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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
जवाहर लाल नेहरू ने अपनी पत्नी (कमला)के लिए यह कविता को लिखा था लेटर में ✍️
यह कविता एगर एलन पो की टू वन इन पैराडाइज से ली गई थी 📖✍️
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यह कविता एगर एलन पो की टू वन इन पैराडाइज से ली गई थी 📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
जाने-माने अभिनेता चार्ली चैप्लिन ने अपनी आत्मकथा में स्विटज़रलैंड में नेहरू से हुई मुलाक़ात का दिलचस्प वर्णन किया है.
जब चैप्लिन नेहरू से मिलने आए तो दोनों के बीच इतनी अच्छी बातचीत हुई कि उन्होंने उन्हें अगले दिन अपने विला पर खाने पर आमंत्रित किया.
नेहरू चैप्लिन की कार में ही बैठकर उनके साथ गए. उनकी ख़ाली कार चैप्लिन की कार के पीछे चल रही थी.
भारत के पूर्व विदेश सचिव जगत एस मेहता ने अपनी किताब ‘द ट्रिस्ट बिट्रेड’ में इस मुलाकात का ज़िक्र करते हुए लिखा है, “चार्ली चैप्लिन ने पंडितजी से कहा कि मुझे आपकी हर बात पसंद है, सिवाय एक बात के कि आप शराब नहीं पीते.”
“नेहरू ने इस पर हँसते हुए कहा था, अगर आपको यही बात मेरे ख़िलाफ़ लगती है तो मैं शेरी का एक गिलास पी सकता हूँ.”
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जब चैप्लिन नेहरू से मिलने आए तो दोनों के बीच इतनी अच्छी बातचीत हुई कि उन्होंने उन्हें अगले दिन अपने विला पर खाने पर आमंत्रित किया.
नेहरू चैप्लिन की कार में ही बैठकर उनके साथ गए. उनकी ख़ाली कार चैप्लिन की कार के पीछे चल रही थी.
भारत के पूर्व विदेश सचिव जगत एस मेहता ने अपनी किताब ‘द ट्रिस्ट बिट्रेड’ में इस मुलाकात का ज़िक्र करते हुए लिखा है, “चार्ली चैप्लिन ने पंडितजी से कहा कि मुझे आपकी हर बात पसंद है, सिवाय एक बात के कि आप शराब नहीं पीते.”
“नेहरू ने इस पर हँसते हुए कहा था, अगर आपको यही बात मेरे ख़िलाफ़ लगती है तो मैं शेरी का एक गिलास पी सकता हूँ.”
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
“कोई भी भाषा तब तक नष्ट नहीं होती, जब तक उसे बोलने वाला समाज जीवित रहता है।” –हजारी प्रसाद द्विवेदी –
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
🇮🇳 15 अगस्त 1947 | एक ऐतिहासिक सुबह 🇮🇳
“भारत अब स्वतंत्र था — ब्रिटिश राज का अंत हो चुका था।
यह केवल आज़ादी की घोषणा नहीं थी, यह पीढ़ियों के संघर्ष, त्याग और उम्मीदों की जीत थी।
उस सुबह भारत ने गुलामी से नहीं, बल्कि डर से भी मुक्ति पाई।”
📌 महत्वपूर्ण तथ्य:
• 🕗 समय: सुबह 8:20 बजे
• 📍 स्थान: दुर्बार हॉल, गवर्नमेंट हाउस (आज का राष्ट्रपति भवन)
• 👤 नेतृत्व: जवाहरलाल नेहरू
• 👑 पहले गवर्नर-जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन
• ⚖️ शपथ: मुख्य न्यायाधीश हरीलाल जे. कानिया
• 🚩 भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया
• ✨ ब्रिटिश राज का औपचारिक अंत
यह दिन सत्ता परिवर्तन का नहीं, आत्मसम्मान की वापसी का प्रतीक है।🙏🏻📖🇮🇳
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“भारत अब स्वतंत्र था — ब्रिटिश राज का अंत हो चुका था।
यह केवल आज़ादी की घोषणा नहीं थी, यह पीढ़ियों के संघर्ष, त्याग और उम्मीदों की जीत थी।
उस सुबह भारत ने गुलामी से नहीं, बल्कि डर से भी मुक्ति पाई।”
📌 महत्वपूर्ण तथ्य:
• 🕗 समय: सुबह 8:20 बजे
• 📍 स्थान: दुर्बार हॉल, गवर्नमेंट हाउस (आज का राष्ट्रपति भवन)
• 👤 नेतृत्व: जवाहरलाल नेहरू
• 👑 पहले गवर्नर-जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन
• ⚖️ शपथ: मुख्य न्यायाधीश हरीलाल जे. कानिया
• 🚩 भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया
• ✨ ब्रिटिश राज का औपचारिक अंत
यह दिन सत्ता परिवर्तन का नहीं, आत्मसम्मान की वापसी का प्रतीक है।🙏🏻📖🇮🇳
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Forwarded from अहम् ब्रह्मास्मि ...(R. Pandey) .....
Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
हालाँकि सामान्यत: आर्यो का मुल स्थान 'मध्य एशिया' माना जाता है.. जो मैक्समूलर द्वारा प्रतिपादित है... लेकिन अगर मध्य एशिया ऑप्शन में ना हो तो यह आंसर बैठ सकता है।
सोर्स : उपिंदर सिंह
https://t.me/tikam_ambedakr00
सोर्स : उपिंदर सिंह
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सर जी आप UGC पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. आप भी अपने विचार रखिए. शिक्षा, रोज़गार और मार्गदर्शन से संबधित प्रश्न पूछने वाले युवा अचानक एक हफ्ते से UGC को लेकर पश्न पूछना शुरू कर दिए हैं.
आइए आज बात करते हैं—
सबसे पहले जानेंगे उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने हेतु विनियम-2026 (Promotion of Equity in HEIs Regulations - 2026) के नए नियम क्या है?
भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने हेतु नियम जिसे UGC विनियम 2026 के नाम से जाना जा रहा है. इसे मुख्य रूप से शिक्षण परिसरों में भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गया है. यूजीसी के नए विनियम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं—
1)- शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना. जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से SC, ST और OBC छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से बचाना है. जानकारों के अनुसार पहली बार OBC वर्ग को भी UGC के नए विनियम में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है.
2)- इक्विटी सेल और स्क्वॉड जिसके अंतर्गत प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं अन्य कॉलेजों के लिए एक इक्विटी कमेटी और एक इक्विटी स्क्वॉड बनाना अनिवार्य होगा. ये दोनों समितियाँ ओबीसी, एससी एवं एसटी छात्रों एवं कर्मचारियों पर कैंपस में होने वाले भेदभाव की घटनाओं की निगरानी करेंगी एवं इसकी सूचना को चैनल के माध्यम से ऊपर भेजा जाएगा.
3)- UGC के नए नियमों के अनुसार संबधित मामले में अब त्वरित कार्रवाही होगी. शिकायत मिलने के बाद संस्थान को 24 घंटे के भीतर जांच शुरू करनी होगी. यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है तो UGC उसकी ग्रांट्स रोक सकता है इसके साथ ही सीटों में कटौती भी कर सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो उसकी मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी कर सकता है.
4)- UGC नियमों के क्रियान्वयन के लिए छात्रों एवं कर्मचारियों की शिकायतों के लिए 24 घण्टे की सक्रिय हेल्पलाइन और एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाना अनिवार्य करेगा ताकि मामलों पर त्वरित कार्रवाई को अम्ल में लाया जा सके.
◾भेदभाव का अंत होगा और समावेशिता बढ़ेगी. नए नियमों का मुख्य उद्देश्य जाति, लिंग, धर्म और शारीरिक अक्षमता के आधार पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म करना है. ये नियम परिसरों को अधिक सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.
◾OBC वर्ग को औपचारिक संरक्षण मिला है. पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट रूप से इन सुरक्षात्मक नियमों के दायरे में लाया गया है. इससे पहले ये नियम केवल SC/ST श्रेणियों पर केंद्रित हुआ करते थे.
अब बात करते हैं नियमों का उल्लंघन करने पर क्या क्या कार्यवाही हो सकती है—
यूजीसी के नए नियमों के तहत संस्थानों, छात्र छात्राओं एवं कर्मचारियों के विरुद्ध होने वाली कार्यवाहियों का लेखा-जोखा—
◾यदि कोई विश्वविद्यालय या कॉलेज इन नियमों को लागू करने में विफल रहता है या भेदभाव की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है तो यूजीसी अब उन पर निम्नलिखित प्रतिबंध लगा सकता है. जैसे-
◾अनुदान रोका जाएगा. संस्थान को मिलने वाली सभी वित्तीय सहायता रोकी जा सकती है.
◾मान्यता रद्द कर देना. संस्थान की डीम्ड यूनिवर्सिटी या मान्यता वाली स्थिति को वापस लेने की सिफारिश की जा सकती है.
◾प्रवेश प्रकिया पर रोक लग सकती है. नए सत्र में छात्रों के एडमिशन लेने पर पाबंदी लगाई जा सकती है.
◾UGC अपनी वेबसाइट पर उस संस्थान का नाम डिफॉल्टर सूची में डाल सकता है, जिससे संबधित संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी.
◾नए नियमों के अनुसार यदि कोई शिक्षक, कर्मचारी या छात्र भेदभाव का दोषी पाया जाता है, तो उस पर संस्थान के सेवा नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी.
◾निलंबन या बर्खास्तगी की संस्तुति होगी. इसके तहत दोषी पाए जाने पर प्रोफेसर या स्टाफ को नौकरी से निकाला जा सकता है.
◾अकादमिक प्रतिबंध लगेगा. दोषी छात्र छात्राओं को कैंपस से निष्कासित किया जा सकता है या उनकी डिग्री रोकी जा सकती है.
◾कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. यदि मामला गंभीर है जैसे जातिसूचक गाली या शारीरिक उत्पीड़न तो संस्थान को SC/ST Act के तहत पुलिस FIR दर्ज करानी होगी.
◾दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई करने की अंतिम जिम्मेदारी संस्थान के वीसी या प्रिन्सिपल की होगी. यदि वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें स्वयं जिम्मेदार मानकर उनके ऊपर कार्यवाही की जाएगी-----
✍️
प्रवीण कुमार
( सही है या गलत इसकी चर्चा अगली पोस्ट में करेंगे )
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आइए आज बात करते हैं—
सबसे पहले जानेंगे उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने हेतु विनियम-2026 (Promotion of Equity in HEIs Regulations - 2026) के नए नियम क्या है?
भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने हेतु नियम जिसे UGC विनियम 2026 के नाम से जाना जा रहा है. इसे मुख्य रूप से शिक्षण परिसरों में भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गया है. यूजीसी के नए विनियम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं—
1)- शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना. जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से SC, ST और OBC छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से बचाना है. जानकारों के अनुसार पहली बार OBC वर्ग को भी UGC के नए विनियम में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है.
2)- इक्विटी सेल और स्क्वॉड जिसके अंतर्गत प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं अन्य कॉलेजों के लिए एक इक्विटी कमेटी और एक इक्विटी स्क्वॉड बनाना अनिवार्य होगा. ये दोनों समितियाँ ओबीसी, एससी एवं एसटी छात्रों एवं कर्मचारियों पर कैंपस में होने वाले भेदभाव की घटनाओं की निगरानी करेंगी एवं इसकी सूचना को चैनल के माध्यम से ऊपर भेजा जाएगा.
3)- UGC के नए नियमों के अनुसार संबधित मामले में अब त्वरित कार्रवाही होगी. शिकायत मिलने के बाद संस्थान को 24 घंटे के भीतर जांच शुरू करनी होगी. यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है तो UGC उसकी ग्रांट्स रोक सकता है इसके साथ ही सीटों में कटौती भी कर सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो उसकी मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी कर सकता है.
4)- UGC नियमों के क्रियान्वयन के लिए छात्रों एवं कर्मचारियों की शिकायतों के लिए 24 घण्टे की सक्रिय हेल्पलाइन और एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाना अनिवार्य करेगा ताकि मामलों पर त्वरित कार्रवाई को अम्ल में लाया जा सके.
◾भेदभाव का अंत होगा और समावेशिता बढ़ेगी. नए नियमों का मुख्य उद्देश्य जाति, लिंग, धर्म और शारीरिक अक्षमता के आधार पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म करना है. ये नियम परिसरों को अधिक सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.
◾OBC वर्ग को औपचारिक संरक्षण मिला है. पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट रूप से इन सुरक्षात्मक नियमों के दायरे में लाया गया है. इससे पहले ये नियम केवल SC/ST श्रेणियों पर केंद्रित हुआ करते थे.
अब बात करते हैं नियमों का उल्लंघन करने पर क्या क्या कार्यवाही हो सकती है—
यूजीसी के नए नियमों के तहत संस्थानों, छात्र छात्राओं एवं कर्मचारियों के विरुद्ध होने वाली कार्यवाहियों का लेखा-जोखा—
◾यदि कोई विश्वविद्यालय या कॉलेज इन नियमों को लागू करने में विफल रहता है या भेदभाव की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है तो यूजीसी अब उन पर निम्नलिखित प्रतिबंध लगा सकता है. जैसे-
◾अनुदान रोका जाएगा. संस्थान को मिलने वाली सभी वित्तीय सहायता रोकी जा सकती है.
◾मान्यता रद्द कर देना. संस्थान की डीम्ड यूनिवर्सिटी या मान्यता वाली स्थिति को वापस लेने की सिफारिश की जा सकती है.
◾प्रवेश प्रकिया पर रोक लग सकती है. नए सत्र में छात्रों के एडमिशन लेने पर पाबंदी लगाई जा सकती है.
◾UGC अपनी वेबसाइट पर उस संस्थान का नाम डिफॉल्टर सूची में डाल सकता है, जिससे संबधित संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी.
◾नए नियमों के अनुसार यदि कोई शिक्षक, कर्मचारी या छात्र भेदभाव का दोषी पाया जाता है, तो उस पर संस्थान के सेवा नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी.
◾निलंबन या बर्खास्तगी की संस्तुति होगी. इसके तहत दोषी पाए जाने पर प्रोफेसर या स्टाफ को नौकरी से निकाला जा सकता है.
◾अकादमिक प्रतिबंध लगेगा. दोषी छात्र छात्राओं को कैंपस से निष्कासित किया जा सकता है या उनकी डिग्री रोकी जा सकती है.
◾कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. यदि मामला गंभीर है जैसे जातिसूचक गाली या शारीरिक उत्पीड़न तो संस्थान को SC/ST Act के तहत पुलिस FIR दर्ज करानी होगी.
◾दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई करने की अंतिम जिम्मेदारी संस्थान के वीसी या प्रिन्सिपल की होगी. यदि वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें स्वयं जिम्मेदार मानकर उनके ऊपर कार्यवाही की जाएगी-----
✍️
प्रवीण कुमार
( सही है या गलत इसकी चर्चा अगली पोस्ट में करेंगे )
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