Forwarded from गुरुकुल इतिहास सूरतगढ़ History for Rpsc 🇮🇳
✍जैन धर्म की देविया: रोहिणी, प्रग्यप्ति, काली, महामानवी, गौरी, चकरेशवरी, सचिया
✍बौद्ध धर्म की देविया : तारा, मारिची, हारिति, सरस्वती, देवी चुंदा, अपराजीत
✍बौद्ध धर्म की देविया : तारा, मारिची, हारिति, सरस्वती, देवी चुंदा, अपराजीत
No Document No History
Photo
लखनऊ के अनमोल रत्न
जिनके नाम से लखनऊ में कुछ भी नहीं है।
02 फरवरी 1887 को राजकुमारी अमृतकौर जी का जन्म लखनऊ में हुआ था. उनके पिता थे राजा हरनाम सिंह अहलूवालिया, जिन्हें अंग्रेजों ने सर की उपाधि से नवाजा था।
वे कपूरथला रियासत के महाराज के छोटे बेटे थे। बताया जाता है कि कपूरथला की राजगद्दी को लेकर विवाद शुरू हुआ तो राजा हरनाम सिंह ने रियासत ही छोड़ दी और कपूरथला से लखनऊ रहने आ गए थे।
लखनऊ के #चाँदबाग मे उन्होंने शानदार हवेली बनवाई। अब चाँद बाग वो हिस्सा अब #कपूरथला के नाम से जाना जाता है।
राजकुमारीअमृतकौर जी आजीवन अविवाहित रहीं।आजाद भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री थीं.दिल्ली में #एम्स की स्थापना करने के लिए उन्होंने 100 एकड़ से अधिक जमीन सहित सारे गहने बेच दिए। एम्स को कई बंगले भी दान में दे दिए।
राजा हरनाम सिंह की आठ संतानें थी जिनमें राजकुमारी अमृत कौर अपने सात भाईयों में अकेली बहिन थीं।
एम्स की स्थापना के लिए उन्होंने न्यूजीलैंड ,ऑस्ट्रेलिया ,पश्चिम जर्मनी ,स्वीडन और अमरीका से मदद हासिल की थी। राजकुमारी अमृत कौर और उनके एक भाई ने #शिमला और #समरहिल में पैतृक सम्पत्ति और मकान को संस्थान के कर्मचारियों और नर्सों के लिए होलिडे होम के रूप में दान कर दिया था।
2 अक्टूबर 1964 को राजकुमारी अमृत कौर का निधन हुआ था।
जिनके नाम से लखनऊ में कुछ भी नहीं है।
02 फरवरी 1887 को राजकुमारी अमृतकौर जी का जन्म लखनऊ में हुआ था. उनके पिता थे राजा हरनाम सिंह अहलूवालिया, जिन्हें अंग्रेजों ने सर की उपाधि से नवाजा था।
वे कपूरथला रियासत के महाराज के छोटे बेटे थे। बताया जाता है कि कपूरथला की राजगद्दी को लेकर विवाद शुरू हुआ तो राजा हरनाम सिंह ने रियासत ही छोड़ दी और कपूरथला से लखनऊ रहने आ गए थे।
लखनऊ के #चाँदबाग मे उन्होंने शानदार हवेली बनवाई। अब चाँद बाग वो हिस्सा अब #कपूरथला के नाम से जाना जाता है।
राजकुमारीअमृतकौर जी आजीवन अविवाहित रहीं।आजाद भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री थीं.दिल्ली में #एम्स की स्थापना करने के लिए उन्होंने 100 एकड़ से अधिक जमीन सहित सारे गहने बेच दिए। एम्स को कई बंगले भी दान में दे दिए।
राजा हरनाम सिंह की आठ संतानें थी जिनमें राजकुमारी अमृत कौर अपने सात भाईयों में अकेली बहिन थीं।
एम्स की स्थापना के लिए उन्होंने न्यूजीलैंड ,ऑस्ट्रेलिया ,पश्चिम जर्मनी ,स्वीडन और अमरीका से मदद हासिल की थी। राजकुमारी अमृत कौर और उनके एक भाई ने #शिमला और #समरहिल में पैतृक सम्पत्ति और मकान को संस्थान के कर्मचारियों और नर्सों के लिए होलिडे होम के रूप में दान कर दिया था।
2 अक्टूबर 1964 को राजकुमारी अमृत कौर का निधन हुआ था।
❤5👍1
स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्
#चौरी_चौरा की घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन क्रांतिकारी कड़ियों में से एक है, जो सौ वर्षों बाद भी अपने सही ऐतिहासिक स्थान की प्रतीक्षा कर रही है। 4 फ़रवरी 1922 को घटित यह घटना केवल एक स्थानीय उभार नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश का निर्णायक प्रकटीकरण थी। दुर्भाग्यवश, तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के साथ-साथ भारतीय राजनीति के कुछ प्रभावशाली नेतृत्वकर्ताओं द्वारा इसे जिस प्रकार ‘अपराध’ या ‘विचलन’ के रूप में प्रस्तुत किया गया, उसी दृष्टि को आगे चलकर स्वतंत्र भारत के मुख्यधारा के इतिहासलेखन ने भी लगभग यथावत स्वीकार कर लिया।
आज जब हम #चौरी_चौरा_आंदोलन के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं, तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस घटना को ‘काण्ड’ जैसे नकारात्मक और बोझिल उपसर्ग से मुक्त किया जाए। यह कोई आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि औपनिवेशिक अत्याचार के विरुद्ध उपजी जनक्रांति थी, जिसे उसी गरिमा और ऐतिहासिक चेतना के साथ देखा जाना चाहिए।
यह भी एक दुर्लभ तथ्य है कि किसी एक घटना के दो शहीद स्मारक हों। आवश्यकता इस बात की है कि औपनिवेशिक सत्ता के प्रतिनिधियों के नाम पर स्थापित स्मारकीय प्रतीकों से ‘शहादत’ का गौरव हटाकर, उसे उन अमर बलिदानियों को समर्पित किया जाए जिन्होंने ‘स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ के ध्येय से अपने प्राण न्योछावर किए।
इतिहासकारों के लिए यह भी ज़रूरी है कि वे इस घटना को केवल महात्मा गांधी के पश्चाताप या असहयोग आंदोलन की वापसी तक सीमित न रखें। बाबा राघवदास, महामना मदन मोहन मालवीय और सुभाष चंद्र बोस जैसी विभूतियों की तत्कालीन प्रतिक्रियाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि चौरी-चौरा को एक व्यापक राष्ट्रीय प्रतिरोध के रूप में भी देखा गया था। यह बहुजन जनक्रांति भारतीय प्रतिरोध की दीर्घकालिक परंपरा को गहराई से प्रभावित करने वाली घटना थी।
स्वतंत्र भारत में इस विषय पर कुछ महत्त्वपूर्ण अध्ययन अवश्य हुए हैं, किंतु औपनिवेशिक स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण चौरी-चौरा को अक्सर ‘स्थानीय सामाजिक अपराध’ के संकुचित फ्रेम में बाँध दिया गया। अब समय है कि इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टि से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और जनपक्षधर नज़रिए से पुनः पढ़ा जाए।
#चौरी_चौरा की घटना केवल अतीत नहीं, बल्कि इतिहासलेखन की उस चुनौती का नाम है, जो हमसे पुनर्पाठ, पुनर्मूल्यांकन और पुनर्स्थापन की माँग करती है।
#चौरी_चौरा_आंदोलन में ‘स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ के ध्येय से लड़े-जूझे-प्राणोत्सर्ग करने वाले अमर बलिदानियों को सादर नमन। 💐
#चौरी_चौरा की घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन क्रांतिकारी कड़ियों में से एक है, जो सौ वर्षों बाद भी अपने सही ऐतिहासिक स्थान की प्रतीक्षा कर रही है। 4 फ़रवरी 1922 को घटित यह घटना केवल एक स्थानीय उभार नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश का निर्णायक प्रकटीकरण थी। दुर्भाग्यवश, तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के साथ-साथ भारतीय राजनीति के कुछ प्रभावशाली नेतृत्वकर्ताओं द्वारा इसे जिस प्रकार ‘अपराध’ या ‘विचलन’ के रूप में प्रस्तुत किया गया, उसी दृष्टि को आगे चलकर स्वतंत्र भारत के मुख्यधारा के इतिहासलेखन ने भी लगभग यथावत स्वीकार कर लिया।
आज जब हम #चौरी_चौरा_आंदोलन के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं, तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस घटना को ‘काण्ड’ जैसे नकारात्मक और बोझिल उपसर्ग से मुक्त किया जाए। यह कोई आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि औपनिवेशिक अत्याचार के विरुद्ध उपजी जनक्रांति थी, जिसे उसी गरिमा और ऐतिहासिक चेतना के साथ देखा जाना चाहिए।
यह भी एक दुर्लभ तथ्य है कि किसी एक घटना के दो शहीद स्मारक हों। आवश्यकता इस बात की है कि औपनिवेशिक सत्ता के प्रतिनिधियों के नाम पर स्थापित स्मारकीय प्रतीकों से ‘शहादत’ का गौरव हटाकर, उसे उन अमर बलिदानियों को समर्पित किया जाए जिन्होंने ‘स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ के ध्येय से अपने प्राण न्योछावर किए।
इतिहासकारों के लिए यह भी ज़रूरी है कि वे इस घटना को केवल महात्मा गांधी के पश्चाताप या असहयोग आंदोलन की वापसी तक सीमित न रखें। बाबा राघवदास, महामना मदन मोहन मालवीय और सुभाष चंद्र बोस जैसी विभूतियों की तत्कालीन प्रतिक्रियाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि चौरी-चौरा को एक व्यापक राष्ट्रीय प्रतिरोध के रूप में भी देखा गया था। यह बहुजन जनक्रांति भारतीय प्रतिरोध की दीर्घकालिक परंपरा को गहराई से प्रभावित करने वाली घटना थी।
स्वतंत्र भारत में इस विषय पर कुछ महत्त्वपूर्ण अध्ययन अवश्य हुए हैं, किंतु औपनिवेशिक स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण चौरी-चौरा को अक्सर ‘स्थानीय सामाजिक अपराध’ के संकुचित फ्रेम में बाँध दिया गया। अब समय है कि इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टि से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और जनपक्षधर नज़रिए से पुनः पढ़ा जाए।
#चौरी_चौरा की घटना केवल अतीत नहीं, बल्कि इतिहासलेखन की उस चुनौती का नाम है, जो हमसे पुनर्पाठ, पुनर्मूल्यांकन और पुनर्स्थापन की माँग करती है।
#चौरी_चौरा_आंदोलन में ‘स्वरक्तै: स्वराष्ट्रं रक्षेत्’ के ध्येय से लड़े-जूझे-प्राणोत्सर्ग करने वाले अमर बलिदानियों को सादर नमन। 💐
❤3
🛑 AI से 'कॉपी-पेस्ट' किया तो डिग्री पर फिरेगा पानी!
👉BRABU (बिहार यूनिवर्सिटी) के दर्जनों PhD छात्रों को लगा बड़ा झटका! UGC ने AI से लिखी गई थीसिस को पकड़कर वापस लौटा दिया है।
मुख्य बातें:
📉 40% से ज्यादा चोरी: थीसिस में भारी मात्रा में कंटेंट कॉपी-पेस्ट पाया गया।
💻 पकड़ा गया फ्रॉड: UGC के आधुनिक सॉफ्टवेयर ने AI की चालाकी को तुरंत पकड़ लिया।
✍️ अब दोबारा मेहनत: इन छात्रों को अब नए सिरे से अपनी पूरी थीसिस लिखनी होगी।
👌सीख: अपनी मेहनत और मौलिकता (Originality) का कोई विकल्प नहीं है। तकनीक का सहारा लें, लेकिन शब्द अपने ही रखें!
👉BRABU (बिहार यूनिवर्सिटी) के दर्जनों PhD छात्रों को लगा बड़ा झटका! UGC ने AI से लिखी गई थीसिस को पकड़कर वापस लौटा दिया है।
मुख्य बातें:
📉 40% से ज्यादा चोरी: थीसिस में भारी मात्रा में कंटेंट कॉपी-पेस्ट पाया गया।
💻 पकड़ा गया फ्रॉड: UGC के आधुनिक सॉफ्टवेयर ने AI की चालाकी को तुरंत पकड़ लिया।
✍️ अब दोबारा मेहनत: इन छात्रों को अब नए सिरे से अपनी पूरी थीसिस लिखनी होगी।
👌सीख: अपनी मेहनत और मौलिकता (Originality) का कोई विकल्प नहीं है। तकनीक का सहारा लें, लेकिन शब्द अपने ही रखें!
❤8
https://t.me/+nqCH8jHzE905OGRl
NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
Telegram
Tιƙαɱ αɱႦҽԃƙαɾ: (history)
Group admin: @tikam_ambedkar (JRF-90AIR)
❤1🤔1
प्रिय दोस्तों,
नेट का रिजल्ट 7 बजकर 40 मिनिट पर लगेगा..⭐️ ✅ ✅
बार बार साइट चेक न करे,
अपना एप्लीकेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ कागज़ पर लिखकर रखना,✅
क्योंकि साइट हैंग होने की बहुत ज्यादा प्रबल संभावना है...✅
सुख और दुख दोनों का गहरा संबंध आज देखने को मिलेगा..✅ ✅
नेट का रिजल्ट 7 बजकर 40 मिनिट पर लगेगा..
बार बार साइट चेक न करे,
अपना एप्लीकेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ कागज़ पर लिखकर रखना,
क्योंकि साइट हैंग होने की बहुत ज्यादा प्रबल संभावना है...
सुख और दुख दोनों का गहरा संबंध आज देखने को मिलेगा..
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
👍11😁5💯2❤1
No Document No History
प्रिय दोस्तों, नेट का रिजल्ट 7 बजकर 40 मिनिट पर लगेगा..⭐️ ✅ ✅ बार बार साइट चेक न करे, अपना एप्लीकेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ कागज़ पर लिखकर रखना,✅ क्योंकि साइट हैंग होने की बहुत ज्यादा प्रबल संभावना है...✅ सुख और दुख दोनों का गहरा संबंध आज देखने को मिलेगा..✅ ✅
समय 7:40 बताने का कारण है,
क्योंकि उन्होंने यह पोस्ट 7:40 मिनट पर डाली थी✅
और कोई कारण नहीं है,
वैसे हम बताना नहीं चाहते थे
लेकिन आप लोग हम पर केस कर दोगे😂
अगर 7:40 पर लगता है तो इसे केवल संयोग समझे✅ ✅
क्योंकि उन्होंने यह पोस्ट 7:40 मिनट पर डाली थी
और कोई कारण नहीं है,
वैसे हम बताना नहीं चाहते थे
लेकिन आप लोग हम पर केस कर दोगे
अगर 7:40 पर लगता है तो इसे केवल संयोग समझे
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
😁8🤣5👍3❤1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
इसमें जितनी भी कमेटी या पेक्ट है इनको खुद से एक बार जरूर देखना, बहुत अच्छी जानकारी हो जाएगी 📖✍️
बंगाल पेक्ट, ली मोदी पेक्ट, देसाई लियाकत पेक्ट, राजाजी मुंजे पेक्ट, पूना पेक्ट, गांधी दास पेक्ट, लियाकत नेहरू पेक्ट आदि पेक्ट को खुद से ढूंढ के लिख ले क्या पता कभी एग्जाम में आ जाए 📖✍️
बंगाल पेक्ट, ली मोदी पेक्ट, देसाई लियाकत पेक्ट, राजाजी मुंजे पेक्ट, पूना पेक्ट, गांधी दास पेक्ट, लियाकत नेहरू पेक्ट आदि पेक्ट को खुद से ढूंढ के लिख ले क्या पता कभी एग्जाम में आ जाए 📖✍️
🔥3👏1
मनुस्मृति : आरंभिक भारत का सबसे प्रसिद्ध विधिग्रंथ है। इसे संस्कृत भाषा में दूसरी शताब्दी ई. पू. और दूसरी शताब्दी ई. के बीच लिखा गया था ।
स्रोत: NCERT भारतीय इतिहास के कुछ विषय
हर्षचरित संस्कृत में लिखी गई कन्नौज के शासक हर्षवर्धन की जीवनी है, इसके लेखक बाणभट्ट हर्षवर्धन के राजकवि थे ।
स्रोत: NCERT भारतीय इतिहास के कुछ विषय
❤1
प्रिय दोस्तों,
आज नेट का रिजल्ट लग जायेगा इसमे किसी को कोई dobut नहीं है,
लेकिन आपका अगर NET JRF हो जाता है तो कृपया करके कोई न्यू टेलीग्राम चैनल अथवा ग्रुप खोलने की गलती न करे,✅
ऑलरेडी टेलीग्राम पर बहुत सारे अच्छे-अच्छे चैनल और ग्रुप्स है,
अगर आपका रिजल्ट आता तो अच्छी बात है आगे की पढ़ाई जारी रखें,
चैनल अथवा न्यू ग्रुप खोलकर समय को बर्बाद न करे,
टेलीग्राम पर कितने अच्छे-अच्छे चैनल और ग्रुप है उनका फायदा लीजिये,
जिनका रिजल्ट आएगा उनको बहुत-बहुत बधाई और जिनका कुछ नंबर से रहेगा उनको जून 26 के लिए शुभकामनाएं...💐 🌺
https://t.me/Ramsing2023
आज नेट का रिजल्ट लग जायेगा इसमे किसी को कोई dobut नहीं है,
लेकिन आपका अगर NET JRF हो जाता है तो कृपया करके कोई न्यू टेलीग्राम चैनल अथवा ग्रुप खोलने की गलती न करे,
ऑलरेडी टेलीग्राम पर बहुत सारे अच्छे-अच्छे चैनल और ग्रुप्स है,
अगर आपका रिजल्ट आता तो अच्छी बात है आगे की पढ़ाई जारी रखें,
चैनल अथवा न्यू ग्रुप खोलकर समय को बर्बाद न करे,
टेलीग्राम पर कितने अच्छे-अच्छे चैनल और ग्रुप है उनका फायदा लीजिये,
जिनका रिजल्ट आएगा उनको बहुत-बहुत बधाई और जिनका कुछ नंबर से रहेगा उनको जून 26 के लिए शुभकामनाएं...
सफलता स्थायी नहीं है और असफलता अंतिम नहीं।
सफलता के बाद कभी भी काम करना बंद न करें और असफलता के बाद कभी भी प्रयास करना बंद न करें।💗 💗 🌸 ⏰ 👍
https://t.me/Ramsing2023
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤8👍5💯1
रिजल्ट नहीं बीरबल की खिचड़ी हो चली है ।
जिसका मन आ रहा है रिजल्ट के बारे में वो बता रहा है ।
थोड़ा सब्र कर लो, रिजल्ट आ ही जाएगा ।
ऐसा नहीं कि रिजल्ट आते ही phd में एडमिशन हो जाएगा, या जेआरएफ की स्कॉलरशिप मिल जाएगा ।
बस थोड़ा सब्र रखे, रिजल्ट जब देना होगा आयोग को तभी देगा , बार बार पूछ कर या बता कर वो निकल नहीं जाएगा।
जिसका मन आ रहा है रिजल्ट के बारे में वो बता रहा है ।
थोड़ा सब्र कर लो, रिजल्ट आ ही जाएगा ।
ऐसा नहीं कि रिजल्ट आते ही phd में एडमिशन हो जाएगा, या जेआरएफ की स्कॉलरशिप मिल जाएगा ।
बस थोड़ा सब्र रखे, रिजल्ट जब देना होगा आयोग को तभी देगा , बार बार पूछ कर या बता कर वो निकल नहीं जाएगा।
😁5💯1
पेरिप्लस : यूनानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ समुद्री यात्रा है और एरीथ्रियन यूनानी भाषा में लाल सागर को कहते हैं।
स्रोत: NCERT भारतीय इतिहास के कुछ विषय
👍2
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
'हमारे पास शब्दों का धन है। शब्दों के शस्त्रों से हम युद्ध करेंगे; शब्द हमारे जीवन की श्वास हैं, हम शब्दों के धन को लोगों में बाँटेंगे 📖✍️
-संत तुकाराम, 1608-1650
-संत तुकाराम, 1608-1650
❤7🔥1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
सुभाष चंद्र बोस का भारतीय जनता के नाम रेडियो सन्देश 📖✍️
https://t.me/historyfact00
https://t.me/historyfact00
👏2❤1🔥1