Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📜 गांधी का पहला सार्वजनिक लेखन: The Vegetarian में भारतीय भोजन—
लंदन में कानून की पढ़ाई के दौरान मोहनदास करमचंद गांधी का शुरुआती सार्वजनिक लेखन राजनीति से नहीं, बल्कि शाकाहार और भारतीय भोजन-संस्कृति से जुड़ा था।
🔹 गांधी लंदन में Vegetarian Society से जुड़े और उसके सदस्यों के साथ सक्रिय रहे। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर 1890 में London Vegetarian Society के सदस्यों के साथ उनकी तस्वीर भी दर्ज है।
📰 The Vegetarian में लेखन
गांधी ने The Vegetarian पत्रिका में “Indian Vegetarians” शीर्षक से लेखों की श्रृंखला लिखी। इसके छह भाग 7 फरवरी से 14 मार्च 1891 के बीच प्रकाशित हुए।
📌 “The Foods of India” — गांधी का यह paper 2 मई 1891 को London Vegetarian Society की बैठक में प्रस्तुत किया गया था और The Vegetarian ने इसे 6 मई 1891 को रिपोर्ट किया। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर इसका मूल पाठ CWMG, Vol. 1 में उपलब्ध है।
The Foods of India — M.K. Gandhi
➡️ Presented/Read: 6 May 1891, Portsmouth
➡️ Published: June 1891, The Vegetarian Messenger
➡️ CWMG date: 1 June 1891
https://t.me/historyfact00
लंदन में कानून की पढ़ाई के दौरान मोहनदास करमचंद गांधी का शुरुआती सार्वजनिक लेखन राजनीति से नहीं, बल्कि शाकाहार और भारतीय भोजन-संस्कृति से जुड़ा था।
🔹 गांधी लंदन में Vegetarian Society से जुड़े और उसके सदस्यों के साथ सक्रिय रहे। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर 1890 में London Vegetarian Society के सदस्यों के साथ उनकी तस्वीर भी दर्ज है।
📰 The Vegetarian में लेखन
गांधी ने The Vegetarian पत्रिका में “Indian Vegetarians” शीर्षक से लेखों की श्रृंखला लिखी। इसके छह भाग 7 फरवरी से 14 मार्च 1891 के बीच प्रकाशित हुए।
📌 “The Foods of India” — गांधी का यह paper 2 मई 1891 को London Vegetarian Society की बैठक में प्रस्तुत किया गया था और The Vegetarian ने इसे 6 मई 1891 को रिपोर्ट किया। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर इसका मूल पाठ CWMG, Vol. 1 में उपलब्ध है।
The Foods of India — M.K. Gandhi
➡️ Presented/Read: 6 May 1891, Portsmouth
➡️ Published: June 1891, The Vegetarian Messenger
➡️ CWMG date: 1 June 1891
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❤2👏1
साहब के रास्ते में एक आदमी
खड़ा हो जाए तो सुरक्षा में चूक
किसी लड़की के रास्ते में रोज एक आदमी खड़ा हो
तो थोड़ा रास्ता बदल लीजिए...
साहब की कुर्सी बचानी हो तो पुलिस हर जगह है
किसी की बेटी बचानी हो तो पहले बताए
हमारे थाने का इलाका है क्या...??
गुंडो से कहने की हिम्मत नहीं है
अपराध बंद करो
लड़कियों को समझाना आसान है
बाहर निकलना बंद करो,,,,
वाह ! क्या सुरक्षा व्यवस्था है
जनता सड़क पर उतरे तो पूरा काफिला
पहुंच जाता है
लड़की कहे,,,,कोई मेरा पीछा कर रहा है
तो जवाब मिलता है,कुछ हुआ तो नहीं है ना...??
क्या करवाई के लिए उसका मरना जरूरी है...??
जनता की आवाज दबाने के लिए ताकत भी है,,,,, वक्त भी है,, पूरी तैयारी भी है
जनता को बचाने के लिए यह सब कहां चले जाते हैं....??
वर्दी जनता के पैसों से,,,, तनख्वाह जनता के पैसों से
तो फिर जनता सुरक्षा मांगे तो एहसान मांग रही है क्या....??
अपराधी के सामने कानून मजबूर हो जाता है
सवाल पूछती जनता के सामने कानून इतना बहादुर कैसे हो जाता है...??
प्रजातंत्र है प्रजा के लिए ताकत दिखाइए
सिर्फ साहब के लिए खड़ा तंत्र
जनता से सम्मान किस बात का मांगता है...??
यह कोई शायरी नहीं है
यह आज के लोकतंत्र की सच्चाई है...!!
Dr Abhishek research scholar from azamgarh university
खड़ा हो जाए तो सुरक्षा में चूक
किसी लड़की के रास्ते में रोज एक आदमी खड़ा हो
तो थोड़ा रास्ता बदल लीजिए...
साहब की कुर्सी बचानी हो तो पुलिस हर जगह है
किसी की बेटी बचानी हो तो पहले बताए
हमारे थाने का इलाका है क्या...??
गुंडो से कहने की हिम्मत नहीं है
अपराध बंद करो
लड़कियों को समझाना आसान है
बाहर निकलना बंद करो,,,,
वाह ! क्या सुरक्षा व्यवस्था है
जनता सड़क पर उतरे तो पूरा काफिला
पहुंच जाता है
लड़की कहे,,,,कोई मेरा पीछा कर रहा है
तो जवाब मिलता है,कुछ हुआ तो नहीं है ना...??
क्या करवाई के लिए उसका मरना जरूरी है...??
जनता की आवाज दबाने के लिए ताकत भी है,,,,, वक्त भी है,, पूरी तैयारी भी है
जनता को बचाने के लिए यह सब कहां चले जाते हैं....??
वर्दी जनता के पैसों से,,,, तनख्वाह जनता के पैसों से
तो फिर जनता सुरक्षा मांगे तो एहसान मांग रही है क्या....??
अपराधी के सामने कानून मजबूर हो जाता है
सवाल पूछती जनता के सामने कानून इतना बहादुर कैसे हो जाता है...??
प्रजातंत्र है प्रजा के लिए ताकत दिखाइए
सिर्फ साहब के लिए खड़ा तंत्र
जनता से सम्मान किस बात का मांगता है...??
यह कोई शायरी नहीं है
यह आज के लोकतंत्र की सच्चाई है...!!
Dr Abhishek research scholar from azamgarh university
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Delhi Police have released all detainees from detention centers, except for CJP leaders 🚔. Due legal process will be followed for the CJP leaders (ANI) 📝
#Policy
#Policy
🔥3
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
James Prinsep (1779–1859)—
पढ़ना हो तो पढ़ लेना। बाकी कंटेंट चुराना तो कुछ लोग कर ही लेते हैं, फिर उसे 10 अलग-अलग जगह शेयर भी कर देंगे।
https://t.me/historyfact00
पढ़ना हो तो पढ़ लेना। बाकी कंटेंट चुराना तो कुछ लोग कर ही लेते हैं, फिर उसे 10 अलग-अलग जगह शेयर भी कर देंगे।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📌 James Prinsep : भारत में प्रमुख कार्य
बनारस में उन्होंने विस्तृत सर्वेक्षण करके शहर के अक्षांश-देशांतर निर्धारित किए और प्रत्येक भवन को दर्शाने वाला सटीक मानचित्र तैयार किया, जिसे 1829 में लंदन में lithograph किया गया। उन्होंने भारत में पहली व्यापक Census Survey कराई और तीर्थयात्रियों की संख्या गिनने के लिए कंकड़ों वाली अभिनव पद्धति अपनाई। शहर के लिए आज तक उपयोगी drainage system, ठहरे हुए पानी की निकासी हेतु arched tunnels, तथा करमनासा नदी पर पत्थर का पुल बनाया। उन्होंने नई Mint building और एक church का डिजाइन तैयार किया तथा औरंगज़ेब की जीर्ण-शीर्ण मीनारों और पुरानी मस्जिदों के संरक्षण/पुनर्स्थापन में भी योगदान दिया। कलाकार के रूप में उन्होंने बनारस के घाटों, मंदिरों और स्मारकों के चित्र बनाए और Benares Illustrated, in a Series of Drawings (1830–34) प्रकाशित किया। वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्र में उन्होंने अत्यंत सटीक balance, तापमान के लिए automatic barometer compensator, वर्षा व वाष्पीकरण मापने के उपकरण, लोहे को जंग से बचाने के प्रयोग, तथा उच्च तापमान मापने के लिए pyrometric device पर काम किया; 1828 में On the Measurement of High Temperatures शोध-पत्र प्रकाशित किया। उन्होंने weights and measures के standardization और uniform coinage की वकालत की। मुद्राशास्त्र (Numismatics) में उन्होंने प्राचीन भारतीय सिक्कों का अध्ययन किया, punch-marked, die-struck और moulded coins के विकास को अलग-अलग चरणों में समझाया तथा Bactrian और Kushan coins का अध्ययन किया। भाषाविद् और अभिलेखविद् के रूप में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान Kharosthi और विशेषकर Brahmi script को पढ़ने/समझने की दिशा में था। उन्होंने 1836–38 के बीच Numismatics पर कई शोध-पत्र प्रकाशित किए और Gleanings in Science को Journal of the Asiatic Society में बदलकर उसके पहले editor बने। उन्होंने देशभर से प्राप्त प्राचीन सिक्कों, अभिलेखों, मूर्तियों और पुरातात्त्विक खोजों को एकत्रित एवं प्रकाशित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंततः उनके Brahmi decipherment ने ‘Devanampriya Piyadasi’ के अभिलेखों को समझने का रास्ता खोला और आगे चलकर Piyadasi की पहचान सम्राट अशोक के रूप में स्थापित होने में निर्णायक भूमिका निभाई।
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बनारस में उन्होंने विस्तृत सर्वेक्षण करके शहर के अक्षांश-देशांतर निर्धारित किए और प्रत्येक भवन को दर्शाने वाला सटीक मानचित्र तैयार किया, जिसे 1829 में लंदन में lithograph किया गया। उन्होंने भारत में पहली व्यापक Census Survey कराई और तीर्थयात्रियों की संख्या गिनने के लिए कंकड़ों वाली अभिनव पद्धति अपनाई। शहर के लिए आज तक उपयोगी drainage system, ठहरे हुए पानी की निकासी हेतु arched tunnels, तथा करमनासा नदी पर पत्थर का पुल बनाया। उन्होंने नई Mint building और एक church का डिजाइन तैयार किया तथा औरंगज़ेब की जीर्ण-शीर्ण मीनारों और पुरानी मस्जिदों के संरक्षण/पुनर्स्थापन में भी योगदान दिया। कलाकार के रूप में उन्होंने बनारस के घाटों, मंदिरों और स्मारकों के चित्र बनाए और Benares Illustrated, in a Series of Drawings (1830–34) प्रकाशित किया। वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्र में उन्होंने अत्यंत सटीक balance, तापमान के लिए automatic barometer compensator, वर्षा व वाष्पीकरण मापने के उपकरण, लोहे को जंग से बचाने के प्रयोग, तथा उच्च तापमान मापने के लिए pyrometric device पर काम किया; 1828 में On the Measurement of High Temperatures शोध-पत्र प्रकाशित किया। उन्होंने weights and measures के standardization और uniform coinage की वकालत की। मुद्राशास्त्र (Numismatics) में उन्होंने प्राचीन भारतीय सिक्कों का अध्ययन किया, punch-marked, die-struck और moulded coins के विकास को अलग-अलग चरणों में समझाया तथा Bactrian और Kushan coins का अध्ययन किया। भाषाविद् और अभिलेखविद् के रूप में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान Kharosthi और विशेषकर Brahmi script को पढ़ने/समझने की दिशा में था। उन्होंने 1836–38 के बीच Numismatics पर कई शोध-पत्र प्रकाशित किए और Gleanings in Science को Journal of the Asiatic Society में बदलकर उसके पहले editor बने। उन्होंने देशभर से प्राप्त प्राचीन सिक्कों, अभिलेखों, मूर्तियों और पुरातात्त्विक खोजों को एकत्रित एवं प्रकाशित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंततः उनके Brahmi decipherment ने ‘Devanampriya Piyadasi’ के अभिलेखों को समझने का रास्ता खोला और आगे चलकर Piyadasi की पहचान सम्राट अशोक के रूप में स्थापित होने में निर्णायक भूमिका निभाई।
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