Forwarded from No Document No History (♥️ श्री.रामसिंग राजपूत ⛳ ♥️)
हिंदू_राष्ट्र_हिंदुओं_की_रामकहानी_आनंद_रंगनाथन_.pdf
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@kitabwala_तमन्ना_तुम_अब_कहा_हो_निधीश_त्यागी_Tamnna_Tum_Ab_Kaha.pdf
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
भारतीय राष्ट्रवाद को ब्रिटिश शासन की संतान bataya h
प्रसिद्ध लेखक रजनी पाम दत्त ने अपनी पुस्तक 'इंडिया टुडे' (1940 ई.) में भारतीय राष्ट्रवाद को ब्रिटिश शासन की संतान और इसका परिणाम कहा है।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
कश्मीर प्रश्न और अनुच्छेद 370
1. कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र (UN) ले जाना (1948)
नेहरू पर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया जाता है कि
1948 में उन्होंने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर भारत के आंतरिक विषय का अंतरराष्ट्रीयकरण कर दिया।
भारत-पाक युद्ध (1947–48) के समय भारतीय सेना निर्णायक बढ़त पर थी।
इसी दौरान युद्धविराम (Ceasefire) स्वीकार किया गया।
परिणामस्वरूप कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया (आज का PoK)।
आलोचकों का मत:
यदि सैन्य कार्रवाई पूरी होने दी जाती, तो पूरा कश्मीर भारत के नियंत्रण में होता।
नेहरू का पक्ष:
अंतरराष्ट्रीय नैतिकता और शांति को प्राथमिकता
जनमत संग्रह का भरोसा (जो बाद में संभव नहीं हो पाया)
2. अनुच्छेद 370 और विशेष दर्जा
नेहरू–शेख अब्दुल्ला समझौते के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा दिया गया।
इससे राज्य का पूर्ण एकीकरण देर से हुआ।
आलोचना:
इससे अलगाववाद को बढ़ावा मिला
राष्ट्रीय एकरूपता बाधित हुई।
समर्थन में तर्क:
तत्कालीन परिस्थितियों में कश्मीर को भारत से जोड़ने का यही व्यावहारिक रास्ता था।
https://t.me/historyfact00
1. कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र (UN) ले जाना (1948)
नेहरू पर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया जाता है कि
1948 में उन्होंने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर भारत के आंतरिक विषय का अंतरराष्ट्रीयकरण कर दिया।
भारत-पाक युद्ध (1947–48) के समय भारतीय सेना निर्णायक बढ़त पर थी।
इसी दौरान युद्धविराम (Ceasefire) स्वीकार किया गया।
परिणामस्वरूप कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया (आज का PoK)।
आलोचकों का मत:
यदि सैन्य कार्रवाई पूरी होने दी जाती, तो पूरा कश्मीर भारत के नियंत्रण में होता।
नेहरू का पक्ष:
अंतरराष्ट्रीय नैतिकता और शांति को प्राथमिकता
जनमत संग्रह का भरोसा (जो बाद में संभव नहीं हो पाया)
2. अनुच्छेद 370 और विशेष दर्जा
नेहरू–शेख अब्दुल्ला समझौते के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा दिया गया।
इससे राज्य का पूर्ण एकीकरण देर से हुआ।
आलोचना:
इससे अलगाववाद को बढ़ावा मिला
राष्ट्रीय एकरूपता बाधित हुई।
समर्थन में तर्क:
तत्कालीन परिस्थितियों में कश्मीर को भारत से जोड़ने का यही व्यावहारिक रास्ता था।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
कलकत्ता स्टूडेंट एसोसिएशन (Calcutta Sutdent Association)
छात्रों में राष्ट्रवाद की भावना उत्पन्न करने हेतु 1875 ई. में आनंद मोहन बोस द्वारा स्टूडेंट ऐसोसिएशन की स्थापना की गई।
इस छात्र संघ में सुरेंद्रनाथ बनर्जी की महत्त्वपूर्ण भागीदारी रही।
❤3
"जीवन में तुम गरीब या अमीर हो सकते हो; लेकिन मृत्यु में सब बराबर हैं।
मृत्यु में सर्वाधिक साम्यवाद है।
तुम कैसे भी जीओ, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मृत्यु समान ढंग से घटती है।
जीवन में समानता असंभव है; मृत्यु में असमानता असंभव है।
तो मृत्यु के प्रति सजग होओ, उस पर मनन करो।"
✅ ✅ ✅
प्रिय ओशो जी...🙏 ✨
https://t.me/Ramsing2023
मृत्यु में सर्वाधिक साम्यवाद है।
तुम कैसे भी जीओ, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मृत्यु समान ढंग से घटती है।
जीवन में समानता असंभव है; मृत्यु में असमानता असंभव है।
तो मृत्यु के प्रति सजग होओ, उस पर मनन करो।"
प्रिय ओशो जी...
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
मद्रास नेटिव एसोसिएशन (Madras Native Association)
इस संस्था ने 1857 के विद्रोह की भरसक निंदा की,
परंतु व्यापक जन समर्थन के अभाव में संस्था शीघ्र ही समाप्त हो गई।
❤5
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
'भारतीय सिविल सेवा प्रदर्शन'
भारतीय सिविल सेवा में प्रवेश की न्यूनतम आयु कम किये जाने के विरोध में इंडियन एसोसिएशन द्वारा अखिल भारतीय प्रदर्शन किया गया। इस घटना को ही 'भारतीय सिविल सेवा प्रदर्शन' के रूप में जाना जाता है।