।
दोनों ग्रंथों के पचास-साठ से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। दोनों ही पाठक के हृदय को सीधे छूते हैं। भगवद् गीता मानवीय समस्याओं का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान करती है। यही कारण है कि यह इतनी लोकप्रिय है। इसने भारत में सदियों से मानव मन को प्रेरित किया है और आज यह विश्व के विभिन्न भागों में लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। यह देखना रोचक है कि इन सभी देशों में गीता पढ़ने के बाद लोगों का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। अमेरिका में एमर्सन, वॉल्ट व्हिटमैन और थोरो जैसे विचारकों और लेखकों तथा इंग्लैंड में कार्लाइल ने गीता का अध्ययन करने के बाद अपने दृष्टिकोण में यह विस्तार और गहराई का अनुभव किया और उनके लेखन में भी एक नया संदेश झलकने लगा।
एक शताब्दी बाद, गीता का एक और सुंदर अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित हुआ, जिसका नाम था सर एडविन अर्नोल्ड (1832-1904) द्वारा रचित 'द सॉन्ग सेलेस्टियल'। उन्होंने भारत में, पुणे और अन्य स्थानों पर काम करते हुए संस्कृत भाषा सीखी थी। उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव हो गया और इंग्लैंड लौटने के बाद उन्होंने यह उत्कृष्ट पुस्तक और बुद्ध पर एक और उतनी ही उत्कृष्ट पुस्तक, 'द लाइट ऑफ एशिया' लिखी।
दोनों ग्रंथों के पचास-साठ से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। दोनों ही पाठक के हृदय को सीधे छूते हैं। भगवद् गीता मानवीय समस्याओं का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान करती है। यही कारण है कि यह इतनी लोकप्रिय है। इसने भारत में सदियों से मानव मन को प्रेरित किया है और आज यह विश्व के विभिन्न भागों में लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। यह देखना रोचक है कि इन सभी देशों में गीता पढ़ने के बाद लोगों का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। अमेरिका में एमर्सन, वॉल्ट व्हिटमैन और थोरो जैसे विचारकों और लेखकों तथा इंग्लैंड में कार्लाइल ने गीता का अध्ययन करने के बाद अपने दृष्टिकोण में यह विस्तार और गहराई का अनुभव किया और उनके लेखन में भी एक नया संदेश झलकने लगा।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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1920 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन के अध्यक्ष विजयराघवचारियार 📖✍️
1882 में विजयराघवचारियार द्वारा सलेम में वकालत शुरू करने के कुछ ही समय बाद, शहर में दंगा भड़क उठा। विजयराघवचारियार पर मस्जिद के विध्वंस का कारण बनने वाली हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया और उन्हें दस साल की जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने अदालत में आरोपों का मुकाबला किया और अंततः अपनी निर्दोषता साबित की। इसके बाद, अपनी वकालत की कुशलता के बल पर उन्होंने लॉर्ड रिपन से दंगों के लिए सजा पाए अन्य लोगों को अंडमान सेलुलर जेल से रिहा कराने की सफलतापूर्वक पैरवी की ।
उन्होंने सलेम नगर परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई, जिसके वे दंगे के दौरान सदस्य थे। उनकी अपील के परिणामस्वरूप, उन्हें न केवल नगर परिषद में बहाल किया गया, बल्कि वे भारत के राज्य सचिव से परिषद से हटाए जाने के लिए नाममात्र क्षतिपूर्ति के रूप में 100 रुपये प्राप्त करने में भी सफल रहे। उन्होंने अपने विरुद्ध झूठी गवाही देने वाले गवाहों के खिलाफ भी कार्यवाही की और उन्हें दोषी ठहराया।
1882 के सलेम दंगों ने विजयराघवचारियार को रातोंरात प्रसिद्ध कर दिया। इस दंगे के मामले को भारतीय राष्ट्रीय मीडिया में खूब प्रचारित किया गया और अखबारों ने उन्हें नागरिक स्वतंत्रता के महान रक्षक के रूप में सराहा। इस प्रकार उन्हें "दक्षिण भारत का शेर" और "सलेम का नायक" कहा जाने लगा ।
https://t.me/historyfact00
1882 में विजयराघवचारियार द्वारा सलेम में वकालत शुरू करने के कुछ ही समय बाद, शहर में दंगा भड़क उठा। विजयराघवचारियार पर मस्जिद के विध्वंस का कारण बनने वाली हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया और उन्हें दस साल की जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने अदालत में आरोपों का मुकाबला किया और अंततः अपनी निर्दोषता साबित की। इसके बाद, अपनी वकालत की कुशलता के बल पर उन्होंने लॉर्ड रिपन से दंगों के लिए सजा पाए अन्य लोगों को अंडमान सेलुलर जेल से रिहा कराने की सफलतापूर्वक पैरवी की ।
उन्होंने सलेम नगर परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई, जिसके वे दंगे के दौरान सदस्य थे। उनकी अपील के परिणामस्वरूप, उन्हें न केवल नगर परिषद में बहाल किया गया, बल्कि वे भारत के राज्य सचिव से परिषद से हटाए जाने के लिए नाममात्र क्षतिपूर्ति के रूप में 100 रुपये प्राप्त करने में भी सफल रहे। उन्होंने अपने विरुद्ध झूठी गवाही देने वाले गवाहों के खिलाफ भी कार्यवाही की और उन्हें दोषी ठहराया।
1882 के सलेम दंगों ने विजयराघवचारियार को रातोंरात प्रसिद्ध कर दिया। इस दंगे के मामले को भारतीय राष्ट्रीय मीडिया में खूब प्रचारित किया गया और अखबारों ने उन्हें नागरिक स्वतंत्रता के महान रक्षक के रूप में सराहा। इस प्रकार उन्हें "दक्षिण भारत का शेर" और "सलेम का नायक" कहा जाने लगा ।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
भारतीय इतिहास ( आरम्भ से आजादी तक )
भारत का इतिहास (rpsc स्कूल व्याख्याता)
– पप्पू सिंह प्रजापत
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– पप्पू सिंह प्रजापत
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs)
1855 के संथाल विद्रोह के संदर्भ में दो अत्यंत महत्वपूर्ण गैर-सरकारी प्राथमिक ऐतिहासिक स्रोत कौन-से हैं?
(A) आनंदमठ और नील दर्पण
(B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
(C) जेम्स मिल का इतिहास और हंटर की रिपोर्ट
(D) सियार-उल-मुताखिरीन और तारीख़-ए-बंगाल
उत्तर: (B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
संथाल विद्रोह के दो सबसे प्रामाणिक स्थानीय स्रोत पटना के वकील दिगंबर चक्रवर्ती और 'छोटेरे दसमनजी कथा' (Chhotre Desmanjhi Katha) के वृत्तांत हैं।
(A) आनंदमठ और नील दर्पण
(B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
(C) जेम्स मिल का इतिहास और हंटर की रिपोर्ट
(D) सियार-उल-मुताखिरीन और तारीख़-ए-बंगाल
उत्तर: (B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
संथाल विद्रोह के दो सबसे प्रामाणिक स्थानीय स्रोत पटना के वकील दिगंबर चक्रवर्ती और 'छोटेरे दसमनजी कथा' (Chhotre Desmanjhi Katha) के वृत्तांत हैं।