1) Candidates qualified for JRF & Assistant professor - 5,108
2) Candidates qualified for Assistant professor and PHD - 54,713
3) Candidates qualified only for PHD - 1,17,058
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मुझे कुछ संदेह हो रहा है कुछ लोग फर्जी का भेज कर लोगों को डायवर्ट कर रहे हैं
😁9👍3😢1
No Document No History
मुझे कुछ संदेह हो रहा है कुछ लोग फर्जी का भेज कर लोगों को डायवर्ट कर रहे हैं
महेश कुमार का रिजल्ट रियल है ।
👍4🤔1
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
बोस, “भारतीय भूमि पर बहने वाली पहली रक्त-बूंद आई.एन.ए. के किसी सदस्य की होनी चाहिए।”
ब्रिटिश 14वीं सेना के फील्ड मार्शल विलियम जोसेफ स्लिम (1891–1970) ने मार्च 1944 के मध्य में जापानी सेना द्वारा इंफाल और कोहिमा पर आक्रमण की आशंका व्यक्त की थी।
अप्रैल 1944 की शुरुआत में, आई.एन.ए. की गांधी ब्रिगेड, जनवरी में अपनाए गए उसी मार्ग से आगे बढ़ते हुए, कोहिमा और इंफाल की ओर मार्च कर रही थी ताकि वह प्रथम आई.एन.ए. टुकड़ी सुभाष ब्रिगेड से जुड़ सके।
पालेल, जो इंफाल से लगभग 20 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है, पहुँचने पर उन्हें पता चला कि इंफाल अब तक नहीं गिरा था|
सितंबर 1944 में, बोस ने अंततः अपनी सेनाओं को पीछे हटने का आदेश दिया। उस समय तक INA का लगभग हर जीवित पुरुष सैनिक मलेरिया से संक्रमित हो चुका था।
कोहिमा और इंफाल के रास्ते भारत पर आक्रमण की योजना को छोड़ दिए जाने के बाद, युद्ध के शेष वर्ष में INA भारी हानि और अनेक पलायनों (डेज़र्शन) के साथ बर्मा के रास्ते दक्षिण की ओर पीछे हटती रही।
सुभाष चंद्र बोस का भारत को जीतने का स्वप्न एक भयानक आपदा में बदल चुका था। 📖📚🔖
https://t.me/historyfact00
ब्रिटिश 14वीं सेना के फील्ड मार्शल विलियम जोसेफ स्लिम (1891–1970) ने मार्च 1944 के मध्य में जापानी सेना द्वारा इंफाल और कोहिमा पर आक्रमण की आशंका व्यक्त की थी।
अप्रैल 1944 की शुरुआत में, आई.एन.ए. की गांधी ब्रिगेड, जनवरी में अपनाए गए उसी मार्ग से आगे बढ़ते हुए, कोहिमा और इंफाल की ओर मार्च कर रही थी ताकि वह प्रथम आई.एन.ए. टुकड़ी सुभाष ब्रिगेड से जुड़ सके।
पालेल, जो इंफाल से लगभग 20 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है, पहुँचने पर उन्हें पता चला कि इंफाल अब तक नहीं गिरा था|
सितंबर 1944 में, बोस ने अंततः अपनी सेनाओं को पीछे हटने का आदेश दिया। उस समय तक INA का लगभग हर जीवित पुरुष सैनिक मलेरिया से संक्रमित हो चुका था।
कोहिमा और इंफाल के रास्ते भारत पर आक्रमण की योजना को छोड़ दिए जाने के बाद, युद्ध के शेष वर्ष में INA भारी हानि और अनेक पलायनों (डेज़र्शन) के साथ बर्मा के रास्ते दक्षिण की ओर पीछे हटती रही।
सुभाष चंद्र बोस का भारत को जीतने का स्वप्न एक भयानक आपदा में बदल चुका था। 📖📚🔖
https://t.me/historyfact00
❤2🔥1
No Document No History
मुझे कुछ संदेह हो रहा है कुछ लोग फर्जी का भेज कर लोगों को डायवर्ट कर रहे हैं
qr को गूगल लेंस या किसी पे स्कैनर से स्कैन करके रजिस्ट्रेशन नंबर देख सकते हो जो एडमिट कार्ड से बखूबी मैच करेगा।
Forwarded from Commerce Net Achievers
😍😍😍 And Here We Start As Always.
परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन..
परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन..
🔥6
हम खाना बनाने लग गये थे,
अब देखा तो site नहीं चल रहा है,
चिंता न करे मित्रों,
1 घंटे बाद चालू हो जायेगा✅ ✅ ✅ ✨ ✌ 🌸 💐
अब देखा तो site नहीं चल रहा है,
चिंता न करे मित्रों,
1 घंटे बाद चालू हो जायेगा
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😁8❤2🤣1
और परिणाम सकारात्मक ना आये फिर बहुत दर्द होता
लेकिन कोई बात नहीं
मन के हारे हार मन के जीते जीत 👍
लेकिन कोई बात नहीं
मन के हारे हार मन के जीते जीत 👍
😁2
परीक्षा हो या कोई और खेल,
रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं।
चाहे कुछ दिन में टूटे या फिर सालों में,
रिकॉर्ड्स का टूटना तय माना जाता है।✅
कट ऑफ ज्यादा जाने के अनेक कारण है,
✅ ✅ ✅
रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं।
चाहे कुछ दिन में टूटे या फिर सालों में,
रिकॉर्ड्स का टूटना तय माना जाता है।
कट ऑफ ज्यादा जाने के अनेक कारण है,
हमको तो dec 2014 का कट ऑफ याद आ गया,🙈
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👍10❤4💯1
Nta ने सम्राट अशोक की उपाधि प्रियदर्शी नहीं मानी तो,
भुक्ति और एस के धर का क्या उम्मीद करेंगे,
भुक्ति और मंडल दोनो उत्तर सही दे सकते थे,
धर वाला तो सीधा डिलीट होना था, (इंग्लिश मै भी मिस्टेक थी)
लेकिन nta को कोई फर्क नहीं पड़ता...✅ ✅
भुक्ति और एस के धर का क्या उम्मीद करेंगे,
भुक्ति और मंडल दोनो उत्तर सही दे सकते थे,
धर वाला तो सीधा डिलीट होना था, (इंग्लिश मै भी मिस्टेक थी)
लेकिन nta को कोई फर्क नहीं पड़ता...
इतिहास वालो का बड़ा नसीब खराब है😔☺️
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👍3❤2💯2👏1🤔1
मैं पूर्णता की खोज में
दर-दर भटकता ही रहा,
प्रत्येक पग पर कुछ-न-कुछ
रोड़ा अटकता ही रहा
निराशा क्यों भला हो मुझे ?
जीवन इसी का नाम है,
चलना हमारा काम है।।
जून जेआरएफ पार 2026
~शिव मंगल सिंह ‘सुमन’
दर-दर भटकता ही रहा,
प्रत्येक पग पर कुछ-न-कुछ
रोड़ा अटकता ही रहा
निराशा क्यों भला हो मुझे ?
जीवन इसी का नाम है,
चलना हमारा काम है।।
जून जेआरएफ पार 2026
~शिव मंगल सिंह ‘सुमन’
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
रुकावटें रास्ते का हिस्सा हैं, हिम्मत मंज़िल की पहचान है।✨ ✅
"रुकावटें रास्ते में बहुत आएँगी, डर भी लगेगा और निराशा भी होगी।
लेकिन यही जीवन का रास्ता है।
सच में कुछ बनना है, तो हिम्मत दिखानी ही होगी।"
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❤9👍3💯2
202602041762035910.PDF
275.6 KB
कट ऑफ 26 ✅ ✅
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❤3