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📚 कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स एवं बोर्ड ऑफ कंट्रोल (1773–1858)
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1. कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (Court of Directors)
1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों की संख्या 24 निर्धारित की गई। • प्रत्येक वर्ष 6 सदस्य सेवानिवृत्त होते थे। • प्रत्येक निदेशक का कार्यकाल 4 वर्ष था।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक एवं प्रशासनिक कार्य इसके अधीन रहे, जबकि राजनीतिक मामलों पर बोर्ड ऑफ कंट्रोल का नियंत्रण स्थापित हुआ।
3. चार्टर एक्ट, 1793 • सदस्यों की संख्या 24 ही रही। • कंपनी का चार्टर अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।
4. चार्टर एक्ट, 1813 • सदस्यों की संख्या में परिवर्तन नहीं हुआ; 24 ही रही। • कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त हुआ, लेकिन चाय एवं चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
5. चार्टर एक्ट, 1833 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक कार्य समाप्त कर दिए गए तथा वह मुख्यतः प्रशासनिक संस्था बन गई।
6. चार्टर एक्ट, 1853 • सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई। • इनमें 12 सदस्य निर्वाचित तथा 6 सदस्य ब्रिटिश क्राउन द्वारा मनोनीत किए जाने थे। • निदेशकों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया गया। • प्रत्येक 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते थे।
7. भारत शासन अधिनियम, 1858 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त कर दिया गया। • भारत का प्रशासन ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया।
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2. बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control)
स्थापना: पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना हुई। • इसमें अधिकतम 6 आयुक्त नियुक्त किए जा सकते थे। • कम-से-कम 3 सदस्यों की उपस्थिति में बोर्ड कार्य कर सकता था। • भारत के नागरिक, सैन्य एवं राजस्व संबंधी मामलों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
2. चार्टर एक्ट, 1793 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • इसके अध्यक्ष हेनरी डंडास थे। • बोर्ड के माध्यम से भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बना रहा।
3. चार्टर एक्ट, 1813 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त नहीं हुआ। • भारत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक मामलों पर इसका नियंत्रण जारी रहा।
4. चार्टर एक्ट, 1833 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • ब्रिटिश संसद में 1852 में दिए गए विवरण के अनुसार, 1833 में इसकी संरचना में परिवर्तन किया गया था। इसमें तीन वेतनभोगी आयुक्तों एवं सचिवों की व्यवस्था के स्थान पर एक अध्यक्ष और दो सचिवों की संरचना का उल्लेख मिलता है।
5. 1841 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्षों में परिवर्तन होते रहे। • यह कहना कि 1841 में बोर्ड में केवल एक सदस्य रह गया था, प्रमाणित तथ्य नहीं है।
6. भारत शासन अधिनियम, 1858 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया गया। • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की व्यवस्था भी समाप्त हुई। • भारत के प्रशासन के लिए ब्रिटिश सरकार में भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद बनाया गया।
https://t.me/historyfact00
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1. कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (Court of Directors)
1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों की संख्या 24 निर्धारित की गई। • प्रत्येक वर्ष 6 सदस्य सेवानिवृत्त होते थे। • प्रत्येक निदेशक का कार्यकाल 4 वर्ष था।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक एवं प्रशासनिक कार्य इसके अधीन रहे, जबकि राजनीतिक मामलों पर बोर्ड ऑफ कंट्रोल का नियंत्रण स्थापित हुआ।
3. चार्टर एक्ट, 1793 • सदस्यों की संख्या 24 ही रही। • कंपनी का चार्टर अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।
4. चार्टर एक्ट, 1813 • सदस्यों की संख्या में परिवर्तन नहीं हुआ; 24 ही रही। • कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त हुआ, लेकिन चाय एवं चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
5. चार्टर एक्ट, 1833 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक कार्य समाप्त कर दिए गए तथा वह मुख्यतः प्रशासनिक संस्था बन गई।
6. चार्टर एक्ट, 1853 • सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई। • इनमें 12 सदस्य निर्वाचित तथा 6 सदस्य ब्रिटिश क्राउन द्वारा मनोनीत किए जाने थे। • निदेशकों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया गया। • प्रत्येक 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते थे।
7. भारत शासन अधिनियम, 1858 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त कर दिया गया। • भारत का प्रशासन ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया।
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2. बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control)
स्थापना: पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना हुई। • इसमें अधिकतम 6 आयुक्त नियुक्त किए जा सकते थे। • कम-से-कम 3 सदस्यों की उपस्थिति में बोर्ड कार्य कर सकता था। • भारत के नागरिक, सैन्य एवं राजस्व संबंधी मामलों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
2. चार्टर एक्ट, 1793 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • इसके अध्यक्ष हेनरी डंडास थे। • बोर्ड के माध्यम से भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बना रहा।
3. चार्टर एक्ट, 1813 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त नहीं हुआ। • भारत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक मामलों पर इसका नियंत्रण जारी रहा।
4. चार्टर एक्ट, 1833 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • ब्रिटिश संसद में 1852 में दिए गए विवरण के अनुसार, 1833 में इसकी संरचना में परिवर्तन किया गया था। इसमें तीन वेतनभोगी आयुक्तों एवं सचिवों की व्यवस्था के स्थान पर एक अध्यक्ष और दो सचिवों की संरचना का उल्लेख मिलता है।
5. 1841 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्षों में परिवर्तन होते रहे। • यह कहना कि 1841 में बोर्ड में केवल एक सदस्य रह गया था, प्रमाणित तथ्य नहीं है।
6. भारत शासन अधिनियम, 1858 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया गया। • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की व्यवस्था भी समाप्त हुई। • भारत के प्रशासन के लिए ब्रिटिश सरकार में भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद बनाया गया।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
मुल्ला दाऊद द्वारा 1379-80 ई० में अवधी भाषा में रचित किस प्रसिद्ध प्रेमाख्यान काव्य में चित्रांकित महल की अटारी व रामायण/महाभारत के चित्रों का वर्णन मिलता है?
(A) पद्मावत
(B) चंदायन (लौरकाहा)
(C) मृगावती
(D) मधुमालती
उत्तर: (B) चंदायन (लौरकाहा)
व्याख्या: मुल्ला दाऊद की 'चंदायन' में कथावाचिका चंदा द्वारा विनिर्मित महल की अटारी पर सोने का वर्णन है। इसमें रामायण, महाभारत, लोक कथाओं एवं आम जीवन के चित्र पृष्ठभूमि में सुनहरे रंग के साथ अंकित बताए गए हैं
HC VARMA
(A) पद्मावत
(B) चंदायन (लौरकाहा)
(C) मृगावती
(D) मधुमालती
उत्तर: (B) चंदायन (लौरकाहा)
व्याख्या: मुल्ला दाऊद की 'चंदायन' में कथावाचिका चंदा द्वारा विनिर्मित महल की अटारी पर सोने का वर्णन है। इसमें रामायण, महाभारत, लोक कथाओं एवं आम जीवन के चित्र पृष्ठभूमि में सुनहरे रंग के साथ अंकित बताए गए हैं
HC VARMA
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Forwarded from Ravi Kulria
आधुनिक_भारत_वस्तुनिष्ठ_डेमो.pdf
31.4 MB
Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
No Document No History
आधुनिक_भारत_वस्तुनिष्ठ_डेमो.pdf
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प्रिय दोस्तों,
आप सभी शेयर किया करे...💐 ❤️ ✔️
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Historians_Statements_PYQ_Sumit_Pandey.pdf
2.8 MB
Historians_Statements_PYQ_Sumit_Pandey.pdf
Credit - प्रिय मित्र सुमित पाण्डेय जी❤️ 💐
https://t.me/Ramsing2023
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
विद्यार्थियों के लिए खुशखबरी!
अब प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत के इतिहास की तैयारी करें एक ही कॉम्बो सेट के साथ।
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इतिहास के सभी विद्यार्थियों से निवेदन है कि इस पोस्ट को अपने मित्रों और अध्ययन समूहों में भी शेयर करें।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
गांधी जी और सरोजिनी नायडू
गांधीजी ने उनके भाषणों से प्रभावित होकर उन्हें ‘भारत कोकिला’ की उपाधि दी थी. लेकिन वो अपने पत्रों में उन्हें कभी-कभी ‘डियर बुलबुल’,’डियर मीराबाई’ तो यहां तक कि कभी मजाक में ‘अम्माजान’ और ‘मदर’ भी लिखते थे.
हास्य और विनोद के उसी अंदाज में सरोजिनी भी उन्हें कभी ‘जुलाहा’, ‘लिटिल मैन’ तो कभी ‘मिकी माउस’ संबोधित करती हैं.तो कहीं बिल्कुल कातर और बेबस होकर ‘शांति का दूत’ पुकारते हुए उनसे अपील करती है.
BBC NEWS
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
उनकी नग्नता बैज ऑफ़ ऑनर (सम्मान का तमगा) बन गई थी.
गांधी के वापस लौटने पर एक ब्रिटिश रिपोर्टर ने पूछा- 'मिस्टर गांधी, मुझे नहीं लगता कि आपने किंग से मिलने के लिए उपयुक्त कपड़े पहने थे?' गांधी ने अपनी शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया- 'आप मेरे कपड़ों के बारे में चिंता बिलकुल मत करें. आपके राजा ने हम दोनों के लिए पर्याप्त कपड़े पहन रखे थे.' गांधी के ये शब्द सारी दुनिया में हमेशा के लिए चर्चित हो गए.
दुनिया के मशहूर जीवनी लेखक रॉबर्ट पाएन के शब्दों में 'उनकी नग्नता बैज ऑफ़ ऑनर (सम्मान का तमगा) बन गई थी.'
BBC NEWS
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Forwarded from Vimal04
मूल ग्रंथ की संक्षिप्त व्याख्या = टीका
मूल ग्रंथ की विस्तृत व्याख्या= भाष्य
मूल ग्रंथ की विस्तृत व्याख्या= भाष्य
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यूपी पीजीटी मे संशोधन आज से शुरू होगा जिन लोगो का गलती से मिस्केट हो गया हो फार्म भरते समय वह अपनी त्रुटियाँ सुधार कर ले
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
गांधी-पूर्व दौर (1858-1917) के लोकप्रिय आंदोलनों की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक सीमा (कमजोरी) क्या थी?
(A) वे अत्यधिक सुपठित अखिल भारतीय दल थे
(B) वे अधिकांशतः 'स्वतःस्फूर्त' थे, क्षेत्र व समय में बिखरे हुए थे और दूर के अंग्रेज शासकों के बजाय तात्कालिक स्थानीय शोषकों के विरुद्ध थे
(C) वे केवल अहिंसा पर विश्वास करते थे
(D) उनके किसानों का कोई समर्थन नहीं था
उत्तर: (B)
व्याख्या: ये आंदोलन सचेत साम्राज्यवाद-विरोधी न होकर स्थानीय साहूकार, जमींदार या आबकारी कानूनों के विरुद्ध थे और इनमें समग्र राष्ट्रीय विकल्प का अभाव था।
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(A) वे अत्यधिक सुपठित अखिल भारतीय दल थे
(B) वे अधिकांशतः 'स्वतःस्फूर्त' थे, क्षेत्र व समय में बिखरे हुए थे और दूर के अंग्रेज शासकों के बजाय तात्कालिक स्थानीय शोषकों के विरुद्ध थे
(C) वे केवल अहिंसा पर विश्वास करते थे
(D) उनके किसानों का कोई समर्थन नहीं था
उत्तर: (B)
व्याख्या: ये आंदोलन सचेत साम्राज्यवाद-विरोधी न होकर स्थानीय साहूकार, जमींदार या आबकारी कानूनों के विरुद्ध थे और इनमें समग्र राष्ट्रीय विकल्प का अभाव था।
अवधारणात्मक question
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