No Document No History
6.5K subscribers
24.5K photos
1.47K videos
21.8K files
10.8K links
🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
📚 History PDFs | Notes | PYQs | Research Material
🎓 NET/JRF • SET • Assistant Professor • Competitive Exam
@RamsingRajput786 https://t.me/HistoryChatAdda
Download Telegram
क्रांतिकारी और उग्रवादी
🔥5👏1
क्रांतिकारी आतंकवादी की खास बात थी उनका धर्मनिरपेक्ष चरित्र




क्रांतिकारी आतंकवादी की खास बात थी उनका धर्मनिरपेक्ष चरित्र। 1924 ई. में जब लाला लाजपत राय ने साम्प्रदायिक राजनीति का रास्ता अख्तियार किया तो भगत सिंह ने उनके खिलाफ वैचारिक आंदोलन छेड़ दिया। इस हेतु उन्होंने राबर्ट ब्राउनिंग की एक कविता द लॉस्ट लीडर को एक पर्चे के रूप में छापा।
Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Pooja Pandey)
मस्यु पैरो का धोखा — दौलतराव सिंधिया का पतन

जिसके नेतृत्व में सेना की जिम्मेदारी थी उसी ने धोखा दिया

हुआं यूं कि द्वितीय आंग्ल–मराठा युद्ध (1803 ई.) के दौरान दौलतराव सिंधिया की सेना का नेतृत्व मस्यु पैरो (Monsieur Perron) नामक एक फ्रांसीसी अधिकारी के हाथों में था।

पैरो सिंधिया के अधीन फ्रांसीसी प्रशिक्षित सैनिकों का कमांडर था और मराठा सेना के यूरोपीय ढांचे को वही संभालता था।

लेकिन जब अंग्रेज सेनानायक जनरल जेरार्ड लेक (General Gerard Lake) ने उत्तर भारत की ओर कूच किया, तो पैरो ने डर या लालच में अंग्रेजों से गुप्त समझौता कर लिया।

कहा जाता है कि उसने रिश्वत लेकर या आत्म–हित में युद्ध की पूर्व संध्या पर किला छोड़ दिया और अपनी सेना को पीछे हटा लिया।

इसके परिणामस्वरूप अंग्रेज जनरल लेक ने कोयल (Aligarh Fort) जैसे मजबूत दुर्ग को बिना बड़ी कठिनाई के जीत लिया।
यह घटना 1803 ई. में हुई थी और यही सिंधिया की शक्ति को उत्तर भारत में निर्णायक रूप से कमजोर करने वाला मोड़ बनी।
बाद में लेक ने दिल्ली और आगरा पर भी अधिकार कर लिया और मराठा साम्राज्य की उत्तर दिशा की पकड़ लगभग समाप्त हो गई।

मस्यु पैरो के इस विश्वासघात को मराठा इतिहास में एक महत्वपूर्ण विश्वासघात (Great Betrayal) के रूप में याद किया जाता है।


https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल

https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
👍1
विद्वानो की कोटियाँ 👆👆
Forwarded from आदित्य राय
❤3
Forwarded from 💐꧁🌺शिवशक्ति 🌺 ꧂ 💐
Topic se quiz hoga ab yhaaa... daily  150 questions/ topic 💐💐💐

Aaj modern history se start krte hai..

Aaj ka topic hai यूरोपीय कम्पनी 💐
https://t.me/dreamshinganiaOm




4 PM quiz topic GK GS POLITY GEOGRAPHY ECONOMICS 💐💐💐
👍4
Dear Aspirants

छात्रों के लिए 90–90–1 नियम
आने वाले 90 दिनों तक,
हर दिन के पहले 90 मिनट
सिर्फ़ एक लक्ष्य को दे दो।
कोई मोबाइल नहीं,
कोई भटकाव नहीं—बस तुम और तुम्हारी पढ़ाई।छात्र जीवन में यही 90 मिनट
आत्मविश्वास बनते हैं,याददाश्त मजबूत करते हैं
और परिणाम बदल देते हैं।
याद रखो,
पूरा दिन नहीं—सिर्फ़ सुबह का फोकस
पूरा भविष्य बदल सकता है।

पोस्ट पूरी तरह से कॉपी की गई है ⭐️
https://t.me/Ramsing2023
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤8👍2👏1
PHD NOTIFICATION ONLY ( Ugc Net Jrf Phd )
https://www.instagram.com/reel/DUI7iPRDd0Z/?igsh=NWFrZDd3bDV1Njl1
वाह वाह बहुत खूब
प्रिय मित्र,
प्रो.प्रथम जी....
🩷❤️💜💗💙✨✅🦋
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤4🔥1👏1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
1787
ब्रिटिशों की पहली दंड बस्ती
📍 बेनकूलेन (सुमात्रा, इंडोनेशिया)
• केंद्र: फोर्ट मार्लबोरो
उद्देश्य–
अपराधियों को दूर रखना
निशुल्क श्रम (forced labour) प्राप्त करना

1789
ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंडमान द्वीप समूह का सर्वेक्षण शुरू किया

📍 लेफ्टिनेंट आर्किबाल्ड ब्लेयर
कैदी बस्ती की सिफारिश →
👉 ब्लेयर के नाम पर “पोर्ट ब्लेयर”

प्रशासनिक व दमनकारी ढाँचा

– वाइपर द्वीप में पहली जेल और फांसीघर (1864–67)
– डॉ. जेम्स पैट्रिक वॉकर जैसे अधिकारियों की निगरानी
– एक ही दिन में 80+ स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी

10 मार्च 1858 को अंडमान के चैथम द्वीप पर 733 स्वतंत्रता सेनानियों का पहला जत्था पहुँचा।
इस जत्थे में अल्लामा फ़ज़ल-ए-हक खैराबादी, मौलाना लियाकत अली जैसे प्रमुख नेता भी शामिल थे। कई नेताओं ने कैद के दौरान ही दम तोड़ दिया।

1860 के बाद महिला अपराधियों को भी अंडमान भेजा जाने लगा।
1872 में अंडमान भेजे गए एक वहाबी अपराधी ने
वाइसराय लॉर्ड मेयो की चाकू घोंपकर हत्या कर दी।

1874– सुधारात्मक दंड नीति (Reformative Penal System)
• अच्छे व्यवहार पर
• 20–25 वर्ष बाद रिहाई

https://t.me/historyfact00
❤3👏1🤣1
Article_16 :-लोक नियोजन के विषय में अवसर की समताl

📌अनुच्छेद16(1):-


राज्य के अधीन किसी पद पर नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी।

📌अनुच्छेद16(2):-


राज्य के अधीन किसी नियोजन या पद के संबंध में केवल धर्म, मूल वंश ,जाति ,लिंग ,जन्म स्थान, उद्भव,  निवास या इनमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अपात्र होगा और न उनसे विभेद किया जाएगाl

📌अनुच्छेद16(3):-


सरकारी नौकरियों में संसद निवास स्थान के आधार पर भेदभाव की इजाजत दे सकती है ,पर राज्य विधान मंडल ऐसा नहीं कर सकता।

📌अनुच्छेद16(4):-


पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों में आरक्षणl

नोट: अनुच्छेद16(3) व (4)लोक नियोजन में अवसर की समता के अपवाद हैंl



अनुच्छेद16(4)A:-


SC, ST को सरकारी नौकरियों की पदोन्नति आरक्षण।

अनुच्छेद 16(4)(B)


इस उपबन्ध के तहत आरक्षण से भरी जाने वाले यदि कुछ सीटें खाली रह जाती हैं तो उन्हें अगले साल अलग से भरा जा सकता है।


📌अनुच्छेद16(5):-


धर्म के आधार पर विभेद की राज्य को अनुमति देता है।

📌अनुच्छेद16(6):-


आर्थिक रूप से कमजोर(EWS)को सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण(103वा संविधान संशोधन 2019)
सम्प्रदायकता_का_विकाश_और_भारत_का_विभाजन.pdf
12.4 MB
Shared via All PDF Reader, a practical app that makes reading and editing PDF files super convenient.
Free download:https://st.akrura.ltd/uuy6fa
RPSC first gred आधुनिक भारत के नये जोड़े हुए टॉपिक 👆👆
❤1
🤷‍♀1
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
Photo
बर्मा में (प्रशिक्षण शिविर) स्थापित किया गया था जिसमें पुरुष और महिला—दोनों प्रकार के सैनिक शामिल थे। उनके अनुसार, लगभग तीस शिक्षित लड़कियों को जासूस के रूप में प्रशिक्षित होने के लिए आमंत्रित किया गया।
शांति भौमिक ने सुना कि बोस, कर्नल हबीबुर रहमान के साथ, शिविर में स्वयं आकर रानियों का साक्षात्कार लेंगे, ताकि गुप्त सेवा प्रशिक्षण के लिए “कुछ बुद्धिमान और सक्षम लड़कियों” का चयन किया जा सके।
आईएनए के भर्ती अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीक्रेट सर्विस अधिकारी बनना स्वैच्छिक था, लेकिन सदस्यों ने शामिल होने के लिए अपने नाम रक्त से लिखकर हस्ताक्षर किए।
शांति का चयन हुआ, और रेजिमेंट की अन्य लड़कियों के साथ चुने जाने पर उसे अत्यंत गर्व महसूस हुआ।
“हमने अपनी उँगलियों को थोड़ा काटा और उनसे निकलते रक्त से नेताजी के माथे पर तिलक (शुभ चिह्न) लगाया। उसी रक्त से हमने एक कागज़ पर अपने-अपने नाम भी लिखे, जिस पर यह शपथ लिखी थी—
‘हम अपनी मातृभूमि के लिए अपने रक्त की अंतिम बूँद तक बलिदान देंगे।’”
बोस की ओर देखते हुए, लड़कियों ने देखा कि आनंद के आँसू उनके गालों पर बह रहे थे।

रानी मोम्मता ने दो अन्य रानियों—प्रतिमा सेन और माया गांगुली—के नाम याद किए, जिन्होंने उसके साथ सीक्रेट सर्विस में प्रवेश किया था।
इस परियोजना के प्रति अब भी उत्साहित मोम्मता ने गर्व से कहा—
“खुफिया अधिकारी के रूप में चुना जाना एक बहुत बड़ा सम्मान था। हमारी अलग-अलग कक्षाएँ होती थीं।”
https://t.me/historyfact00
🤣1
अनुशीलन समिति मिदनापुर , कलकत्ता और ढाका




1902 ई. में बंगाल के पहले क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति की स्थापना मिदनापुर में ज्ञानेंद्र नाथ बसु द्वारा तथा

1907 ई. में कलकत्ता में पी. मित्र, जतीन्द्र नाथ बनर्जी एवं वारींद्र कुमार घोष द्वारा की गई।



पुलिनदास द्वारा ढाका अनुशीलन समिति की स्थापना की गई।