Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
Hindu mahasabha found 1907,
Hindu mahasabha conference 1909।
Source – history of hindu mahasabha (haridwar)
Hindu mahasabha conference 1909।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
Hindu mahasabha punjab also known as hindu assembly conference found 1907.
Source – Vijayakumar pujari।
Congress league hindu mahasabha 📖✍️
Source – Vijayakumar pujari।
Congress league hindu mahasabha 📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
रंगीला रसूल 1927 में प्रकाशित पुस्तक है जो लाहौर के महाशय राजपाल ने प्रकाशित की थी। इसके लेखक 'चामुपति एम ए' या किशन प्रसाद प्रताब नामक आर्यसमाजी थे किन्तु लेखक का नाम प्रकाशन ने कभी नहीं बताया। यह पुस्तक बहुत विवादास्पद सिद्ध हुई। इसमें पैगम्बर मुहम्मद के विवाह एवं गृहस्थ जीवन का सही अर्थो मे वर्णन किया गया है। यह पुस्तक मूलतः उर्दू में छपी थी किन्तु बाद में इसका हिन्दी संस्करण भी प्रकाशित हुआ। यह पुस्तक आज तक भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रतिबन्धित है।📖✍️
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Forwarded from Abhishek Lakhera
अविरल गंगा रक्षा समझौता (अबाधित गंगा प्रवाह समझौता)
पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा शुरू किया गया एक ऐतिहासिक 1916 का समझौता है,
जिसने यह स्थापित किया कि गंगा का निर्बाध प्रवाह, विशेष रूप से हरिद्वार में, हिंदुओं का मौलिक अधिकार है और इसने ब्रिटिश सरकार को नदी पर बांध बनाने से रोका।
समझौते के मुख्य विवरण:
पृष्ठभूमि: 1916 में, ब्रिटिश अधिकारियों ने हरिद्वार में एक बांध बनाने का इरादा किया था जो गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को रोक देता।
पहलकर्ता: पंडित मदन मोहन मालवीय, जिन्होंने 1905 में गंगा महासभा की स्थापना की थी, ने विरोध का नेतृत्व किया और समझौता हासिल किया।
महत्व: इसे गंगा संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है, जो कानूनी रूप से नदी की पवित्रता और प्राकृतिक प्रवाह को मान्यता देता है।
कानूनी स्थिति: हालांकि इस समझौते पर 1916 में हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इसकी कानूनी वैधता के बावजूद, यह चिंता का विषय है कि आधुनिक सरकारी कार्रवाइयों द्वारा इस समझौते की भावना को पर्याप्त रूप से बनाए नहीं रखा गया है।
इस समझौते ने गंगा की प्राकृतिक, निरंतर और आध्यात्मिक अखंडता की सुरक्षा सुनिश्चित की, विशेष रूप से हरिद्वार में हर-की-पौड़ी पर।
पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा शुरू किया गया एक ऐतिहासिक 1916 का समझौता है,
जिसने यह स्थापित किया कि गंगा का निर्बाध प्रवाह, विशेष रूप से हरिद्वार में, हिंदुओं का मौलिक अधिकार है और इसने ब्रिटिश सरकार को नदी पर बांध बनाने से रोका।
समझौते के मुख्य विवरण:
पृष्ठभूमि: 1916 में, ब्रिटिश अधिकारियों ने हरिद्वार में एक बांध बनाने का इरादा किया था जो गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को रोक देता।
पहलकर्ता: पंडित मदन मोहन मालवीय, जिन्होंने 1905 में गंगा महासभा की स्थापना की थी, ने विरोध का नेतृत्व किया और समझौता हासिल किया।
महत्व: इसे गंगा संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है, जो कानूनी रूप से नदी की पवित्रता और प्राकृतिक प्रवाह को मान्यता देता है।
कानूनी स्थिति: हालांकि इस समझौते पर 1916 में हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इसकी कानूनी वैधता के बावजूद, यह चिंता का विषय है कि आधुनिक सरकारी कार्रवाइयों द्वारा इस समझौते की भावना को पर्याप्त रूप से बनाए नहीं रखा गया है।
इस समझौते ने गंगा की प्राकृतिक, निरंतर और आध्यात्मिक अखंडता की सुरक्षा सुनिश्चित की, विशेष रूप से हरिद्वार में हर-की-पौड़ी पर।
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जो आपके साथ बुरे हैं
उनके साथ ना अच्छे रहो।।
ना बुरे...
सिर्फ उनसे दूर रहो,✅ ✅ 🚶♂ 🚶♂ 🚶♂
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Jab se story fri huyi hai jisko nhi lagane aata tha vo bhi laga rahi hai 😂😂
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No Document No History
Jab se story fri huyi hai jisko nhi lagane aata tha vo bhi laga rahi hai 😂😂
सिर्फ़ एक स्टोरी लगा सकते है,
और 24 घंटे शो होगी✅
प्रीमियम वाले 100 स्टोरी लगा सकता है और 48 घंटे तक नजर आएगा,
सबको शुभकामनाएं
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Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖)
🎯 NCERT History सार (Class 7): नए राजा और उनके राज्य
(7वीं से 12वीं शताब्दी)
📌 महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Exam Key Points):
दक्कन के राष्ट्रकूट (जो पहले चालुक्यों के सामंत थे) के प्रधान दन्तिदुर्ग ने अपने स्वामी को हराकर यह अनुष्ठान किया और खुद को क्षत्रिय राजा घोषित किया।
कन्नौज (गंगा घाटी) पर नियंत्रण के लिए तीन राजवंशों के बीच सदियों तक युद्ध चला:
1. गुर्जर-प्रतिहार
2. राष्ट्रकूट
3. पाल वंश
☉ उर (Ur): किसानों की बस्तियाँ।
☉ नाडु (Nadu): गाँवों का समूह (न्याय और कर वसूलने का काम करते थे)।
☉ नगरम्: व्यापारियों के संघ का नाम।
☉ तंजौर और गंगईकोंडचोलपुरम: राजराज और राजेंद्र प्रथम द्वारा बनवाए गए विशाल मंदिर।
☉ वेल्लनवगाई: गैर-ब्राह्मण किसान स्वामी की भूमि।
☉ ब्रह्मदेय: ब्राह्मणों को उपहार में दी गई भूमि।
☉ शालभोग: किसी विद्यालय के रखरखाव के लिए भूमि।
☉ देवदान/तिरुन्मट्टक्कनी: मंदिरों को उपहार में दी गई भूमि।
इसने भारत पर 17 बार आक्रमण किए। मुख्य निशाना संपन्न मंदिर थे (जैसे: गुजरात का सोमनाथ)। इसके साथ आए विद्वान अल-बरूनी ने 'किताब-अल-हिंद' लिखी।
चाहमान (चौहान) वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक।
☉1191: तराइन के पहले युद्ध में मुहम्मद गौरी को हराया।
☉ 1192: तराइन के दूसरे युद्ध में गौरी से हार गए।
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(7वीं से 12वीं शताब्दी)
📌 महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Exam Key Points):
🔹 1. हिरण्यगर्भ (सोने का गर्भ):
दक्कन के राष्ट्रकूट (जो पहले चालुक्यों के सामंत थे) के प्रधान दन्तिदुर्ग ने अपने स्वामी को हराकर यह अनुष्ठान किया और खुद को क्षत्रिय राजा घोषित किया।
🔹 2. त्रिपक्षीय संघर्ष (Tripartite Struggle):
कन्नौज (गंगा घाटी) पर नियंत्रण के लिए तीन राजवंशों के बीच सदियों तक युद्ध चला:
1. गुर्जर-प्रतिहार
2. राष्ट्रकूट
3. पाल वंश
🔹 3. चोल साम्राज्य और प्रशासन:
☉ उर (Ur): किसानों की बस्तियाँ।
☉ नाडु (Nadu): गाँवों का समूह (न्याय और कर वसूलने का काम करते थे)।
☉ नगरम्: व्यापारियों के संघ का नाम।
☉ तंजौर और गंगईकोंडचोलपुरम: राजराज और राजेंद्र प्रथम द्वारा बनवाए गए विशाल मंदिर।
🔹 4. भूमि के प्रकार (चोल अभिलेखों के अनुसार):
☉ वेल्लनवगाई: गैर-ब्राह्मण किसान स्वामी की भूमि।
☉ ब्रह्मदेय: ब्राह्मणों को उपहार में दी गई भूमि।
☉ शालभोग: किसी विद्यालय के रखरखाव के लिए भूमि।
☉ देवदान/तिरुन्मट्टक्कनी: मंदिरों को उपहार में दी गई भूमि।
🔹 5. महमूद गज़नवी (अफगानिस्तान):
इसने भारत पर 17 बार आक्रमण किए। मुख्य निशाना संपन्न मंदिर थे (जैसे: गुजरात का सोमनाथ)। इसके साथ आए विद्वान अल-बरूनी ने 'किताब-अल-हिंद' लिखी।
🔹 6. पृथ्वीराज तृतीय (1168-1192):
चाहमान (चौहान) वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक।
☉1191: तराइन के पहले युद्ध में मुहम्मद गौरी को हराया।
☉ 1192: तराइन के दूसरे युद्ध में गौरी से हार गए।
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