No Document No History
6.47K subscribers
24.4K photos
1.47K videos
21.7K files
10.7K links
🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
📚 History PDFs | Notes | PYQs | Research Material
🎓 NET/JRF • SET • Assistant Professor • Competitive Exam
@RamsingRajput786 https://t.me/HistoryChatAdda
Download Telegram
दैमाबाद ताम्रनिधि (PYQ)✍️
https://t.me/tikam_ambedakr00
❤1
शुभ प्रभात

आप सबका दिन मंगल मय हो आनन्द मय रहे

हर हर महादेव ❤️
🙏7❤2
Forwarded from आदित्य राय
*📜 04 फरवरी 📜*

*🌺 चौरी चौरा कांड दिवस 🌺*

तिथि : 04 फरवरी, 1922

' _चौरी चौरा' उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में स्थित एक कस्बा है। चौरी चौरा कस्बे में 4 फरवरी को स्वयंसेवकों ने बैठक की और जुलूस निकालने के लिये पास के मुंडेरा बाज़ार को चुना गया।_

पुलिसकर्मियों ने उन्हें जुलूस निकालने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और स्वयंसेवकों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने भीड़ पर गोली चला दी, जिसमें कुछ लोग मरे और कई घायल हो गए। गुस्साई भीड़ ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जिसमें 23 पुलिसकर्मी मारे गए।

कुछ भागने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों को पीट-पीटकर मार डाला गया। हथियारों सहित पुलिस की काफी सारी संपत्ति नष्ट कर दी गई।

गांधीजी ने पुलिसकर्मियों की हत्या की निंदा की और आस-पास के गाँवों में स्वयंसेवक समूहों को भंग कर दिया गया।

गांधीजी ने असहयोग आंदोलन में हिंसा का प्रवेश देख इसे रोकने का फैसला किया। उन्होंने अपनी इच्छा ‘कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी’ को बताई और 12 फरवरी, 1922 को यह आंदोलन औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया।
❤3
No Document No History pinned «प्रिय दोस्तों, आगामी परीक्षाओं की सभी टेस्ट सीरिज आरम्भ सूची 🌺✅ 🔲UPHESC Assistant Professor 2022🔲 (कैंसिल वाला✅) ⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️ 🏃🏻😀History Starting Date ➡️ 1 Feburary 2026 🕖 🟡 8 Pm 💸Fees 🟡 499₹ 🏃🏻⚱AIH Starting Date 👉🏻 5 Feburary 2026 🕙 ➡️ 7…»
Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Pooja Pandey)
‘दत्त–ब्रेडले थीसिस’


‘दत्त–ब्रेडले थीसिस’ में भारतीय साम्यवादियों को यह सुझाव दिया गया कि वे
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित हों,
उसके संगठन का उपयोग करें
और प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथियों को वहाँ से बाहर करें।
इसी नीति के अंतर्गत आर. पी. दत्त और बेन ब्रेडले की पहल पर
‘भारत में साम्राज्यवाद-विरोधी जनवादी मोर्चा’
(The Anti-Imperialist People’s Front in India) की अवधारणा सामने आई।
यह संयुक्त थीसिस फरवरी 1936 में INPRECORR में
और मार्च 1936 में लंदन की ब्रिटिश कम्युनिस्ट पत्रिका
‘द लेबर मंथली’ में प्रकाशित हुई थी।



https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल

https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
❤3
रुकावटें रास्ते का हिस्सा हैं, हिम्मत मंज़िल की पहचान है। ✨✅


"रुकावटें रास्ते में बहुत आएँगी, डर भी लगेगा और निराशा भी होगी।
लेकिन यही जीवन का रास्ता है।
सच में कुछ बनना है, तो हिम्मत दिखानी ही होगी।"

⏰✨✅🌺✨🤩🎯💰👍
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
👍6❤3💯2
Dekh lena Sbhi bhai bhn.. share kr dena isko .. na Jane kon h kha hai kis conditions m hai 💐💐🙏
👍4❤2
अगर कोई गलत से भी बोल दे की रिजल्ट  जारी हो गया 
सबका बीपी बढ जाये गा 😂🤦‍♂

एनटीये वाले भी मजे ले रहे हैं

anskey   समय से एक दिन पहले जारी कर दिये

और रिजल्ट  समय पर भी इन्तजार  करवा रहे हैं
🤣12😁2
Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (🇮🇳♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖🇮🇳)
ITIHAS_JUNCTION
Photo
🔥 4 फरवरी 1922: चौरी-चौरा कांड – प्रतिशोध की आग! 🇮🇳

आज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक काला और निर्णायक दिन है।

वर्ष 1920 में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन 1922 तक पूरे भारत में अंग्रेजों की नाक में दम कर चुका था। लेकिन गोरखपुर के एक छोटे से कस्बे चौरी-चौरा में कुछ ऐसा हुआ जिसने इतिहास का रुख मोड़ दिया।

🔹 क्या हुआ था?
महंगाई और पुलिसिया दमन के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ पर जब पुलिस ने गोलियां चलाईं, तो भीड़ बेकाबू हो गई। आक्रोशित प्रदर्शनकारी "गांधी महाराज की जय" के नारे लगाते हुए थाने की ओर बढ़े और उसे आग के हवाले कर दिया। इस घटना में 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए।

🔹 गांधीजी का फैसला
इस घटना ने महात्मा गांधी को अंदर तक झकझोर दिया। उन्हें लगा कि देश अभी अहिंसक सत्याग्रह के लिए तैयार नहीं है। 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कांग्रेस की बैठक में उन्होंने आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी।

सुभाष चंद्र बोस और मोतीलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इसे "राष्ट्रीय दुर्भाग्य" कहा, लेकिन गांधीजी अपने अहिंसा के सिद्धांत पर अडिग रहे।

📚 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण:

▪️ घटना की तिथि: 4 फरवरी 1922

▪️ आंदोलन वापसी की घोषणा: 12 फरवरी 1922 (बारदोली प्रस्ताव)

▪️ गवर्नर जनरल उस समय: लॉर्ड रीडिंग

✍️ Join: @Itihaas_Junction
👍2🔥1
Forwarded from वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........
अल्बरूनी का विवरण विभिन्न क्षेत्रों मे प्रचलित लिपियाँ 👆👏
👍3
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
बिहारी नारी की अद्भुत आवाज...💜💗💙🦋✨🦋
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤15👏3🔥2👍1🥰1
भारत में पहली बार नागरिकता की परिभाषा और मूल अधिकारों को व्यवस्थित रूप से प्रतिपादित किया गया था —





👉 नेहरू रिपोर्ट (1928 ई.) में

मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली इस रिपोर्ट में


नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) की स्पष्ट सूची दी गई


समान नागरिकता, कानून के समक्ष समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अधिकारों पर ज़ोर दिया गया
यह ब्रिटिश भारत के लिए एक संवैधानिक मसौदा था.
✍जैन धर्म की देविया: रोहिणी, प्रग्यप्ति, काली, महामानवी, गौरी, चकरेशवरी, सचिया


✍बौद्ध धर्म की देविया : तारा, मारिची, हारिति, सरस्वती, देवी चुंदा, अपराजीत
No Document No History
Photo
लखनऊ के अनमोल रत्न
जिनके नाम से लखनऊ में कुछ भी नहीं है।
02 फरवरी 1887 को राजकुमारी अमृतकौर जी का जन्म लखनऊ में हुआ था. उनके पिता थे राजा हरनाम सिंह अहलूवालिया, जिन्हें अंग्रेजों ने सर की उपाधि से नवाजा था।
वे कपूरथला रियासत के महाराज के छोटे बेटे थे। बताया जाता है कि कपूरथला की राजगद्दी को लेकर विवाद शुरू हुआ तो राजा हरनाम सिंह ने रियासत ही छोड़ दी और कपूरथला से लखनऊ रहने आ गए थे।
लखनऊ के #चाँदबाग मे उन्होंने शानदार हवेली बनवाई। अब चाँद बाग वो हिस्सा अब #कपूरथला के नाम से जाना जाता है।

राजकुमारीअमृतकौर जी आजीवन अविवाहित रहीं।आजाद भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री थीं.दिल्ली में #एम्स की स्थापना करने के लिए उन्होंने 100 एकड़ से अधिक जमीन सहित सारे गहने बेच दिए। एम्स को कई बंगले भी दान में दे दिए।
राजा हरनाम सिंह की आठ संतानें थी जिनमें राजकुमारी अमृत कौर अपने सात भाईयों में अकेली बहिन थीं।
एम्स की स्थापना के लिए उन्होंने न्यूजीलैंड ,ऑस्ट्रेलिया ,पश्चिम जर्मनी ,स्वीडन और अमरीका से मदद हासिल की थी। राजकुमारी अमृत कौर और उनके एक भाई ने #शिमला और #समरहिल में पैतृक सम्पत्ति और मकान को संस्थान के कर्मचारियों और नर्सों के लिए होलिडे होम के रूप में दान कर दिया था।
2 अक्टूबर 1964 को राजकुमारी अमृत कौर का निधन हुआ था।
❤5👍1
स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्
#चौरी_चौरा की घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन क्रांतिकारी कड़ियों में से एक है, जो सौ वर्षों बाद भी अपने सही ऐतिहासिक स्थान की प्रतीक्षा कर रही है। 4 फ़रवरी 1922 को घटित यह घटना केवल एक स्थानीय उभार नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश का निर्णायक प्रकटीकरण थी। दुर्भाग्यवश, तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के साथ-साथ भारतीय राजनीति के कुछ प्रभावशाली नेतृत्वकर्ताओं द्वारा इसे जिस प्रकार ‘अपराध’ या ‘विचलन’ के रूप में प्रस्तुत किया गया, उसी दृष्टि को आगे चलकर स्वतंत्र भारत के मुख्यधारा के इतिहासलेखन ने भी लगभग यथावत स्वीकार कर लिया।
आज जब हम #चौरी_चौरा_आंदोलन के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं, तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस घटना को ‘काण्ड’ जैसे नकारात्मक और बोझिल उपसर्ग से मुक्त किया जाए। यह कोई आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि औपनिवेशिक अत्याचार के विरुद्ध उपजी जनक्रांति थी, जिसे उसी गरिमा और ऐतिहासिक चेतना के साथ देखा जाना चाहिए।
यह भी एक दुर्लभ तथ्य है कि किसी एक घटना के दो शहीद स्मारक हों। आवश्यकता इस बात की है कि औपनिवेशिक सत्ता के प्रतिनिधियों के नाम पर स्थापित स्मारकीय प्रतीकों से ‘शहादत’ का गौरव हटाकर, उसे उन अमर बलिदानियों को समर्पित किया जाए जिन्होंने ‘स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ के ध्येय से अपने प्राण न्योछावर किए।
इतिहासकारों के लिए यह भी ज़रूरी है कि वे इस घटना को केवल महात्मा गांधी के पश्चाताप या असहयोग आंदोलन की वापसी तक सीमित न रखें। बाबा राघवदास, महामना मदन मोहन मालवीय और सुभाष चंद्र बोस जैसी विभूतियों की तत्कालीन प्रतिक्रियाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि चौरी-चौरा को एक व्यापक राष्ट्रीय प्रतिरोध के रूप में भी देखा गया था। यह बहुजन जनक्रांति भारतीय प्रतिरोध की दीर्घकालिक परंपरा को गहराई से प्रभावित करने वाली घटना थी।
स्वतंत्र भारत में इस विषय पर कुछ महत्त्वपूर्ण अध्ययन अवश्य हुए हैं, किंतु औपनिवेशिक स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण चौरी-चौरा को अक्सर ‘स्थानीय सामाजिक अपराध’ के संकुचित फ्रेम में बाँध दिया गया। अब समय है कि इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टि से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और जनपक्षधर नज़रिए से पुनः पढ़ा जाए।
#चौरी_चौरा की घटना केवल अतीत नहीं, बल्कि इतिहासलेखन की उस चुनौती का नाम है, जो हमसे पुनर्पाठ, पुनर्मूल्यांकन और पुनर्स्थापन की माँग करती है।
#चौरी_चौरा_आंदोलन में ‘स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ के ध्येय से लड़े-जूझे-प्राणोत्सर्ग करने वाले अमर बलिदानियों को सादर नमन। 💐
❤3
🛑 AI से 'कॉपी-पेस्ट' किया तो डिग्री पर फिरेगा पानी!
👉BRABU (बिहार यूनिवर्सिटी) के दर्जनों PhD छात्रों को लगा बड़ा झटका! UGC ने AI से लिखी गई थीसिस को पकड़कर वापस लौटा दिया है।
मुख्य बातें:
📉 40% से ज्यादा चोरी: थीसिस में भारी मात्रा में कंटेंट कॉपी-पेस्ट पाया गया।
💻 पकड़ा गया फ्रॉड: UGC के आधुनिक सॉफ्टवेयर ने AI की चालाकी को तुरंत पकड़ लिया।
✍️ अब दोबारा मेहनत: इन छात्रों को अब नए सिरे से अपनी पूरी थीसिस लिखनी होगी।
👌सीख: अपनी मेहनत और मौलिकता (Originality) का कोई विकल्प नहीं है। तकनीक का सहारा लें, लेकिन शब्द अपने ही रखें!
❤8
https://t.me/+nqCH8jHzE905OGRl

NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।

Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
❤1🤔1