Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
सूफी साधना के चार क्रमिक सोपान (चरण) सही क्रम में कौन-से हैं?
(A) शरीअत → तरीकत → मारिफत → हकीकत
(B) तरीकत → शरीअत → हकीकत → मारिफत
(C) मारिफत → हकीकत → शरीअत → तरीकत
(D) हकीकत → मारिफत → तरीकत → शरीअत
उत्तर: (A) शरीअत → तरीकत → मारिफत → हकीकत
व्याख्या: सूफी साधना में साधक के मार्ग को चार चरणों में समझाया गया है:
(1) शरीअत (धार्मिक नियम),
(2) तरीकत (आध्यात्मिक मार्ग),
(3) मारिफत (दिव्य ज्ञान), तथा
(4) हकीकत (परम सत्य से साक्षात्कार)।
(A) शरीअत → तरीकत → मारिफत → हकीकत
(B) तरीकत → शरीअत → हकीकत → मारिफत
(C) मारिफत → हकीकत → शरीअत → तरीकत
(D) हकीकत → मारिफत → तरीकत → शरीअत
उत्तर: (A) शरीअत → तरीकत → मारिफत → हकीकत
व्याख्या: सूफी साधना में साधक के मार्ग को चार चरणों में समझाया गया है:
(1) शरीअत (धार्मिक नियम),
(2) तरीकत (आध्यात्मिक मार्ग),
(3) मारिफत (दिव्य ज्ञान), तथा
(4) हकीकत (परम सत्य से साक्षात्कार)।
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
1857 का विद्रोह चर्बी लगे कारतूसों के विरोध से आरम्भ हुआ, जो मेरठ से फैलकर दिल्ली, अवध, मध्य भारत और बिहार तक पहुँच गया। इसमें सैनिकों के साथ-साथ असैनिक जनता ने भी भाग लिया। 1858 तक अंग्रेज़ों ने एक-एक क्षेत्र पर पुनः अधिकार कर लिया और अंततः पूरे भारत में अपनी सत्ता पुनः स्थापित कर ली।
1857–58 के विद्रोह का कालक्रम (index) देता है, जो परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें तिथि, स्थान और घटनाओं का सही क्रम मिलता है, जिससे chronology, MCQ और short questions सीधे पूछे जाते हैं।📝📒
https://t.me/historyfact00
1857–58 के विद्रोह का कालक्रम (index) देता है, जो परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें तिथि, स्थान और घटनाओं का सही क्रम मिलता है, जिससे chronology, MCQ और short questions सीधे पूछे जाते हैं।📝📒
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
1940 में मदुरई में हुए अखिल भारतीय हिंदू महासभा के 22वें अधिवेशन में विनायक दामोदर सावरकर ने अध्यक्षीय भाषण दिया था।
भाषण के प्रमुख बिंदु–
हिंदू संगठन और सैन्यीकरण– सावरकर ने हिंदुओं से संगठित होने और सैन्य प्रशिक्षण लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल नैतिक उपदेशों से राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता।
“The belief in absolute non-violence … evinces no saintliness but senselessness.”
द्वितीय विश्व युद्ध पर दृष्टिकोण उन्होंने कहा कि हिंदुओं को सेना में भर्ती होकर सैन्य अनुभव प्राप्त करना चाहिए, ताकि भविष्य में भारत की शक्ति बढ़े।
राजनीतिक यथार्थवाद सावरकर ने उस समय की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को देखते हुए व्यावहारिक राजनीति पर जोर दिया।
हिंदू राष्ट्र की अवधारणा उन्होंने “हिंदुत्व” और “हिंदू राष्ट्र” की अवधारणा को अपने भाषण में विस्तार से रखा।
अहिंसा की आलोचना उन्होंने पूर्ण अहिंसा की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्र की रक्षा के लिए शक्ति आवश्यक है।
Source – “Presidential Address at the 22nd Session of the Akhil Bharatiya Hindu Mahasabha, Madura, 1940 A.D.” — V.D. Savarkar
https://t.me/historyfact00
भाषण के प्रमुख बिंदु–
हिंदू संगठन और सैन्यीकरण– सावरकर ने हिंदुओं से संगठित होने और सैन्य प्रशिक्षण लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल नैतिक उपदेशों से राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता।
“The belief in absolute non-violence … evinces no saintliness but senselessness.”
द्वितीय विश्व युद्ध पर दृष्टिकोण उन्होंने कहा कि हिंदुओं को सेना में भर्ती होकर सैन्य अनुभव प्राप्त करना चाहिए, ताकि भविष्य में भारत की शक्ति बढ़े।
राजनीतिक यथार्थवाद सावरकर ने उस समय की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को देखते हुए व्यावहारिक राजनीति पर जोर दिया।
हिंदू राष्ट्र की अवधारणा उन्होंने “हिंदुत्व” और “हिंदू राष्ट्र” की अवधारणा को अपने भाषण में विस्तार से रखा।
अहिंसा की आलोचना उन्होंने पूर्ण अहिंसा की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्र की रक्षा के लिए शक्ति आवश्यक है।
Source – “Presidential Address at the 22nd Session of the Akhil Bharatiya Hindu Mahasabha, Madura, 1940 A.D.” — V.D. Savarkar
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