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एक तरफ जहां जलियांवाला बाग में नरसंहार हुआ दूसरी तरफ अकाल तख्त के प्रमुख अरूर सिंह ने डायर को स्वर्ण मंदिर में आमंत्रित किया और उसे सरोपा भेट किया 🫣📖✍️

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डॉ. बालकृष्ण शिवराम मूंजे, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के कट्टर अनुयायी थे। 1872 में जन्मे मूंजे ने 1898 में चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दो वर्षों तक बंबई में चिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस की, और फिर ब्रिटिश भारतीय सेना के साथ दक्षिण अफ्रीका जाकर बोअर युद्ध में शामिल हुए 📖✍️

गांधी जी का उल्लेख तो सभी पढ़ते है कि उन्होंने बोअर के युद्ध में अंग्रेजों की मदद की थी, लेकिन हिंदू महासभा के सदस्य मुंजे ने भी अंग्रेजों की सेनाओं की मदद इस युद्ध में थी 📖✍️


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पिछले 50 से 100 वर्षों के दौरान हम जो हासिल नहीं कर सकें, वह हमने छह महीनों में ही हासिल कर लिया है।






बारीसाल सम्मेलन (1906 ई.) के अध्यक्ष एस. अब्दुल रसूल ने स्वदेशी आंदोलन के सम्बंध में कहा था कि "पिछले 50 से 100 वर्षों के दौरान हम जो हासिल नहीं कर सकें, वह हमने छह महीनों में ही हासिल कर लिया है। हमें यहाँ तक पहुँचाया है, बंगाल विभाजन ने। विभाजन जैसी शर्मनाक घटना ने महान राष्ट्रीय आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन को जन्म दिया है।"
मुस्लिम लीग का पाकिस्तान प्रस्ताव व अंतरराष्ट्रीय दबाव का प्रभाव 📖✍️
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NCERT 12th - समकालीन विश्व राजनीति


Chapter -1 - शीत युद्ध का काल


शीत युद्ध (Cold War) - परिचय:

शीत युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष था जो मुख्य रूप से अमेरिका और सोवियत संघ (USSR) के बीच हुआ। यह संघर्ष 1945 से 1991 तक चला और इसके कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में युद्ध, तनाव और शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का वातावरण बना। हालांकि शीत युद्ध में दोनों पक्षों के बीच सीधा सैन्य संघर्ष नहीं हुआ, लेकिन यह एक शीत युद्ध था, जिसमें दोनों महाशक्तियाँ अपने-अपने विचारधाराओं (पूंजीवाद और साम्यवाद) के प्रसार के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही थीं।

शीत युद्ध के प्रमुख देश:


1. अमेरिका - पूंजीवाद और लोकतंत्र का प्रतिनिधि।


2. सोवियत संघ (USSR) - साम्यवाद और एक पार्टी शासन का प्रतिनिधि।


3. यूरोप के विभिन्न देश - इनमें पश्चिमी यूरोपीय देशों ने अमेरिका का समर्थन किया, जबकि पूर्वी यूरोपीय देशों ने सोवियत संघ का समर्थन किया।


4. चीन - जो एक समय सोवियत संघ का सहयोगी था, लेकिन बाद में उसने अपनी अलग दिशा अपनाई।


5. भारत और अन्य देशों - शीत युद्ध के दौरान कुछ देश तटस्थ रहने का प्रयास करते थे और इन्हें ‘गैर-हस्तक्षेपवादी’ (Non-Aligned) देशों के रूप में जाना जाता है।



शीत युद्ध का प्रारंभ:


शीत युद्ध की शुरुआत 1945 में हुई, जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विचारधाराओं और शक्ति के लिए संघर्ष शुरू हुआ। अमेरिका ने पूंजीवाद और लोकतंत्र का समर्थन किया, जबकि सोवियत संघ ने साम्यवाद और एक पार्टी शासन का। यह युद्ध सिर्फ अमेरिका और सोवियत संघ के बीच नहीं था, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों पर भी इसका प्रभाव पड़ा, जिनमें अफ्रीका, एशिया, और लैटिन अमेरिका के देशों ने अपनी स्थिति तय करने में संघर्ष किया।

प्रमुख घटनाएँ:


1. 1945: द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के बाद, अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए, जिससे युद्ध समाप्त हुआ। इस घटना ने शीत युद्ध के शुरुआत की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


2. 1947: अमेरिका ने 'ट्रूमन सिद्धांत' की घोषणा की, जिसमें उन्होंने दुनिया में साम्यवाद के प्रसार को रोकने का निर्णय लिया। इसी वर्ष मार्शल प्लान की भी घोषणा की गई, जिसके तहत पश्चिमी यूरोप के देशों को आर्थिक सहायता दी गई।


3. 1948: सोवियत संघ ने पश्चिमी जर्मनी के बर्लिन शहर पर घेराबंदी की। अमेरिका ने विमानों के माध्यम से राहत सामग्री भेजकर इसका सामना किया।


4. 1950-1953: कोरियाई युद्ध हुआ, जिसमें उत्तरी कोरिया ने दक्षिणी कोरिया पर आक्रमण किया। अमेरिका ने दक्षिण कोरिया की मदद की, और सोवियत संघ तथा चीन ने उत्तरी कोरिया का समर्थन किया। युद्ध के बाद कोरिया को 38वीं समांतर रेखा के आधार पर विभाजित कर दिया गया।

5. 1954: वियतनाम का विभाजन 17वीं समांतर रेखा द्वारा हुआ, और जेनेवा समझौते के तहत इसे विभाजित किया गया। इसके बाद वियतनाम में अमेरिका का हस्तक्षेप प्रारंभ हुआ।

6. 1962: क्यूबा मिसाइल संकट में सोवियत संघ ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात की, जिसके बाद अमेरिका ने क्यूबा से अमेरिकी पानी में सोवियत जहाजों को रोकने का आदेश दिया। इस संकट ने दुनिया को परमाणु युद्ध के खतरे के पास लाकर खड़ा कर दिया।

7. 1979: सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया, जिससे अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव और बढ़ा। यह युद्ध 1989 में समाप्त हुआ, जब सोवियत संघ ने अपनी सेना को अफगानिस्तान से वापस बुला लिया।

8. 1985: मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ के राष्ट्रपति के रूप में सत्ता संभाली और उन्होंने सुधारों की शुरुआत की, जो शीत युद्ध के अंत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

9. 1991: सोवियत संघ का विघटन हुआ, और शीत युद्ध समाप्त हो गया। इसके साथ ही अमेरिका एकमात्र वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरा।

शीत युद्ध के समाधान:


शीत युद्ध का कोई सीधा सैन्य समाधान नहीं था, लेकिन कूटनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक उपायों के माध्यम से इसे समाप्त किया गया। गोर्बाचेव के सुधारों और 'ग्लासनोस्त' (खुलापन) तथा 'पेरेस्त्रोइका' (पुनर्निर्माण) की नीतियों ने सोवियत संघ में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की। इसके परिणामस्वरूप 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ और शीत युद्ध समाप्त हो गया।


शीत युद्ध में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) का योगदान:

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) शीत युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल थी, जिसे 1961 में भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, युगोस्लाविया के जोसिप ब्रोज़ टिटो, और मिस्र के राष्ट्रपति गामल अब्दल नासिर द्वारा स्थापित किया गया। इस आंदोलन का उद्देश्य शीत युद्ध में शामिल दोनों प्रमुख गुटों (अमेरिका और सोवियत संघ) से स्वतंत्र रहकर, शांति, स्थिरता.....👇
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और विकास की दिशा में कार्य करना था। गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों ने न तो पूंजीवाद का समर्थन किया, न ही साम्यवाद का, बल्कि अपने देशों के विकास के लिए एक स्वतंत्र और तटस्थ कूटनीति अपनाई।

यह आंदोलन मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को एक मंच पर लाया। गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने शीत युद्ध के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वैश्विक स्तर पर स्वतंत्रता, समानता और लोकतंत्र की पहल को बढ़ावा दिया। हालांकि, शीत युद्ध के अंत के बाद इस आंदोलन का प्रभाव कुछ कम हुआ, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच बना रहा।

बाइपोलैरिटी के बाद के चैलेंज और शीत युद्ध की भूमिका:

शीत युद्ध के समाप्त होने के बाद, दुनिया में एक नई व्यवस्था का निर्माण हुआ, जिसमें केवल एक प्रमुख महाशक्ति, यानी अमेरिका, बची। शीत युद्ध के दौरान दुनिया दो प्रमुख गुटों में विभाजित थी—अमेरिका द्वारा नेतृत्व किए गए पूंजीवादी गुट और सोवियत संघ द्वारा नेतृत्व किए गए साम्यवादी गुट। जब सोवियत संघ 1991 में विघटित हुआ, तो बाइपोलैरिटी समाप्त हो गई और युनिपोलैरिटी की स्थिति बनी, जिसमें अमेरिका अकेली वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरा।
वैश्विक शक्ति संतुलन: एकमात्र महाशक्ति के रूप में अमेरिका का प्रभुत्व दुनिया के अन्य देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया। कई देशों ने अमेरिका के नेतृत्व में होने वाली नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई, खासकर उसकी सैन्य हस्तक्षेप की नीतियों जैसे इराक और अफगानिस्तान में युद्ध।

आर्थिक असमानताएँ: शीत युद्ध के बाद के दौर में, विकासशील देशों के बीच बढ़ती हुई आर्थिक असमानताएँ और वैश्विक गरीबी एक बड़ी चुनौती बनी। विकासशील देशों ने अमेरिकी और पश्चिमी नीतियों के दबाव को महसूस किया।

नए संघर्ष और आतंकवाद: शीत युद्ध के समाप्त होने के बाद नए प्रकार के संघर्ष और आतंकवाद के मुद्दे उभरे। यह वैश्विक सुरक्षा के लिए नया खतरा बन गया, जैसा कि 9/11 के हमलों के बाद देखा गया।


शीत युद्ध की भूमिका:

शीत युद्ध ने वैश्विक स्तर पर दो गुटों के बीच संतुलन बनाए रखा था, जिससे किसी भी एक गुट का अत्यधिक प्रभाव सीमित था। लेकिन शीत युद्ध के बाद अमेरिका के एकल प्रभुत्व ने नई समस्याओं को जन्म दिया। इसके बावजूद, शीत युद्ध के दौरान पैदा हुए कूटनीतिक और सैन्य उपायों, जैसे परमाणु निरस्त्रीकरण की पहल और वैश्विक संगठनों (संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन आदि) के प्रभावी कार्य, बाइपोलैरिटी के बाद के समय में भी काम आए और दुनिया को बेहतर दिशा में मार्गदर्शन देने का प्रयास किया।
इस तरह, शीत युद्ध का अंत दुनिया के लिए एक नए प्रकार की कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य स्थिति लेकर आया, जिसे विभिन्न देशों ने अपने-अपने तरीके से स्वीकार किया और उसका सामना किया।
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NCERT 12th 📚 Book- समकालीन विश्व राजनीति

📜Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व


1. शीतयुद्ध का अंत हो गया तथा अमरीका विश्व की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरा, अमरीका प्रभुत्व एक धुर्वीय विश्व का युद आरंभ हुआ।

2. नयी विश्व व्यवस्था की शुरुआत हुई, संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इराक के विरुद्ध बल प्रयोग की अनुमति दिए जाने की अमरीका राष्ट्रपति जार्ज बुश ने नई विश्व व्यवस्था की संज्ञा दी।

3. दूसरों के व्यवहार को प्रभावित या नियंत्रण करने की क्षमता जिससे के हम उनसे मनचाहा काम कर सके वर्चस्व या आधिपत्त्य कहलाता है।

4. इतिहास हमें बताता है कि विश्व में किसी भी देश का वर्चस्व स्थाई नहीं रह सकता।

5. विश्व राजनीति में विभिन्न देश या देशों के समूह ताकत पाने और कायम रखने की लगातार कोशिश करते हैं। यह ताकत सैन्य प्रभुत्व, आर्थिक शक्ति, राजनीतिक रुतबे और सांस्कृतिक विकास के रूप में होती है।

6. अमेरिका वर्चस्व की शुरुआत सोवियत संघ के 1991 के विघटन के बाद हुई।

7. लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा था।

8. अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध परमाणु बम का प्रयोग।

9. युद्ध के दौरान अमेरिका का निर्यात बढ़ा और वह विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया।

10. विश्व पर वर्चस्व का प्रभाव इराक ने कुवैत पर हमला किया, संयुक्त राष्ट्रसंघ ने कुवैत को मुक्त करने का फैसला लिया।

11. UN ने इसे ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म सैनिक अभियान का नाम दिया।

12. संयुक्त राष्ट्रसंघ की आड़ में यह अमेरिका अभियान था, इसकी सेना के प्रमुख जनरल नार्मन श्वार्जकोव थे।

13. 34 देशों की सेना में 75 प्रतिशत सैनिक अमेरिका के थे। इराक की हार हुई। इसके अतिरिक्त समुद्री मार्ग, उदारीकरण, कोष, आर्थिक प्रतिबंधों द्वारा प्रभाव डालना आदि।

14. सीबीटी, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, आदि अमेरिका के वर्चस्व के प्रतीक हैं।

15. प्रथम खाड़ी युद्ध द्वारा अमेरिका ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, इसे कंप्यूटर युद्ध की संज्ञा दी तथा "वीडियो गेम वार" भी कहा जाता है।

16. 1992-2000 चुनावों में बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मामलों में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

17. 1999 में युगोस्लाविया पर सैन्य कार्यवाही की गई जबकि वहां अलबानियाई लोगों ने आंदोलन किया। इसको दबाने के लिए नाटो सेनाओं ने कोसोवो पर अपना कब्जा किया।

18. 1998 में नैरोबी (केन्या) तथा दारे-सलाम (तंजानिया) के अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी हुई, इसका जिम्मेदार अलकायदा आतंकी संगठन को माना गया। इसके प्रतिशोध में अमेरिकी राष्ट्रपति ने "ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच" का आदेश दिया। इसके अंतर्गत सूडान और अफगानिस्तान में अलकायदा के ठिकानों पर क्रूज मिसाइलों से बमबारी की गई। इसकी जानकारी अमेरिका ने UN को भी नहीं दी।

19. 11 सितम्बर 2001 आतंकवादी घटना के विरुद्ध, ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम चलाया।

20. इस ऑपरेशन में अमेरिकियों ने सभी देशों को विश्व से आतंकवाद का सफाया करने में योगदान करने को कहा। इसे 9/11 की घटना से जाना जाता है।

21. यह घटना अमेरिकी की शक्ति और उसके वर्चस्व को खुली चुनौती थी।

22. इस ऑपरेशन में अमेरिकियों ने 'अलकायदा' और अफगानिस्तान के तालिबान को निशाना बनाया।

23. 9/11 की घटना का प्रभुत्व अलकायदा के ओसामा बिन लादेन द्वारा निर्देशित थी।

24. 19 मार्च 2003 को इराक पर आक्रमण UN की अनुमति के बिना किया। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य फ्रांस, रूस और चीन ने भी इसकी आलोचना की। वास्तव में अमेरिकी इराक में सद्दाम हुसैन के शासन को समाप्त करना, अपनी पसंद की सरकार स्थापित करना तथा इराक के तेल भंडार पर नियंत्रण करना चाहते थे, इसे ऑपरेशन इराकी फ्रीडम कहा गया।

25. सद्दाम हुसैन को बंदी बनाया, उस पर मुकदमा चला, दिसम्बर 2006 में उसे फांसी दे दी गई।

26. अमेरिका एक मात्र महाशक्ति के रूप में है, उसने राजनीति को अपनी इच्छानुसार चलाने के प्रयास किए, अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं, संगठनों की परवाह नहीं की, अपनी बात मनवाने के प्रयास किए, परंतु यह दादागिरी कहीं भी गांव, नगर, प्रांत, राष्ट्र तथा विश्व में अधिक दिन नहीं चलती, उसे चुनौती मिलती है।

27. अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध अमेरिका की संस्थागत बनावट है। यहां शासन के तीन अंगों के बीच शक्ति का बंटवारा है। कार्यपालिका द्वारा सैन्य शक्ति पर अंकुश लगाने का काम करती है।

28. अमेरिकी समाज जो अपनी प्रकृति में उन्मुक्त है, अमेरिका के विदेशी सैन्य अभियानों पर अंकुश रखने में बड़ी भूमिका निभाती है।

29. नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) देशों में बाजारमूलक अर्थव्यवस्था चलती है।

30. नाटो में शामिल देश अमेरिका के वर्चस्व पर अंकुश लगा सकते हैं।

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प्रमुख संविधान संशोधन - जहां से हर बार प्रश्न एग्जाम में पूछे जाते हैं।
याद करने वाले keywrod —

▪️1st (1950) - भूमि सुधार

▪️35th (1974) - सिक्किम को भारतीय संघ के सह राज्य का दर्जा

▪️36th (1975) - सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा

▪️42nd (1976) - समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अखंडता को परिभाषित किया गया, नीति निदेशक तत्व को अधिक व्यापक बनाया गया, मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया, न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई

▪️44th (1978) - संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार से हटा दिया गया

▪️52nd (1985) - दलबदल अधिनियम लाया गया

▪️61th (1989) - मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 की गई

▪️73rd (1992) - पंचायती राज व्यवस्था

▪️74th (1992) - नगर पालिका

▪️86th (2002) - 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा

▪️101वां (2016) - GST

▪️102वां (2018)- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा

▪️103वां (2019) - EWS के लिए

▪️104वां (2019) - संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का 80 वर्ष के पश्चात ना रहना

▪️105वां (2021) - इस संशोधन ने राज्य सूचियों और पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उन्हें अधिसूचित करने की राज्यों की शक्ति को संरक्षित किया।
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