महान समाज सुधारक, अद्भुत कवि और आध्यात्मिक गुरु संत शिरोमणि संत गुरु रविदास जी की जयंती पर शत-शत नमन🙏
#रविदास_जयंती
#रविदास_जयंती
❤6
'उसे चुनो जो तुम्हें चुनता है'
ऐसा इंसान खोजो जिसे तुम्हारे साथ होने पर गर्व हो, जो तुम्हें खोने से डरे, और ज़रूरत पड़ने पर तुम्हारे लिए खड़ा हो।
जो तुम्हारी क़दर करे, सम्मान दे, परवाह करे और प्रेम को शब्दों से ज़्यादा कर्म में दिखाए।⭐️ ✅
⭐️ ⭐️ ⭐️ ⭐️ ✅ ✅ ✅
ऐसा इंसान खोजो जिसे तुम्हारे साथ होने पर गर्व हो, जो तुम्हें खोने से डरे, और ज़रूरत पड़ने पर तुम्हारे लिए खड़ा हो।
जो तुम्हारी क़दर करे, सम्मान दे, परवाह करे और प्रेम को शब्दों से ज़्यादा कर्म में दिखाए।
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤9👍1💯1
Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Bhoomi)
🏹 भारतीय इतिहास का स्वाभिमान
"तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाए?"
👉 यह सवाल यूनान के महान विजेता सिकंदर (Alexander the Great) ने युद्ध के बाद भारतीय राजा पुरु (Porus) से पूछा।
राजा पुरु का सीधा और गर्व से भरा उत्तर था –
"जैसा एक राजा के साथ किया जाना चाहिए।" 👑
⚔️ यह घटना (326 ई.पू. – Hydaspes का युद्ध, झेलम नदी के किनारे) भारतीय इतिहास की सबसे गौरवशाली घटनाओं में से एक है।
राजा पुरु की वीरता, आत्मसम्मान और अटल स्वाभिमान ने सिकंदर जैसे विश्वविजेता को भी प्रभावित कर दिया।
🌍 नतीजा यह हुआ कि –
सिकंदर ने पुरु का राज्य लौटा दिया।
उसे मित्र और सम्मानित सहयोगी बना लिया।
यूनानी इतिहासकारों ने भी पुरु की वीरता का उल्लेख बड़े गर्व से किया।
✨ यह घटना हमें सिखाती है कि –
👉 शौर्य और आत्मसम्मान ऐसी ताकतें हैं जो परिस्थितियों को बदल सकती हैं।
👉 सच्चा राजा वही है जो सम्मान से समझौता नहीं करता।
👉 इंसान की असली जीत उसकी गरिमा में होती है, हार में भी।
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
"तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाए?"
👉 यह सवाल यूनान के महान विजेता सिकंदर (Alexander the Great) ने युद्ध के बाद भारतीय राजा पुरु (Porus) से पूछा।
राजा पुरु का सीधा और गर्व से भरा उत्तर था –
"जैसा एक राजा के साथ किया जाना चाहिए।" 👑
⚔️ यह घटना (326 ई.पू. – Hydaspes का युद्ध, झेलम नदी के किनारे) भारतीय इतिहास की सबसे गौरवशाली घटनाओं में से एक है।
राजा पुरु की वीरता, आत्मसम्मान और अटल स्वाभिमान ने सिकंदर जैसे विश्वविजेता को भी प्रभावित कर दिया।
🌍 नतीजा यह हुआ कि –
सिकंदर ने पुरु का राज्य लौटा दिया।
उसे मित्र और सम्मानित सहयोगी बना लिया।
यूनानी इतिहासकारों ने भी पुरु की वीरता का उल्लेख बड़े गर्व से किया।
✨ यह घटना हमें सिखाती है कि –
👉 शौर्य और आत्मसम्मान ऐसी ताकतें हैं जो परिस्थितियों को बदल सकती हैं।
👉 सच्चा राजा वही है जो सम्मान से समझौता नहीं करता।
👉 इंसान की असली जीत उसकी गरिमा में होती है, हार में भी।
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
Telegram
All history hub 📖📖📖
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Follow the ExamEasy ( History Hub) channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va6OYUyCcW4qeeGgb41S
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Follow the ExamEasy ( History Hub) channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va6OYUyCcW4qeeGgb41S
💯1
प्राचीन भारत के इतिहास का महत्व
श्रोत RS Sharma Ji
To more fact join
https://t.me/Ramsing2023
https://t.me/historyfact00
श्रोत RS Sharma Ji
To more fact join
https://t.me/Ramsing2023
https://t.me/historyfact00
❤1
🙌5000 members complete😎....
❤10👏2🥰1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
शफात अहमद ख़ां प्रसिद्ध मुस्लिम राष्ट्रवादी नेता एवं इतिहास और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे थे। वे जिन्ना की पाकिस्तान नीति के खिलाफ थे।
उन्होंने इंग्लैंड में शिक्षा पाई और डॉक्टरेट की डिग्री ली। 2 वर्ष तक लंदन में अध्यापन का काम करने के बाद वे पहले मद्रास विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर नियुक्त हुए।
डॉक्टर शफ़ात अहमद सन 1941 से 1945 तक दक्षिण अफ्रीका में भारत के हाई कमिश्नर रहे। वह देश के लिए औपनिवेशक स्वराज की स्थिति को अधिक उपयोगी मानते थे। इतिहास के विद्वान शफात अहमद खान ने इस विषय में अनेक ग्रंथों की रचना की। इसलिए 1946 में जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अंतरिम सरकार में मंत्री के रूप में सम्मिलित करने का निश्चय किया। इससे मुस्लिम संप्रदायवादी कुपित होकर मंत्रिमंडल में सम्मिलित होने से पहले ही शफात अहमद खान पर छुरे से हमला कर दिया। वे मंत्री पद पर भी अधिक समय तक नहीं रहे। मुस्लिम लीग द्वारा मंत्रिमंडल में सम्मिलित होने का निर्णय करने के बाद उन्हें हटना पड़ा।
Join for more facts 👇
https://t.me/historyfact00
उन्होंने इंग्लैंड में शिक्षा पाई और डॉक्टरेट की डिग्री ली। 2 वर्ष तक लंदन में अध्यापन का काम करने के बाद वे पहले मद्रास विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर नियुक्त हुए।
डॉक्टर शफ़ात अहमद सन 1941 से 1945 तक दक्षिण अफ्रीका में भारत के हाई कमिश्नर रहे। वह देश के लिए औपनिवेशक स्वराज की स्थिति को अधिक उपयोगी मानते थे। इतिहास के विद्वान शफात अहमद खान ने इस विषय में अनेक ग्रंथों की रचना की। इसलिए 1946 में जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अंतरिम सरकार में मंत्री के रूप में सम्मिलित करने का निश्चय किया। इससे मुस्लिम संप्रदायवादी कुपित होकर मंत्रिमंडल में सम्मिलित होने से पहले ही शफात अहमद खान पर छुरे से हमला कर दिया। वे मंत्री पद पर भी अधिक समय तक नहीं रहे। मुस्लिम लीग द्वारा मंत्रिमंडल में सम्मिलित होने का निर्णय करने के बाद उन्हें हटना पड़ा।
Join for more facts 👇
https://t.me/historyfact00
❤2
No Document No History
🙌5000 members complete😎....
बहुत-बहुत धन्यवाद
प्रिय मित्र प्रो. प्रथम जी आपका...💜 💗 💙
और बाकी टीम का भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं और धन्यवाद मित्रो...
5️⃣ 0️⃣ 0️⃣ 0️⃣ 💖
प्रिय मित्र प्रो. प्रथम जी आपका...
और बाकी टीम का भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं और धन्यवाद मित्रो...
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤5👏2🔥1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
एक बार जब क़ानून मंत्री डॉ. अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के लिए एक सलाहकार समिति के गठन की घोषणा की, तो अम्मू ने सदन में ज़ोरदार हस्तक्षेप किया। उन्होंने खुलकर सवाल उठाया कि क्या महिलाओं के संगठनों के किसी प्रतिनिधि को हिंदू कोड बिल पर सलाह देने वाली उस गैर-सरकारी सलाहकार समिति में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा—
“हर बार जब इस सदन में महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा कोई प्रश्न उठता है, तो सामान्य हँसी-मज़ाक शुरू हो जाता है, मानो यह कोई मज़ाक हो। मैं इसे मज़ाक के रूप में नहीं कह रही हूँ। मैं माननीय क़ानून मंत्री से यह जानना चाहती हूँ कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि हिंदू कोड महिलाओं को बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित करता है और भारत में कई महिला संगठन मौजूद हैं, क्या उनसे इस सलाहकार समिति के लिए प्रतिनिधि भेजने को कहा गया है, जिसकी बैठक बहुत जल्द होने वाली है?”
अम्मू ने तब तक प्रश्न उठाना नहीं छोड़ा, जब तक कि डॉ. अंबेडकर ने उन्हें यह जानकारी नहीं दे दी कि महिला संगठनों को आमंत्रित कर लिया गया है। उस समय हो रही सारी निरर्थक हँसी समाप्त हो गई। 🇮🇳🙏🏻
https://t.me/historyfact00
उन्होंने कहा—
“हर बार जब इस सदन में महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा कोई प्रश्न उठता है, तो सामान्य हँसी-मज़ाक शुरू हो जाता है, मानो यह कोई मज़ाक हो। मैं इसे मज़ाक के रूप में नहीं कह रही हूँ। मैं माननीय क़ानून मंत्री से यह जानना चाहती हूँ कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि हिंदू कोड महिलाओं को बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित करता है और भारत में कई महिला संगठन मौजूद हैं, क्या उनसे इस सलाहकार समिति के लिए प्रतिनिधि भेजने को कहा गया है, जिसकी बैठक बहुत जल्द होने वाली है?”
अम्मू ने तब तक प्रश्न उठाना नहीं छोड़ा, जब तक कि डॉ. अंबेडकर ने उन्हें यह जानकारी नहीं दे दी कि महिला संगठनों को आमंत्रित कर लिया गया है। उस समय हो रही सारी निरर्थक हँसी समाप्त हो गई। 🇮🇳🙏🏻
https://t.me/historyfact00
❤3🔥1
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
गिरमिटिया
गिरमिटिया वे भूतपूर्व श्रमिक /मजदूर थे जिन्हें अनुबंध पर अफ्रीका ले जाया गया था। इनके अनुबंध को गिरमिट कहते थे।
❤4
Forwarded from 𝙽𝚘 𝙳𝚘𝚌𝚞𝚖𝚎𝚗𝚝 𝙽𝚘 𝙷𝚒𝚜𝚝𝚘𝚛𝚢 (श्री रामसिंग राजपूत)
Itihas Darshan-2019.pdf
365.5 KB