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गांधी जी का पहला जेल अनुभव 1908 में हुआ। जेल के नियम उन्हें ब्रह्मचारी और आत्मसंयमी जीवन के अनुकूल लगे।
नियम थे—
सूर्यास्त से पहले अंतिम भोजन
चाय-कॉफी का निषेध
भोजन में केवल आवश्यकता अनुसार नमक, स्वाद के लिए नहीं
जेल से छूटने के बाद गांधी जी ने ये नियम स्वेच्छा से अपने जीवन में अपना लिए, क्योंकि आत्म-लगाया गया संयम अधिक प्रभावी होता है।
बाद में उन्होंने पूरी तरह नमक छोड़ने का प्रयोग किया और इसे कई वर्षों तक निभाया।
गांधी जी का विश्वास था कि ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम के लिए सरल व संयमित आहार आवश्यक है।
इसी दौरान कस्तूरबा गांधी बीमार पड़ीं और उनके इलाज के प्रयास सफल नहीं हो रहे थे।
गांधी जी ने कस्तूरबा से नमक और दाल छोड़ने का आग्रह किया, पर वे सहमत नहीं हुईं।
तब गांधी जी ने किसी पर दबाव न डालते हुए स्वयं एक वर्ष तक नमक और दाल छोड़ने का व्रत लिया।
कस्तूरबा इस त्याग से भावुक हो गईं और गांधी जी के प्रेम व दृढ़ता को समझ सकीं।
गांधी जी ने इस पूरे प्रसंग को “सत्याग्रह का एक शुद्ध और घरेलू रूप” कहा।
गांधी जी ने इस घटना को अपने जीवन की सबसे मधुर स्मृतियों में से एक बताया।
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नाम: अजीजान बाई
स्थान: कानपुर (उत्तर प्रदेश)
समय: 1857 का विद्रोह
भूमिका: क्रांतिकारी, सैन्य सहयोगी, जासूसी व रसद व्यवस्था

अजीजान बाई मूल रूप से तवायफ (नर्तकी/गायिका) थीं, लेकिन 1857 के विद्रोह में उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने नाना साहेब पेशवा का समर्थन किया और उनके आंदोलन से जुड़ी रहीं।
अजीजान बाई ने
विद्रोही सैनिकों को आर्थिक सहायता दी,हथियारों और रसद की व्यवस्था में मदद की,अंग्रेज़ों की गतिविधियों की सूचना (जासूसी) विद्रोहियों तक पहुँचाई।
कानपुर में विद्रोह के दौरान वे देशभक्ति गीतों और भाषणों के माध्यम से जनता और सैनिकों का मनोबल बढ़ाती थीं।
समाज में उपेक्षित माने जाने वाले वर्ग से होने के बावजूद उनका योगदान राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
अजीजान बाई यह दिखाती हैं कि 1857 का संग्राम केवल राजाओं-रानियों तक सीमित नहीं था, बल्कि सामान्य नागरिकों और महिलाओं ने भी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका नाम अक्सर इतिहास की मुख्यधारा में नहीं मिलता, लेकिन वे लोकप्रिय क्रांतिकारी नायिकाओं में गिनी जाती हैं।
अजीजान बाई 1857 के संग्राम में कानपुर की वह साहसी महिला थीं जिन्होंने नाना साहेब के पक्ष में रहकर धन, सूचना और जनसमर्थन से अंग्रेज़ों का विरोध किया ✍️📖
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प्रिंसटन, न्यू जर्सी में अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ जवाहरलाल नेहरू 📽️
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दक्कन का अकाल (1630–1632 ई.)
​शासक: मुगल बादशाह शाहजहाँ
क्षेत्र: गुजरात, महाराष्ट्र और दक्कन का पठार
​यह भारत के इतिहास का सबसे विनाशकारी अकाल माना जाता है। इस अकाल का आँखों देखा हाल बादशाह शाहजहाँ के दरबारी इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहौरी ने अपनी पुस्तक 'पादशाहनामा' (Padshahnama) में लिखा है।
​अब्दुल हमीद लाहौरी का कथन:
लाहौरी ने फारसी में जो लिखा, उसका अनुवाद इतिहास के पन्नों में दर्ज है:
​"लोग इतने मजबूर हो गए थे कि वे मरे हुए जानवरों का मांस खाने लगे। जब वह भी खत्म हो गया, तो आदमी, आदमी को खाने लगा। और स्थिति यहाँ तक बिगड़ गई कि बेटे का मांस उसकी मोहब्बत से ज्यादा प्यारा हो गया (The flesh of a son was preferred to his love)। पिसे हुए मरे हुए लोगों की हड्डियों को आटे में मिलाकर बेचा जाने लगा।"
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बंगाल का अकाल (1769–1770 ई.) / 'छियात्तर का मन्वन्तर'
​शासक: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (द्वैध शासन काल)
क्षेत्र: बंगाल, बिहार, ओडिशा
​यह आधुनिक भारत का पहला सबसे बड़ा अकाल था, जिसमें बंगाल की एक-तिहाई आबादी (लगभग 1 करोड़ लोग) खत्म हो गई थी।
"​ऐतिहासिक साक्ष्य: यद्यपि इसमें 'नरभक्षण' (Cannibalism) के आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ कम हैं, लेकिन समकालीन साहित्य और स्थानीय रिपोर्टों में यह ज़िक्र मिलता है" कि "जीवित लोग मरे हुओं को खा रहे थे और नदियाँ लाशों से पट गई थीं।"
​बंकिम चंद्र चटर्जी का उपन्यास 'आनंदमठ' इसी अकाल की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है, जिसमें भुखमरी की भयावहता का चित्रण है।
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विषय: हड़प्पा के 'बाट' (Weights) – इतने सटीक कैसे?

🚩 NCERT 'फैक्ट' ऑफ द डे 🚩


⚖️ हड़प्पा सभ्यता की इंजीनियरिंग का नमूना
हम अक्सर हड़प्पा की ईंटों की बात करते हैं, लेकिन उनके तोलने के बाट (Weights) उनकी गणितीय समझ का सबसे बड़ा सबूत हैं।

📘 NCERT (कक्षा 12, ईंटें, मनके और अस्थियाँ) से ज्ञान:

➜ पदार्थ: ये बाट सामान्यतः चर्ट (Chert) नामक पत्थर से बनाए जाते थे।

➜ आकार: ये घनाकार (Cubical) होते थे और इन पर कोई निशान नहीं होता था।

➜ द्विआधारी प्रणाली (Binary System): छोटे बाटों का मान 1, 2, 4, 8, 16, 32... (12,800 तक) के अनुपात में होता था। यानी वे 2 के गुणांक में चलते थे!

➜ दशमलव प्रणाली: भारी बाटों के लिए वे दशमलव प्रणाली का उपयोग करते थे।

🤔 सोचने वाली बात: आज से 4500 साल पहले इतनी मानकीकृत (Standardized) व्यवस्था कैसे लागू की गई होगी?

Source:- NCERT 12th class

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