Forwarded from The Lion 🪖 Army
✅✅इतिहास अध्ययन की पाठशाला🍫
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
ऋग्वेद संहिता के दसवें मण्डल पुरुषसूक्त में पहली बार यह उल्लेख किया गया कि ब्राह्मण, राजन्य, वैश्य और शूद्र ये चार सामाजिक वर्ग हैं। इस सूक्त से वर्ण शब्द का कहीं प्रयोग नहीं किया गया। सामान्य तौर पर ये चार सामाजिक श्रेणियों को परिभाषित करता था। जिनकी उत्पत्ति पुरुष के एक महान यज्ञ में आहुति दिए जाने के क्रम में हुई। पुरुष का शरीर चार वर्षों में विभाजित होना, दूसरे शब्दों में यह निर्दिष्ट करता है कि सैद्धांतिक दृष्टि से एक ही संपूर्णता के ये अलग-अलग अवयव थे। इस व्यवस्था में ब्राह्मण सबसे ऊपर और शूद्र सबसे नीचे अवस्थित थे। दूसरी बात यह है कि वर्णों की उत्पत्ति, धरती, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा जैसे प्राकृतिक तत्वों के साथ हुई, वह यह सिद्ध करने का प्रयास था कि यह एक स्वाभाविक और पारलौकिक प्रक्रिया का ही एक अंग है न कि कृत्रिम। जैसा कि ब्रायन. के. स्मिथ (1994) ने बतलाया है कि वर्ण व्यवस्था केवल सामाजिक वर्गीकरण के लिए नहीं बल्कि ईश्वर अथवा प्राकृतिक संसार के विभाजन से भी जोड़ दी गयी।
सोर्स : उपिंदर सिंह
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
आर्यो का पूर्वी विस्तार :
शतपथ ब्राह्मण (1.4.1.10) में एक कथा कही गयी है जिसके अनुसार विदेघ माथव जो मूल रूप से सरस्वती के किनारे रहते थे, उन्होंने सदानीरा (गंडक) नदी को पार किया। इस क्रम में उनके पुरोहित गौतम रघुगण थे और इनकी अगवानी अग्नि वैष्वानर कर रहे थे। इतिहासकारों ने इस कथा की व्याख्या इस प्रकार की है कि यह इंडो-आर्य लोगों के पूर्ववर्ती प्रवर्जन की प्रक्रिया को दर्शाता है जिन्होंने जंगलों को काटकर पूर्वी भारत में कृषि की शुरुआत की। एक दूसरे प्रकार की व्याख्या यह भी की गयी है कि उत्तर-पश्चिमी मूल के होने के कारण विदेह के राजा को सामाजिक सम्मान की प्राप्ति के लिए और अपनी सत्ता को वैधानिकता देने के लिए इस प्रकार के संदर्भ से जोड़ा गया है, क्योंकि अग्नि और ब्राह्मण यज्ञ अनुष्ठानों के द्वारा इस क्षेत्र में उनको निश्चित रूप से सम्मान मिला होगा।
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शतपथ ब्राह्मण (1.4.1.10) में एक कथा कही गयी है जिसके अनुसार विदेघ माथव जो मूल रूप से सरस्वती के किनारे रहते थे, उन्होंने सदानीरा (गंडक) नदी को पार किया। इस क्रम में उनके पुरोहित गौतम रघुगण थे और इनकी अगवानी अग्नि वैष्वानर कर रहे थे। इतिहासकारों ने इस कथा की व्याख्या इस प्रकार की है कि यह इंडो-आर्य लोगों के पूर्ववर्ती प्रवर्जन की प्रक्रिया को दर्शाता है जिन्होंने जंगलों को काटकर पूर्वी भारत में कृषि की शुरुआत की। एक दूसरे प्रकार की व्याख्या यह भी की गयी है कि उत्तर-पश्चिमी मूल के होने के कारण विदेह के राजा को सामाजिक सम्मान की प्राप्ति के लिए और अपनी सत्ता को वैधानिकता देने के लिए इस प्रकार के संदर्भ से जोड़ा गया है, क्योंकि अग्नि और ब्राह्मण यज्ञ अनुष्ठानों के द्वारा इस क्षेत्र में उनको निश्चित रूप से सम्मान मिला होगा।
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Forwarded from No Document No History (Shri.Ramsing Rajput ⛳)
No Document No History
monograph20.pdf
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Forwarded from No Document No History (Shri.Ramsing Rajput ⛳)
No Document No History
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Forwarded from No Document No History (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
Nyaya Bindu of Dharma Kirti - Govind Chandra Pandey.pdf
41.6 MB
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Forwarded from No Document No History (Shri.Ramsing Rajput ⛳)
No Document No History
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत)
गुनाहों_का_देवता_Gunahon_Ka_Devta_by_धर्मवीर_भारती,_Dharmaveer_Bharti.pdf
2.6 MB
गुनाहों का देवता Gunahon Ka Devta by धर्मवीर भारती, Dharmaveer Bharti.pdf
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत)
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
उत्तर वैदिक ग्रंथों में महिलाओं के कार्यों का उल्लेख किया गया है, जैसे पशुओं को चराना, दूध दुहना, पानी लाना। वयितृ' या 'शिरी' महिला बुनकर की कहते थे। पेशस्करी महिला कसीदाकार को कहते थे। 'विदलकरी' बांस में काम करने वाली महिलाओं को कहते थे। 'राजयितृ' कपड़ों में रंग करने वाली महिलाओं को कहते थे तथा 'उपलप्रक्षिणी' अनाज पिसने वाली महिला को कहते थे। शतपथ ब्राह्माण में जतलाया गया है कि महिलाएं ऊन का काम भी करती थीं। अपला, ऋग्वेद (8.80) के अनुसार, अपने पिता के खेतों की देखभाल किया करती थी। विश्पला (ऋग्वेद 1.112.10 तथा 1.116.5), एक योद्धा स्त्री जिसने युद्ध में अपना एक पैर खोया था और मुद्गलिनी और वध्रीमति जैसी योद्धा महिलाओं की भी चर्चा की गयी है। गार्गी और मैत्रेयी जैसी कुछ महिलाओं ने उपनिषद् के ऋषियों के साथ शास्त्रार्थ भी किया।
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Forwarded from ABHI....🫣
_जाना_जरूरी_है_क्या_ऐश्वर्या_शर्मा_Mast_Novels_blueking_1.pdf
18.4 MB
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Forwarded from ABHI....🫣
_नागा_वॉरियर्स_भाग_1_Novels_blueking.pdf
43.3 MB
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