Forwarded from Pooja Pandey
सैनिकों को वेतन दिलाने की प्रशासनिक ज़िम्मेदारी = वज़ीर
👉 सैनिकों की भर्ती, रिकॉर्ड और निरीक्षण = आरिज-ए-मुमालिक
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No Document No History
इतिहास के प्रश्न भेजिए..
ठीक है थोडी देर मे भेजते हैं
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NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़े और क्विज एटेम्पट करे।
Daily 2 क्विज।
Timing
2PM
8PM
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
गांधी–स्मटस समझौता 1914 और इंडियन रिलीफ एक्ट–
1. पृष्ठभूमि– गांधी 1893 से दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।ट्रांसवाल और नेटाल में भारतीयों पर कई भेदभावपूर्ण कानून लागू थे
1906 से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया लंबे संघर्ष,जेल यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सरकार वार्ता को तैयार हुई
2. गांधी–स्मटस समझौता
यह समझौता गांधी और दक्षिण अफ्रीका के गृह मंत्री जनरल जान क्रिश्चियन स्मटस के बीच हुआ यह समझौता भारतीय सत्याग्रहियों की जीत माना जाता है समझौते के बाद भारतीयों का आंदोलन स्थगित कर दिया गया
3. समझौते की मुख्य शर्तें
भारतीयों पर लगाया गया £3 का अपमानजनक कर समाप्त किया गया भारतीय विवाहों को कानूनी मान्यता दी गई पहले से पंजीकृत भारतीयों को नए पंजीकरण प्रमाण-पत्र लेने की बाध्यता समाप्त की गई भारतीयों को अवैध प्रवासी मानकर प्रताड़ित करने की नीति में ढील दी गई
4. इंडियन रिलीफ एक्ट 1914
गांधी–स्मटस समझौते को लागू करने के लिए 1914 में इंडियन रिलीफ एक्ट पारित किया गया इसे दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संघर्ष की सबसे बड़ी कानूनी सफलता माना जाता है
https://t.me/historyfact00
1. पृष्ठभूमि– गांधी 1893 से दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।ट्रांसवाल और नेटाल में भारतीयों पर कई भेदभावपूर्ण कानून लागू थे
1906 से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया लंबे संघर्ष,जेल यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सरकार वार्ता को तैयार हुई
2. गांधी–स्मटस समझौता
यह समझौता गांधी और दक्षिण अफ्रीका के गृह मंत्री जनरल जान क्रिश्चियन स्मटस के बीच हुआ यह समझौता भारतीय सत्याग्रहियों की जीत माना जाता है समझौते के बाद भारतीयों का आंदोलन स्थगित कर दिया गया
3. समझौते की मुख्य शर्तें
भारतीयों पर लगाया गया £3 का अपमानजनक कर समाप्त किया गया भारतीय विवाहों को कानूनी मान्यता दी गई पहले से पंजीकृत भारतीयों को नए पंजीकरण प्रमाण-पत्र लेने की बाध्यता समाप्त की गई भारतीयों को अवैध प्रवासी मानकर प्रताड़ित करने की नीति में ढील दी गई
4. इंडियन रिलीफ एक्ट 1914
गांधी–स्मटस समझौते को लागू करने के लिए 1914 में इंडियन रिलीफ एक्ट पारित किया गया इसे दक्षिण अफ्रीका में भारतीय संघर्ष की सबसे बड़ी कानूनी सफलता माना जाता है
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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1. 1893 – दक्षिण अफ्रीका आगमन
गांधी जी एक भारतीय व्यापारी दादा अब्दुल्ला के मुकदमे के लिए वकील बनकर नेटाल (Natal) पहुँचे।
यहीं उन्हें नस्लीय भेदभाव का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ।
2. 1893 – पीटरमैरिट्ज़बर्ग घटना
प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।
यही घटना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी।
3. 1894 – नेटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना
भारतीयों के अधिकारों की रक्षा हेतु Natal Indian Congress (NIC) बनाई।
भारतीयों को संगठित करने का पहला बड़ा प्रयास।
4. 1896–1897 – भारत यात्रा और पुनः अफ्रीका वापसी
भारत आकर दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की स्थिति बताई।
वापस लौटने पर डरबन में उन पर हमला हुआ, फिर भी उन्होंने क्षमा का मार्ग चुना।
5. 1899–1902 – बोअर युद्ध में सेवा
ब्रिटिश सरकार की सहायता के लिए इंडियन एम्बुलेंस कॉर्प्स बनाया।
यह दिखाया कि भारतीय जिम्मेदार नागरिक हैं।
6. 1903 – ‘Indian Opinion’ पत्र का प्रकाशन
भारतीयों की समस्याओं को उजागर करने के लिए अख़बार शुरू किया।
सत्य, अधिकार और जागरूकता का माध्यम बना।
7. 1904 – फीनिक्स आश्रम की स्थापना
सामूहिक जीवन, सादगी और श्रम का प्रयोग।
सत्याग्रह की वैचारिक नींव यहीं मजबूत हुई।
8. 1906 – सत्याग्रह का प्रारंभ
ट्रांसवाल सरकार के एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट (ब्लैक एक्ट) के विरोध में।
पहली बार सत्याग्रह शब्द और प्रयोग सामने आया।
9. 1908–1909 – जेल यात्राएँ
कानून तोड़ने के कारण कई बार जेल गए।
आंदोलन को नैतिक बल मिला।
10. 1910 – टॉल्सटॉय फार्म की स्थापना
सत्याग्रहियों के प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर जीवन के लिए।
नैतिक अनुशासन का केंद्र।
11. 1913 – महिला और श्रमिक सत्याग्रह
भारतीय महिलाओं की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन।
खदान मजदूरों को भी आंदोलन से जोड़ा।
12. 1914 – स्मट्स–गांधी समझौता
सरकार ने कई भेदभावपूर्ण कानून वापस लिए।
सत्याग्रह की पहली बड़ी जीत।
13. 1914 – भारत वापसी
21 वर्षों के संघर्ष के बाद भारत लौटे।
दक्षिण अफ्रीका उनका राजनीतिक प्रयोगशाला बना।
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गांधी जी एक भारतीय व्यापारी दादा अब्दुल्ला के मुकदमे के लिए वकील बनकर नेटाल (Natal) पहुँचे।
यहीं उन्हें नस्लीय भेदभाव का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ।
2. 1893 – पीटरमैरिट्ज़बर्ग घटना
प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।
यही घटना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी।
3. 1894 – नेटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना
भारतीयों के अधिकारों की रक्षा हेतु Natal Indian Congress (NIC) बनाई।
भारतीयों को संगठित करने का पहला बड़ा प्रयास।
4. 1896–1897 – भारत यात्रा और पुनः अफ्रीका वापसी
भारत आकर दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की स्थिति बताई।
वापस लौटने पर डरबन में उन पर हमला हुआ, फिर भी उन्होंने क्षमा का मार्ग चुना।
5. 1899–1902 – बोअर युद्ध में सेवा
ब्रिटिश सरकार की सहायता के लिए इंडियन एम्बुलेंस कॉर्प्स बनाया।
यह दिखाया कि भारतीय जिम्मेदार नागरिक हैं।
6. 1903 – ‘Indian Opinion’ पत्र का प्रकाशन
भारतीयों की समस्याओं को उजागर करने के लिए अख़बार शुरू किया।
सत्य, अधिकार और जागरूकता का माध्यम बना।
7. 1904 – फीनिक्स आश्रम की स्थापना
सामूहिक जीवन, सादगी और श्रम का प्रयोग।
सत्याग्रह की वैचारिक नींव यहीं मजबूत हुई।
8. 1906 – सत्याग्रह का प्रारंभ
ट्रांसवाल सरकार के एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट (ब्लैक एक्ट) के विरोध में।
पहली बार सत्याग्रह शब्द और प्रयोग सामने आया।
9. 1908–1909 – जेल यात्राएँ
कानून तोड़ने के कारण कई बार जेल गए।
आंदोलन को नैतिक बल मिला।
10. 1910 – टॉल्सटॉय फार्म की स्थापना
सत्याग्रहियों के प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर जीवन के लिए।
नैतिक अनुशासन का केंद्र।
11. 1913 – महिला और श्रमिक सत्याग्रह
भारतीय महिलाओं की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन।
खदान मजदूरों को भी आंदोलन से जोड़ा।
12. 1914 – स्मट्स–गांधी समझौता
सरकार ने कई भेदभावपूर्ण कानून वापस लिए।
सत्याग्रह की पहली बड़ी जीत।
13. 1914 – भारत वापसी
21 वर्षों के संघर्ष के बाद भारत लौटे।
दक्षिण अफ्रीका उनका राजनीतिक प्रयोगशाला बना।
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चर्चा का विषय – कांग्रेस के अधिवेशन 1900–1920
समय –11:30 PM 📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
"मैं एक योद्धा था, एक और युद्ध, अंतिम और बेहतरीन"
रास बहारी बोस का जीवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी बलिदान और रणनीतिक धैर्य की भावना का प्रतीक है, जो प्रारंभिक सशस्त्र प्रतिरोध को लगातार संगठनात्मक प्रयासों से जोड़ता है। उनकी मृत्यु टोक्यो में 21 जनवरी, 1945 को हुई 📖✍️
कभी कभी जीवन में वैसा नहीं होता जैसे हमने सोचा होता है, कभी कभी ऐसी परिस्थितियां भी बन जाती है जो हमारे अनुकूल न हो।
हर कोई अपने जीवन में एक आंतरिक और बाहरी जंग लड़ रहा है लेकिन हार न माने, कभी तो सब अच्छा हो जाएगा 📖✍️
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रास बहारी बोस का जीवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी बलिदान और रणनीतिक धैर्य की भावना का प्रतीक है, जो प्रारंभिक सशस्त्र प्रतिरोध को लगातार संगठनात्मक प्रयासों से जोड़ता है। उनकी मृत्यु टोक्यो में 21 जनवरी, 1945 को हुई 📖✍️
कभी कभी जीवन में वैसा नहीं होता जैसे हमने सोचा होता है, कभी कभी ऐसी परिस्थितियां भी बन जाती है जो हमारे अनुकूल न हो।
हर कोई अपने जीवन में एक आंतरिक और बाहरी जंग लड़ रहा है लेकिन हार न माने, कभी तो सब अच्छा हो जाएगा 📖✍️
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No Document No History
EMRS मुख्य परीक्षा 2, 3 एवं 8 मार्च को आयोजित होगी... https://t.me/Ramsing2023 https://t.me/+s_pFPHC3MKM2OGI1
EMRS TIER 2 OFFICIAL UPDATE
This is to notify that fake information is being circulated regarding Tier 2 exam dates of ESSE 2025. Dates of Tier 2 exam have not been notified so far. All the short-listed candidates of Tier 2 are requested to refer to the website of NESTS only, for authentic information.
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📌 सावरकर और विठ्ठल मंदिर (1924) –
तिथि: 17 अप्रैल 1924
• घटना: सावरकर ने समाज सुधार से जुड़े अपने प्रयोगों की शुरुआत की।
• स्थान: परशुराम गाँव का विठ्ठल मंदिर
• यह चितपावन ब्राह्मणों का सबसे पवित्र स्थल माना जाता था।
• यह पेशवा बाजीराव प्रथम का प्रेरणा-स्थल था।
• मंदिर की स्थापना सावरकर के आध्यात्मिक गुरु ब्रह्मेन्द्र स्वामी ने की थी।
🔹 सावरकर का भाषण
• रिहाई के बाद सावरकर का पहला प्रमुख भाषण यहीं हुआ।
• भाषण का स्वरूप आध्यात्मिक + राजनीतिक था।
• प्रमुख विषय:
• शुद्धिकरण अभियान
• अस्पृश्योद्धार (अस्पृश्यों का उत्थान)
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तिथि: 17 अप्रैल 1924
• घटना: सावरकर ने समाज सुधार से जुड़े अपने प्रयोगों की शुरुआत की।
• स्थान: परशुराम गाँव का विठ्ठल मंदिर
• यह चितपावन ब्राह्मणों का सबसे पवित्र स्थल माना जाता था।
• यह पेशवा बाजीराव प्रथम का प्रेरणा-स्थल था।
• मंदिर की स्थापना सावरकर के आध्यात्मिक गुरु ब्रह्मेन्द्र स्वामी ने की थी।
🔹 सावरकर का भाषण
• रिहाई के बाद सावरकर का पहला प्रमुख भाषण यहीं हुआ।
• भाषण का स्वरूप आध्यात्मिक + राजनीतिक था।
• प्रमुख विषय:
• शुद्धिकरण अभियान
• अस्पृश्योद्धार (अस्पृश्यों का उत्थान)
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Forwarded from इतिहास ज्ञान गंगा (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
ठक्कर फेरु
अलाद्दीन खिलजी का हिन्दू टकसाल अधिकारी ठक्कर फेरू था। वह गियासुद्दीन तुगलक तक दिल्ली टकसाल अधिकारी पद पर बना रहा। उसने अपभ्रंश में 'द्रव्य परीक्षा' (1318 ई.) नामक पुस्तक लेखन किया। इस ग्रन्थ के 4 अध्यायों में 149 गाथाएँ संकलित है। इसके 'मुद्रा प्रकरण' में तात्कालीन 'रौप्य मुद्रा', 'स्वर्ण मुद्रा', 'त्रिधातु मिश्रित मुद्रा', 'द्वितीय धातु मुद्रा', 'खुरासानी मुद्रा', 'अठनारी मुद्रा', 'रिणी मुद्रा' (चुरू), 'गूर्जरी मुद्रा', 'मालवी मुद्रा', 'जालंधरी मुद्रा' और 'दिल्ली मुद्रा' में पहले तोमर राजाओं की और बाद में 55 प्रकार की तात्कालीन मुसलमानी मुद्राओं का स्वरूप वर्णन है।
ठक्कर फेरू जैन श्रीमाल वंश के धाधिया गोत्रीय श्री कालिय के पुत्र चंद के पुत्र थे। ये मूलतः कन्नाणा (हरियाणा) निवासी थे। शाही खजाने के रत्नों के आधार पर उन्होंने रत्न परीक्षा नामक प्राकृत ग्रन्थ की रचना की। गणितसार कौमुदी, गणितसार, युग प्रधान चतुष्पदिका, वास्तुसार, ज्योतिषसार, धातूत्पत्ति व भूगर्भ शास्त्र भी उनकी अन्य रचनाएँ है।
https://t.me/+bqS2kyNkG6I4ZWVl
अलाद्दीन खिलजी का हिन्दू टकसाल अधिकारी ठक्कर फेरू था। वह गियासुद्दीन तुगलक तक दिल्ली टकसाल अधिकारी पद पर बना रहा। उसने अपभ्रंश में 'द्रव्य परीक्षा' (1318 ई.) नामक पुस्तक लेखन किया। इस ग्रन्थ के 4 अध्यायों में 149 गाथाएँ संकलित है। इसके 'मुद्रा प्रकरण' में तात्कालीन 'रौप्य मुद्रा', 'स्वर्ण मुद्रा', 'त्रिधातु मिश्रित मुद्रा', 'द्वितीय धातु मुद्रा', 'खुरासानी मुद्रा', 'अठनारी मुद्रा', 'रिणी मुद्रा' (चुरू), 'गूर्जरी मुद्रा', 'मालवी मुद्रा', 'जालंधरी मुद्रा' और 'दिल्ली मुद्रा' में पहले तोमर राजाओं की और बाद में 55 प्रकार की तात्कालीन मुसलमानी मुद्राओं का स्वरूप वर्णन है।
ठक्कर फेरू जैन श्रीमाल वंश के धाधिया गोत्रीय श्री कालिय के पुत्र चंद के पुत्र थे। ये मूलतः कन्नाणा (हरियाणा) निवासी थे। शाही खजाने के रत्नों के आधार पर उन्होंने रत्न परीक्षा नामक प्राकृत ग्रन्थ की रचना की। गणितसार कौमुदी, गणितसार, युग प्रधान चतुष्पदिका, वास्तुसार, ज्योतिषसार, धातूत्पत्ति व भूगर्भ शास्त्र भी उनकी अन्य रचनाएँ है।
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UGC NET. इतिहास
इतिहास की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें (UGC NET/ PGT/TGT)
💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
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💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
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