No Document No History
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⚠️ महत्वपूर्ण निर्देश: ✔️ केवल Paid Challenges ही स्वीकार किए जाएंगे।
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
राजतंत्र के विकास के साथ बहुत सारे जटिल यज्ञ कर्मकाण्डों को भी जोड़ा गया। वाजपेय यज्ञ में समृद्धि और शक्ति की प्राप्ति के लिए अनुष्ठानों का आयोजन होता था तथा इससे बहुत सारे प्रजनन क्षमता से जुड़े अनुष्ठान भी जोड़ दिये गए थे। इसमें एक औपचारिक, एक अनुष्ठानिक रथदौड़ होती थी जिसमें राजन् अपने बंधु-बांधवों के विरुद्ध रथों की दौड़ में विजयी होता था। अश्वमेध यज्ञ में सर्वोच्च राजनीतिक शक्ति की प्राप्ति के लिए अनुष्ठान किया जाता था और इस यज्ञ में भी कई अतिरिक्त प्रजनन सम्बंधी अनुष्ठानों को जोड़ दिया गया था। राजसूय यज्ञ राजाभिषेक के अनुष्ठान को कहते हैं। इसमें भी बहुत सारे कृषि की उर्वरा शक्ति और प्रजनन क्षमता से जुड़े अनुष्ठान सम्मिलित थे। इसमें एक अवसर पर राजन अपने बंधु-बांधवों के पशुधन का हरण करता था। दूसरे अवसर पर वह चौसर के खेल में उनमें विजयी होता था। ये सब प्रतीकात्मक स्तर पर किये जाते थे। राजसूय यज्ञ से जुड़ी यह मान्यता थी कि इस सृष्टि के निर्माण और अंत के चक्रीय प्रक्रिया के केंद्र में राजन् खड़ा है (हिस्टेरमैन, 1957)।
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
'झूकर संस्कृति'
उत्तर पश्चिम में परिपक्व हड़प्पा संस्कृति के बाद उत्तर हड़प्पा संस्कृति का विकास हुआ था, जिसको सिन्ध में 'झुकर संस्कृति' तथा पंजाब में 'सिमेट्री-एच संस्कृति' की संज्ञा दी गई है। इस काल में मुख्य परिवर्तन यही हुआ कि हड़प्पा संस्कृति के नगरीकरण के तत्व पूर्ण रूप से गौण हो गए। झूकर संस्कृति की जानकारी झूकर, चन्हूदड़ो तथा आमरी के पुरातात्त्विक उत्खनन से मिली है। परिपक्व हड़प्पा संस्कृति की मुद्भाण्ड पुरम्परा सीमित रूप से विद्यमान रही। घनाकार बटखरे और मातृदेवी की प्रतिमाएं प्रायः नगण्य रूप से मिलने लगीं। आयताकार हडप्पा सील मुहरों की जगह वृत्ताकार सील मुहरों ने ले लीं। लिपि का प्रदर्शन केवल मृद्भाण्डों के ठीकरों में देखा जा सकता है।
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उत्तर पश्चिम में परिपक्व हड़प्पा संस्कृति के बाद उत्तर हड़प्पा संस्कृति का विकास हुआ था, जिसको सिन्ध में 'झुकर संस्कृति' तथा पंजाब में 'सिमेट्री-एच संस्कृति' की संज्ञा दी गई है। इस काल में मुख्य परिवर्तन यही हुआ कि हड़प्पा संस्कृति के नगरीकरण के तत्व पूर्ण रूप से गौण हो गए। झूकर संस्कृति की जानकारी झूकर, चन्हूदड़ो तथा आमरी के पुरातात्त्विक उत्खनन से मिली है। परिपक्व हड़प्पा संस्कृति की मुद्भाण्ड पुरम्परा सीमित रूप से विद्यमान रही। घनाकार बटखरे और मातृदेवी की प्रतिमाएं प्रायः नगण्य रूप से मिलने लगीं। आयताकार हडप्पा सील मुहरों की जगह वृत्ताकार सील मुहरों ने ले लीं। लिपि का प्रदर्शन केवल मृद्भाण्डों के ठीकरों में देखा जा सकता है।
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अपने जीवन के
किसी भी दिन को कभी मत पछताओ:
अच्छे दिन खुशी देते हैं,
बुरे दिन अनुभव देते हैं,✅
सबसे बुरे दिन सबक देते हैं,
और
सबसे अच्छे दिन यादें देते हैं।⭐️
https://t.me/Ramsing2023
किसी भी दिन को कभी मत पछताओ:
अच्छे दिन खुशी देते हैं,
बुरे दिन अनुभव देते हैं,
सबसे बुरे दिन सबक देते हैं,
और
सबसे अच्छे दिन यादें देते हैं।
मैं हमेशा खुद से कहता हूँ, "ग़लतियों को जाने दो और सबक रखो।"
शुभ रात्रि🍎 🤩
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
इतिहास से जुडी विभिन्न प्रकार की पुस्तके, पेपर और सिलेबस के लिए
इतिहास के जुड़े सभी ग्रुप अपना लिंक हमारे ग्रुप में डालते हैं लेकिन हमारा लिंक जिससे सभी के लिए
किताबें अध्ययन को पढ़ने के साथ साथ विषय को समझने में बहुत मदद करती हैं आधे अधूरे ज्ञान से ऊपर उठिए क्योंकि इतिहास को पढ़ने के साथ-साथ समझना भी आवश्यक है नजरिया बदलो सोच बदल जाएगी
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Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
📜 ब्रिटिश कालीन भू-धृति पद्धतियां
📖 शब्द की उत्पत्ति (Etymology)
•. 'टेन्योर' (Tenure) शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'teneo' शब्द से हुई है।
• इसका अर्थ होता है— 'धारण करना' (to hold)।
🏛️ प्रमुख प्रणालियाँ
• अंग्रेजों ने भारत में मुख्य रूप से तीन भू-धृति पद्धतियां अपनाईं:
1. ज़मींदारी
2. महलवाड़ी
3. रैयतवाड़ी
1️⃣ ज़मींदारी / स्थाई बंदोबस्त
• 🗺️ विस्तार: यह पद्धति बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बनारस खंड और उत्तरी कर्नाटक में लागू थी।
• 📊 भू-भाग: ब्रिटिश भारत की लगभग 19% भूमि इस पद्धति के अंतर्गत आती थी।
2️⃣ महलवाड़ी पद्धति
• 🗺️ विस्तार: यह पद्धति उत्तर प्रदेश, मध्य प्रांत और पंजाब (कुछ परिवर्तनों के साथ) में लागू की गई थी।
• 📊 भू-भाग: ब्रिटिश भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30% हिस्सा इसके अधीन था।
3️⃣ रैयतवाड़ी पद्धति
• 🗺️ विस्तार: यह पद्धति बॉम्बे और मद्रास के अधिकांश भागों, असम तथा अन्य क्षेत्रों में लागू थी।
• 📊 भू-भाग: यह सबसे बड़े क्षेत्र पर लागू थी, जिसके अंतर्गत ब्रिटिश भारत की लगभग 51% भूमि आती थी।
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📖 शब्द की उत्पत्ति (Etymology)
•. 'टेन्योर' (Tenure) शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'teneo' शब्द से हुई है।
• इसका अर्थ होता है— 'धारण करना' (to hold)।
🏛️ प्रमुख प्रणालियाँ
• अंग्रेजों ने भारत में मुख्य रूप से तीन भू-धृति पद्धतियां अपनाईं:
1. ज़मींदारी
2. महलवाड़ी
3. रैयतवाड़ी
1️⃣ ज़मींदारी / स्थाई बंदोबस्त
• 🗺️ विस्तार: यह पद्धति बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बनारस खंड और उत्तरी कर्नाटक में लागू थी।
• 📊 भू-भाग: ब्रिटिश भारत की लगभग 19% भूमि इस पद्धति के अंतर्गत आती थी।
2️⃣ महलवाड़ी पद्धति
• 🗺️ विस्तार: यह पद्धति उत्तर प्रदेश, मध्य प्रांत और पंजाब (कुछ परिवर्तनों के साथ) में लागू की गई थी।
• 📊 भू-भाग: ब्रिटिश भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30% हिस्सा इसके अधीन था।
3️⃣ रैयतवाड़ी पद्धति
• 🗺️ विस्तार: यह पद्धति बॉम्बे और मद्रास के अधिकांश भागों, असम तथा अन्य क्षेत्रों में लागू थी।
• 📊 भू-भाग: यह सबसे बड़े क्षेत्र पर लागू थी, जिसके अंतर्गत ब्रिटिश भारत की लगभग 51% भूमि आती थी।
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
No Document No History
UPPSC_GDC_Assistant_Professor_Government_Degree_College_History.pdf
उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए किताब बहुत अच्छी है
हमें पता है आप लोगों को रिएक्शन देना पसंद नहीं है❤️ ✅
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Forwarded from Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ (History)
सन् 1905 में तंजौर तहसील के एक ब्राह्मण ने मैसूर के ओरिएंटल रिसर्च लाइब्रेरी के पुस्तकाध्यक्ष आर. शामाशास्त्री को 168 पृष्ठों की एक पांडुलिपि सौंप दी। यह पांडुलिपि संस्कृत भाषा में ग्रंथ लिपि में लिखी गई थी। मूल ग्रंथ के साथ भट्टस्वामी नामक विद्वान की टीकाएँ (व्याख्याएँ) भी सम्मिलित थीं। पूरा ग्रंथ पंद्रह अध्यायों और कई उपखंडों में विभाजित था। इसमें विषय का वर्णन संक्षिप्त सूत्रों के रूप में किया गया था, जिनका अर्थ समझना आसान नहीं था।
यह पांडुलिपि बड़ी सावधानी से लिखी गई थी, किंतु कुछ स्थानों पर त्रुटियाँ भी दिखाई देती थीं। ग्रंथ के प्रारंभ में “ॐ” लिखा हुआ था और उसके बाद शुक्र और बृहस्पति की, क्रमशः दानवों और देवताओं के आचार्य के रूप में, स्तुति की गई थी। इसके बाद उल्लेख था कि अर्थशास्त्र वास्तव में प्राचीन आचार्यों की श्रेष्ठ रचनाओं का संग्रह है, जिसके माध्यम से पूरी पृथ्वी को जीता और उसकी रक्षा की जा सकती है।
आगे ग्रंथ में अध्ययन किए गए विषयों की सूची दी गई थी। प्रस्तावना में यह कहा गया था कि विचार और अर्थ की सहज अभिव्यक्ति की दृष्टि से यह रचना अत्यंत सरल और बोधगम्य है, तथा इसके संकलनकर्ता कौटिल्य हैं।
आर. शामाशास्त्री ने अनुमान लगाया कि यह पांडुलिपि लगभग 100 से 200 वर्ष पुरानी है, लेकिन इसकी विषय-वस्तु इससे कहीं अधिक प्राचीन है, जो प्राचीन राज्यशास्त्र की परिपक्व परंपरा को आगे बढ़ाती है।
सन् 1905 के बाद इस दुर्लभ ग्रंथ को इंडियन एंटिक्वरी नामक शोध पत्रिका में क्रमशः कई अंकों में प्रकाशित किया गया। सन् 1909 में पहली बार इसका संपूर्ण भाषांतरण सामने आया और 1915 में इसका पहला अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित हुआ।
आर. शामाशास्त्री के अनुवाद के प्रकाशित होने के बाद कौटिल्य के अर्थशास्त्र के प्रति विद्वानों की रुचि बढ़ी, जिससे अन्य पांडुलिपियों और टीकाओं को भी एकत्र किया जाने लगा।
यह ग्रंथ केवल अंग्रेज़ी ही नहीं, बल्कि बंगला, हिंदी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, तमिल, जर्मन, इटालियन और रूसी भाषाओं में भी अनूदित हुआ।
अर्थशास्त्र का सबसे प्रमाणिक संस्करण आर. पी. कांग्ले द्वारा सन् 1960–63 के बीच प्रकाशित किया गया, जिसमें अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ-साथ अर्थशास्त्र की विभिन्न पांडुलिपियों और मध्यकालीन टीकाकारों की व्याख्याएँ भी सम्मिलित थी।
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यह पांडुलिपि बड़ी सावधानी से लिखी गई थी, किंतु कुछ स्थानों पर त्रुटियाँ भी दिखाई देती थीं। ग्रंथ के प्रारंभ में “ॐ” लिखा हुआ था और उसके बाद शुक्र और बृहस्पति की, क्रमशः दानवों और देवताओं के आचार्य के रूप में, स्तुति की गई थी। इसके बाद उल्लेख था कि अर्थशास्त्र वास्तव में प्राचीन आचार्यों की श्रेष्ठ रचनाओं का संग्रह है, जिसके माध्यम से पूरी पृथ्वी को जीता और उसकी रक्षा की जा सकती है।
आगे ग्रंथ में अध्ययन किए गए विषयों की सूची दी गई थी। प्रस्तावना में यह कहा गया था कि विचार और अर्थ की सहज अभिव्यक्ति की दृष्टि से यह रचना अत्यंत सरल और बोधगम्य है, तथा इसके संकलनकर्ता कौटिल्य हैं।
आर. शामाशास्त्री ने अनुमान लगाया कि यह पांडुलिपि लगभग 100 से 200 वर्ष पुरानी है, लेकिन इसकी विषय-वस्तु इससे कहीं अधिक प्राचीन है, जो प्राचीन राज्यशास्त्र की परिपक्व परंपरा को आगे बढ़ाती है।
सन् 1905 के बाद इस दुर्लभ ग्रंथ को इंडियन एंटिक्वरी नामक शोध पत्रिका में क्रमशः कई अंकों में प्रकाशित किया गया। सन् 1909 में पहली बार इसका संपूर्ण भाषांतरण सामने आया और 1915 में इसका पहला अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित हुआ।
आर. शामाशास्त्री के अनुवाद के प्रकाशित होने के बाद कौटिल्य के अर्थशास्त्र के प्रति विद्वानों की रुचि बढ़ी, जिससे अन्य पांडुलिपियों और टीकाओं को भी एकत्र किया जाने लगा।
यह ग्रंथ केवल अंग्रेज़ी ही नहीं, बल्कि बंगला, हिंदी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, तमिल, जर्मन, इटालियन और रूसी भाषाओं में भी अनूदित हुआ।
अर्थशास्त्र का सबसे प्रमाणिक संस्करण आर. पी. कांग्ले द्वारा सन् 1960–63 के बीच प्रकाशित किया गया, जिसमें अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ-साथ अर्थशास्त्र की विभिन्न पांडुलिपियों और मध्यकालीन टीकाकारों की व्याख्याएँ भी सम्मिलित थी।
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की एक बहुत बड़ी श्रृंखला
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No Document No History pinned «🚩 इतिहास अध्ययन की पाठशाला🌹 🎯 🌸 💔 🌷 ✨ ✨ 💕 🔥 ✨ ✨ 📢 ✅ रोजाना शाम 7:15 बजे और रात्रि 9:30 बजे 🔤 🔤 🔤 🔠 🔠 🔠 🔠 की एक बहुत बड़ी श्रृंखला ❤️ ✅ 👍 🥸 असिस्टेंट प्रोफेसर और PGT टेस्ट की लगातार तैयारी 5️⃣ 0️⃣ 0️⃣ 0️⃣ ➕ टारगेट क्वेश्चन👇 👇 Link✅ 📹 🔗 https://t.me/IAP606»
Forwarded from No Document No History (Abhishek)
UPPCS MAINS OPTIONAL HISTORY DESCRIPTIVE SOLVED PAPERS.pdf
7.2 MB
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Forwarded from No Document No History (♥️ श्री.रामसिंग राजपूत ⛳♥️)
No Document No History
UPPCS MAINS OPTIONAL HISTORY DESCRIPTIVE SOLVED PAPERS.pdf
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No Document No History
जिंदगी में सबर करना सीखो, जल्दबाजी में गलत फैसला हो जाता है..!! https://t.me/Ramsing2023 ✅ ❤️
जिंदगी में कुछ सीखो या ना सीखो,
मगर लोगों को पहचानना जरूर सीखो क्योंकि लोग जैसे दिखते हैं वैसे होते नहीं है..
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Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
ITIHAS_JUNCTION
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विषय: हम्पी की खोज, कॉलिन मैकेंज़ी और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
🏛️ खंडहरों से इतिहास तक: हम्पी (विजयनगर)
★ विजयनगर साम्राज्य (जीत का शहर) को हम आज हम्पी के नाम से जानते हैं। इसके गौरवशाली इतिहास को दुनिया के सामने लाने का श्रेय कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी को जाता है।
🧐 कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी (Colin Mackenzie)
• खोज (1800 ई.): NCERT के अनुसार, 1800 ई. में इस इंजीनियर और पुरातत्वविद ने हम्पी के भग्नावशेषों को प्रकाश में लाया।
• पद: वह ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे और बाद में भारत के पहले सर्वेयर जनरल (Surveyor General) बने (कार्यकाल: 1815-1821)।
• स्रोत: हम्पी का पहला सर्वेक्षण मानचित्र (Survey Map) तैयार करने के लिए उन्होंने 'विरुपाक्ष मंदिर' के पुरोहितों की स्मृतियों का सहारा लिया था।
📸 मैकेंज़ी के बाद की प्रगति (Timeline):
• 1836 ई.: अभिलेखकर्ताओं (Epigraphists) ने हम्पी के मंदिरों से अभिलेखों को इकट्ठा करना शुरू किया।
• 1856 ई.: अलेक्जेंडर ग्रीन लॉ (Alexander Greenlaw) ने हम्पी के अवशेषों की पहली विस्तृत तस्वीरें लीं।
💧 विजयनगर की जल प्रणाली (Water System):
• हीरिया नहर: तुंगभद्रा नदी पर बने बाँध से इसमें पानी आता था।
• कमलापुरम जलाशय: इसका पानी खेतों और 'राजकीय केंद्र' दोनों के लिए उपयोग होता था।
📚 Key Terms (परीक्षा विशेष):
➜ 'महानवमी डिब्बा': एक विशाल मंच, जहाँ संभवतः अनुष्ठान होते थे।
➜ 'अमर-नायक प्रणाली' (Amaranayaka System): विजयनगर की प्रमुख राजनीतिक प्रणाली, जो संभवतः दिल्ली सल्तनत की 'इक्ता' प्रणाली से प्रेरित थी। अमर-नायक सैनिक कमांडर होते थे।
Source:- NCERT 12th class (Themes in Indian History)
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🚩 NCERT 'फैक्ट' ऑफ द डे 🚩
🏛️ खंडहरों से इतिहास तक: हम्पी (विजयनगर)
★ विजयनगर साम्राज्य (जीत का शहर) को हम आज हम्पी के नाम से जानते हैं। इसके गौरवशाली इतिहास को दुनिया के सामने लाने का श्रेय कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी को जाता है।
🧐 कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी (Colin Mackenzie)
• खोज (1800 ई.): NCERT के अनुसार, 1800 ई. में इस इंजीनियर और पुरातत्वविद ने हम्पी के भग्नावशेषों को प्रकाश में लाया।
• पद: वह ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे और बाद में भारत के पहले सर्वेयर जनरल (Surveyor General) बने (कार्यकाल: 1815-1821)।
• स्रोत: हम्पी का पहला सर्वेक्षण मानचित्र (Survey Map) तैयार करने के लिए उन्होंने 'विरुपाक्ष मंदिर' के पुरोहितों की स्मृतियों का सहारा लिया था।
📸 मैकेंज़ी के बाद की प्रगति (Timeline):
• 1836 ई.: अभिलेखकर्ताओं (Epigraphists) ने हम्पी के मंदिरों से अभिलेखों को इकट्ठा करना शुरू किया।
• 1856 ई.: अलेक्जेंडर ग्रीन लॉ (Alexander Greenlaw) ने हम्पी के अवशेषों की पहली विस्तृत तस्वीरें लीं।
💧 विजयनगर की जल प्रणाली (Water System):
• हीरिया नहर: तुंगभद्रा नदी पर बने बाँध से इसमें पानी आता था।
• कमलापुरम जलाशय: इसका पानी खेतों और 'राजकीय केंद्र' दोनों के लिए उपयोग होता था।
📚 Key Terms (परीक्षा विशेष):
➜ 'महानवमी डिब्बा': एक विशाल मंच, जहाँ संभवतः अनुष्ठान होते थे।
➜ 'अमर-नायक प्रणाली' (Amaranayaka System): विजयनगर की प्रमुख राजनीतिक प्रणाली, जो संभवतः दिल्ली सल्तनत की 'इक्ता' प्रणाली से प्रेरित थी। अमर-नायक सैनिक कमांडर होते थे।
Source:- NCERT 12th class (Themes in Indian History)
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
नागपुर झंडा सत्याग्रह (Nagpur Flag Satyagraha)
1923 ई. में सरकार ने स्थानीय आदेश द्वारा नागपुर में कांग्रेस को अपने ध्वज के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था, फलतः यह सत्याग्रह शुरू किया गया।
ध्यातव्य है कि गुजरात से आंदोलनकारियों के समूह सरकार पर दबाव बनाने के लिये नागपुर भेजे गए, जिससे सरकार समझौते के लिये बाध्य हो गई।
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