No Document No History
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🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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Forwarded from No Document No History (♥️ श्री.रामसिंग राजपूत ⛳ ♥️)
The Essential Writings of Mahatma Gandhi.pdf
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Forwarded from No Document No History (♥️ श्री.रामसिंग राजपूत ⛳ ♥️)
No Document No History
The Essential Writings of Mahatma Gandhi.pdf
प्रिय बापू जी,
हमको आपकी बहुत याद आती है...✅🌸🌺💗
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खादी का एकदम परफेक्ट प्रोग्राम सेट कर दिया गांधी जी ने
Fact✍️
रोचक प्राप्ति नवदाटोली में हुई जब एक बड़ा भंडारण के उद्देश्य से बनाया गया मर्तबान प्राप्त हुआ। इसके ऊपर दाई ओर स्त्री की आकृति अंकित थी। हो सकता है यह धर्म से जुड़ा हुआ हो। और बांई ओर एक
बड़े मगरमच्छ या गिरगिट की आकृति बनी हुई है और इनके पीछे एक मंदिरनुमा आकृति है। यह मंदिर लगता है गिरगिट के समान किसी सम्बंधी प्रतीक के लिए बना हुआ था। चार मंदिरों की आकृतियां चार हिस्सों में पायी गयी है और चार को एथलिक पैटर्न (गोटेदार डिजाइन) से अलंकृत किया गया था। मर्तबान के दूसरे हिस्से में कछुआ के साथ देवस्थल बना हुआ है। महाराष्ट्र के प्रकाश नामक पुरातात्त्विक स्थल से भी मालवा संस्कृति के स्तर में भी कछुए की आकृति का शंख से बना एक ताबीज भी मिला था। एक टोटीदार पात्र के ऊपर लहराते हुए बालों वाले एक पुरुष की आकृति बनी है, जो नवदाटोली से प्राप्त हुई है। इसकी कुछ विद्वानों ने रुद्र के आदिम रूप से तुलना की है।
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चिटगांव शस्त्रागार कांड (अप्रैल 1930)
मालवा संस्कृति में शवों को घरों के नीचे ही दफनाया जाता था और शवों को उत्तर-पश्चिम दिशा में रखा जाता था। इंदौर के आजादपुर नामक स्थल से घर के फर्श के नीचे दफनाए गए एक शिशु (बच्चे) का शव मिला है। इनके पैरों को मृत्यु के बाद काट दिया गया था। एक धारदार ब्लेड तथा एक टेराकोटा की बनी छोटी तख्ती इनके सिर के पास रखी जाती थी।

Info: फैक्ट के साथ जो क्वेश्चन अटैच है... वह जोर्वे संस्कृति संबंधित है... लेकिन फैक्ट मालवा संस्कृति से सम्बंधित है... क्वेश्चन जो पूछा गया वह 1997 में यानी 28 साल पहले पूछा गया था...जो जोर्वे संस्कृति को इंगित करता है... लेकिन अब पेपर सैटर बदल गये है...तो मालवा संस्कृति से भी ऐसे नये क्वेश्चन बन सकते है।✍️

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स्रोत – RBI
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समझ नहीं आ रहा है.. कौनसी लाइन लिखें और कौनसी छोड़े भारी कंफ्यूजन है, भाई 🤭
हऱ 2 दूसरी लाइन इम्पोर्टेन्ट लग रही है..🙉


महान है, वह गाइड लिखने जो इतने बड़े सागर को कुछ पेज निपटा लेते है... लेकिन फिर इधर से एक महामानव आता है और कहता है गाइड को फाड़ के फेंक दो... कोई काम की नहीं है।
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दैमाबाद ताम्रनिधि (PYQ)✍️
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शुभ प्रभात

आप सबका दिन मंगल मय हो आनन्द मय रहे

हर हर महादेव ❤️
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Forwarded from आदित्य राय
*📜 04 फरवरी 📜*

*🌺 चौरी चौरा कांड दिवस 🌺*

तिथि : 04 फरवरी, 1922

' _चौरी चौरा' उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में स्थित एक कस्बा है। चौरी चौरा कस्बे में 4 फरवरी को स्वयंसेवकों ने बैठक की और जुलूस निकालने के लिये पास के मुंडेरा बाज़ार को चुना गया।_

पुलिसकर्मियों ने उन्हें जुलूस निकालने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और स्वयंसेवकों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने भीड़ पर गोली चला दी, जिसमें कुछ लोग मरे और कई घायल हो गए। गुस्साई भीड़ ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जिसमें 23 पुलिसकर्मी मारे गए।

कुछ भागने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों को पीट-पीटकर मार डाला गया। हथियारों सहित पुलिस की काफी सारी संपत्ति नष्ट कर दी गई।

गांधीजी ने पुलिसकर्मियों की हत्या की निंदा की और आस-पास के गाँवों में स्वयंसेवक समूहों को भंग कर दिया गया।

गांधीजी ने असहयोग आंदोलन में हिंसा का प्रवेश देख इसे रोकने का फैसला किया। उन्होंने अपनी इच्छा ‘कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी’ को बताई और 12 फरवरी, 1922 को यह आंदोलन औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया।
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No Document No History pinned «प्रिय दोस्तों, आगामी परीक्षाओं की सभी टेस्ट सीरिज आरम्भ सूची 🌺✅ 🔲UPHESC Assistant Professor 2022🔲 (कैंसिल वाला✅) ⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️ 🏃🏻😀History Starting Date ➡️ 1 Feburary 2026 🕖 🟡 8 Pm 💸Fees 🟡 499₹ 🏃🏻⚱AIH Starting Date 👉🏻 5 Feburary 2026 🕙 ➡️ 7…»
Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Pooja Pandey)
‘दत्त–ब्रेडले थीसिस’


‘दत्त–ब्रेडले थीसिस’ में भारतीय साम्यवादियों को यह सुझाव दिया गया कि वे
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित हों,
उसके संगठन का उपयोग करें
और प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथियों को वहाँ से बाहर करें।
इसी नीति के अंतर्गत आर. पी. दत्त और बेन ब्रेडले की पहल पर
‘भारत में साम्राज्यवाद-विरोधी जनवादी मोर्चा’
(The Anti-Imperialist People’s Front in India) की अवधारणा सामने आई।
यह संयुक्त थीसिस फरवरी 1936 में INPRECORR में
और मार्च 1936 में लंदन की ब्रिटिश कम्युनिस्ट पत्रिका
‘द लेबर मंथली’ में प्रकाशित हुई थी।



https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल

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Quiz group
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रुकावटें रास्ते का हिस्सा हैं, हिम्मत मंज़िल की पहचान है। ✨✅


"रुकावटें रास्ते में बहुत आएँगी, डर भी लगेगा और निराशा भी होगी।
लेकिन यही जीवन का रास्ता है।
सच में कुछ बनना है, तो हिम्मत दिखानी ही होगी।"

⏰✨✅🌺✨🤩🎯💰👍
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Dekh lena Sbhi bhai bhn.. share kr dena isko .. na Jane kon h kha hai kis conditions m hai 💐💐🙏
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अगर कोई गलत से भी बोल दे की रिजल्ट  जारी हो गया 
सबका बीपी बढ जाये गा 😂🤦‍♂

एनटीये वाले भी मजे ले रहे हैं

anskey   समय से एक दिन पहले जारी कर दिये

और रिजल्ट  समय पर भी इन्तजार  करवा रहे हैं
🤣12😁2
Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
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ITIHAS_JUNCTION
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🔥 4 फरवरी 1922: चौरी-चौरा कांड – प्रतिशोध की आग! 🇮🇳

आज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक काला और निर्णायक दिन है।

वर्ष 1920 में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन 1922 तक पूरे भारत में अंग्रेजों की नाक में दम कर चुका था। लेकिन गोरखपुर के एक छोटे से कस्बे चौरी-चौरा में कुछ ऐसा हुआ जिसने इतिहास का रुख मोड़ दिया।

🔹 क्या हुआ था?
महंगाई और पुलिसिया दमन के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ पर जब पुलिस ने गोलियां चलाईं, तो भीड़ बेकाबू हो गई। आक्रोशित प्रदर्शनकारी "गांधी महाराज की जय" के नारे लगाते हुए थाने की ओर बढ़े और उसे आग के हवाले कर दिया। इस घटना में 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए।

🔹 गांधीजी का फैसला
इस घटना ने महात्मा गांधी को अंदर तक झकझोर दिया। उन्हें लगा कि देश अभी अहिंसक सत्याग्रह के लिए तैयार नहीं है। 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कांग्रेस की बैठक में उन्होंने आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी।

सुभाष चंद्र बोस और मोतीलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इसे "राष्ट्रीय दुर्भाग्य" कहा, लेकिन गांधीजी अपने अहिंसा के सिद्धांत पर अडिग रहे।

📚 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण:

▪️ घटना की तिथि: 4 फरवरी 1922

▪️ आंदोलन वापसी की घोषणा: 12 फरवरी 1922 (बारदोली प्रस्ताव)

▪️ गवर्नर जनरल उस समय: लॉर्ड रीडिंग

✍️ Join: @Itihaas_Junction
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Forwarded from वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........
अल्बरूनी का विवरण विभिन्न क्षेत्रों मे प्रचलित लिपियाँ 👆👏
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