Forwarded from 𝙽𝚘 𝙳𝚘𝚌𝚞𝚖𝚎𝚗𝚝 𝙽𝚘 𝙷𝚒𝚜𝚝𝚘𝚛𝚢 (श्री.रामसिंग राजपूत)
Fundamental of Research Methodology and Statistics (Eng) 1MB.pdf
1.1 MB
Fundamental of Research Methodology and Statistics (Eng) 1MB.pdf
❤1
Forwarded from 𝙽𝚘 𝙳𝚘𝚌𝚞𝚖𝚎𝚗𝚝 𝙽𝚘 𝙷𝚒𝚜𝚝𝚘𝚛𝚢 (श्री रामसिंग राजपूत)
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤3👍1
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
विदेशों में क्रांतिकारी आंदोलन (Revolutionary Movements Foriegn)
❤2
Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
⭐विषय: मनसबदारी व्यवस्था में 'ज़ात' और 'सवार' का असली मतलब क्या था❔❓
अक्सर हम मुग़ल इतिहास पढ़ते समय 'मनसबदारी व्यवस्था' (Mansabdari System) के बारे में सुनते हैं, लेकिन क्या आपको 'ज़ात' और 'सवार' के बीच का बारीक अंतर पता है❓❔ 🤔
📖 NCERT (कक्षा 12, शासक और इतिवृत्त) के अनुसार:
अकबर ने इस व्यवस्था को व्यवस्थित किया था। इसमें दो पद होते थे:
1️⃣ ज़ात (Zat): यह एक व्यक्तिगत पद था।
इससे मनसबदार के पद (Rank) और वेतन (Salary) का निर्धारण होता था।
जिसका 'ज़ात' जितना अधिक, दरबार में उसकी प्रतिष्ठा उतनी ही बड़ी!
2️⃣ सवार (Sawar): यह सैन्य जिम्मेदारी थी।
यह बताता था कि एक मनसबदार को कितने घोड़े और घुड़सवार रखने हैं।
💡 रोचक तथ्य: 17वीं शताब्दी (शाहजहाँ/औरंगजेब के समय) तक आते-आते, मनसबदारों की संख्या इतनी बढ़ गई कि उन्हें जागीर मिलने में कई साल लग जाते थे! इसे 'जागीरदारी संकट' भी कहा जाता है।
Source:- NCERT 12th class
✍️ Join: @Itihaas_Junction
🚩 NCERT 'फैक्ट' ऑफ द डे 🚩
अक्सर हम मुग़ल इतिहास पढ़ते समय 'मनसबदारी व्यवस्था' (Mansabdari System) के बारे में सुनते हैं, लेकिन क्या आपको 'ज़ात' और 'सवार' के बीच का बारीक अंतर पता है❓❔ 🤔
📖 NCERT (कक्षा 12, शासक और इतिवृत्त) के अनुसार:
अकबर ने इस व्यवस्था को व्यवस्थित किया था। इसमें दो पद होते थे:
1️⃣ ज़ात (Zat): यह एक व्यक्तिगत पद था।
इससे मनसबदार के पद (Rank) और वेतन (Salary) का निर्धारण होता था।
जिसका 'ज़ात' जितना अधिक, दरबार में उसकी प्रतिष्ठा उतनी ही बड़ी!
2️⃣ सवार (Sawar): यह सैन्य जिम्मेदारी थी।
यह बताता था कि एक मनसबदार को कितने घोड़े और घुड़सवार रखने हैं।
💡 रोचक तथ्य: 17वीं शताब्दी (शाहजहाँ/औरंगजेब के समय) तक आते-आते, मनसबदारों की संख्या इतनी बढ़ गई कि उन्हें जागीर मिलने में कई साल लग जाते थे! इसे 'जागीरदारी संकट' भी कहा जाता है।
Source:- NCERT 12th class
✍️ Join: @Itihaas_Junction
❤5👍1🔥1
Forwarded from History Education 🔱❤
🔰भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन -
बम्बई में प्रथम अधिवेशन , डब्ल्यू.सी. बनर्जी की अध्यक्षता में - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन।
कलकत्ता में दूसरा अधिवेशन , दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में।
मद्रास में तीसरा अधिवेशन , सैयद बदरुद्दीन तैयबजी की अध्यक्षता में - पहले मुस्लिम अध्यक्ष।
इलाहाबाद में चौथा अधिवेशन , जॉर्ज यूले की अध्यक्षता में - प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष।
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाया गया।
कांग्रेस मंच पर गांधीजी की पहली उपस्थिति।
स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा । गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में आयोजित ।
अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी - स्वराज, बहिष्कार, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा पर प्रस्ताव
अध्यक्ष रास बिहारी घोष - नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच विभाजन ।
अध्यक्ष ए.सी. मजूमदार - उदारवादियों और गरमपंथियों के बीच एकता; मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौता ।
अध्यक्ष एनी बेसेंट - कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष।
अध्यक्षमोतीलाल नेहरू - खिलाफत आंदोलन के लिए समर्थन ।
अध्यक्ष महात्मा गांधी - गांधीजी की अध्यक्षता वाला एकमात्र अधिवेशन।
1927 : मद्रास -
अध्यक्ष डॉ. एम.ए. अंसारी - साइमन कमीशन के खिलाफ और पूर्ण स्वराज के लिए प्रस्ताव ।
1929 : लाहौर -
अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू - पूर्ण स्वराज पर प्रस्ताव; सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ।
1931 : कराची -
अध्यक्ष वल्लभभाई पटेल - मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम पर प्रस्ताव ।
1936 : लखनऊ -
अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू - समाजवादी विचारों की ओर झुकाव।
1938 : हरिपुरा -
अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस - राष्ट्रीय योजना समिति का गठन।
1939 : त्रिपुरी मध्यप्रदेश-
अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद - बोस पुनः निर्वाचित लेकिन त्यागपत्र दे दिया; फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन हुआ।
1940 : रामगढ़ -
अध्यक्ष अबुल कलाम आज़ाद - ....
1946 : मेरठ -
अध्यक्ष जे.बी. कृपलानी - स्वतंत्रता से पूर्व अधिवेशन।
....forwarded📤
1885 :
बम्बई में प्रथम अधिवेशन , डब्ल्यू.सी. बनर्जी की अध्यक्षता में - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन।
1886 :
कलकत्ता में दूसरा अधिवेशन , दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में।
1887 :
मद्रास में तीसरा अधिवेशन , सैयद बदरुद्दीन तैयबजी की अध्यक्षता में - पहले मुस्लिम अध्यक्ष।
1888 :
इलाहाबाद में चौथा अधिवेशन , जॉर्ज यूले की अध्यक्षता में - प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष।
1896 : कलकत्ता -
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाया गया।
1901 : कलकत्ता -
कांग्रेस मंच पर गांधीजी की पहली उपस्थिति।
1905 : बनारस -
स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा । गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में आयोजित ।
1906 : कलकत्ता -
अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी - स्वराज, बहिष्कार, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा पर प्रस्ताव
1907 : सूरत -
अध्यक्ष रास बिहारी घोष - नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच विभाजन ।
1916 : लखनऊ -
अध्यक्ष ए.सी. मजूमदार - उदारवादियों और गरमपंथियों के बीच एकता; मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौता ।
1917 : कलकत्ता -
अध्यक्ष एनी बेसेंट - कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष।
1919 : अमृतसर -
अध्यक्षमोतीलाल नेहरू - खिलाफत आंदोलन के लिए समर्थन ।
1924 : बेलगाम -
अध्यक्ष महात्मा गांधी - गांधीजी की अध्यक्षता वाला एकमात्र अधिवेशन।
1927 : मद्रास -
अध्यक्ष डॉ. एम.ए. अंसारी - साइमन कमीशन के खिलाफ और पूर्ण स्वराज के लिए प्रस्ताव ।
1929 : लाहौर -
अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू - पूर्ण स्वराज पर प्रस्ताव; सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ।
1931 : कराची -
अध्यक्ष वल्लभभाई पटेल - मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम पर प्रस्ताव ।
1936 : लखनऊ -
अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू - समाजवादी विचारों की ओर झुकाव।
1938 : हरिपुरा -
अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस - राष्ट्रीय योजना समिति का गठन।
1939 : त्रिपुरी मध्यप्रदेश-
अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद - बोस पुनः निर्वाचित लेकिन त्यागपत्र दे दिया; फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन हुआ।
1940 : रामगढ़ -
अध्यक्ष अबुल कलाम आज़ाद - ....
1946 : मेरठ -
अध्यक्ष जे.बी. कृपलानी - स्वतंत्रता से पूर्व अधिवेशन।
....forwarded📤
https://t.me/+nqCH8jHzE905OGRl ✅
🔠 🔠 🔠 ❗️ 🔤 🔤 🔤
के लिए भारतीय इतिहास➕ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
🔠 🔠 🔠 🔠 🔠
2️⃣ ✅ 📌 ✌ 👍
🔤 🔤 🔤 🔤 ❗️
🔠 🔠 🔠 🔠 🔠 🔠 😀
2️⃣ 🔠 🔣 🔠 ⭐️
8️⃣ 🔠 🔣 🔠 ⭐️
के लिए भारतीय इतिहास
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤2
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤6👍3🔥1
Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Bhoomi)
“यदि पराजय ही मिलनी है, युद्ध के मैदान में तो क्या हुआ?
लूट नहीं पाया अभी सर्वस्व — अभी भी शेष है, द्रढ़ इच्छाशक्ति और उत्साह,
जिसका समर्पण या नमन संभव नहीं, संभव नहीं!”
यह पंक्तियाँ बाबर के अदम्य साहस और अटूट आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।
बाबर से संबंधित प्रमुख तथ्य
1. पूरा नाम – ज़हीर-उद-दीन मुहम्मद बाबर।
2. जन्म – 14 फ़रवरी 1483, अंदिजन (फ़रग़ाना घाटी, वर्तमान उज़्बेकिस्तान)।
3. वंश
पिता: उमर शेख मिर्ज़ा
माता: कुतलुग निगार ख़ानम (चंगेज़ ख़ान की वंशावली से)
4. साम्राज्य स्थापना
1526 ई. पानीपत की प्रथम लड़ाई में इब्राहीम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी।
5. अन्य प्रमुख युद्ध
1527 : खानवा का युद्ध (राणा सांगा को पराजित किया)।
1528 : चंदेरी का युद्ध (मेदिनी राय पर विजय)।
1529 : घाघरा का युद्ध (अफगान-नुसरत शाह की संयुक्त शक्ति को हराया)।
6. धार्मिक-सांस्कृतिक पक्ष
बाबर की रुचि सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं थी, वह साहित्य, बाग-बगीचों और स्थापत्य कला का भी प्रेमी था।
उसने भारत में चारबाग शैली के बगीचे शुरू किए।
7. भाषा और साहित्य
बाबर तुर्की (चगताई तुर्की) में कविता लिखता था।
उसकी आत्मकथा "तुझुक-ए-बाबरी" या "बाबरनामा" मध्य एशियाई संस्कृति और भारत के बारे में बहुमूल्य स्रोत है।
8. व्यक्तित्व
बाबर शराब और अफीम का सेवन करता था, लेकिन वही व्यक्ति गहन संवेदनशील और काव्यप्रिय भी था।
उसमें संगठन और रणनीति की अद्भुत क्षमता थी।
9. मृत्यु – 26 दिसम्बर 1530, आगरा।
बाद में उसकी इच्छा के अनुसार उसके शव को काबुल ले जाकर दफनाया गया।
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
लूट नहीं पाया अभी सर्वस्व — अभी भी शेष है, द्रढ़ इच्छाशक्ति और उत्साह,
जिसका समर्पण या नमन संभव नहीं, संभव नहीं!”
यह पंक्तियाँ बाबर के अदम्य साहस और अटूट आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।
बाबर से संबंधित प्रमुख तथ्य
1. पूरा नाम – ज़हीर-उद-दीन मुहम्मद बाबर।
2. जन्म – 14 फ़रवरी 1483, अंदिजन (फ़रग़ाना घाटी, वर्तमान उज़्बेकिस्तान)।
3. वंश
पिता: उमर शेख मिर्ज़ा
माता: कुतलुग निगार ख़ानम (चंगेज़ ख़ान की वंशावली से)
4. साम्राज्य स्थापना
1526 ई. पानीपत की प्रथम लड़ाई में इब्राहीम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी।
5. अन्य प्रमुख युद्ध
1527 : खानवा का युद्ध (राणा सांगा को पराजित किया)।
1528 : चंदेरी का युद्ध (मेदिनी राय पर विजय)।
1529 : घाघरा का युद्ध (अफगान-नुसरत शाह की संयुक्त शक्ति को हराया)।
6. धार्मिक-सांस्कृतिक पक्ष
बाबर की रुचि सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं थी, वह साहित्य, बाग-बगीचों और स्थापत्य कला का भी प्रेमी था।
उसने भारत में चारबाग शैली के बगीचे शुरू किए।
7. भाषा और साहित्य
बाबर तुर्की (चगताई तुर्की) में कविता लिखता था।
उसकी आत्मकथा "तुझुक-ए-बाबरी" या "बाबरनामा" मध्य एशियाई संस्कृति और भारत के बारे में बहुमूल्य स्रोत है।
8. व्यक्तित्व
बाबर शराब और अफीम का सेवन करता था, लेकिन वही व्यक्ति गहन संवेदनशील और काव्यप्रिय भी था।
उसमें संगठन और रणनीति की अद्भुत क्षमता थी।
9. मृत्यु – 26 दिसम्बर 1530, आगरा।
बाद में उसकी इच्छा के अनुसार उसके शव को काबुल ले जाकर दफनाया गया।
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
Telegram
All history hub 📖📖📖
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Follow the ExamEasy ( History Hub) channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va6OYUyCcW4qeeGgb41S
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Follow the ExamEasy ( History Hub) channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va6OYUyCcW4qeeGgb41S
❤5