Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
पहली बार संविधान का दर्शन
पहली बार संविधान का दर्शन तिलक के स्वराज विधेयक में हुआ।(1895)
Forwarded from ITIHAS_JUNCTION (♖𝐃𝐞𝐬𝐡𝐛𝐡𝐚𝐤𝐭♖)
ITIHAS_JUNCTION
Photo
🚩 महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी की 202वीं जयंती पर नमन 🚩
आज 12 फरवरी, 2026 को महान समाज सुधारक, दार्शनिक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 202वीं जन्म जयंती है।
📝 संक्षिप्त परिचय (Exam Key Points):
🔹 मूल नाम: मूलशंकर तिवारी
🔹 जन्म: 12 फरवरी, 1824 (टंकारा, गुजरात)
🔹 संस्था: आर्य समाज (स्थापना: 1875, मुंबई)
🔹 प्रसिद्ध नारा: "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas)
🔹 प्रमुख कृति: सत्यार्थ प्रकाश
💡 राष्ट्र और समाज को अमूल्य योगदान:
1️⃣ सामाजिक सुधार:
उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह, सती प्रथा और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। वे महिला शिक्षा और विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे।
2️⃣ स्वराज के प्रथम प्रणेता:
इतिहास में यह दर्ज है कि सबसे पहले 'स्वराज' शब्द का उपयोग स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने ही किया था। इसी विचार को बाद में लोकमान्य तिलक और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने आगे बढ़ाया।
3️⃣ वेदों का ज्ञान:
उनका मानना था कि भारत की सभी समस्याओं का समाधान वेदों में निहित है। उन्होंने अज्ञानता को दूर करने और वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
📌 निष्कर्ष:
स्वामी जी के विचार 19वीं सदी में जितने प्रभावशाली थे, आज 21वीं सदी में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी पुस्तक 'सत्यार्थ प्रकाश' आज भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक प्रमुख मार्गदर्शिका है।
आइये, हम उनके आदर्शों को अपनाकर एक उन्नत समाज का निर्माण करें।
✍️ @Itihaas_Junction
आज 12 फरवरी, 2026 को महान समाज सुधारक, दार्शनिक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 202वीं जन्म जयंती है।
📝 संक्षिप्त परिचय (Exam Key Points):
🔹 मूल नाम: मूलशंकर तिवारी
🔹 जन्म: 12 फरवरी, 1824 (टंकारा, गुजरात)
🔹 संस्था: आर्य समाज (स्थापना: 1875, मुंबई)
🔹 प्रसिद्ध नारा: "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas)
🔹 प्रमुख कृति: सत्यार्थ प्रकाश
💡 राष्ट्र और समाज को अमूल्य योगदान:
1️⃣ सामाजिक सुधार:
उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह, सती प्रथा और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। वे महिला शिक्षा और विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे।
2️⃣ स्वराज के प्रथम प्रणेता:
इतिहास में यह दर्ज है कि सबसे पहले 'स्वराज' शब्द का उपयोग स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने ही किया था। इसी विचार को बाद में लोकमान्य तिलक और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने आगे बढ़ाया।
3️⃣ वेदों का ज्ञान:
उनका मानना था कि भारत की सभी समस्याओं का समाधान वेदों में निहित है। उन्होंने अज्ञानता को दूर करने और वैदिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
📌 निष्कर्ष:
स्वामी जी के विचार 19वीं सदी में जितने प्रभावशाली थे, आज 21वीं सदी में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी पुस्तक 'सत्यार्थ प्रकाश' आज भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक प्रमुख मार्गदर्शिका है।
आइये, हम उनके आदर्शों को अपनाकर एक उन्नत समाज का निर्माण करें।
✍️ @Itihaas_Junction
❤3
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
1857 का विद्रोह चर्बी लगे कारतूसों के विरोध से आरम्भ हुआ, जो मेरठ से फैलकर दिल्ली, अवध, मध्य भारत और बिहार तक पहुँच गया। इसमें सैनिकों के साथ-साथ असैनिक जनता ने भी भाग लिया। 1858 तक अंग्रेज़ों ने एक-एक क्षेत्र पर पुनः अधिकार कर लिया और अंततः पूरे भारत में अपनी सत्ता पुनः स्थापित कर ली।
1857–58 के विद्रोह का कालक्रम (index) देता है, जो परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें तिथि, स्थान और घटनाओं का सही क्रम मिलता है, जिससे chronology, MCQ और short questions सीधे पूछे जाते हैं।📝📒
https://t.me/historyfact00
1857–58 के विद्रोह का कालक्रम (index) देता है, जो परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें तिथि, स्थान और घटनाओं का सही क्रम मिलता है, जिससे chronology, MCQ और short questions सीधे पूछे जाते हैं।📝📒
https://t.me/historyfact00
❤2👏1
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
😁11❤5👍2
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन 28–30 दिसम्बर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ, जिसकी अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने की तथा इसके संस्थापक ए. ओ. ह्यूम को ‘कांग्रेस का जनक’ कहा जाता है। इस अधिवेशन में 72 प्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस की स्थापना के संबंध में ‘सुरक्षा वाल्व सिद्धांत’ प्रसिद्ध है, जिसके अनुसार ह्यूम ने तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड डफरिन के सुझाव पर भारतीयों के बढ़ते असंतोष को शांतिपूर्ण और संवैधानिक मार्ग देने हेतु कांग्रेस की स्थापना की। इस सिद्धांत का समर्थन लाला लाजपत राय (Young India, 1916) और एम. एस. गोलवलकर आदि ने किया, जबकि इतिहासकार बिपिन चंद्र ने इसका खंडन किया। 1898 में डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने भी कहा कि कांग्रेस का गठन डफरिन की देन था।
4-उद्देश्य थे
9 प्रस्ताव पारित हुए
https://t.me/historyfact00
4-उद्देश्य थे
9 प्रस्ताव पारित हुए
https://t.me/historyfact00
❤2👏2
Forwarded from History Education 🔱❤
गुप्तकालीन मंदिर जो मध्य प्रदेश में स्थित है
1.भूमरा का शिव मंदिर
2. नाचना कुठार का मंदिर
3. एरण का विष्णु मंदिर
4. पिपरिया का विष्णु मंदिर
1.भूमरा का शिव मंदिर
2. नाचना कुठार का मंदिर
3. एरण का विष्णु मंदिर
4. पिपरिया का विष्णु मंदिर
🙏4❤1
Forwarded from The Lion 🪖 Army
✅✅इतिहास अध्ययन की पाठशाला🍫
🥸असिस्टेंट प्रोफेसर और PGT टेस्ट की लगातार तैयारी 5000+ टारगेट क्वेश्चन👇👇
Link 🔗 https://t.me/IAP606
🥸असिस्टेंट प्रोफेसर और PGT टेस्ट की लगातार तैयारी 5000+ टारगेट क्वेश्चन👇👇
Link 🔗 https://t.me/IAP606
❤2💯1
Forwarded from PHD NOTIFICATION ONLY ( Ugc Net Jrf Phd ) (Professor Pratham Bhanotra)
Ph.D. (RDC) टॉपिक चयन प्रक्रिया
– DAVV इंदौर
आरडीसी कोर्स वर्क के बाद ही होती है ।
कुछ कारण से मेरी आरडीसी २ साल बाद हुई ।
1. बोर्ड की संरचना
RDC (Research Degree Committee) बोर्ड में एक चेयरमैन (अध्यक्ष) और चार सदस्य होते हैं। यही समिति आपके शोध विषय (Topic) को अनुमोदित करती है।
2. शब्दों की शुद्धता पर विशेष ध्यान
बोर्ड आपके टॉपिक में शब्दों की त्रुटियाँ (Spelling / Grammar Mistakes) बहुत ध्यान से देखता है।
इसलिए विषय का शीर्षक (Title) बिल्कुल शुद्ध, स्पष्ट और सही भाषा में लिखा होना चाहिए।
3. P³ नियम (Person, Place, Period)
टॉपिक में तीन मुख्य तत्व अनिवार्य रूप से होने चाहिए:
• Person (व्यक्ति)
• Place (स्थान)
• Period (काल/समयावधि)
इसे P³ Rule कहा जाता है। यदि ये तीनों स्पष्ट रूप से शामिल हैं, तो विषय अधिक प्रभावी और स्वीकार्य माना जाता है।
4. टॉपिक में संशोधन (Correction/Change)
यदि बोर्ड आपके विषय में कोई परिवर्तन सुझाता है, तो आपको लगभग एक महीने का समय दिया जाता है।
इस अवधि में गाइड (Guide/Supervisor) से चर्चा करके संशोधन कर पुनः प्रस्तुत करना होता है।
5. PPT प्रस्तुति की संभावना
बोर्ड यदि आवश्यक समझे तो आपसे अपने शोध विषय पर PPT (PowerPoint Presentation) प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है।
इसलिए अपने विषय की स्पष्ट समझ और तैयारी पहले से रखें।
6. टॉपिक स्पष्ट और शोधयोग्य होना चाहिए
विषय न तो बहुत व्यापक (Too Broad) होना चाहिए और न ही बहुत संकीर्ण (Too Narrow)।
विषय ऐसा हो जिसमें शोध की पर्याप्त संभावनाएँ हों।
7. नवीनता (Originality) आवश्यक है
टॉपिक में कुछ नया दृष्टिकोण (New Perspective) या शोध की नई दिशा होनी चाहिए। पहले से किए गए शोध की पुनरावृत्ति से बचें।
8. गाइड से पूर्व चर्चा आवश्यक
RDC में प्रस्तुत करने से पहले अपने गाइड से पूरी तरह चर्चा करें और उनकी सहमति लेकर ही विषय प्रस्तुत करें।
---------
मेरे टॉपिक में कोई चेंज नहीं है तो मुझे कुछ भी नहीं करने को कहा है
---------
😌मेरी Rdc के कुछ यादगार पल नीचे ⬇️ ।👏🏻😃
https://www.instagram.com/p/DUnsoKLk_2w/?igsh=MXY1empna2c0NmdtZQ==
– DAVV इंदौर
आरडीसी कोर्स वर्क के बाद ही होती है ।
कुछ कारण से मेरी आरडीसी २ साल बाद हुई ।
यह जानकारी सभी शोधार्थियों के लिए उपयोगी है।
1. बोर्ड की संरचना
RDC (Research Degree Committee) बोर्ड में एक चेयरमैन (अध्यक्ष) और चार सदस्य होते हैं। यही समिति आपके शोध विषय (Topic) को अनुमोदित करती है।
2. शब्दों की शुद्धता पर विशेष ध्यान
बोर्ड आपके टॉपिक में शब्दों की त्रुटियाँ (Spelling / Grammar Mistakes) बहुत ध्यान से देखता है।
इसलिए विषय का शीर्षक (Title) बिल्कुल शुद्ध, स्पष्ट और सही भाषा में लिखा होना चाहिए।
3. P³ नियम (Person, Place, Period)
टॉपिक में तीन मुख्य तत्व अनिवार्य रूप से होने चाहिए:
• Person (व्यक्ति)
• Place (स्थान)
• Period (काल/समयावधि)
इसे P³ Rule कहा जाता है। यदि ये तीनों स्पष्ट रूप से शामिल हैं, तो विषय अधिक प्रभावी और स्वीकार्य माना जाता है।
4. टॉपिक में संशोधन (Correction/Change)
यदि बोर्ड आपके विषय में कोई परिवर्तन सुझाता है, तो आपको लगभग एक महीने का समय दिया जाता है।
इस अवधि में गाइड (Guide/Supervisor) से चर्चा करके संशोधन कर पुनः प्रस्तुत करना होता है।
5. PPT प्रस्तुति की संभावना
बोर्ड यदि आवश्यक समझे तो आपसे अपने शोध विषय पर PPT (PowerPoint Presentation) प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है।
इसलिए अपने विषय की स्पष्ट समझ और तैयारी पहले से रखें।
6. टॉपिक स्पष्ट और शोधयोग्य होना चाहिए
विषय न तो बहुत व्यापक (Too Broad) होना चाहिए और न ही बहुत संकीर्ण (Too Narrow)।
विषय ऐसा हो जिसमें शोध की पर्याप्त संभावनाएँ हों।
7. नवीनता (Originality) आवश्यक है
टॉपिक में कुछ नया दृष्टिकोण (New Perspective) या शोध की नई दिशा होनी चाहिए। पहले से किए गए शोध की पुनरावृत्ति से बचें।
8. गाइड से पूर्व चर्चा आवश्यक
RDC में प्रस्तुत करने से पहले अपने गाइड से पूरी तरह चर्चा करें और उनकी सहमति लेकर ही विषय प्रस्तुत करें।
---------
मेरे टॉपिक में कोई चेंज नहीं है तो मुझे कुछ भी नहीं करने को कहा है
---------
😌मेरी Rdc के कुछ यादगार पल नीचे ⬇️ ।👏🏻😃
https://www.instagram.com/p/DUnsoKLk_2w/?igsh=MXY1empna2c0NmdtZQ==
👍7❤4
No Document No History pinned «Ph.D. (RDC) टॉपिक चयन प्रक्रिया – DAVV इंदौर आरडीसी कोर्स वर्क के बाद ही होती है । कुछ कारण से मेरी आरडीसी २ साल बाद हुई । यह जानकारी सभी शोधार्थियों के लिए उपयोगी है। 1. बोर्ड की संरचना RDC (Research Degree Committee) बोर्ड में एक चेयरमैन (अध्यक्ष)…»
Forwarded from इतिहास ज्ञान गंगा (पण्डित पुष्यमित्र शुंग)
Telegram
UGC NET. इतिहास
इतिहास की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें (UGC NET/ PGT/TGT)
💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
Join 👇
https://t.me/+bqS2kyNkG6I4ZWVl
💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
Join 👇
https://t.me/+bqS2kyNkG6I4ZWVl
❤1👍1
Forwarded from वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........
देशी_रियासतों_का_एकीकरण,_स्वतंत्रता_पश्चात्_के_विभिन्न_समस्या,_संविधान.pdf
15.5 MB
Shared via All PDF Reader, a practical app that makes reading and editing PDF files super convenient.
Free download:https://st.akrura.ltd/uuy6fa
Free download:https://st.akrura.ltd/uuy6fa
👍1
Forwarded from वृषभानुदुलारी राधा रानी ...........
सम्प्रदायकता_का_विकाश_और_भारत_का_विभाजन.pdf
12.4 MB
Shared via All PDF Reader, a practical app that makes reading and editing PDF files super convenient.
Free download:https://st.akrura.ltd/uuy6fa
Free download:https://st.akrura.ltd/uuy6fa
👍1
Forwarded from Pk Gothwal
आजादी_से_2000_तक_भारतीय_इतिहास_भाग_2.pdf
626.6 KB
आजादी से 2000 तक भारतीय इतिहास भाग 2.pdf
👍1
Forwarded from गुरुकुल इतिहास सूरतगढ़ History for Rpsc 🇮🇳
RPSC first gred new syllabus ke topic 👆👆
👍5