No Document No History
6.47K subscribers
24.3K photos
1.47K videos
21.7K files
10.7K links
🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
📚 History PDFs | Notes | PYQs | Research Material
🎓 NET/JRF • SET • Assistant Professor • Competitive Exam
@RamsingRajput786 https://t.me/HistoryChatAdda
Download Telegram
202602042106560782.pdf
4.9 KB
202602042106560782.pdf
प्रिय दोस्तों,
ugc net इतिहास की अंतिम उत्तर कुंजी...✅✅💗🌺✌💐

रिजल्ट के लिए थोड़ा इंतजार करे...✅✅
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤3👍2🔥1
nta ने पोछा मार दिया😂😂✅
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
🤣13❤3😁2👍1
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
देर ना हो जाये कही देर ना हो जाये 😁
🤷8🤷‍♀5🤣4💯3
Same as provisional ek bhi answer change nhi he
👍6😢3❤1
खून पीने वाले पुर्तगाली –सीलोन के दृष्टा का उल्लेख 📖✍️
https://t.me/historyfact00
👍1🔥1
प्रिय दोस्तों,
ugc net इंडियन कल्चर और archaeology की अंतिम उत्तर कुंजी...✅✅

इन दोनो मै कुछ प्रश्न डिलीट हुए है,


लेकिन इतिहास का एक भी डिलीट नहीं हुवा...🌸✨
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤6👍2
❤6
https://t.me/+nqCH8jHzE905OGRl

NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।

Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
गांधी जी का पहला जेल अनुभव 1908 में हुआ। जेल के नियम उन्हें ब्रह्मचारी और आत्मसंयमी जीवन के अनुकूल लगे।
नियम थे—
सूर्यास्त से पहले अंतिम भोजन
चाय-कॉफी का निषेध
भोजन में केवल आवश्यकता अनुसार नमक, स्वाद के लिए नहीं
जेल से छूटने के बाद गांधी जी ने ये नियम स्वेच्छा से अपने जीवन में अपना लिए, क्योंकि आत्म-लगाया गया संयम अधिक प्रभावी होता है।
बाद में उन्होंने पूरी तरह नमक छोड़ने का प्रयोग किया और इसे कई वर्षों तक निभाया।
गांधी जी का विश्वास था कि ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम के लिए सरल व संयमित आहार आवश्यक है।
इसी दौरान कस्तूरबा गांधी बीमार पड़ीं और उनके इलाज के प्रयास सफल नहीं हो रहे थे।
गांधी जी ने कस्तूरबा से नमक और दाल छोड़ने का आग्रह किया, पर वे सहमत नहीं हुईं।
तब गांधी जी ने किसी पर दबाव न डालते हुए स्वयं एक वर्ष तक नमक और दाल छोड़ने का व्रत लिया।
कस्तूरबा इस त्याग से भावुक हो गईं और गांधी जी के प्रेम व दृढ़ता को समझ सकीं।
गांधी जी ने इस पूरे प्रसंग को “सत्याग्रह का एक शुद्ध और घरेलू रूप” कहा।
गांधी जी ने इस घटना को अपने जीवन की सबसे मधुर स्मृतियों में से एक बताया।
https://t.me/historyfact00
👏2❤1
https://cnr.nic.in/Results26/Score/Login?apprefno=101052512


ओपन हो रहा है लेकिन रिजल्ट शो नहीं हो रहा,
❤3
💯2