Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
सेलुलर जेल की यातनाएं –
👉कैदियों को अमानवीय तरीकों से बाँधकर रखा जाता था—लोहे की पट्टियाँ टाँगों या कमर से बाँध दी जाती थीं, जिससे वे हिल–डुल नहीं सकते थे।
लंबे समय तक कैद और शारीरिक यातनाओं के कारण कैदी महीनों बिस्तर में पड़े रहते थे और छोटे काम करना भी मुश्किल हो जाता था।
इस अमानवीय व्यवहार के चलते कई कैदी आत्महत्या के बारे में सोचने लगे।
1912 में इंदु भूषण राय ने आत्महत्या कर ली, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
इसके बाद उल्लासकर दत्त ने कुएँ में उतरकर पानी भरने जैसे काम करने से इंकार कर दिया।
बैरी (अधिकारी) ने उन्हें धमकियाँ दीं और मारपीट भी की, लेकिन वे नहीं झुके।
आदेश दिया गया कि उल्लासकर को जंजीरों से बाँधकर एक सप्ताह तक कोठरी की छत से लटकाया जाए।
भीषण दर्द और यातना के कारण उनकी चीखें पूरी जेल में गूँजती रहीं।
बाहर निकाले जाने पर पता चला कि उन्हें 107° बुखार था और वे प्रलाप की अवस्था में थे।
बैरी ने इसे काम से बचने के लिए पागलपन का नाटक बताया और उन्हें बिजली के झटके देने का आदेश दिया।
बिजली के झटकों से वे बेहोश हो गए; तीन दिन बाद होश आने पर भी उन्हें दौरे पड़ते रहे।
https://t.me/historyfact00
👉कैदियों को अमानवीय तरीकों से बाँधकर रखा जाता था—लोहे की पट्टियाँ टाँगों या कमर से बाँध दी जाती थीं, जिससे वे हिल–डुल नहीं सकते थे।
लंबे समय तक कैद और शारीरिक यातनाओं के कारण कैदी महीनों बिस्तर में पड़े रहते थे और छोटे काम करना भी मुश्किल हो जाता था।
इस अमानवीय व्यवहार के चलते कई कैदी आत्महत्या के बारे में सोचने लगे।
1912 में इंदु भूषण राय ने आत्महत्या कर ली, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
इसके बाद उल्लासकर दत्त ने कुएँ में उतरकर पानी भरने जैसे काम करने से इंकार कर दिया।
बैरी (अधिकारी) ने उन्हें धमकियाँ दीं और मारपीट भी की, लेकिन वे नहीं झुके।
आदेश दिया गया कि उल्लासकर को जंजीरों से बाँधकर एक सप्ताह तक कोठरी की छत से लटकाया जाए।
भीषण दर्द और यातना के कारण उनकी चीखें पूरी जेल में गूँजती रहीं।
बाहर निकाले जाने पर पता चला कि उन्हें 107° बुखार था और वे प्रलाप की अवस्था में थे।
बैरी ने इसे काम से बचने के लिए पागलपन का नाटक बताया और उन्हें बिजली के झटके देने का आदेश दिया।
बिजली के झटकों से वे बेहोश हो गए; तीन दिन बाद होश आने पर भी उन्हें दौरे पड़ते रहे।
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Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
ITIHAS_JUNCTION
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📝Post: प्राचीन भारत (मौर्य युगीन कला)
🕊️विषय: सारनाथ सिंह शीर्ष - सिर्फ एक प्रतीक नहीं, एक पूरा दर्शन!
🦁 राष्ट्रीय प्रतीक का गहन विश्लेषण
➜ हम सभी भारत के राष्ट्रीय प्रतीक, सारनाथ के 'सिंह शीर्ष' (Lion Capital) को जानते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि मौर्य साम्राज्य की विचारधारा और बौद्ध धर्म के प्रसार का एक जटिल दस्तावेज है।
आइये इसकी परतों को खोलते हैं:
📘 1. अदृश्य आधार (The Abacus) - जीवन का चक्र:
➜(जैसा आपने पहले पढ़ा) शेरों के नीचे गोल आधार पर चार पशु दौड़ती मुद्रा में हैं, जो 'धर्मचक्र' से अलग किए गए हैं। ये बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं के प्रतीक हैं:
🐘 हाथी (Elephant): बुद्ध का गर्भ में आना (स्वप्न का प्रतीक)।
🐂 वृषभ (Bull): बुद्ध का जन्म और यौवन (सांसारिक जीवन)।
🐎 घोड़ा (Horse): महाभिनिष्क्रमण (गृहत्याग)।
🦁 सिंह (Lion): शाक्यसिंह के रूप में ज्ञान प्राप्ति।
📘 2. चार शेर (The Four Lions) - 'सिंहावलोकन':
➜शीर्ष पर चार एशियाई शेर पीठ सटाकर बैठे हैं।
•दिशाएं: वे चारों दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) में देख रहे हैं।
•प्रतीक: यह केवल सम्राट अशोक की शक्ति का ही नहीं, बल्कि 'धम्म की सर्वव्यापकता' का प्रतीक है।
•सिंहनाद: उनके खुले मुंह 'सिंहनाद' (शेर की दहाड़) को दर्शाते हैं, यानी चारों दिशाओं में बुद्ध की शिक्षाओं का निडर प्रचार।
📘 3. जो 'खो गया' है (The Missing Element):
➜ मूल रूप से, इन चार शेरों के सिर के ऊपर एक और विशाल 'महाधर्मचक्र' (Great Wheel of Law) स्थापित था, जिसमें संभवतः 32 तीलियाँ थीं।
➜यह चक्र 'धम्म की विजय' का सर्वोच्च प्रतीक था, जिसे अब हम टूटी हुई अवस्था में संग्रहालय में देखते हैं।
📘 4. कलात्मक प्रभाव और तकनीक:
सामग्री: चुनार का बलुआ पत्थर (Chunar Sandstone)।
★तकनीक: यह एकाश्मक (Monolithic) नहीं है। स्तंभ का दंड (Shaft) अलग था और यह शीर्ष (Capital) अलग से जोड़कर लगाया गया था।
★मौर्य पॉलिश: इस पर ओपदार पॉलिश (Mauryan Polish) है, जो इतनी चमकदार है कि धातु का भ्रम पैदा करती है।
★उल्टा कमल: सबसे नीचे एक उल्टे घंटे के आकार का कमल (Inverted Lotus/Bell Capital) है, जो ईरानी (अखेमेनिड) प्रभाव दर्शाता है, लेकिन भारतीय कलाकारों ने इसे 'पूर्ण घट' का रूप दिया है।
🤔 गहन चिंतन (Critical Thinking):
सारनाथ स्तंभ यह दर्शाता है कि कैसे अशोक ने राजकीय शक्ति (शेर) का उपयोग भौतिक विजय के लिए नहीं, बल्कि नैतिक विजय (धम्म चक्र) के समर्थन के लिए किया। यह 'भेरीघोष' का 'धम्मघोष' में परिवर्तन है।
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📚 Source Focus: NCERT कक्षा 12 (विषय 4: विचारक, विश्वास और इमारतें) + Advanced Art History inputs for NET.
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✍️ Join: @Itihaas_Junction
🕊️विषय: सारनाथ सिंह शीर्ष - सिर्फ एक प्रतीक नहीं, एक पूरा दर्शन!
🚩 NCERT 'डीप डाइव' (For NET/JRF) 🚩
🦁 राष्ट्रीय प्रतीक का गहन विश्लेषण
➜ हम सभी भारत के राष्ट्रीय प्रतीक, सारनाथ के 'सिंह शीर्ष' (Lion Capital) को जानते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि मौर्य साम्राज्य की विचारधारा और बौद्ध धर्म के प्रसार का एक जटिल दस्तावेज है।
आइये इसकी परतों को खोलते हैं:
📘 1. अदृश्य आधार (The Abacus) - जीवन का चक्र:
➜(जैसा आपने पहले पढ़ा) शेरों के नीचे गोल आधार पर चार पशु दौड़ती मुद्रा में हैं, जो 'धर्मचक्र' से अलग किए गए हैं। ये बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं के प्रतीक हैं:
🐘 हाथी (Elephant): बुद्ध का गर्भ में आना (स्वप्न का प्रतीक)।
🐂 वृषभ (Bull): बुद्ध का जन्म और यौवन (सांसारिक जीवन)।
🐎 घोड़ा (Horse): महाभिनिष्क्रमण (गृहत्याग)।
🦁 सिंह (Lion): शाक्यसिंह के रूप में ज्ञान प्राप्ति।
📘 2. चार शेर (The Four Lions) - 'सिंहावलोकन':
➜शीर्ष पर चार एशियाई शेर पीठ सटाकर बैठे हैं।
•दिशाएं: वे चारों दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) में देख रहे हैं।
•प्रतीक: यह केवल सम्राट अशोक की शक्ति का ही नहीं, बल्कि 'धम्म की सर्वव्यापकता' का प्रतीक है।
•सिंहनाद: उनके खुले मुंह 'सिंहनाद' (शेर की दहाड़) को दर्शाते हैं, यानी चारों दिशाओं में बुद्ध की शिक्षाओं का निडर प्रचार।
📘 3. जो 'खो गया' है (The Missing Element):
➜ मूल रूप से, इन चार शेरों के सिर के ऊपर एक और विशाल 'महाधर्मचक्र' (Great Wheel of Law) स्थापित था, जिसमें संभवतः 32 तीलियाँ थीं।
➜यह चक्र 'धम्म की विजय' का सर्वोच्च प्रतीक था, जिसे अब हम टूटी हुई अवस्था में संग्रहालय में देखते हैं।
📘 4. कलात्मक प्रभाव और तकनीक:
सामग्री: चुनार का बलुआ पत्थर (Chunar Sandstone)।
★तकनीक: यह एकाश्मक (Monolithic) नहीं है। स्तंभ का दंड (Shaft) अलग था और यह शीर्ष (Capital) अलग से जोड़कर लगाया गया था।
★मौर्य पॉलिश: इस पर ओपदार पॉलिश (Mauryan Polish) है, जो इतनी चमकदार है कि धातु का भ्रम पैदा करती है।
★उल्टा कमल: सबसे नीचे एक उल्टे घंटे के आकार का कमल (Inverted Lotus/Bell Capital) है, जो ईरानी (अखेमेनिड) प्रभाव दर्शाता है, लेकिन भारतीय कलाकारों ने इसे 'पूर्ण घट' का रूप दिया है।
🤔 गहन चिंतन (Critical Thinking):
सारनाथ स्तंभ यह दर्शाता है कि कैसे अशोक ने राजकीय शक्ति (शेर) का उपयोग भौतिक विजय के लिए नहीं, बल्कि नैतिक विजय (धम्म चक्र) के समर्थन के लिए किया। यह 'भेरीघोष' का 'धम्मघोष' में परिवर्तन है।
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NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
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Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ: (history)
Group admin: @tikam_ambedkar (JRF-90AIR)
Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Pooja Pandey)
मार्क्सवादी इतिहासकार एवं उनकी कृतियां
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
👉कौशाम्बी की प्रमुख पुस्तकें-
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1. मिथ एण्ड रियलिटी स्टडीज इन दी फारमेशन आफ इण्डियन कल्चर
2. एन इन्ट्रोडक्सन टू दि स्टडी आफ इण्डियन हिस्ट्री
3. एन्शियंट इण्डियन कल्चर एण्ड सिविलाइजेशन
4. ए हिस्टोरिकल आउट लाइन
👉 रामशरण शर्मा की प्रमुख पुस्तकें-
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1. शुद्रज इन एंशेंट इण्डिया
2- इंडियन फ्यूडलिंज्म
3-अर्बन डिके इन इण्डिया
4. लूकिंग फार द आर्यन्स
5. एडवण्ट ऑफ आर्यन्स
6 मैटेरियल कल्चर एंड सोशल फॉर्मेशंस इन एंशिएंट इंड्रिया
7 . लाइट ऑन अर्ली इंडियन सोसायटी एंड इकोनॉमी
8. भारत के प्राचीन नगरों का पतन,
आर. एस. शर्मा ने विनगरीकरण के संदर्भ में दो चरणों का सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
👉रोमिला थॉपर की प्रमुख पुस्तकें-
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1. अशोका एंड दी डिक्लाइन ऑफ दी मौर्याज
2. हिस्ट्री ऑफ इंडिया
3. एंशिएंट इंडियन सोशल हिस्ट्री
4. फ्रॉम लीनिएज टु स्टेट
5. इंटरप्रेटिंग अर्ली इंडिया।
रोमिला थापर ने ऋग्वैदिक समाज को जनजाति के बजाय 'कौलिक” (Lineage) माना है।
👉बिपिन चन्द्र की प्रमुख पुस्तकें-
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1. द राइज एंड ग्रोथ ऑफ इकॉनोमिक नेशनलिज्म
2. नेशनलिज्म एंड कोलोनियलिज्म इन इंडिया
3. इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस 1857-1947
4 कम्युनलिज्म इन मॉडर्न इंडिया
👉इरफान हबीब की प्रमुख पुस्तकें
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1 इंटरप्रेटिंग इंडियन हिस्ट्री
2 कास्ट एंड मनी इन इंडियन सोसायटी
3 प्रॉब्लम ऑफ मर्क्सिस्ट हिस्टोरियोग्राफी
4 दी एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया
5- एन एटलस ऑफ दी मुगल एम्पायर
6 दी कैम्ब्रिज इकॉनोमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया।
इरफान हबीब महोदय को भारत का आर्थिक मानचित्र, 1-300 ई. (The Economic Map of India) तैयार करने का श्रेय प्राप्त था।
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
👉कौशाम्बी की प्रमुख पुस्तकें-
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1. मिथ एण्ड रियलिटी स्टडीज इन दी फारमेशन आफ इण्डियन कल्चर
2. एन इन्ट्रोडक्सन टू दि स्टडी आफ इण्डियन हिस्ट्री
3. एन्शियंट इण्डियन कल्चर एण्ड सिविलाइजेशन
4. ए हिस्टोरिकल आउट लाइन
👉 रामशरण शर्मा की प्रमुख पुस्तकें-
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1. शुद्रज इन एंशेंट इण्डिया
2- इंडियन फ्यूडलिंज्म
3-अर्बन डिके इन इण्डिया
4. लूकिंग फार द आर्यन्स
5. एडवण्ट ऑफ आर्यन्स
6 मैटेरियल कल्चर एंड सोशल फॉर्मेशंस इन एंशिएंट इंड्रिया
7 . लाइट ऑन अर्ली इंडियन सोसायटी एंड इकोनॉमी
8. भारत के प्राचीन नगरों का पतन,
आर. एस. शर्मा ने विनगरीकरण के संदर्भ में दो चरणों का सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
👉रोमिला थॉपर की प्रमुख पुस्तकें-
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1. अशोका एंड दी डिक्लाइन ऑफ दी मौर्याज
2. हिस्ट्री ऑफ इंडिया
3. एंशिएंट इंडियन सोशल हिस्ट्री
4. फ्रॉम लीनिएज टु स्टेट
5. इंटरप्रेटिंग अर्ली इंडिया।
रोमिला थापर ने ऋग्वैदिक समाज को जनजाति के बजाय 'कौलिक” (Lineage) माना है।
👉बिपिन चन्द्र की प्रमुख पुस्तकें-
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1. द राइज एंड ग्रोथ ऑफ इकॉनोमिक नेशनलिज्म
2. नेशनलिज्म एंड कोलोनियलिज्म इन इंडिया
3. इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस 1857-1947
4 कम्युनलिज्म इन मॉडर्न इंडिया
👉इरफान हबीब की प्रमुख पुस्तकें
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1 इंटरप्रेटिंग इंडियन हिस्ट्री
2 कास्ट एंड मनी इन इंडियन सोसायटी
3 प्रॉब्लम ऑफ मर्क्सिस्ट हिस्टोरियोग्राफी
4 दी एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया
5- एन एटलस ऑफ दी मुगल एम्पायर
6 दी कैम्ब्रिज इकॉनोमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
मुग़ल इतिहास की सबसे मँहगी शादी
नादिरा बानो से दारा शिकोह की शादी को मुग़ल इतिहास की सबसे मँहगी शादी कहा जाता है.
उस समय इंग्लैंड से भारत भ्रमण पर आए पीटर मैंडी ने अपने एक लेख में लिखा कि उस शादी में उस ज़माने में 32 लाख रुपये ख़र्च हुए थे जिसमें से 16 लाख रुपये दारा की बड़ी बहन जहाँआरा बेगम ने दिए थे.
अवीक चंदा बताते हैं, "दारा सबके प्रिय थे बादशाह के भी और अपनी बड़ी बहन जहाँआरा के भी. उस समय उनकी माँ मुमताज़ महल गुज़र चुकी थीं और जहाँआरा बेगम बादशाह बेगम बन गई थीं अपनी पत्नी की मौत के बाद शाहजहाँ पहली बार किसी सार्वजनिक समारोह में भाग ले रहे थे. ये शादी 1 फ़रवरी , 1633 को हुई थी और 8 फ़रवरी तक दावतों का सिलसिला जारी रहा. इस दौरान रात में इतने पटाख़े छोड़े गए और इतनी रोशनी की गई कि ऐसा लगा कि रात में दिन हो गया हो. कहा जाता है कि शादी के दिन पहने गए दुल्हन के जोड़े की ही क़ीमत आठ लाख रुपए थी."
नादिरा बानो से दारा शिकोह की शादी को मुग़ल इतिहास की सबसे मँहगी शादी कहा जाता है.
उस समय इंग्लैंड से भारत भ्रमण पर आए पीटर मैंडी ने अपने एक लेख में लिखा कि उस शादी में उस ज़माने में 32 लाख रुपये ख़र्च हुए थे जिसमें से 16 लाख रुपये दारा की बड़ी बहन जहाँआरा बेगम ने दिए थे.
अवीक चंदा बताते हैं, "दारा सबके प्रिय थे बादशाह के भी और अपनी बड़ी बहन जहाँआरा के भी. उस समय उनकी माँ मुमताज़ महल गुज़र चुकी थीं और जहाँआरा बेगम बादशाह बेगम बन गई थीं अपनी पत्नी की मौत के बाद शाहजहाँ पहली बार किसी सार्वजनिक समारोह में भाग ले रहे थे. ये शादी 1 फ़रवरी , 1633 को हुई थी और 8 फ़रवरी तक दावतों का सिलसिला जारी रहा. इस दौरान रात में इतने पटाख़े छोड़े गए और इतनी रोशनी की गई कि ऐसा लगा कि रात में दिन हो गया हो. कहा जाता है कि शादी के दिन पहने गए दुल्हन के जोड़े की ही क़ीमत आठ लाख रुपए थी."
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🇮🇳 मैडम भीकाजी कामा
(भारत की प्रथम महिला क्रांतिकारी, जिन्होंने विदेश में भारतीय ध्वज फहराया)
🌀 जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि🌀
🌿मैडम भीकाजी कामा का जन्म 24 सितम्बर 1861 को बॉम्बे (आज की मुंबई) में एक पारसी परिवार में हुआ।
🌿उनके पिता सोहराबजी फ्रामजी पटेल एक शिक्षित और देशप्रेमी व्यक्ति थे।
🌿बचपन से ही भीकाजी तेज़ बुद्धि, साहसी स्वभाव और स्वतंत्र विचारों वाली थीं।
🌿उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मुंबई के अच्छे विद्यालयों से प्राप्त की।
🌀विवाह और निजी जीवन का संघर्🌀
🍁भीकाजी कामा का विवाह रुस्तमजी कामा से हुआ, जो ब्रिटिश सरकार के समर्थक थे।
🍁यहीं से उनके जीवन का पहला बड़ा संघर्ष शुरू हुआ।
🍁भीकाजी देश की आज़ादी की समर्थक थीं
🍁उनके पति अंग्रेज़ों के पक्ष में थे
🍁इन वैचारिक मतभेदों के कारण उनका वैवाहिक जीवन कष्टदायक हो गया।
👉 उन्होंने सामाजिक दबावों के बावजूद अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
🌺🌺समाज सेवा और प्लेग महामारी का संघर्ष(1896)🌺🌺
☘️1896 में बॉम्बे में भयंकर प्लेग फैला। लोग मर रहे थे, चारों ओर डर था।
भीकाजी कामा ने:
👉बीमार लोगों की सेवा की।
👉अस्पतालों और राहत शिविरों में काम किया।
👉बिना अपनी जान की परवाह किए लोगों की मदद की।
👉इसी सेवा कार्य के दौरान वे खुद प्लेग से ग्रसित हो गईं।
🍀उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि डॉक्टरों ने कहा कि भारत में रहना जानलेवा हो सकता है।
👉 यही बीमारी उन्हें विदेश जाने के लिए मजबूर करती है, लेकिन यही उनके क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत बन जाती है।
.🌟 इंग्लैंड जाना और नया संघर्ष🌟
🍀इलाज के लिए वे लंदन गईं। वहाँ पहुँचने के बाद उन्होंने देखा कि:
🍀अंग्रेज़ सरकार भारत को कैसे लूट रही है
भारत की सच्चाई दुनिया से छुपाई जा रही है।
लंदन में उनकी मुलाकात:
👉शामजी कृष्ण वर्मा
👉दादाभाई नौरोजी
👉लाला हरदयाल
जैसे महान क्रांतिकारियों से हुई।
उन्होंने:
☘️भारतीय छात्रों को आज़ादी के लिए प्रेरित किया
👉 यह सब ब्रिटिश सरकार को बहुत खतरनाक लगा।
👉उन्हें “राजद्रोही” घोषित कर दिया।
👉भारत लौटने पर गिरफ़्तारी की धमकी दी।
👉उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया
🌼उन्हें कहा गया:
“अगर भारत लौटना है तो अंग्रेज़ सरकार से माफी माँगो।”
👉 भीकाजी कामा ने साफ़ इंकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि वे गुलामी के आगे सिर नहीं झुकाएँगी।
🌟 फ्रांस और जर्मनी में क्रांतिकारी अ
🌺लंदन से निष्कासित किए जाने के बाद वे फ्रांस (पेरिस) चली गईं।
🌸गुप्त रूप से क्रांतिकारी साहित्य छपवाया
अख़बारों के ज़रिए भारत की आवाज़ दुनिया तक पहुँचाई
🌸भारतीय क्रांतिकारियों को आर्थिक सहायता दी
🔥 1907 : ऐतिहासिक ध्वज फहराना
जर्मनी के स्टटगार्ट शहर में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन हुआ।
👉 यहाँ मैडम भीकाजी कामा ने पहली बार भारतीय स्वतंत्रता का ध्वज फहराया और कहा:
“यह झंडा भारत की आज़ादी का प्रतीक है।”
🇳🇪यह झंडा:
🌈 केसरिया, पीला और हरा रंग लिए था
उस पर “वन्दे मातरम्” लिखा था🌈
👉 यह घटना पूरे यूरोप में गूंज गई।
👉लगभग 30 साल तक वे अपने देश नहीं लौट सकीं।
👉अकेलापन
👉बीमारी
👉आर्थिक तंगी
👉लगातार निगरानी
फिर भी: 👉 उन्होंने संघर्ष कभी नहीं छोड़ा।
वे कहती थीं:
🌈“अगर मेरी मातृभूमि आज़ाद नहीं, तो मेरा सुख व्यर्थ है।”🌈
💢 भारत वापसी (1935)💢
☘️जब वे बहुत बूढ़ी और बीमार हो गईं, तब ब्रिटिश सरकार ने शर्तों के साथ उन्हें भारत लौटने दिया।
☘️1935 में वे भारत लौटीं और बॉम्बे के एक अस्पताल में रहीं।
☘️13 अगस्त 1936 को इस महान क्रांतिकारी का निधन हो गया।🌿
उन्होंने:
🌈आज़ादी के लिए अपना जीवन दे दिया
लेकिन आज़ाद भारत देखने से पहले ही चली गईं
🌈 संघर्ष का महत्व और विरासत
👉मैडम भीकाजी कामा का संघर्ष
स्त्रियाँ केवल घर तक सीमित नहीं
👉आज़ादी के लिए देश छोड़ना भी संघर्ष है।
👉विचारों के लिए अकेले खड़े होना भी क्रांति है।
🍁मैडम भीकाजी कामा केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं थीं,
🍁वे त्याग, साहस और आत्मबलिदान की मूर्ति थीं।
उनका पूरा जीवन एक संदेश है:
“देश की आज़ादी से बड़ा कोई सुख नहीं।”
✅.......✍✍✍✍ Ambikesh ...
(भारत की प्रथम महिला क्रांतिकारी, जिन्होंने विदेश में भारतीय ध्वज फहराया)
🌀 जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि🌀
🌿मैडम भीकाजी कामा का जन्म 24 सितम्बर 1861 को बॉम्बे (आज की मुंबई) में एक पारसी परिवार में हुआ।
🌿उनके पिता सोहराबजी फ्रामजी पटेल एक शिक्षित और देशप्रेमी व्यक्ति थे।
🌿बचपन से ही भीकाजी तेज़ बुद्धि, साहसी स्वभाव और स्वतंत्र विचारों वाली थीं।
🌿उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मुंबई के अच्छे विद्यालयों से प्राप्त की।
🌀विवाह और निजी जीवन का संघर्🌀
🍁भीकाजी कामा का विवाह रुस्तमजी कामा से हुआ, जो ब्रिटिश सरकार के समर्थक थे।
🍁यहीं से उनके जीवन का पहला बड़ा संघर्ष शुरू हुआ।
🍁भीकाजी देश की आज़ादी की समर्थक थीं
🍁उनके पति अंग्रेज़ों के पक्ष में थे
🍁इन वैचारिक मतभेदों के कारण उनका वैवाहिक जीवन कष्टदायक हो गया।
👉 उन्होंने सामाजिक दबावों के बावजूद अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
🌺🌺समाज सेवा और प्लेग महामारी का संघर्ष(1896)🌺🌺
☘️1896 में बॉम्बे में भयंकर प्लेग फैला। लोग मर रहे थे, चारों ओर डर था।
भीकाजी कामा ने:
👉बीमार लोगों की सेवा की।
👉अस्पतालों और राहत शिविरों में काम किया।
👉बिना अपनी जान की परवाह किए लोगों की मदद की।
👉इसी सेवा कार्य के दौरान वे खुद प्लेग से ग्रसित हो गईं।
🍀उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि डॉक्टरों ने कहा कि भारत में रहना जानलेवा हो सकता है।
👉 यही बीमारी उन्हें विदेश जाने के लिए मजबूर करती है, लेकिन यही उनके क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत बन जाती है।
.🌟 इंग्लैंड जाना और नया संघर्ष🌟
🍀इलाज के लिए वे लंदन गईं। वहाँ पहुँचने के बाद उन्होंने देखा कि:
🍀अंग्रेज़ सरकार भारत को कैसे लूट रही है
भारत की सच्चाई दुनिया से छुपाई जा रही है।
लंदन में उनकी मुलाकात:
👉शामजी कृष्ण वर्मा
👉दादाभाई नौरोजी
👉लाला हरदयाल
जैसे महान क्रांतिकारियों से हुई।
उन्होंने:
☘️भारतीय छात्रों को आज़ादी के लिए प्रेरित किया
👉 यह सब ब्रिटिश सरकार को बहुत खतरनाक लगा।
👉उन्हें “राजद्रोही” घोषित कर दिया।
👉भारत लौटने पर गिरफ़्तारी की धमकी दी।
👉उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया
🌼उन्हें कहा गया:
“अगर भारत लौटना है तो अंग्रेज़ सरकार से माफी माँगो।”
👉 भीकाजी कामा ने साफ़ इंकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि वे गुलामी के आगे सिर नहीं झुकाएँगी।
🌟 फ्रांस और जर्मनी में क्रांतिकारी अ
🌺लंदन से निष्कासित किए जाने के बाद वे फ्रांस (पेरिस) चली गईं।
🌸गुप्त रूप से क्रांतिकारी साहित्य छपवाया
अख़बारों के ज़रिए भारत की आवाज़ दुनिया तक पहुँचाई
🌸भारतीय क्रांतिकारियों को आर्थिक सहायता दी
🔥 1907 : ऐतिहासिक ध्वज फहराना
जर्मनी के स्टटगार्ट शहर में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन हुआ।
👉 यहाँ मैडम भीकाजी कामा ने पहली बार भारतीय स्वतंत्रता का ध्वज फहराया और कहा:
“यह झंडा भारत की आज़ादी का प्रतीक है।”
🇳🇪यह झंडा:
🌈 केसरिया, पीला और हरा रंग लिए था
उस पर “वन्दे मातरम्” लिखा था🌈
👉 यह घटना पूरे यूरोप में गूंज गई।
👉लगभग 30 साल तक वे अपने देश नहीं लौट सकीं।
👉अकेलापन
👉बीमारी
👉आर्थिक तंगी
👉लगातार निगरानी
फिर भी: 👉 उन्होंने संघर्ष कभी नहीं छोड़ा।
वे कहती थीं:
🌈“अगर मेरी मातृभूमि आज़ाद नहीं, तो मेरा सुख व्यर्थ है।”🌈
💢 भारत वापसी (1935)💢
☘️जब वे बहुत बूढ़ी और बीमार हो गईं, तब ब्रिटिश सरकार ने शर्तों के साथ उन्हें भारत लौटने दिया।
☘️1935 में वे भारत लौटीं और बॉम्बे के एक अस्पताल में रहीं।
☘️13 अगस्त 1936 को इस महान क्रांतिकारी का निधन हो गया।🌿
उन्होंने:
🌈आज़ादी के लिए अपना जीवन दे दिया
लेकिन आज़ाद भारत देखने से पहले ही चली गईं
🌈 संघर्ष का महत्व और विरासत
👉मैडम भीकाजी कामा का संघर्ष
स्त्रियाँ केवल घर तक सीमित नहीं
👉आज़ादी के लिए देश छोड़ना भी संघर्ष है।
👉विचारों के लिए अकेले खड़े होना भी क्रांति है।
🍁मैडम भीकाजी कामा केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं थीं,
🍁वे त्याग, साहस और आत्मबलिदान की मूर्ति थीं।
उनका पूरा जीवन एक संदेश है:
“देश की आज़ादी से बड़ा कोई सुख नहीं।”
✅.......✍✍✍✍ Ambikesh ...
❤7👍2
21 साल की इस क्रांतिकारी लड़की के हौसले देख थर्रा उठे थे अंग्रेज
⚔️ प्रीतिलता वाद्देदार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उन शुरुआती वीरांगनाओं में से थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ प्रत्यक्ष हथियार उठाकर इतिहास रच दिया। चटगांव (अब बांग्लादेश) में जन्मी प्रीतिलता बचपन से ही मेधावी थीं, लेकिन अंग्रेज शासन ने उनकी स्नातक की डिग्री पर रोक लगा दी थी (जो आज़ादी के 65 साल बाद मिली)।
✨ क्रांतिकारी मास्टर सूर्य सेन के संपर्क में आने के बाद वे चटगांव रिवोल्यूशनरी पार्टी की सक्रिय सदस्य बनीं और भेष बदलकर ब्रिटिश सत्ता की जड़ें हिलाने की योजना बनाने लगीं। इतिहास की सबसे अपमानजनक यादों में से एक है यूरोपियन क्लबों के बाहर लगी वह तख्ती, जिस पर लिखा होता था "कुत्तों और भारतीयों का आना मना है।"
🔥 प्रीतिलता ने इस नस्लीय भेदभाव और गुलामी का जवाब गोलियों से देने का फैसला किया। 23 सितंबर 1932 को मात्र 21 वर्ष की आयु में, उन्होंने सात क्रांतिकारियों के दल का नेतृत्व करते हुए इसी क्लब पर धावा बोल दिया। उनके लगाए बमों और गरजती पिस्तौलों ने अंग्रेजी हुकूमत के अहंकार को चकनाचूर कर दिया।
⚔️ हमले के दौरान घायल होने के बाद, अंग्रेजों के हाथों पकड़े जाने के बजाय उन्होंने 'पोटेशियम साइनाइड' खाकर अपनी मातृभूमि पर प्राण न्यौछावर कर दिए। बलिदान से पहले उन्होंने अपनी बहनों के नाम एक संदेश छोड़ा कि महिलाएं अब खुद को कमजोर न समझें और आज़ादी की लड़ाई में पीछे न रहें। प्रीतिलता का संक्षिप्त लेकिन तेजस्वी जीवन यह साबित कर गया कि जब बात स्वाभिमान और स्वराज की हो, तो भारतीय नारी युद्ध के मैदान में भी किसी से पीछे नहीं है।
✨ आचार्य जी एक सत्र में समझाते है* - “एक वो थी २१ साल की जो जान पर खेल गई; एक ये हैं २१ साल के जो वीडियो गेम खेलते हैं। वो आज़ाद को नहीं जानता, वो बिस्मिल को नहीं जानता, वो सूर्य सेन को नहीं जानता, वो प्रितिलता को नहीं जानता, तो वो जानता किसको है?”
👨👩👧 “मेरी अपील है सब अभिभावकों से, गार्जियंस से कि खास खयाल रखिए कि आपका एडोलिसेंट या टीनएज बच्चा, आपका किशोर, ऑनलाइन किस तरह की संगति रख रहा है।”
🧭 “मैं ये नहीं कह रहा कि आप चौकीदार-पुलिस बनके उसके ऊपर चढ़ जाएँ, पर आपको पता तो हो कम-से-कम किसका फैन बन गया है वो आजकल।”
🌟 “कौन उसकी नजर में सेलिब्रिटी है? क्योंकि तुम जिसके फैन बन गए हो, तुम बिल्कुल वैसे ही हो जाने हो, पक्का समझ लो। वरना तुम फैन होते क्यों? कहीं-न-कहीं तुम्हारी अभिलाषा है कि तुम्हें वैसा होना है।”
🔗 स्रोत: https://indianexpress.com/article/lifestyle/art-and-culture/pritilata-waddedar-revolutionary-india-the-21-year-old-who-chose-to-die-than-be-caught-by-the-british-6300316/
🔗 महत्वपूर्ण आर्टिकल:
https://acharyaprashant.org/en/articles/kaun-kamzor-kar-raha-mere-desh-kee-yuva-takat-ko-1_5908531
⚔️ प्रीतिलता वाद्देदार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उन शुरुआती वीरांगनाओं में से थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ प्रत्यक्ष हथियार उठाकर इतिहास रच दिया। चटगांव (अब बांग्लादेश) में जन्मी प्रीतिलता बचपन से ही मेधावी थीं, लेकिन अंग्रेज शासन ने उनकी स्नातक की डिग्री पर रोक लगा दी थी (जो आज़ादी के 65 साल बाद मिली)।
✨ क्रांतिकारी मास्टर सूर्य सेन के संपर्क में आने के बाद वे चटगांव रिवोल्यूशनरी पार्टी की सक्रिय सदस्य बनीं और भेष बदलकर ब्रिटिश सत्ता की जड़ें हिलाने की योजना बनाने लगीं। इतिहास की सबसे अपमानजनक यादों में से एक है यूरोपियन क्लबों के बाहर लगी वह तख्ती, जिस पर लिखा होता था "कुत्तों और भारतीयों का आना मना है।"
🔥 प्रीतिलता ने इस नस्लीय भेदभाव और गुलामी का जवाब गोलियों से देने का फैसला किया। 23 सितंबर 1932 को मात्र 21 वर्ष की आयु में, उन्होंने सात क्रांतिकारियों के दल का नेतृत्व करते हुए इसी क्लब पर धावा बोल दिया। उनके लगाए बमों और गरजती पिस्तौलों ने अंग्रेजी हुकूमत के अहंकार को चकनाचूर कर दिया।
⚔️ हमले के दौरान घायल होने के बाद, अंग्रेजों के हाथों पकड़े जाने के बजाय उन्होंने 'पोटेशियम साइनाइड' खाकर अपनी मातृभूमि पर प्राण न्यौछावर कर दिए। बलिदान से पहले उन्होंने अपनी बहनों के नाम एक संदेश छोड़ा कि महिलाएं अब खुद को कमजोर न समझें और आज़ादी की लड़ाई में पीछे न रहें। प्रीतिलता का संक्षिप्त लेकिन तेजस्वी जीवन यह साबित कर गया कि जब बात स्वाभिमान और स्वराज की हो, तो भारतीय नारी युद्ध के मैदान में भी किसी से पीछे नहीं है।
✨ आचार्य जी एक सत्र में समझाते है* - “एक वो थी २१ साल की जो जान पर खेल गई; एक ये हैं २१ साल के जो वीडियो गेम खेलते हैं। वो आज़ाद को नहीं जानता, वो बिस्मिल को नहीं जानता, वो सूर्य सेन को नहीं जानता, वो प्रितिलता को नहीं जानता, तो वो जानता किसको है?”
👨👩👧 “मेरी अपील है सब अभिभावकों से, गार्जियंस से कि खास खयाल रखिए कि आपका एडोलिसेंट या टीनएज बच्चा, आपका किशोर, ऑनलाइन किस तरह की संगति रख रहा है।”
🧭 “मैं ये नहीं कह रहा कि आप चौकीदार-पुलिस बनके उसके ऊपर चढ़ जाएँ, पर आपको पता तो हो कम-से-कम किसका फैन बन गया है वो आजकल।”
🌟 “कौन उसकी नजर में सेलिब्रिटी है? क्योंकि तुम जिसके फैन बन गए हो, तुम बिल्कुल वैसे ही हो जाने हो, पक्का समझ लो। वरना तुम फैन होते क्यों? कहीं-न-कहीं तुम्हारी अभिलाषा है कि तुम्हें वैसा होना है।”
🔗 स्रोत: https://indianexpress.com/article/lifestyle/art-and-culture/pritilata-waddedar-revolutionary-india-the-21-year-old-who-chose-to-die-than-be-caught-by-the-british-6300316/
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The Indian Express
Pritilata Waddedar, the 21-year-old who chose to die than be caught by the British
Women’s Day Special: Inspired by Surya Sen, the 21-year-old led the raid on the Pahartali European Club in Chittagong.
❤1💯1
https://t.me/+nqCH8jHzE905OGRl
NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
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Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ: (history)
Group admin: @tikam_ambedkar (JRF-90AIR)
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प्रिय दोस्तों,
आप सबको याद होगा कि 4 और 5 फरवरी को क्या हुआ था?
सही उत्तर - चोरी चोरा कांड हुआ था😂 😂
आप सबको याद होगा कि 4 और 5 फरवरी को क्या हुआ था?
सही उत्तर - चोरी चोरा कांड हुआ था
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प्रिय दोस्तों,
आप सभी सो जाए,
अगर आज रिजल्ट लगा तो आप सबको चैनल पर शेयर कर देंगे,
चांसेस तो कल शाम को 7:00 बजे लगने के है✅
हम आज 4:00 बजे सोएंगे,
आप बार-बार साइट पर मत जाओ,✅
आप सभी सो जाए,
अगर आज रिजल्ट लगा तो आप सबको चैनल पर शेयर कर देंगे,
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हम आज 4:00 बजे सोएंगे,
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